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चौथी औद्योगिक क्रांति के लिए केंद्र (C4IR)

Lokesh Pal January 28, 2026 03:19 19 0

संदर्भ

विश्व आर्थिक मंच (WEF) ने चतुर्थ औद्योगिक क्रांति के लिए पाँच नए केंद्रों (Centres for the Fourth Industrial Revolution-C4IR) की स्थापना की घोषणा की है, जिनमें एक भारत के आंध्र प्रदेश में स्थापित किया जाएगा।

चतुर्थ औद्योगिक क्रांति केंद्र (C4IR) नेटवर्क के बारे में 

  • प्रारंभ एवं नेतृत्व: इस नेटवर्क की शुरुआत वर्ष 2017 में विश्व आर्थिक मंच (WEF) द्वारा उभरती प्रौद्योगिकियों के शासन को दिशा देने हेतु की गई थी।
  • नेटवर्क का स्वरूप: यह एक वैश्विक, बहु-हितधारक मंच है, जो सरकारों, उद्योग, शिक्षा जगत और नागरिक समाज को आपस में जोड़ता है।
  • मुख्य उद्देश्य: यह सुनिश्चित करना कि उभरती प्रौद्योगिकियाँ सामाजिक लाभ प्रदान करें, साथ ही नैतिक, सुरक्षा तथा आर्थिक जोखिमों को न्यूनतम किया जा सके।
  • नेटवर्क संरचना: यह विभिन्न महाद्वीपों में स्थित स्वतंत्र राष्ट्रीय एवं विषयगत चतुर्थ औद्योगिक क्रांति केंद्रों से मिलकर बना है।
  • प्रमुख प्रौद्योगिकी क्षेत्र: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा गवर्नेंस, साइबर सुरक्षा, ब्लॉकचेन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), ऊर्जा संक्रमण तथा सीमांत (Frontier) प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित है।

भारत में चतुर्थ औद्योगिक क्रांति केंद्र (C4IR)

  • स्थान: भारत में नया केंद्र आंध्र प्रदेश में स्थित है।
  • नाम: इसेसेंटर फॉर एनर्जी एंड साइबर रेजिलिएंस’  नाम दिया गया है।

  • यह भारत का तीसरा C4IR केंद्र है (मुंबई और तेलंगाना में पहले से स्थापित केंद्रों के बाद)।
  • साझेदारी: यह केंद्र आंध्र प्रदेश सरकार के साथ आधिकारिक साझेदारी में स्थापित किया गया है।
    • यह सहयोग लचीली डिजिटल और ऊर्जा प्रणालियों के निर्माण से संबंधित राज्य की प्राथमिकताओं के अनुरूप है।
  • उद्देश्य: ऊर्जा संक्रमण (जैसे हरित ऊर्जा प्रणालियाँ) में नवाचार को बढ़ावा देना, विभिन्न उद्योगों में साइबर लचीलापन सुदृढ़ करना, साइबर सुरक्षा रणनीतियों का विकास, कार्यबल का कौशल उन्नयन तथा विश्वसनीय डिजिटल प्रणालियों को प्रोत्साहित करना।

औद्योगिक क्रांति के चरण

  • औद्योगिक क्रांति विनिर्माण, प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था और समाज में हुए प्रमुख रूपांतरणों की एक शृंखला को संदर्भित करती है।
  • इतिहासकार पारंपरिक रूप से इसे विशिष्ट चरणों (या “क्रांतियों”) में विभाजित करते हैं और आधुनिक समझ के अनुसार सामान्यतः चार चरणों को मान्यता दी जाती है।

प्रथम औद्योगिक क्रांति (उद्योग 1.0) 

  • समयावधि: लगभग वर्ष 1760–1840 (ब्रिटेन से आरंभ होकर बाद में यूरोप और उत्तरी अमेरिका में प्रसारित)।
  • मुख्य प्रेरक तत्त्व: जल शक्ति और विशेष रूप से भाप शक्ति द्वारा संचालित यंत्रीकरण।
  • प्रमुख विकास: भाप इंजन (जेम्स वाट द्वारा उन्नत), यंत्रीकृत वस्त्र उत्पादन (स्पिनिंग जेनी, वाटर फ्रेम, स्पिनिंग म्यूल, पॉवर लूम), लौह उत्पादन में सुधार, कारखानों का उदय तथा हस्तकला से मशीन-आधारित उत्पादन की ओर संक्रमण तथा प्रारंभिक रेलवे एवं भाप इंजन वाले पोत।
  • प्रभाव: कृषि/हस्तकला आधारित अर्थव्यवस्थाओं से मशीन-आधारित विनिर्माण की ओर संक्रमण; नगरीकरण; उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि।

द्वितीय औद्योगिक क्रांति (उद्योग 2.0)

  • समयावधि: लगभग 1870–1914 (19वीं सदी के उत्तरार्द्ध से 20वीं सदी के प्रारंभ तक)।
  • मुख्य प्रेरक तत्त्व: विद्युत, इस्पात और आंतरिक दहन इंजन।
  • प्रमुख विकास: प्रकाश व्यवस्था और मशीनों के संचालन हेतु विद्युत का व्यापक उपयोग, असेंवली लाइन और बड़े पैमाने पर उत्पादन (हेनरी फोर्ड द्वारा), इस्पात उत्पादन, रासायनिक उद्योग में प्रगति।
  • प्रभाव: बड़े पैमाने पर उत्पादन; विशाल निगमों का उदय; परिवहन और संचार में तीव्रता; औद्योगीकृत देशों में जीवन स्तर में वृद्धि; व्यापार का वैश्वीकरण।

तृतीय औद्योगिक क्रांति (उद्योग 3.0)

  • समयावधि: लगभग 1969 से 20वीं सदी के उत्तरार्द्ध/21वीं सदी के प्रारंभ तक (प्रायः 1970 के दशक से आगे मानी जाती है)।
  • मुख्य प्रेरक तत्त्व: इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर और सूचना प्रौद्योगिकी (जिसे डिजिटल क्रांति भी कहा जाता है)।
  • प्रमुख विकास: सेमीकंडक्टर, माइक्रोप्रोसेसर और पर्सनल कंप्यूटर, कारखानों में स्वचालन (प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर, औद्योगिक रोबोट), इंटरनेट तथा वैश्विक संपर्क, विनिर्माण एवं आपूर्ति शृंखलाओं में सॉफ्टवेयर व आईटी प्रणालियाँ।
  • प्रभाव: स्वचालित और कंप्यूटरीकृत उत्पादन की ओर संक्रमण; सेवा और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्थाओं का उदय; डिजिटल संचार द्वारा वैश्वीकरण में तीव्रता।

चतुर्थ औद्योगिक क्रांति (4IR) के बारे में

  • परिभाषा: चतुर्थ औद्योगिक क्रांति तीव्र तकनीकी परिवर्तन का वर्तमान युग है, जिसकी विशेषता भौतिक, डिजिटल और जैविक क्षेत्रों का संलयन है।
  • उत्पत्ति: इसे पहली बार वर्ष 2016 में विश्व आर्थिक मंच के संस्थापक क्लॉस श्वाब द्वारा डिजिटल क्रांति (तृतीय औद्योगिक क्रांति) से आगे के एक विशिष्ट नए चरण के रूप में वर्णित किया गया।
  • परिवर्तन की घातांकीय गति: पूर्ववर्ती औद्योगिक क्रांतियों के विपरीत, 4IR घातांकीय गति से आगे बढ़ती है, जिसका कारण कंप्यूटिंग शक्ति, डेटा भंडारण, कनेक्टिविटी और नवाचार की तीव्रता में अभूतपूर्व प्रगति है।
  • चतुर्थ औद्योगिक क्रांति की प्रमुख विशेषताएँ
    • गति: परिवर्तन मानव इतिहास में अभूतपूर्व गति से होता है।
    • विस्तार: यह प्रत्येक उद्योग, प्रत्येक देश और प्रत्येक अनुशासन को प्रभावित करती है।
    • प्रणालीगत रूपांतरण: यह केवल मौजूदा प्रणालियों में सुधार नहीं करती, बल्कि उत्पादन, प्रबंधन और शासन की संपूर्ण प्रणालियों को प्रतिस्थापित या मूल रूप से पुनर्गठित कर देती है।
  • साइबर-भौतिक प्रणालियाँ: इसकी एक परिभाषात्मक विशेषता साइबर-भौतिक प्रणालियों का निर्माण है— स्मार्ट, परस्पर-संबद्ध नेटवर्क, जहाँ मशीनें, सेंसर, सॉफ्टवेयर और मानव वास्तविक समय में परस्पर क्रिया करते हैं।
    • यह स्मार्ट फैक्टरियों, स्वायत्त वाहनों, पूर्वानुमानात्मक रखरखाव और प्रभावी अवसंरचना को संभव बनाता है।

विश्व आर्थिक मंच (WEF) के बारे में

  • विश्व आर्थिक मंच वैश्विक चुनौतियों से निपटने हेतु सार्वजनिक-निजी सहयोग को बढ़ावा देने वाला एक अंतरराष्ट्रीय, गैर-सरकारी संगठन है।
  • स्थापना: वर्ष 1971 में क्लॉस श्वाब द्वारा स्थापित।
  • मुख्यालय: जिनेवा, स्विट्जरलैंड।
  • मुख्य उद्देश्य
    • वैश्विक स्थिति में सुधार हेतु संवाद और सहयोग को प्रोत्साहित करना।
    • वैश्विक, क्षेत्रीय और उद्योग-स्तरीय एजेंडाओं को आकार देना।
    • समावेशी और सतत् विकास को बढ़ावा देना।
  • चतुर्थ औद्योगिक क्रांति (4IR) में भूमिका
    • जिम्मेदार प्रौद्योगिकी शासन हेतु C4IR नेटवर्क का नेतृत्व।
    • AI नैतिकता, डेटा गवर्नेंस और डिजिटल विश्वास पर ध्यान।
  • वार्षिक बैठक: प्रत्येक वर्ष जनवरी में दावोस, स्विट्जरलैंड में आयोजित।
    • यह वैश्विक आर्थिक परिदृश्य, संघर्षों, जलवायु कार्रवाई और प्रौद्योगिकी पर चर्चा का एक प्रमुख मंच है।

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