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एशिया में प्राकृतिक आपदाओं का बढ़ता खतरा

Lokesh Pal January 06, 2026 03:08 29 0

संदर्भ

एशिया की उभरती अर्थव्यवस्थाएँ, जिनमें भारत, चीन और आसियान देश शामिल हैं, बार-बार और अधिक तीव्र प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते खतरे का सामना कर रही हैं।

एशिया में प्राकृतिक आपदाएँ

  • अत्यधिक जोखिम वाला क्षेत्र: पिछले कुछ दशकों में, एशिया विश्व स्तर पर सर्वाधिक आपदाग्रस्त क्षेत्र रहा है।
  • वार्षिक आवृत्ति और प्रभाव: हाल के आँकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में प्रतिवर्ष 100 से अधिक जलवायु संबंधी आपदाएँ आती हैं, जिनसे करोड़ों लोग प्रभावित होते हैं।
  • मानवीय प्रभाव: पिछले दशक में बढ़ते जोखिम स्पष्ट हुए हैं, कुछ अनुमानों के अनुसार, आपदाओं से प्रतिवर्ष लगभग 8 करोड़ लोग प्रभावित होते हैं।

प्राकृतिक आपदाओं के प्रकार:

क्षेत्र के लिए समग्र खतरा चार प्रमुख श्रेणियों के खतरों का मिश्रण है:

  1. जलविज्ञानीय: बाढ़, भूस्खलन।
  2. मौसम विज्ञान संबंधी: तूफान, अत्यधिक तापमान।
  3. जलवायु विज्ञान संबंधी: सूखा, वनाग्नि।
  4. भू-भौतिकीय: भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट।

जोखिमों में भौगोलिक भिन्नता

  • प्राकृतिक आपदाओं के प्रकार देश और भौगोलिक स्थिति के अनुसार काफी भिन्न होते हैं।
  • भारत: मुख्य रूप से जल संबंधी घटनाओं से प्रेरित बाढ़ (तूफान से संबंधित नहीं) और भूस्खलन के प्रति संवेदनशील है।
  • फिलीपींस और वियतनाम: प्रायः उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (टाइफून) और तूफानों की चपेट में आते हैं।
  • चीन और इंडोनेशिया: बाढ़ और तूफानों के साथ-साथ भूकंप तथा ज्वालामुखी विस्फोट सहित उच्च भूकंपीय जोखिमों का सामना करते हैं।

आपदाओं के कारण भारत की अर्थव्यवस्था को हुआ नुकसान

  • ऐतिहासिक आधारभूत आँकड़े: वर्ष 1990-2024 की अवधि के आँकड़ों से पता चलता है कि भारत को आपदाओं से संबंधित औसतन वार्षिक नुकसान उसके सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 0.4% के बराबर हुआ है।
  • उच्च प्रभाव वाले वर्ष: विशेष रूप से खराब वर्षों में, जैसे कि देशव्यापी बाढ़ या चक्रवातों के दौरान, आर्थिक प्रभाव कहीं अधिक हो सकता है।
    • कुछ विश्लेषणों के अनुसार, विशिष्ट उच्च क्षति अवधियों में हानि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 2% तक पहुँच सकती है।
  • क्षेत्रीय प्रभाव: भारत की संवेदनशीलता मुख्य रूप से जल संबंधी है (तूफान से संबंधित बाढ़ और भूस्खलन के अलावा अन्य आपदाओं से), जिसका कृषि, आवास और बुनियादी ढाँचे पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है।

विश्व जोखिम सूचकांक

  • विश्व जोखिम सूचकांक एक वार्षिक मूल्यांकन उपकरण है, जो विश्व भर के देशों के लिए चरम प्राकृतिक घटनाओं और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से उत्पन्न आपदा जोखिम की गणना करता है।
  • यह विश्व जोखिम रिपोर्ट का हिस्सा है, जिसे बुंड्निस एंटविक्लुंग हिल्फ्ट द्वारा शांति एवं सशस्त्र संघर्ष के अंतरराष्ट्रीय कानून संस्थान (IFHV) के सहयोग से प्रकाशित किया जाता है।
  • गणना पद्धति: जोखिम = जोखिम का दायरा × जोखिम की संभावना।
    • जोखिम: भूकंप, सुनामी, चक्रवात, बाढ़, सूखा और समुद्र स्तर में वृद्धि जैसी आपदाओं से प्रभावित आबादी।
    • कमजोरी: संभाव्यता (गरीबी, असमानता जैसे संरचनात्मक कारक), सामना करने की क्षमता का अभाव (जैसे- चिकित्सा देखभाल, आपदा की तैयारी) और अनुकूलन क्षमता का अभाव (दीर्घकालिक समायोजन, जैसे- शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण)।
  • विश्व जोखिम रिपोर्ट 2025 बाढ़ को एक प्रमुख आपदा के रूप में दर्शाती है।
  • शीर्ष क्रम वाले देश (2025)
    • फिलीपींस में सर्वाधिक जोखिम बना हुआ है।
    • भारत अब दूसरे स्थान पर है।
    • इंडोनेशिया तीसरे स्थान पर है।

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