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वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR)

Lokesh Pal January 06, 2026 02:47 82 0

संदर्भ

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) के 42वें स्थापना दिवस पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने ‘डीप-टेक स्टार्ट-अप्स’ के लिए DSIR फंडिंग मानदंडों में ढील देने की घोषणा की।

संबंधित तथ्य

  • औद्योगिक अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए DSIR औद्योगिक अनुसंधान और विकास संवर्द्धन कार्यक्रम (IRDPP) के तहत वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) के बारे में 

  • स्थापना
    • भारत सरकार (कार्य आवंटन) नियम, 1961 के 164वें संशोधन के अंतर्गत, 4 जनवरी, 1985 को राष्ट्रपति की अधिसूचना द्वारा इस विभाग की स्थापना की गई थी।
    • विभाग को स्वदेशी प्रौद्योगिकी के विकास, उपयोग और हस्तांतरण को बढ़ावा देने का दायित्व सौंपा गया है।
  • नोडल मंत्रालय: DSIR, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
  • मुख्य अधिदेश और उद्देश्य
    • सभी क्षेत्रों में औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देना।
    • लघु एवं मध्यम औद्योगिक इकाइयों (SMEs/MSMEs) को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्द्धी प्रौद्योगिकियों के विकास में सहयोग प्रदान करना।
    • वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं और उद्योग के बीच सेतु के रूप में कार्य करना, जिसके लिए निम्नलिखित कार्यों का क्रियान्वयन किया जाता हैं:
      • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम (NRDC)
      • अनुसंधान एवं विकास निवेश को सुगम बनाने के लिए सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (CEL)।

औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास प्रोत्साहन कार्यक्रम (IRDPP) के बारे में 

  • उद्देश्य
    • आंतरिक अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर अधिक ध्यान केंद्रित करना।
    • उद्योग और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान संगठनों (SIROs) में अनुसंधान एवं विकास अवसंरचना को मजबूत करना।
    • उद्योग और SIRO-नेतृत्व वाली अनुसंधान एवं विकास पहलों को प्रोत्साहित करना।
    • आंतरिक अनुसंधान एवं विकास केंद्रों और SIROs के कार्यों को राष्ट्रीय तकनीकी और औद्योगिक विकास लक्ष्यों के साथ संरेखित करना।
  • कार्यक्रम का प्रकार: अनुसंधान एवं विकास (R&D)।
  • केंद्रित क्षेत्र: इंजीनियरिंग, पर्यावरण, प्राकृतिक एवं अनुप्रयुक्त विज्ञान, कृषि विज्ञान, चिकित्सा विज्ञान, सामाजिक विज्ञान।
  • वित्तपोषण एजेंसी: वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR)
  • पात्रता मानदंड
    • आवेदक कंपनी अधिनियम, 1956 या 2013 के तहत पंजीकृत कंपनी होनी चाहिए।
    • निगमन के बाद न्यूनतम तीन वित्तीय वर्ष पूर्ण हो चुके हों।
    • न्यूनतम विगत दो वर्षों से आय का स्रोत नियमित होना चाहिए।
    • अनुसंधान एवं विकास (R&D) मान्यता प्राप्त करने वाली कंपनियाँ विनिर्माण, उत्पादन या तकनीकी सेवाओं में संलग्न  होनी चाहिए।
    • अनुसंधान एवं विकास इकाइयाँ अधिकृत गैर-आवासीय परिसर में स्थित होनी चाहिए।
    • स्वतंत्र अनुसंधान एवं विकास अवसंरचना तथा योग्य तकनीकी मानव संसाधन की उपलब्धता होनी चाहिए।
    • आवेदन के समय अनुसंधान एवं विकास इकाई कार्यरत होनी चाहिए।
    • नवीन उत्पादों या प्रौद्योगिकियों के विकास संबंधी उद्देश्य से स्पष्ट रूप से परिभाषित, समयबद्ध अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रम संचालित होने चाहिए।

नीतिगत परिवर्तनों की घोषणा की गई

  • व्यवहार्यता का प्रावधान हटाया गया: DSIR के अंतर्गत वित्तपोषण हेतु डीप-टेक स्टार्ट-अप्स के लिए तीन वर्ष की न्यूनतम व्यवहार्यता/अस्तित्व की शर्त को समाप्त कर दिया गया है।
  • वित्तपोषण सीमा: वर्तमान में पात्र स्टार्ट-अप्स 1 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
  • सुरक्षा उपाय और मूल्यांकन मानक
    • तकनीकी परिपक्वता मूल्यांकन: स्टार्ट-अप्स को तकनीकी परिपक्वता से संबंधित उपयुक्त मूल्यांकन मानकों को पूर्ण करना होगा।
    • गुणवत्ता नियंत्रण: वित्तपोषण में दी गई छूट से जाँच में कोई कमी नहीं आती, बल्कि इससे आयु-आधारित मानदंडों के स्थान पर तकनीकी तत्परता और नवाचार क्षमता पर ध्यान केंद्रित होता है।

सुधार के पीछे निहित तर्क

  • प्रारंभिक चरण को बढ़ावा: तीन वर्ष की अनिवार्यता को समाप्त करने का उद्देश्य नवोन्मेषी परियोजनाओं और उद्यमियों को शुरुआती गति प्रदान करना है।
  • नवाचार को बढ़ावा देना: यह सुधार स्टार्ट-अप्स को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने से पूर्व तीव्र विस्तार करने हेतु प्रोत्साहित करता है।
  • गहन प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहन: गहन प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में प्रायः दीर्घ अनुसंधान एवं विकास चक्र शामिल होते हैं, इसलिए प्रारंभिक वित्तीय सहायता अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

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