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अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार-2025

Lokesh Pal October 15, 2025 02:34 373 0

संदर्भ

वर्ष 2025 का नोबेल पुरस्कार (अर्थशास्त्र) जोएल मोक्यर, फिलिप एघियोन और पीटर हॉविट को नवाचार-आधारित आर्थिक विकास पर उनके अग्रणी कार्य के लिए प्रदान किया गया है। इन तीनों अर्थशास्त्रियों के कार्य ने यह स्पष्ट किया कि किस प्रकार नवाचार ने पिछली दो शताब्दियों में वैश्विक आर्थिक ठहराव को निरंतर विकास में परिवर्तित किया है।

पुरस्कार विजेता और उनके योगदान

पुरस्कार विजेता पद / संस्थान मान्यता / योगदान
जोएल मोक्यर 

(नीदरलैंड)

प्रोफेसर, नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी (अमेरिका); तेल अवीव यूनिवर्सिटी (इजरायल)l तकनीकी प्रगति के माध्यम से सतत् विकास संबंधी “पूर्वापेक्षाओं” की पहचान के लिए सम्मानित।
फिलिप एघियोन

फ्राँस

प्रोफेसर, कॉलेज डी फ्राँस और INSEAD, पेरिस, फ्राँस; लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस, यूके “क्रिएटिव डिस्ट्रक्शन” सिद्धांत पर आधारित सतत् विकास के सिद्धांत के लिए संयुक्त रूप से सम्मानित।
पीटर हॉविट

कनाडा  

प्रोफेसर, ब्राउन यूनिवर्सिटी, प्रोविडेंस, अमेरिका।

जोएल मोक्यर का योगदान — ज्ञान (Knowledge) ही विकास का आधार

  • मुख्य विचार:  मोक्यर के अनुसार, आधुनिक आर्थिक विकास का इंजन “उपयोगी ज्ञान (Useful Knowledge)” है, जिसे उन्होंने दो भागों में बाँटा—
    • प्रस्तावनात्मक ज्ञान (Propositional Knowledge): प्राकृतिक घटनाओं के “कारण” का ज्ञान।
    • निर्देशात्मक ज्ञान (Prescriptive Knowledge): इस ज्ञान को व्यवहार में “कैसे लागू” किया जाए।

  • ऐतिहासिक परिवर्तन
    • औद्योगिक क्रांति से पहले, सिद्धांत और इंजीनियरिंग के मध्य कमजोर संबंधों के कारण नवाचार का व्यावहारिक अनुप्रयोग नहीं था।

  • वैज्ञानिक क्रांति (16वीं-17वीं शताब्दी) ने मापन, प्रयोग और पुनरुत्पादनशीलता के माध्यम से इसे परिवर्तित कर दिया, जिससे सैद्धांतिक और व्यावहारिक ज्ञान के बीच प्रतिपुष्टि संभव हुई।

उदाहरण

  • वाष्प इंजन का विकास — वायुमंडलीय दाब की वैज्ञानिक समझ के आधार पर हुआ।
  • इस्पात उत्पादन — ऑक्सीजन और कार्बन की रासायनिक प्रक्रिया की जानकारी से संभव हुआ।

नीतिगत निहितार्थ

  • सतत् विकास के लिए तकनीकी रूप से कुशल श्रमिकों की आवश्यकता होती है, जो विचारों को उत्पादों में परिवर्तित कर सकें।
  • सरकारों को कौशल विकास, अनुसंधान एवं विकास, और नवाचार के प्रति खुलेपन में निवेश करना चाहिए, साथ ही तकनीकी परिवर्तन से प्रभावित समूहों के प्रतिरोध का प्रबंधन भी करना चाहिए।

जोसेफ शुंपीटर का सिद्धांत — “क्रिएटिव डिस्ट्रक्शन”

  • ऑस्ट्रियाई-अमेरिकी अर्थशास्त्री जोसेफ शुंपीटर ने वर्ष 1942 में अपनी पुस्तक “कैपिटलिज्म, सोशलिज्म एंड डेमोक्रेसी” में “क्रिएटिव डिस्ट्रक्शन”की अवधारणा प्रस्तुत की।
  • यह उस प्रक्रिया को संदर्भित करता है, जिसके द्वारा नवाचार आर्थिक संरचना में क्रांति लाता है, पुराने उद्योगों के स्थान पर नए उद्योगों का निर्माण करता है।

 मुख्य विचार

  • आर्थिक विकास नवाचार के एक चक्र के माध्यम से होता है, जहाँ नई तकनीकें और विधियाँ पुरानी तकनीकों और विधियों का स्थान ग्रहण कर लेती हैं।
  • यह निरंतर नवीनीकरण प्रगति और व्यवधान दोनों उत्पन्न करता है, पुरानी कंपनियाँ और नौकरियाँ समाप्त हो सकती हैं, लेकिन अधिक कुशल उद्योग विकसित हो सकते हैं।

उदाहरण

  • ऑटोमोबाइल उद्योग ने घोड़ा-गाड़ी उद्योग को समाप्त किया।
  • डिजिटल कैमरा ने ‘फिल्म कैमरा’ बाजार को नष्ट किया।
  • ऑनलाइन बैंकिंग और फिनटेक ने पारंपरिक बैंकिंग को चुनौती दी।

एघियोन–हॉविट मॉडल: “क्रिएटिव डिस्ट्रक्शन एंड ग्रोथ”

अवधारणा: जोसेफ शुंपीटर के क्रिएटिव डिस्ट्रक्शन के सिद्धांत के आधार पर एक गणितीय मॉडल का निर्माण किया गया, जिसमें दिखाया गया कि किस प्रकार नवाचार पुरानी प्रौद्योगिकियों के प्रतिस्थापन के माध्यम से विकास को गति प्रदान करता है।

प्रक्रिया

  • कंपनियाँ नवाचारों को विकसित करने और अस्थायी एकाधिकार शक्ति प्राप्त करने के लिए अनुसंधान एवं विकास में निवेश करती हैं।
  • नए नवाचार पुराने नवाचारों का स्थान ग्रहण करते हैं, जिससे लाभ का पुनर्वितरण होता है और सामाजिक स्तर पर उत्पादकता में वृद्धि होती है।

नीतिगत चुनौती

  • सरकारों को अनुसंधान एवं विकास में नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए सब्सिडी प्रदान करने से संबंधित दो विरोधी प्रवृत्तियाँ हैं:
    • अनुसंधान एवं विकास का समर्थन: समाज को अप्रचलित तकनीकों से भी लाभ होता है।
    • अत्यधिक अनुसंधान एवं विकास पर रोक लगाना: नए नवाचार केवल मामूली लाभ ही ला सकते हैं, जबकि लाभ पर ही ध्यान केन्द्रित किया जा सकता है।
  • साथ ही, उनकी अंतर्दृष्टि इस बात पर जोर देती है कि दीर्घकालिक समृद्धि न केवल नवाचार पर निर्भर करती है, बल्कि उन संस्थानों पर भी निर्भर करती है जो प्रतिस्पर्द्धा, सीखने और प्रौद्योगिकी के समान प्रसार को सक्षम बनाते हैं।
  • परिणाम: उनका मॉडल इष्टतम अनुसंधान एवं विकास स्तर निर्धारित करने में मदद करता है और नवाचार सब्सिडी, पेटेंट कानून और प्रतिस्पर्द्धा विनियमन पर नीतियों को सूचित करता है।

PW OnlyIAS विशेष 

भारत के संदर्भ में प्रासंगिकता

नोबेल पुरस्कार विजेता की अंतर्दृष्टि भारत के विकास पथ के साथ प्रतिध्वनित होती है, जहाँ उत्पादकता-आधारित विकास के लिए नवाचार और संस्थागत समर्थन महत्त्वपूर्ण हैं।

  • भारत में नवाचार-आधारित विकास के लिए कई पहलें शुरू की गई हैं: अनुसंधान राष्ट्रीय फाउंडेशन (NRF), अटल इनोवेशन मिशन, स्टार्ट-अप इंडिया, PLI योजनाएँ, डिजिटल इंडिया।
  • उन्नत अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अनुसंधान एवं विकास निवेश (जीडीपी का 0.64%) कम बना हुआ है, जो ‘अघियन-हॉविट’ के राज्य-समर्थित नवाचार प्रोत्साहनों पर बल को रेखांकित करता है।
  • जैसे-जैसे भारत ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, पुनर्कौशल और सामाजिक सुरक्षा के माध्यम से रचनात्मक हानि का प्रबंधन महत्त्वपूर्ण होता जा रहा है।