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पशुधन में एंटीबायोटिक उपयोग का भविष्य

Lokesh Pal April 05, 2025 02:16 5 0

संदर्भ

हाल ही में खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने पशुधन में वैश्विक एंटीबायोटिक उपयोग पर एक अध्ययन किया।

  • नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित इस अध्ययन का शीर्षक है – पशुधन में एंटीबायोटिक उपयोग का भविष्य (Future of Antibiotic Use in Livestock), जिसमें वर्ष 2040 तक पशुधन में एंटीबायोटिक उपयोग में अनुमानित वृद्धि पर प्रकाश डाला गया है।

पशुधन में एंटीबायोटिक उपयोग के भविष्य की मुख्य बिंदु

  • एंटीबायोटिक उपयोग में अनुमानित वृद्धि
    • वर्ष 2019 में पशुधन में वैश्विक एंटीबायोटिक उपयोग (AMUQ) लगभग 1,10,777 टन था।
    • वर्ष 2040 तक यह 30% बढ़कर 1,43,481 टन होने की आशा है।
  • पशुधन उत्पादकता लाभ के माध्यम से संभावित कमी
    • पशु स्वास्थ्य, प्रबंधन प्रथाओं और उत्पादन दक्षता में सुधार करके वर्ष 2040 तक एंटीबायोटिक के उपयोग को 57% (62,000 टन तक) तक कम किया जा सकता है।
    • एंटीबायोटिक उपयोग तीव्रता (AMUI) में मामूली कमी भी AMUQ वृद्धि को काफी हद तक संतुलित कर सकती है।
    • सर्वाधिक कमी तब होती है, जब AMUI में 50% की कटौती की जाती है और पशुधन बायोमास को कम किया जाता है।
  • वैश्विक एंटीबायोटिक उपयोग में क्षेत्रीय योगदान
    • एशिया और प्रशांत: सबसे बड़ा योगदानकर्ता बने रहने की उम्मीद है (वैश्विक AMUQ का 64.6%)।
    • दक्षिण अमेरिका: 19% योगदान देता है।
    • अफ्रीका: 5.7% योगदान देता है।
    • उत्तरी अमेरिका: 5.5% योगदान देता है।
    • यूरोप: वैश्विक एंटीबायोटिक उपयोग का 5.2% हिस्सा बनाता है।
  • वैश्विक कटौती लक्ष्य प्राप्त करने में चुनौतियाँ
    • कई क्षेत्रों, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहाँ पशुधन उद्योग बढ़ रहा है, बढ़ती खाद्य माँग को पूरा करते हुए एंटीबायोटिक के उपयोग को कम करने में चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
    • केवल पशुधन की संख्या कम करने से समग्र एंटीबायोटिक उपयोग पर सीमित प्रभाव पड़ता है।

रेनोफार्म (RENOFARM) पहल के बारे में 

  • FAO ने ‘सतत् कृषि खाद्य प्रणाली परिवर्तन के लिए खेतों पर रोगाणुरोधी की आवश्यकता को कम करना’ (Reduce the Need for Antimicrobials on Farms for Sustainable Agrifood Systems Transformation-RENOFARM) नामक पहल शुरू की।
  • उद्देश्य
    • पशुधन में एंटीबायोटिक के उपयोग को कम करने के लिए नीतिगत मार्गदर्शन प्रदान करना।
    • पशुधन प्रबंधन में सुधार के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करना।
    • देशों को सतत् कृषि खाद्य प्रणालियों में संक्रमण में मदद करने के लिए क्षमता निर्माण का समर्थन करना।
  • यह पहल एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (AMR) को रोकने और खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने के वैश्विक प्रयासों के अनुरूप है।
    • दुनिया भर की सरकारों ने वर्ष 2024 संयुक्त राष्ट्र महासभा रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) घोषणा के तहत कृषि खाद्य प्रणालियों में एंटीमाइक्रोबियल उपयोग को कम करने का संकल्प लिया है।

रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance-AMR) घोषणा

  • रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) पर 79वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) उच्च स्तरीय बैठक में, वैश्विक नेताओं ने AMR के बढ़ते खतरे को संबोधित करने के लिए रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) घोषणा का समर्थन किया।
  • उद्देश्य
    • घोषणा का उद्देश्य AMR के मानवीय, कृषि और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए समन्वित वैश्विक कार्रवाई को मजबूत करना है।
  • लक्ष्य
    • स्वास्थ्य प्रभाव: वर्ष 2030 तक जीवाणुजनित AMR से जुड़ी वार्षिक मौतों में 10% की कमी लाना (वर्तमान में अनुमानित 4.95 मिलियन)।
    • मानव स्वास्थ्य: सुनिश्चित करना कि वैश्विक स्तर पर उपयोग होने वाले कम-से-कम 70% एंटीबायोटिक्स WHO एक्सेस समूह के हों।
    • कृषि: वर्ष 2030 तक कृषि खाद्य प्रणालियों में रोगाणुरोधी उपयोग को उल्लेखनीय रूप से कम करना।
    • पर्यावरण: पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए पारिस्थितिकी तंत्र में रोगाणुरोधी पदार्थों के निर्वहन को संबोधित करना।
  • कार्यान्वयन तंत्र 
    • वर्ष 2030 के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए वैश्विक बहुक्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना।
    • स्थायी राष्ट्रीय वित्त पोषण सुनिश्चित करना और AMR के खिलाफ कार्रवाई में तेजी लाने के लिए उत्प्रेरक निधि में अतिरिक्त 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाना।

पशुओं में एंटीबायोटिक्स का उपयोग क्यों किया जाता है?

  • एंटीबायोटिक्स को अक्सर संक्रमण या तनाव से संबंधित बीमारियों को रोकने और पशुओं में जीवाणु संक्रमण का इलाज करने के लिए चारे में दिया जाता है।
  • गहन खेती में विकास को बढ़ावा देने और चारे की दक्षता में सुधार करने के लिए उपयोग किया जाता है।

अत्यधिक एंटीबायोटिक उपयोग के परिणाम

  • रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR): अधिक उपयोग से प्रतिरोधी बैक्टीरिया उत्पन्न होते हैं, जिससे मानव और पशु स्वास्थ्य में एंटीबायोटिक दवाओं की प्रभावशीलता कम हो जाती है।
    • उदाहरण के लिए, पशुधन खेती और जलीय कृषि व्यवस्था में कोलिस्टिन (Colistin) के अत्यधिक उपयोग के परिणामस्वरूप कोलिस्टिन प्रतिरोधी बैक्टीरिया का हॉटस्पॉट बन गया है।
  • पर्यावरणीय प्रभाव: एंटीबायोटिक अवशेष जल और मृदा में प्रवेश करते हैं, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है।
  • खाद्य सुरक्षा जोखिम: दवा प्रतिरोधी बैक्टीरिया खाद्य शृंखला में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे उपभोक्ताओं के लिए स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न हो सकता है।
  • वैश्विक स्वास्थ्य खतरा: AMR मनुष्यों में अधिक गंभीर और अनुपचारित संक्रमणों को जन्म दे सकता है।

पशुओं में एंटीबायोटिक निर्भरता कम करने के उपाय

  • बेहतर पशु स्वास्थ्य एवं प्रबंधन के माध्यम से पशुधन उत्पादकता को बढ़ाना।
  • खाद्य उत्पादन को बनाए रखते हुए अनावश्यक एंटीबायोटिक के उपयोग को कम करना।
  • RENOFARM और UN AMR घोषणा जैसी पहलों के माध्यम से वैश्विक सहयोग को प्रोत्साहित करना।
  • वैकल्पिक उपचारों, टीकों और सतत् कृषि पद्धतियों पर शोध में निवेश करना।

भारत में पशुधन की स्थिति

  • पशुधन संख्या: 20वीं पशुधन गणना के अनुसार देश में लगभग 303.76 मिलियन गोजातीय (मवेशी, भैंस, मिथुन और याक), 74.26 मिलियन भेड़, 148.88 मिलियन बकरियाँ, 9.06 मिलियन सूअर और लगभग 851.81 मिलियन मुर्गियाँ हैं।
  • अर्थव्यवस्था में योगदान: वर्ष 2020-21 में पशुधन क्षेत्र ने कुल GVA में 4.90 प्रतिशत का योगदान दिया।

पशुधन क्षेत्र में सरकारी पहल

  • पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (Animal Husbandry Infrastructure Development Fund-AHIDF): इसका उद्देश्य पशुपालन क्षेत्र में प्रसंस्करण, कोल्ड चेन और मूल्य संवर्द्धन के लिए अवसंरचना के निर्माण में निजी क्षेत्र के निवेश का समर्थन करना है।
  • राष्ट्रीय पशुधन मिशन (National Livestock Mission-NLM): इस योजना का फोकस रोजगार सृजन, उद्यमिता विकास; प्रति पशु उत्पादकता में वृद्धि और इस प्रकार मांस, बकरी के दूध, अंडे और ऊन के उत्पादन में वृद्धि को लक्षित करना है।
  • राष्ट्रीय गोकुल मिशन: सरकार द्वारा इसे देशी नस्लों के विकास और संरक्षण तथा गोजातीय आबादी के आनुवंशिक उन्नयन पर ध्यान केंद्रित करते हुए शुरू किया गया है।
  • पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण कार्यक्रम (Livestock Health and Disease Control Programme-LHDCP): यह पशुधन रोगों को दूर करने और पशु चिकित्सा स्वास्थ्य अवसंरचना को बढ़ाने के लिए लागू किया गया है।
  • भारत पशुधन पशुधन डेटा स्टैक: पशुधन क्षेत्र में उत्पादकता और पता लगाने की क्षमता बढ़ाने के लिए ‘रियल टाइम’ पशुधन डेटा संग्रह तथा प्रबंधन के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
  • दुग्ध सहकारी समितियों और दुग्ध उत्पादक कंपनियों के डेयरी किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC): 15 नवंबर, 2024 तक, AHD किसानों के लिए 41.66 लाख से अधिक नए KCC स्वीकृत किए गए।
  • गोजातीय उत्पादकता पर राष्ट्रीय मिशन: आनुवंशिक सुधार, पोषण और स्वास्थ्य पहलों के माध्यम से देशी मवेशियों और भैंसों की उत्पादकता में सुधार करने की एक योजना।
  • राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम: गोजातीय पशुओं के लिए कृत्रिम गर्भाधान कवरेज को बढ़ावा देने, आनुवंशिक वृद्धि और बेहतर दूध उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी पहल है।

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