100% तक छात्रवृत्ति जीतें

रजिस्टर करें

‘नॉन-एनिमल टेस्टिंग’ (NAMs) मॉडल

Lokesh Pal July 22, 2026 03:17 6 0

संदर्भ 

नॉन-एनिमल टेस्टिंग (NAMs) मॉडल को वैश्विक स्तर पर प्राप्त हो रही बढ़ती स्वीकृति भारत को अपनी औषधि खोज एवं औषधि विकास पारितंत्र को सुदृढ़ करने का महत्त्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है।

नॉन-एनिमल टेस्टिंग’ मॉडल (NAMs) के बारे में

  • नॉन-एनिमल टेस्टिंग मॉडल (NAMs) ऐसी मानव प्रासंगिक वैज्ञानिक विधियाँ हैं, जिनके माध्यम से मुख्य रूप से पशु परीक्षण पर निर्भर हुए बिना औषधियों एवं रसायनों की सुरक्षा, प्रभावकारिता तथा विषाक्तता का मूल्यांकन किया जाता है।
  • उद्देश्य: पूर्व-नैदानिक परीक्षण की पूर्वानुमान सटीकता में सुधार करना, औषधि विकास की लागत एवं समय-सीमा को कम करना तथा प्रयोगशाला पशुओं के उपयोग को न्यूनतम करना।

नॉन-एनिमल टेस्टिंग’ मॉडल (NAMs) के प्रकार

  • ऑर्गेनॉइड: ये स्टेम सेल्स से विकसित लघु अंग होते हैं, जो मानव अंगों की संरचना एवं कार्यप्रणाली का यथार्थपरक अनुकरण करते हैं।
    • स्टेम सेल्स ऐसी अविभेदित सेल्स हैं, जिनमें स्व-पुनर्नवीकरण तथा विशिष्ट कोशिका प्रकारों में विभेदित होने की अद्वितीय क्षमता होती है, जिससे वे शरीर की प्राकृतिक मरम्मत एवं ऊतक पुनर्जनन का आधार निर्मित करती हैं।
    • इनमें एंब्रायोनिक स्टेम सेल्स (बहुशक्तियुक्त), एडल्ट स्टेम सेल्स (बहुक्षमतायुक्त) तथा इंड्यूस्ड प्लुरिपोटेंट स्टेम सेल्स (iPSCs) शामिल हैं तथा इनका व्यापक उपयोग पुनर्योजी चिकित्सा, ऊतक अभियांत्रिकी, रोग मॉडलिंग, औषधि खोज एवं वैयक्तिकीकृत चिकित्सा में किया जाता है।
  • ऑर्गन-ऑन-चिप: ये माइक्रोफ्लुइडिक आधारित उपकरण हैं, जो डिजीज मॉडलिंग एवं औषधि परीक्षण के लिए मानव अंगों की शारीरिक क्रियाओं का अनुकरण करते हैं।
  • संगणकीय मॉडल: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML) तथा इन-सिलिको मॉडल का उपयोग औषधियों के व्यवहार एवं विषाक्तता का पूर्वानुमान लगाने के लिए किया जाता है।
  • उन्नत सेल-आधारित मॉडल: इनमें मानव सेल संवर्द्धन, त्रि-आयामी ऊतक मॉडल तथा शरीर के बाहर किए जाने वाले ऊतक अध्ययन (Ex vivo Tissue Studies)  शामिल हैं, जो मानव-विशिष्ट जैविक अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं।

नॉन-एनिमल टेस्टिंग’ मॉडल (NAMs) की आवश्यकता

  • औषधि विकास की निम्न सफलता दर: फेज-I नैदानिक परीक्षणों में प्रवेश करने वाली संभावित औषधियों में से केवल लगभग 10–14% को ही अंततः नियामकीय स्वीकृति प्राप्त होती है।
  • एनिमल मॉडल्स की सीमाएँ: पशु-आधारित परीक्षण (Animal Testing) प्रायः मानव की जैविक प्रतिक्रियाओं का सटीक पूर्वानुमान लगाने में असफल रहते हैं, जिसके परिणामस्वरूप औषधियाँ नैदानिक परीक्षणों के उन्नत चरणों में विफल हो जाती हैं।
  • उच्च विकास लागत: पूर्व-नैदानिक स्तर पर अप्रभावी पूर्वानुमान के कारण अनुसंधान लागत, औषधि अपक्षय (Drug Attrition) तथा नवीन औषधियों की रोगियों तक पहुच बाधित होती है।

भारत की वर्तमान स्थिति

  • भारत ने धीरे-धीरे वैकल्पिक अनुसंधान प्लेटफॉर्म्स को अपनाया है, जैसे- सी. एलीगेंस (C. elegans), ड्रोसोफिला, जेब्राफिश सिस्टम्स, यीस्ट-आधारित मॉडल्स तथा एक्स-विवो ऊतक अध्ययन।
  • हाल के वर्षों में 3D ऑर्गेनॉइड्स तथा मानव-संगत कोशिकीय मॉडल्स ने भारत की औषधि अनुसंधान एवं विकास क्षमता को मजबूती प्रदान की है।
  • भारत की नियामकीय प्रणाली पहले से ही ‘प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट’ अध्ययन, टार्गेट आइडेंटिफिकेशन, ड्रग स्क्रीनिंग तथा टॉक्सिकोलॉजी के कुछ भागों में NAMs के उपयोग की अनुमति देती है।
  • हालाँकि, इसका अपनाया जाना अभी भी निम्नलिखित कारणों से सीमित है:
    • सीमित नियामकीय स्पष्टता
    • एकीकृत राष्ट्रीय रणनीति का अभाव
    • अल्प-उपयोगित वैज्ञानिक क्षमता, जिसे अभी तक औपचारिक रूप से नियामकीय प्रक्रियाओं में एकीकृत नहीं किया गया है।

वैश्विक विकास

  • संयुक्त राज्य अमेरिका (US), यूरोपीय संघ (EU), यूनाइटेड किंगडम (UK) तथा जापान प्रयोगात्मक चरण से आगे बढ़ चुके हैं। इन देशों ने NAMs के लिए राष्ट्रीय केंद्र, समर्पित वित्तपोषण तंत्र तथा वैलिडेशन कार्यक्रम स्थापित किए हैं तथा इनके अनुरूप नियामकीय प्रक्रियाओं को भी अनुकूलित किया जा रहा है।

भारत के लिए महत्त्व

  • औषधि नवाचार को बढ़ावा: NAMs का व्यापक उपयोग नवीन औषधि खोज, जटिल जैविक औषधियों (Biologics) तथा उच्च-मूल्य औषधि अनुसंधान को गति प्रदान कर सकता है।
  • औषधि विकास की दक्षता में सुधार: मानव-संगत परीक्षण मॉडल्स औषधियों की विफलता दर तथा विकास की समय सीमा को कम कर सकते हैं, साथ ही अनुसंधान लागत को घटा सकते हैं।
  • बौद्धिक संपदा सृजन को प्रोत्साहन: नवाचार पर अधिक बल पेटेंट सृजन तथा प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा दे सकता है।
  • जैव-अर्थव्यवस्था को समर्थन: NAMs, BioE3 नीति, आत्मनिर्भर भारत तथा वैश्विक जीवन विज्ञान नवाचार केंद्र बनने की भारत की महत्त्वाकांक्षा के उद्देश्यों के अनुरूप हैं।

NAMs के अनुप्रयोग

  • औषधि खोज: NAMs औषधीय स्क्रीनिंगऔषधीय लक्ष्यों की पहचान (टार्गेट आइडेंटिफिकेशन) तथा पूर्व-नैदानिक मूल्यांकन की सटीकता एवं दक्षता में सुधार करते हैं।
  • बायोसिमिलर्स एवं जेनेरिक औषधियाँ: ये गुणवत्ता परीक्षण तथा तुलनात्मक सुरक्षा मूल्यांकन को बेहतर बना सकते हैं।
  • कॉस्मेटिक्स एवं पर्सनल केयर: वर्चुअल स्किन मॉडल्स तथा संगणकीय प्लेटफॉर्म्स उत्पादों की सुरक्षा मूल्यांकन के लिए पशु परीक्षण का स्थान ले सकते हैं।
  • प्रिसिजन मेडिसिन: मानव-संगत मॉडल्स वैयक्तिकीकृत उपचारों तथा रोग-विशिष्ट उपचारों के विकास में सहायता करते हैं।
  • रासायनिक सुरक्षा मूल्यांकन: NAMs औद्योगिक रसायनों, खाद्य योजकों तथा पर्यावरणीय विषाक्तता के मूल्यांकन में सुधार करते हैं।

पशु परीक्षण से जुड़े नैतिक मुद्दे

  • पशु कल्याण: पशु परीक्षण के दौरान पशुओं को पीड़ा, हानि तथा कभी-कभी मृत्यु का सामना करना पड़ता है, जिससे उनके कल्याण को लेकर चिंताएँ उत्पन्न होती हैं।
  • पशु अधिकारों का उल्लंघन: यह वैज्ञानिक एवं वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए पशुओं को साधन के रूप में उपयोग करने की नैतिक वैधता पर प्रश्न खड़ा करता है।
  • सूचित सहमति का अभाव: मनुष्यों के विपरीत, पशु सहमति प्रदान नहीं कर सकते, जिससे उनका उपयोग नैतिक रूप से विवादास्पद बन जाता है।
  • संदिग्ध वैज्ञानिक वैधता: पशुओं एवं मनुष्यों के मध्य शारीरिक तथा आनुवंशिक भिन्नताएँ अविश्वसनीय अथवा अहस्तांतरणीय परिणामों का कारण बन सकती हैं।
  • वैकल्पिक साधनों की उपलब्धता: नॉन-एनिमल टेस्टिंग मॉडल्स (NAMs), जैसे ऑर्गेनॉइड्स, ऑर्गन-ऑन-चिप तथा AI-आधारित मॉडल्स के विकास ने पशु परीक्षण के नैतिक औचित्य को कम कर दिया है।
  • 3Rs सिद्धांत: नैतिक अनुसंधान में 3Rs का पालन आवश्यक है—रिप्लेसमेंट (जहाँ संभव हो, वैकल्पिक विधियों का उपयोग), रिडक्शन (प्रयुक्त पशुओं की संख्या न्यूनतम रखना) तथा रिफाइनमेंट (पीड़ा एवं कष्ट को कम करना)।
  • सामाजिक उत्तरदायित्व: समाज अब ऐसी नैतिक, मानवीय एवं पारदर्शी अनुसंधान पद्धतियों की अपेक्षा करता है, जो वैज्ञानिक प्रगति और पशु कल्याण के मध्य संतुलन स्थापित सुनिश्चित करती हैं।

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

THE MOST
LEARNING PLATFORM

Learn From India's Best Faculty

      

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.