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धान के खेतों में मेथेन उत्सर्जन में कमी के लिए कार्बन क्रेडिट

Lokesh Pal January 01, 2026 01:04 49 0

संदर्भ 

भारत में चावल किसान अब जलवायु-अनुकूल और जल-बचत प्रथाओं के माध्यम से मेथेन उत्सर्जन को कम करके तथा इन कटौतियों को कार्बन क्रेडिट के रूप में मौद्रिक रूप प्रदान कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं।

पारंपरिक चावल की कृषि से संबंधित समस्याएँ

  • परंपरागत धान खेती में रोपाई के बाद लगभग पहले दो महीनों तक खेतों में निरंतर जलभराव (लगभग 4–5 सेंटीमीटर जल-स्तर) रखा जाता है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य खरपतवार नियंत्रण होता है, क्योंकि स्थिर जल ऑक्सीजन-रहित (अवायवीय) वातावरण का निर्माण करता है, जिससे खरपतवार के बीज अंकुरित नहीं हो पाते।
  • यही जल-भराव वाली स्थिति मेथेन उत्पन्न करने वाले सूक्ष्मजीवों के लिए अनुकूल होती है, जो मृदा में कार्बनिक पदार्थों को विघटित कर मेथेन गैस उत्पन्न करते हैं।
  • मीथेन एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है, जिसमें 100 वर्षों में कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में 28 गुना अधिक वैश्विक तापन क्षमता होती है।

‘अल्टरनेट वेटिंग एंड ड्राइंग’ (Alternate Wetting and Drying – AWD)

  • यह सिंचित धान उत्पादन की एक जल-प्रबंधन तकनीक है, जिसमें परंपरागत विधि की तुलना में कम जल का उपयोग किया जाता है।
  • इसमें खेतों को पुनः जलभराव से पहले कुछ समय के लिए सूखने दिया जाता है, जिससे जल उपयोग और मेथेन उत्सर्जन दोनों में कमी आती है।
  • यह आवधिक सुखाने की प्रक्रिया अवायवीय परिस्थितियों को बाधित करती है, जिससे मेथेन उत्पादन में काफी कमी आती है।
  • अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान: अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान ने विशेषकर एशिया में इस तकनीक को जल-संरक्षण हेतु एक स्मार्ट समाधान के रूप में बढ़ावा दिया है।

लाभ

  • जल-बचत: इस विधि आधारित खेतों में 3.14 मिलियन लीटर प्रति एकड़ जल का उपयोग हुआ, जबकि निरंतर जलभराव वाले खेतों में 4.96 मिलियन लीटर प्रति एकड़ जल की आवश्यकता होती थी।
  • मेथेन में कमी: इस विधि आधारित खेतों से 3.5 टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य प्रति हेक्टेयर उत्सर्जन हुआ, जबकि निरंतर जलभराव वाले खेतों से 6 टन प्रति हेक्टेयर।
  • उपज में कोई कमी नहीं: दोनों विधियों में औसत अनाज उपज लगभग 2.5 टन प्रति एकड़ समान रही।

किसानों के लिए कार्बन क्रेडिट का अवसर

  • मान्यता प्राप्त मानक के तहत सत्यापन होने के बाद मेथेन उत्सर्जन में कमी को बिक्री योग्य कार्बन क्रेडिट में परिवर्तित किया जा सकता है।
  • कंपनियाँ (जैसे डेटा सेंटर या एयरलाइन कंपनियाँ) अपने स्वयं के उत्सर्जन की भरपाई के लिए इन क्रेडिट को खरीदती हैं।
  • मेथेन कटौती से प्राप्त कार्बन क्रेडिट का मूल्य लगभग 15–25 अमेरिकी डॉलर प्रति टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य होता है।
    • इस विधि से प्रति फसल प्रति हेक्टेयर लगभग 2.5 टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य उत्सर्जन में कमी आती है, जिससे किसान कम-से-कम 37.5 अमेरिकी डॉलर प्रति हेक्टेयर प्रति फसल चक्र कमाई कर सकता है।
    • यह राशि लगभग ₹1,363 प्रति एकड़ के बराबर है, जो एक महत्त्वपूर्ण अतिरिक्त आय है।

अभ्यास में AWD परियोजनाएँ

  • मिट्टी लैब्स (भारत): भारत के कई राज्यों में हजारों किसानों के साथ कार्य कर रही है।
    • दृष्टिकोण: जल-स्तर की निगरानी और पद्धति के सत्यापन हेतु डिजिटल तकनीक का उपयोग।
    • प्रमाणित परिणाम: तेलंगाना में अध्ययन के दौरान 37 प्रतिशत जल-बचत तथा स्थिर उपज प्राप्त हुई।
  • ग्रीन कार्बन (वियतनाम): उत्तरी छह प्रांतों में परियोजना, जिसके व्यापक विस्तार की योजना है।
    • दृष्टिकोण: तकनीकी सहायता और आँकड़ा संग्रह हेतु राष्ट्रीय कृषि संस्थानों के साथ साझेदारी।
    • प्रमाणित परिणाम: न्घे एन (Nghe An) प्रांत में लगभग 55 प्रतिशत मेथेन कटौती और 5.5 प्रतिशत उपज वृद्धि।

कार्बन क्रेडिट क्या है

  • कार्बन क्रेडिट एक व्यापार-योग्य प्रमाणपत्र या अनुमति है, जो 1 टन कार्बन डाइऑक्साइड या किसी अन्य ग्रीनहाउस गैस (जैसे- मेथेन) की समतुल्य मात्रा के उत्सर्जन का अधिकार दर्शाता है।
  • यह क्योटो प्रोटोकॉल और पेरिस समझौते जैसे अंतरराष्ट्रीय ढाँचों से प्रेरित एक बाजार-आधारित उपकरण है, जो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी को प्रोत्साहित करता है।

मुख्य तंत्र

  • क्योटो प्रोटोकॉल के तहत स्वच्छ विकास तंत्र (CDM) ने विकसित देशों को विकासशील देशों में परियोजनाओं के माध्यम से क्रेडिट अर्जित करने में सक्षम बनाया।
  • पेरिस समझौते का अनुच्छेद-6 अंतरराष्ट्रीय कार्बन व्यापार को सक्षम बनाता है।

कार्बन क्रेडिट की कार्यप्रणाली

  • परियोजना द्वारा उत्सर्जन में कमी: वृक्षारोपण, नवीकरणीय ऊर्जा उपयोग या कृषि पद्धतियों में बदलाव जैसे कार्य वातावरण से ग्रीनहाउस गैसों को निष्कासित करते हैं।
  • उत्सर्जन में कमी का सत्यापन: स्वतंत्र संगठन यह सत्यापित करते हैं कि उत्सर्जन में कमी वास्तविक, मापने योग्य और अतिरिक्त है (कार्बन क्रेडिट फंडिंग के बिना यह संभव नहीं होता)।
  • क्रेडिट जारी करना: CO₂ समतुल्य (CO₂e) के प्रत्येक टन में कमी या उसे हटाने पर एक कार्बन क्रेडिट जारी किया जाता है।
  • क्रेडिट की खरीद-बिक्री: क्रेडिट कार्बन बाजारों में बेचे जाते हैं:
    • वे कंपनियाँ या सरकारें, जिन्हें नियामक सीमाओं या स्वैच्छिक जलवायु लक्ष्यों (जैसे “नेट जीरो”) को पूरा करने के लिए अपने स्वयं के उत्सर्जन की भरपाई करने की आवश्यकता होती है।
    • निवेशक या मध्यस्थ, जो इनका व्यापार करते हैं।

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