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कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2025 का मसौदा

Lokesh Pal January 09, 2026 05:00 21 0

संदर्भ

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2025 का मसौदा जारी किया है, जिसमें कीटनाशक अधिनियम, 1968 और कीटनाशक नियम, 1971 को प्रतिस्थापित करने के लिए सार्वजनिक टिप्पणियाँ आमंत्रित की गई हैं।

कीटनाशक ऐसे रासायनिक या जैविक एजेंट होते हैं, जिनका उद्देश्य कीटों को रोकना, नष्ट करना, आकर्षित करना, भगाना, कम करना या नियंत्रित करना होता है, जिनमें कीट, खरपतवार, कवक तथा अन्य जीव शामिल हैं, जो फसलों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं।

भारत में कीटनाशकों का उपयोग

  • FAO (2022) के अनुसार, भारत ने वर्ष 2020 में 61,000 टन से अधिक कीटनाशकों का उपयोग किया।
    • यह ब्राजील (377,000), चीन (273,000 टन), अर्जेंटीना (241,000 टन) जैसे देशों की तुलना में अपेक्षाकृत कम है।
  • भारत में कीटनाशक उत्पादन: वर्ष 2022–2023 में भारत ने 258,130 टन कीटनाशकों का उत्पादन किया।
    • यह वर्ष 1998 के 102,240 टन के उत्पादन की तुलना में दो गुना वृद्धि को दर्शाता है।
  • निर्मित कीटनाशक: वर्तमान में, भारत में कुल 293 पंजीकृत कीटनाशकों में से 104 कीटनाशकों का निर्माण किया जा रहा है।
  • भारत में प्रतिबंधित कीटनाशक: अप्रैल 2022 तक, भारत ने 46 कीटनाशकों और 4 कीटनाशक फॉर्मुलेशनों पर प्रतिबंध लगाया है।

मसौदा विधेयक के प्रमुख प्रावधान

  • समग्र विनियमन
    • एकीकृत विनियामक प्रणाली: यह विधेयक कीटनाशकों के विनियमन को केंद्रीकृत करता है, जिसमें निर्माण, आयात, बिक्री, परिवहन, उपयोग और निपटान सहित सभी पहलुओं (पूर्ण जीवन-चक्र) का प्रबंधन शामिल है।
    • केंद्र के अंतर्गत नियंत्रण: कीटनाशक विनियमन को संघीय विषय बनाया जाएगा, जिससे समय के साथ विकसित हुई खंडित राज्य-स्तरीय विनियमन प्रणाली का स्थान लिया जाएगा।
  • दो-स्तरीय संस्थागत संरचना
    • केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड: कीटनाशक विनियमन से संबंधित वैज्ञानिक और तकनीकी मामलों पर एक परामर्शदायी निकाय।
    • पंजीकरण समिति: यह कीटनाशक का पंजीकरण करने, समीक्षा करने, निलंबित करने या रद्द करने के लिए उत्तरदायी कार्यकारी प्राधिकरण है।
      • इस निकाय को यह सुनिश्चित करने का कार्य सौंपा जाएगा कि पूर्व पंजीकरण के बिना कोई भी कीटनाशक निर्मित या आयातित न हो।
  • किसान-केंद्रित दृष्टिकोण
    • किसान-केंद्रित: यह मसौदा विधेयक अंधाधुंध कीटनाशक उपयोग के खतरों से किसानों और उपभोक्ताओं संरक्षण प्रदान करता है।
    • पारदर्शिता और अनुरेखणीयता: डिजिटल प्रक्रियाओं के माध्यम से कीटनाशक आपूर्ति शृंखला में बेहतर पारदर्शिता और अनुरेखणीयता।
    • अनिवार्य डिजिटल अभिलेख: पंजीकरण, लाइसेंसिंग, निरीक्षण और अभिलेख-रक्षण को डिजिटल रूप से प्रबंधित किया जाएगा, जिससे किसानों को सेवा प्रदाय में सुधार होगा।
  • कीटनाशक पंजीकरण को सरलीकृत करना
    • समयबद्ध पंजीकरण: पंजीकरण समिति को 12 माह के अंतर्गत कीटनाशक पंजीकरण पर निर्णय लेना होगा, जिसे 18 माह तक बढ़ाया जा सकता है। सामान्य (जेनरिक) कीटनाशकों के लिए, यदि इस अवधि के भीतर कोई निर्णय नहीं लिया जाता है, तो स्वचालित रूप से स्वीकृति प्रदान की जाएगी।
    • सामान्य कीटनाशकों के लिए शीघ्र अनुमोदन: यह विधेयक विलंब को कम करने और अनुमोदन प्रक्रिया को सरलीकृत कर प्रतिस्पर्द्धा को प्रोत्साहित करने का प्रयास करता है।
  • नकली और खराब  कीटनाशकों पर सख्त नियंत्रण:
    • कठोर दंड: यह विधेयक अवैध गतिविधियों को हतोत्साहित करने के लिए नकली और घटिया कीटनाशकों पर अधिक दंडात्मक प्रावधान लागू करता है।
    • परीक्षण प्रयोगशालाओं का प्रत्यायन: यह सुनिश्चित करने के लिए कीटनाशक परीक्षण प्रयोगशालाओं का अनिवार्य प्रत्यायन कि बाजार में केवल क्वालिटी-सर्टिफाइड उत्पाद ही उपलब्ध हों।
  • प्रवर्तन शक्तियाँ:
    • निरीक्षण और जब्ती: निरीक्षकों को परिसरों में प्रवेश करने, भंडार जब्त करने, बिक्री रोकने और परीक्षण हेतु नमूने लेने का अधिकार होगा।
    • पंजीकरण का निलंबन और रद्दीकरण: यदि मानव स्वास्थ्य, पशुओं या पर्यावरण के लिए जोखिम के प्रमाण मिलते हैं, तो कीटनाशक पंजीकरण की समीक्षा कर उन्हें निलंबित किया जा सकता है।
  • राज्य-स्तरीय दंड: राज्य प्राधिकरण विधेयक के अंतर्गत विशिष्ट दंड संरचनाएँ निर्धारित करेंगे, जिससे राष्ट्रीय ढाँचे के अनुरूप अनुपालन सुनिश्चित हो सके, साथ ही क्षेत्रीय लचीलापन भी बना रहे।

मसौदा कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2025 बनाम कीटनाशक अधिनियम, 1968

पहलू कीटनाशक अधिनियम, 1968 कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2025
विनियमन का दायरा मुख्य रूप से कीटनाशकों (इंसेक्टिसाइड्स) पर केंद्रित। सभी कीटनाशकों (रासायनिक और जैविक) को शामिल करता है, जिनमें पौध वृद्धि नियामक, पोस्ट हार्वेस्टिंग संबंधी कीटनाशक तथा घरेलू उपयोग के कीटनाशक भी शामिल हैं।
संस्थागत ढाँचा भूमिकाओं का स्पष्ट पृथक्करण नहीं था; उत्तरदायित्वों में अतिव्यापन था। केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड (परामर्शात्मक भूमिका), पंजीकरण समिति (विनियामक निर्णय) और कीटनाशक निरीक्षकों का गठन।
डिजिटल शासन पंजीकरण और लाइसेंसिंग के लिए मुख्यतः मैनुअल प्रक्रियाएँ। कानूनी समय-सीमा के साथ ऑनलाइन पंजीकरण और लाइसेंसिंग।

निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्राधिकरण द्वारा कार्रवाई न करने पर अनुमानित (डीम्ड) पंजीकरण।

प्रवर्तन दृष्टिकोण उल्लंघनों के लिए आपराधिक अभियोजन पर अधिक निर्भरता। छोटे उल्लंघनों के लिए क्रमिक दंड (मौद्रिक जुर्माना, कंपाउंडिंग) तथा गंभीर उल्लंघनों के लिए कड़े दंड (भारी जुर्माना, कारावास, पंजीकरण रद्द करना)।
निगरानी का प्रवर्तन निगरानी पर सीमित ज़ोर। कीटनाशक विषाक्तता को सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दे के रूप में राज्य-स्तरीय रिपोर्टिंग को अनिवार्य करता है।

विधेयक का महत्त्व

  • सुरक्षित कीटनाशक उपयोग सुनिश्चित करता है: यह विधेयक भारत में कीटनाशकों के सुरक्षित और विनियमित उपयोग को सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखता है, जिससे किसान कल्याण और उपभोक्ता स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है।
  • शासन में सुधार: केंद्रीकृत प्रणाली अपनाकर, यह विधेयक कीटनाशक विनियमन में मौजूद कमियों को दूर करता है, जिससे जवाबदेही और पारदर्शिता में सुधार होता है।
  • पर्यावरण संरक्षण: असुरक्षित कीटनाशकों के निलंबन और रद्दीकरण से संबंधित प्रावधान पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों को हानिकारक रसायनों से बचाने का उद्देश्य रखते हैं।
  • जैव-प्रौद्योगिकी को बढ़ावा: जैविक कीटनाशकों और समेकित कीट प्रबंधन को प्रोत्साहन देना वैश्विक सतत् लक्ष्यों के अनुरूप है, जिससे हानिकारक रसायनों पर निर्भरता कम होती है।

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