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भारत में इलेक्ट्रिक कुकिंग: स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन का एक नया मार्ग

Lokesh Pal March 18, 2026 01:09 12 0

संदर्भ 

ऊर्जा अर्थशास्त्र और वित्तीय विश्लेषण संस्थान (Institute for Energy Economics and Financial Analysis- IEEFA) द्वारा किए गए अध्ययनों पर आधारित एक हालिया विश्लेषण ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि भारत में इलेक्ट्रिक कुकिंग, LPG की तुलना में सस्ती होती जा रही है, जिससे घरों को गैस आधारित खाना पकाने से इलेक्ट्रिक कुकिंग की ओर स्थानांतरित करने पर नीतिगत बहस छिड़ गई है।

इलेक्ट्रिक कुकिंग के बारे में

  • इलेक्ट्रिक कुकिंग से तात्पर्य भोजन तैयार करने के लिए विद्युत से चलने वाले उपकरणों जैसे इंडक्शन कुकटॉप, इलेक्ट्रिक स्टोव और इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर के उपयोग से है।
    • यह LPG, केरोसिन और बायोमास जैसे पारंपरिक ईंधनों का स्थान लेता है।
  • उपकरणों के प्रकार
    • इंडक्शन कुकटॉप- विद्युत चुंबकीय तापन का उपयोग करते हैं।
    • इलेक्ट्रिक हॉटप्लेट/कॉइल – प्रतिरोधक तापन का उपयोग करते हैं।
    • इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर – ऊर्जा-कुशल और समय बचाने वाले होते हैं।
    • माइक्रोवेव ओवन – भोजन को दोबारा गर्म करने और सीमित मात्रा में पकाने के लिए उपयोग किए जाते हैं।

भारत में इलेक्ट्रिक कुकिंग की ओर रुख करने का औचित्य

  • किफायती: अक्टूबर 2025 में IEEFA द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि इलेक्ट्रिक कुकिंग बिना सब्सिडी वाली LPG से 37% और बिना किसी विद्युत सब्सिडी वाली पाइपलाइन वाली प्राकृतिक गैस से 14% सस्ती है।
  • दक्षता अंतर: MECS कार्यक्रम कुकिंग डायरी में परीक्षण किए गए इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर, मूल्यांकन किए गए किसी भी अन्य उपकरण की तुलना में कम ऊर्जा का उपयोग करते हैं।
    • उदाहरण के लिए: इंडक्शन कुकटॉप लगभग 85% ऊर्जा बर्तन में स्थानांतरित करते हैं; हालाँकि LPG बर्नर लगभग 40% ऊर्जा ही स्थानांतरित कर पाता है।
  • आयात पर निर्भरता कम करना: भारत LPG का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे खाना पकाने की ऊर्जा वैश्विक आपूर्ति में व्यवधानों के प्रति संवेदनशील हो जाती है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से।
  • नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण को बढ़ावा देना: इलेक्ट्रिक कुकिंग को रूफटॉप सोलर सिस्टम से संचालित किया जा सकता है, जिससे परिवार ऊर्जा उत्पादक के रूप में कार्य कर सकते हैं।

इलेक्ट्रिक कुकिंग के लाभ

  • उच्च ऊर्जा दक्षता: इंडक्शन कुकटॉप 85-90% तक कुशल होते हैं, जबकि LPG स्टोव केवल 35-40% ऊर्जा का उपयोग करते हैं, जिससे ऊर्जा की काफी बचत होती है।
  • ऊर्जा की बर्बादी में कमी: LPG कुकिंग में लगभग 60% ऊष्मा वातावरण में नष्ट हो जाती है, जबकि इंडक्शन सीधे बर्तन को गर्म करता है, जिससे ऊर्जा की बर्बादी कम होती है।
  • कम समय में खाना पकाना: इंडक्शन कुकटॉप तेजी से गर्म होते हैं और LPG आधारित कुकिंग की तुलना में खाना पकाने का समय काफी कम कर सकते हैं।
  • पर्यावरण पर कम प्रभाव: इलेक्ट्रिक कुकिंग जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करती है और नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित हो सकती है, जिससे घरेलू उत्सर्जन और आंतरिक प्रदूषण को कम करने में मदद मिलती है।

चरम माँग को प्रबंधित करने के लिए स्मार्ट ग्रिड समाधान

  • ओपन ऑटोमेटेड डिमांड रिस्पॉन्स (OpenADR): OpenADR एक दो-तरफा संचार मानक है, जो स्मार्ट थर्मोस्टैट्स, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जर, वॉटर हीटर और कुकटॉप्स को डिमांड रिस्पॉन्स, सहायक सेवाओं (फ्रीक्वेंसी/वोल्टेज) और DER समन्वय में स्वचालित रूप से शामिल होने में सक्षम बनाता है।
    • इसके बाद ये उपकरण बिना किसी हस्तक्षेप के अपनी खपत को स्वचालित रूप से समायोजित कर लेते हैं।
  • तैनाती: टाटा पॉवर दिल्ली ने देश का पहला OpenADR पायलट प्रोजेक्ट 167 वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के माध्यम से संचालित किया, जिससे अत्यधिक खपत में औसतन 14% की कमी आई।
  • ऊर्जा भंडारण: विद्युत कंपनियां पीक आवर्स के दौरान विद्युत आपूर्ति के लिए बैटरी स्टोरेज सिस्टम का उपयोग कर सकती हैं।
    • उदाहरण के लिए: BSES पॉवर लिमिटेड ने भारत का पहला वाणिज्यिक बैटरी स्टोरेज सिस्टम स्थापित किया।

इलेक्ट्रिक कुकिंग की ओर संक्रमण में चुनौतियाँ

  • विद्युत की चरम माँग: भारत में विद्युत की चरम माँग वर्ष 2014 में 148 गीगावाट से बढ़कर दिसंबर 2025 में रिकॉर्ड 242.5 गीगावाट हो गई, जो बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को दर्शाती है।
    • शाम को खाना पकाने का समय (रात 9-11 बजे) इसी चरम माँग के साथ मेल खाता है, जिससे ग्रिड पर दबाव और बढ़ सकता है।
  • खाना पकाने का तरीका और तकनीकी बाधाएँ: भारतीय खाना पकाने में अक्सर कई बर्तनों का उपयोग, चपाती बनाना और उच्च ताप वाली तकनीकें शामिल होती हैं, जिससे सिंगल प्लेट इंडक्शन कुकिंग अपर्याप्त हो जाती है।
    • उदाहरण के लिए: ऊर्जा और संसाधन संस्थान ने विद्युत से खाना पकाने की कम हिस्सेदारी (~5%) को देखते हुए, व्यापक उपयोग के लिए इंडक्शन तकनीकों की आवश्यकता पर जोर दिया है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में पहुँच की कमी: अंतरराष्ट्रीय सतत् विकास संस्थान और IEEFA दोनों शहरी रसोई से विद्युत से खाना पकाने की शुरुआत करने की सलाह देते हैं, जिससे आयातित LPG उन ग्रामीण क्षेत्रों के लिए उपलब्ध हो सके, जहाँ अभी भी विश्वसनीय विद्युत की कमी है।
  • ग्रिड अवसंरचना की सीमाएँ: कई घरों में वर्तमान में 3 किलोवाट की लोड क्षमता है, जो कई विद्युत उपकरणों के लिए अपर्याप्त हो सकती है।
    • उदाहरण के लिए, ट्रांसफार्मर और वितरण अवसंरचना को उन्नत करने के लिए बड़े निवेश की आवश्यकता होती है।

सरकारी पहल

  • राष्ट्रीय कुशल पाक कला कार्यक्रम (NECP): इसका उद्देश्य भारत भर में लगभग 20 लाख (20 लाख) ऊर्जा-कुशल इंडक्शन कुकस्टोव स्थापित करके इलेक्ट्रिक कुकिंग को बढ़ावा देना है।
  • गो इलेक्ट्रिक अभियान: ऊर्जा मंत्रालय की एक पहल, जिसका उद्देश्य खाना पकाने सहित ऊर्जा के उपयोग के विद्युतीकरण को बढ़ावा देना है।
  • EESL द्वारा थोक खरीद मॉडल: EESL इंडक्शन कुकटॉप की लागत कम करने और उनकी उपलब्धता बढ़ाने के लिए थोक खरीद (जैसे- उजाला एलईडी) का उपयोग करता है।
    • किफायती मूल्य निर्धारण और बड़े पैमाने पर वितरण के माध्यम से इसके उपयोग को बढ़ाने में सहायता मिलती है।
  • ऊर्जा दक्षता ब्यूरो ने इंडक्शन हॉब्स के लिए स्टार लेबलिंग शुरू की है।

आगे की राह 

  • ग्रिड पर भार कम करना: बैटरी स्टोरेज के साथ रूफटॉप सोलर पैनल लगाने से परिवार उर्जा उत्पादक बन सकते हैं, यानी दिन में विद्युत उत्पादन करके शाम को इंडक्शन कुकिंग के लिए संगृहीत ऊर्जा का उपयोग कर सकते हैं, जिससे पीक लोड कम हो जाता है।
    • उदाहरण के लिए:  वर्ष 2025 के एक ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय ग्रिड अध्ययन में बताया गया है कि जब आवासीय विद्युतीकरण को रूफटॉप सोलर, बैटरी और ऑफ-पीक शेड्यूलिंग के साथ जोड़ा गया, तो पीक लोड आधा हो गया और ग्रिड सुदृढ़ीकरण लागत में 75% की कमी आई।
  • सौर क्षमता का दोहन: भारत की रूफटॉप सोलर क्षमता वर्ष 2026 में 24 गीगावाट से बढ़कर वर्ष 2030 तक 41 गीगावाट से अधिक होने का अनुमान है, जो पीएम-सूर्य घर योजना से प्रेरित है, जिसका उद्देश्य दस मिलियन परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त विद्युत देना है।
  • पीयर-टू-पीयर (P2P) ऊर्जा व्यापार को बढ़ावा देना: अतिरिक्त सौर विद्युत का भंडारण और व्यापार दोनों किया जाना चाहिए। P2P ऊर्जा व्यापार से घरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पड़ोसियों को सीधे अतिरिक्त विद्युत बेचने में सहायता मिलेगी, जिससे वितरण कंपनियों पर निर्भरता कम होगी और स्थानीय चरम माँग में सुधार होगा।
    • उदाहरण के लिए: लखनऊ में, उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा अनुमोदित एक नियामक सैंडबॉक्स के तहत, इंडिया स्मार्ट ग्रिड फोरम और ऑस्ट्रेलिया की पॉवरलेजर के नेतृत्व में दक्षिण एशिया की पहली ब्लॉकचेन-आधारित P2P सौर व्यापार पायलट परियोजना चल रही है।
  • इलेक्ट्रिक कुकिंग के लिए LPG सब्सिडी का युक्तिकरण: अनुमानित ₹40,000 करोड़ की वार्षिक LPG सब्सिडी का एक हिस्सा इंडक्शन कुकटॉप के लिए एकमुश्त पूँजीगत सहायता के रूप में पुनर्निर्देशित किया जाए।
  • भारत-विशिष्ट इंडक्शन तकनीकों के लिए अनुसंधान एवं विकास: भारतीय खाना पकाने के लिए डिजाइन की गई मल्टी-पॉट इंडक्शन तकनीक पर अनुसंधान एवं विकास के लिए निधि प्रदान की जाए। और टियर-1 शहरों में नए आवासीय भवनों के लिए पूर्णतः विद्युत निर्माण अनिवार्य किया जाए।

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