100% तक छात्रवृत्ति जीतें

रजिस्टर करें

डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI)

Lokesh Pal January 19, 2026 04:48 21 0

संदर्भ

प्रधानमंत्री ने भारत द्वारा आयोजित राष्ट्रमंडल के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (CSPOC) के दौरान राष्ट्रमंडल देशों के साथ अपनी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) साझा करने की भारत के प्रयासों को रेखांकित किया।

डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना क्या है?

  • परिभाषा: डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) मूलभूत डिजिटल प्रणालियों का एक समुच्चय है, जो आधुनिक समाज के आधारभूत ढाँचे का निर्माण करता है।
    • यह एक डिजिटल सार्वजनिक वस्तु के रूप में कार्य करती है, क्योंकि इसे व्यापक रूप से सुलभ, डिजाइन के स्तर पर गैर-बहिष्करणकारी तथा विभिन्न क्षेत्रों में अनेक सेवाओं का समर्थन करने में सक्षम बनाया गया है।
  • उद्देश्य: DPI नागरिकों, व्यवसायों और सरकारों के बीच सुरक्षित और निर्बाध अंतःक्रियाओं को सक्षम बनाती है।

DPI के प्रमुख स्तंभ

  • डिजिटल पहचान स्तर: डिजिटल पहचान स्तर व्यक्तियों के सटीक सत्यापन को सक्षम बनाता है, जिससे सेवाएँ और लाभ लक्षित लाभार्थियों तक पहुँच सकें।
  • डिजिटल दस्तावेज अवसंरचना: डिजिटल दस्तावेज स्तर आधिकारिक दस्तावेजों के भंडारण, अभिगम और सत्यापन की सुविधा प्रदान करता है, जिससे भौतिक कागजी कार्य पर निर्भरता कम होती है।
  • डेटा विनिमय और सहमति स्तर: डेटा विनिमय स्तर सुरक्षित और सहमति-आधारित डेटा साझाकरण को सक्षम बनाता है, जिससे उपयोगकर्ता की स्वायत्तता की रक्षा करते हुए सेवा दक्षता में सुधार होता है।
  • डिजिटल भुगतान स्तर: डिजिटल भुगतान स्तर तीव्र, कम-लागत और सुरक्षित वित्तीय लेन-देन को सक्षम बनाता है, जो वित्तीय समावेशन तथा औपचारिकीकरण को समर्थन प्रदान करता है।
  • अंतर-संचालनीय मंच: अंतरसंचालनीयता यह सुनिश्चित करती है कि कई सेवा प्रदाता बिना किसी अलगाव के सामान्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एप्लिकेशन बना सकें।

इंडिया स्टैक

  • इंडिया स्टैक खुले और अंतर-संचालनीय डिजिटल निर्माण खंडों का एक समुच्चय है, जो पहचान सत्यापन, डिजिटल भुगतान और सुरक्षित डेटा साझाकरण को बड़े पैमाने पर सक्षम बनाकर कागज-रहित, नकदी-रहित और मानवीय उपस्थिति-रहित सेवा वितरण को संभव बनाता है।
  • इंडिया स्टैक के तीन परस्पर संबद्ध स्तर
    • पहचान स्तर: सुरक्षित डिजिटल पहचान और प्रामाणीकरण।
      • उदाहरण: आधार, ई-केवाईसी।

    • भुगतान स्तर: तीव्र, कम-लागत और अंतर-संचालनीय डिजिटल लेन-देन को सुगम बनाती है।
      • उदाहरण: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), आधार पेमेंट ब्रिज।
    • डेटा शासन स्तर: सुरक्षित, सहमति-आधारित डेटा साझाकरण और डिजिटल दस्तावेज प्रबंधन।
      • उदाहरण: डिजिलॉकर और अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क।

इंडिया स्टैक का वैश्विक अंगीकरण

  • डिजिटल भुगतान (UPI): सिंगापुर (पे-नाउ), संयुक्त अरब अमीरात और फ्राँस के साथ संबंध।
  • डिजिटल पहचान मंच: मॉड्यूलर ओपन सोर्स आइडेंटिटी प्लेटफॉर्म (MOSIP) को फिलीपींस, मोरक्को और इथियोपिया जैसे देशों ने अपनाया है।

राष्ट्रमंडल के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन (CSPOC)

  • परिचय: यह एक मंच है, जो राष्ट्रमंडल के स्वतंत्र संप्रभु राज्यों की राष्ट्रीय संसदों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों को एक साथ लाता है।
  • उत्पत्ति और स्थापना: CSPOC की स्थापना वर्ष 1969 में कनाडा की ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ के तत्कालीन अध्यक्ष लुसिएन लामुरो की एक पहल के रूप में की गई थी।
  • उद्देश्य: संसदीय नेतृत्व और सहयोग को सुदृढ़ करना।
  • सचिवालय
    • स्थापना से ही कनाडा द्वारा आयोजित और समर्थित।
    • CSPOC के कार्य संचालन हेतु प्रशासनिक और संस्थागत सहायता प्रदान करता है।
  • संस्थागत स्थिति
    • एक स्वतंत्र निकाय के रूप में कार्य करता है।
    • निम्नलिखित से कोई औपचारिक संबद्धता नहीं है:
      • राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (CPA)
      • राष्ट्रमंडल सचिवालय
      • राष्ट्रमंडल राष्ट्राध्यक्ष सम्मेलन (CHOGM)।
  • सदस्यता मानदंड: केवल संप्रभु राष्ट्रमंडल राज्यों की राष्ट्रीय संसदों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों तक सीमित।
  • कार्य चक्र और बैठकें: दो-वर्षीय चक्र पर संचालित:
    • पूर्ण सम्मेलन: प्रत्येक दो वर्ष में (आमतौर पर जनवरी में)।
    • स्थायी समिति की बैठक: मध्यवर्ती वर्ष में।
  • शासन संरचना
    • स्थायी समिति: CSPOC की गतिविधियों की निगरानी करती है।
      • 15 सदस्यों से युक्त; कोरम = 5
      • अगले मेजबान क्षेत्राधिकार की निचली सदन के अध्यक्ष द्वारा अध्यक्षता।
      • कार्यकाल: एक सम्मेलन की समाप्ति से अगले सम्मेलन की समाप्ति तक।
  • CSPOC के उद्देश्य
    • विभिन्न संसदों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों द्वारा निष्पक्षता और न्यायसंगतता को बनाए रखना, प्रोत्साहित करना तथा संवर्द्धित करना;
    • विभिन्न स्वरूपों में संसदीय लोकतंत्र के ज्ञान और समझ को बढ़ावा देना; तथा
    • संसदीय संस्थाओं का विकास करना।

28वाँ CSPOC सम्मेलन

  • मेजबान: भारत 28वें सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जो भारत द्वारा CSPOC की मेजबानी का चौथा अवसर है (पूर्व में वर्ष 1971, 1986 और 2010 में)।
  • प्रमुख फोकस क्षेत्र
    • विधायी कार्यप्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सोशल मीडिया का एकीकरण,
    • संसदीय संस्थाओं के साथ सार्वजनिक सहभागिता को सुदृढ़ करना, तथा
    • संसद सदस्यों की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करना।

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

THE MOST
LEARNING PLATFORM

Learn From India's Best Faculty

      

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.