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संरक्षित हड़प्पा स्थलों की घोषणा

Lokesh Pal April 04, 2025 02:57 12 0

संदर्भ

हरियाणा सरकार ने भिवानी जिले में 4,400 वर्ष प्राचीन दो हड़प्पा सभ्यता स्थलों को संरक्षित पुरातात्त्विक स्थल घोषित किया है।

हड़प्पा स्थलों के बारे में

  • ये स्थल तिघराना और मिताथल गाँवों में स्थित हैं।
  • 10 एकड़ में विस्तृत मिताथल स्थल को हरियाणा प्राचीन एवं ऐतिहासिक स्मारक तथा पुरातत्त्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1964 के तहत संरक्षित किया जाएगा।
  • इन स्थलों की सुरक्षा के लिए बाड़ लगाने और सुरक्षा गार्ड तैनात करने जैसे उपाय किए जाएँगे।

हड़प्पा स्थल और उनकी विशेषताएँ

मिताथल गाँव स्थल

  • खोज: इसकी खोज सबसे पहले वर्ष 1913 में हुई थी, जब यहाँ समुद्रगुप्त के काल के सिक्के मिले थे।
  • उत्खनन: यह वर्ष 1965 से 1968 तक किया गया था, जिसमें मोती, ताँबे के औजार और प्रोटो-ऐतिहासिक सामग्री मिली थी।
  • शोध: केंद्रीय विश्वविद्यालय की टीम द्वारा चार बार (वर्ष 2016, वर्ष 2020, वर्ष 2021 और वर्ष 2024) पुरातत्त्व खनन और शोध किया गया।
  • योजना: हड़प्पा नगर नियोजन, वास्तुकला और कला के साक्ष्य मिले।
  • मृदभांड: पीपल के पत्ते, तराजू और ज्यामितीय डिजाइनों से चित्रित मजबूत लाल मृदभांड की खोज की गई।
  • कलाकृतियाँ: प्राप्त की गई वस्तुओं में मोती, चूड़ियाँ, टेराकोटा, पत्थर, शंख, ताँबा, हाथीदाँत और हड्डी की वस्तुएँ शामिल हैं।

तिघराना गाँव स्थल (Tighrana Village Site)

  • निरंतरता: तिघराना गाँव स्थल में हड़प्पा के बाद के अवशेष हैं, जो मानव बस्ती की निरंतरता को दर्शाते हैं।
  • निवासी: सर्वप्रथम 2,400 ईसा पूर्व के आसपास ताम्रपाषाण कृषि समुदायों (सोथियन) द्वारा बसाया गया था।
  • आवास: शुरुआती आवासीय लोग छप्पर वाली छतों के छोटे मिट्टी-ईंट के घरों में रहते थे।
  • आजीविका: कृषि और पशुपालन में संलग्न लोग, काले और सफेद डिजाइन वाले चाक से बने मिट्टी के बर्तनों का उपयोग करते थे।
  • अवधि: इस स्थल में सिसवाल, हड़प्पा पूर्व और हड़प्पा के बाद के अवशेष हैं।
  • उद्योग: मोती और हरी कार्नेलियन चूड़ियाँ एक मनका-निर्माण और आभूषण उद्योग का संकेत देती हैं।

इन स्थलों की सुरक्षा का महत्त्व 

  • क्षति से सुरक्षा: इस घोषणा से पूर्व, इन स्थलों को कृषि भूमि माना जाता था, जिससे इसे नुकसान होता था।
  • स्थल का नुकसान: मानवीय गतिविधियों के कारण मिताथल और तिघराना का एक बड़ा हिस्सा पहले ही नष्ट हो चुका है।
  • संरक्षण: संरक्षित स्थिति की घोषणा हड़प्पा सभ्यता के संरक्षण और आगे के अध्ययन को सुनिश्चित करती है।
  • प्राचीन भारत की अंतर्दृष्टि प्रदान करना: ये स्थल प्राचीन भारत में प्रारंभिक शहरी नियोजन, संस्कृति और शिल्प कौशल के बारे में महत्त्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं।
  • आगे का शोध: उचित संरक्षण आगे के नुकसान को रोकेगा और भविष्य की पुरातात्त्विक खोजों के माध्यम से ऐतिहासिक समझ को बढ़ाने की अनुमति देगा।

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