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केंद्रीय बजट 2026-27 में रक्षा क्षेत्र हेतु निधि में बढोतरी

Lokesh Pal February 05, 2026 03:44 6 0

संदर्भ

ऑपरेशन सिंदूर के बाद तथा बढ़ते द्वि-सीमांत सुरक्षा जोखिमों के परिप्रेक्ष्य में, केंद्रीय बजट 2026–27 में आधुनिकीकरण एवं स्वदेशीकरण को तीव्र करने हेतु रक्षा पूँजीगत व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है।

रक्षा बजट आवंटन की प्रमुख विशेषताएँ

  • रिकॉर्ड कुल परिव्यय: वित्त वर्ष 2026–27 का रक्षा बजट ₹7.85 लाख करोड़ है, जो अब तक का सर्वाधिक है। इसमें वर्ष-दर-वर्ष 15% की वृद्धि दर्ज की गई है तथा यह कुल केंद्रीय व्यय का 14.7% और आगामी वित्त वर्ष 2026–27 के अनुमानित सकल घरेलू उत्पाद का 2% है।
  • पूँजीगत व्यय में तीव्र वृद्धि: पूँजीगत परिव्यय बढ़कर ₹2.19 लाख करोड़ हो गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 22% अधिक है। इससे कुल रक्षा बजट में इसकी हिस्सेदारी लगभग 28% हो गई है, जो आधुनिकीकरण की दिशा में स्पष्ट परिवर्तन को दर्शाता है।
  • स्वदेशी खरीद को समर्थन: पूँजी अधिग्रहण बजट का लगभग 75% (₹1.39 लाख करोड़) घरेलू उद्योग के लिए आरक्षित किया गया है, जिससे रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भर भारत अभियान को सुदृढ़ किया गया है।
  • राजस्व घटकों का युक्तिकरण: पेंशन (21.8%) एवं वेतन (22.4%) की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2020 के स्तरों की तुलना में घटी है, जिससे राजस्व व्यय पर लंबे समय द्वारा उत्पन्न दवाब कम हुआ है।

व्यय के लक्षित क्षेत्र

  • सैन्य आधुनिकीकरण: अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान, पनडुब्बियाँ, युद्धपोत, UAVs, ड्रोन, सटीक-निर्देशित हथियार, एवं स्मार्ट हथियारों हेतु निधि आवंटित की गई है, जिससे हालिया अभियानों में उजागर हुई क्षमता संबंधी कमियों को दूर किया जा सके।
  • युद्ध तैयारी एवं भंडारण: उच्च पूँजीगत व्यय से युद्ध-क्षति भंडारों की पुनःपूर्ति को समर्थन मिलता है, विशेष रूप से गोला-बारूद एवं लोटरिंग म्यूनिशन, जो ऑपरेशन सिंदूर के दौरान क्षीण हो गए थे।
  • स्वदेशी रक्षा उद्योग: रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (DPSUs), MSMEs तथा निजी कंपनियों को ‘बाय इंडियन-स्वदेशी रूप से अभिकल्पित, विकसित एवं निर्मित’ (Buy Indian–IDDM) एवं अन्य स्वदेशी खरीद मार्गों के माध्यम से लाभ मिलता है, जिससे घरेलू आपूर्ति शृंखलाएँ सुदृढ़ होती हैं।
    • बाय इंडियन-IDDM (Buy Indian–IDDM) रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) के अंतर्गत एक खरीद श्रेणी है, जो भारत में डिजाइन, विकसित एवं निर्मित उच्च स्वदेशी सामग्री वाले रक्षा उपकरणों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।
  • आपातकालीन एवं ‘फास्ट-ट्रैक’ खरीद: बजट आपातकालीन खरीद तंत्र के संस्थानीकरण को दर्शाता है, जिससे ‘एंटी-ड्रोन’ प्रणालियों एवं लंबी दूरी के प्रहार प्रणालियों जैसी महत्त्वपूर्ण तकनीकों का त्वरित समावेशन संभव होता है।

उच्च रक्षा व्यय की आवश्यकता

  • परिवर्तित भू-राजनीतिक परिवेश: भारत को चीन एवं पाकिस्तान से सतत् द्वि-सीमांत चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, साथ ही क्षेत्रीय अस्थिरता भी बनी हुई है, जिससे प्रतिरोधक क्षमता एवं तत्परता में निरंतर निवेश आवश्यक हो गया है।
  • ऑपरेशन सिंदूर से प्राप्त सीख: इस अभियान ने गोला-बारूद की कमियाँ, वायु रक्षा तथा त्वरित समावेशन क्षमताओं में कमियों को उजागर किया, जिससे अधिक एवं लचीले पूँजी आवंटन की आवश्यकता उत्पन्न हुई।
  • ‘कमिटेड लायबिलिटीज ट्रैप’ से मुक्ति: ऐतिहासिक रूप से, पूँजीगत व्यय का बड़ा भाग पुराने अनुबंधों में संलग्न था, जिससे नई खरीद सीमित हो जाती थी। वर्तमान वृद्धि AMCA एवं परियोजना 75I पनडुब्बियों जैसे नए बड़े अनुबंधों के लिए वित्तीय स्थान उपलब्ध कराती है।
  • मानव बल से प्रौद्योगिकी की ओर स्थानांतरण: आधुनिक युद्ध में प्रौद्योगिकी, सटीकता एवं नेटवर्क आधारित प्लेटफॉर्म पर अधिक निर्भरता बढ़ रही है, जिससे वेतन एवं पेंशन की तुलना में पूँजीगत व्यय अधिक आवश्यक हो गया है।
  • आत्मनिर्भरता एवं आर्थिक प्रसार को बढ़ावा: उच्च रक्षा व्यय स्वदेशीकरण, रोजगार सृजन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एवं निर्यात को समर्थन प्रदान करता है, जिससे सुरक्षा उद्देश्यों का आर्थिक विकास से समन्वय होता है।

निष्कर्ष

केंद्रीय बजट 2026–27 में रक्षा पूँजीगत व्यय में की गई वृद्धि, एक नियमित विस्तार के बजाय एक रणनीतिक पुनर्संतुलन को दर्शाती है। हालिया परिचालन अनुभव, विकसित होते खतरे एवं भारत के रक्षा औद्योगिक आधार की परिपक्वता से प्रभावित यह बजट आधुनिकीकरण, तत्परता एवं आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देता है।

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