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क्रिप्टोकरेंसी और वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) संस्थाओं हेतु दिशा-निर्देश

Lokesh Pal January 13, 2026 03:22 6 0

संदर्भ

वित्त मंत्रालय के अंतर्गत वित्तीय आसूचना इकाई–भारत (FIU-IND) ने भारत में संचालित क्रिप्टोकरेंसी और वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) संस्थाओं पर नियामक निगरानी को सुदृढ़ करने हेतु अद्यतन दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

संबंधित तथ्य

  • इन निर्देशों के अंतर्गत एक्सचेंजों द्वारा स्टॉक मार्केट के IPO के समकक्ष ‘इनिशियल कॉइन ऑफरिंग’ (ICO) और ‘इनिशियल टोकन ऑफरिंग’ (ITO) को भी हतोत्साहित किया गया है।

दिशा-निर्देशों की प्रमुख विशेषताएँ

  • अनिवार्य पंजीकरण
    • सभी क्रिप्टो एक्सचेंजों को रिपोर्टिंग एंटिटी (REs) के रूप में FIU के साथ पंजीकरण करना अनिवार्य होगा।
    • अवैध वित्तीय गतिविधियों की पहचान के लिए एक्सचेंजों को संदिग्ध लेन-देन रिपोर्ट (STRs) प्रस्तुत करनी होंगी और ग्राहकों तथा  लेन-देन का विस्तृत रिकॉर्ड बनाए रखना होगा।
  • प्रिंसिपल ऑफिसर (PO): प्रत्येक VDA रिपोर्टिंग एंटिटी के लिए प्रिंसिपल ऑफिसर (PO) की नियुक्ति अनिवार्य है।
    • भूमिका और उत्तरदायित्व: एंटी-मनी लॉण्ड्रिंग (AML), आतंकवादी वित्तपोषण की रोकथाम (CFT) तथा ‘काउंटर-प्रोलिफरेशन फाइनेंसिंग’ (CPF) अनुपालन की समग्र जिम्मेदारी।
  • साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण मानदंड: VDA सेवा प्रदाताओं को CERT-In द्वारा सूचीबद्ध ऑडिटर से साइबर सुरक्षा ऑडिट प्रमाण-पत्र प्राप्त करना होगा।
    • प्रमाण-पत्र में CERT-In के निर्देशों और लागू साइबर सुरक्षा ढाँचों के अनुपालन की पुष्टि होनी चाहिए।
  • अनहोस्टेड वॉलेट और पीयर-टू-पीयर लेन-देन: रिपोर्टिंग एंटिटीज कोअनहोस्टेड वॉलेट ट्रांसफर’ से संबंधित जानकारी एकत्र करनी होगी।
  • उन्नत KYC आवश्यकताएँ
    • एक्सचेंजों को स्थायी खाता संख्या (PAN), भौतिक उपस्थिति के सत्यापन हेतु लाइवनेस डिटेक्शन के साथ सेल्फी तथा जियो-टैगिंग अनिवार्य रूप से एकत्र करनी होगी।
    • खाता सत्यापन: ग्राहकों के बैंक खातों का सत्यापनपेनी-ड्रॉप’ तंत्र के माध्यम से किया जाएगा।
      • पेनी-ड्रॉप’ बैंक खाता सत्यापन: खाते के स्वामित्व और परिचालन स्थिति की पुष्टि हेतु ₹1 का वापसी योग्य लेन-देन किया जाता है।

नियामक प्राधिकरण और कानूनी आधार

  • कानूनी ढाँचा: दिशा-निर्देश धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के अंतर्गत जारी किए गए हैं।
  • क्रिप्टो की स्थिति: भारत में क्रिप्टोकरेंसी वैध मुद्रा नहीं है, किंतु आयकर अधिनियम के अंतर्गत कराधान के अधीन है।
    • VDA को आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 2(47A) के अंतर्गत परिभाषित किया गया है।

वर्चुअल डिजिटल एसेट  (VDAs)

वर्चुअल डिजिटल एसेट को आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 2(47A) के अंतर्गत निम्नलिखित प्रकार से परिभाषित किया गया है-

  • डिजिटल मूल्य प्रतिनिधित्व: ऐसी कोई भी सूचना, कोड, संख्या या टोकन– भारतीय अथवा विदेशी मुद्रा को छोड़कर, जो क्रिप्टोग्राफिक या समान माध्यमों से उत्पन्न हो, और जो:
    • प्रतिफल के साथ या बिना डिजिटल मूल्य का प्रतिनिधित्व करता हो,
    • अंतर्निहित मूल्य हो या मूल्य के भंडार अथवा लेखा इकाई के रूप में कार्य करता हो तथा
    • इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्थानांतरित, संगृहीत या व्यापार योग्य हो, जिसमें वित्तीय लेन-देन या निवेश में उपयोग शामिल है।
      • उदाहरण: बिटकॉइन, ईथर, टेथर, एल्गोरैंड और स्टेलर।
  • नॉन-फंजिबल टोकन (NFTs): नाम चाहे जो भी हो, NFTs या अन्य समान डिजिटल टोकन।
    • उदाहरण: ‘बोर्ड एप यॉट’ क्लब, क्रिप्टोपंक्स, NBA टॉप शॉट।
  • सरकार द्वारा अधिसूचित परिसंपत्तियाँ: कोई अन्य डिजिटल परिसंपत्ति, जिसे केंद्र सरकार राजपत्र में अधिसूचित कर सकती है।

नोट: VDA सेवा प्रदाताओं को वर्ष 2023 में PMLA, 2002 के दायरे में लाया गया था।

  • इनिशियल कॉइन ऑफरिंग (ICO): एक धन एकत्रित करने की विधि, जिसमें कोई ब्लॉकचेन परियोजना लॉन्च से पूर्व या दौरान निवेशकों को (आमतौर पर BTC/ETH/फिएट के बदले) नए जारी किए गए क्रिप्टो कॉइन बेचती है।
  • इनिशियल टोकन ऑफरिंग (ITO): एक धन एकत्रित करने की विधि, जिसमें कोई परियोजना डिजिटल टोकन (यूटिलिटी/गवर्नेंस/एसेट-लिंक्ड) बेचती है, जो उसके इकोसिस्टम के भीतर पहुँच/अधिकार प्रदान करते हैं और सामान्यतः किसी मौजूदा ब्लॉकचेन पर जारी किए जाते हैं।

क्रिप्टो दिशा-निर्देशों को अद्यतन करने की आवश्यकता

  • मनी लॉण्ड्रिंग और आतंक वित्तपोषण का बढ़ता जोखिम: गोपनीयता, सीमा-पार लेन-देन के लिए क्रिप्टोकरेंसी के बढ़ते उपयोग से मनी लॉण्ड्रिंग, आतंकी वित्तपोषण और प्रसार को लेकर चिंताएँ बढ़ीं हैं ।
  • तेजी से विकसित होते क्षेत्र में नियामक अंतराल: ‘पीयर-टू-पीयर’ लेन-देन, अनहोस्टेड वॉलेट और ऑफशोर एक्सचेंज जैसी VDA गतिविधियों के विस्तार से मौजूदा ढाँचे में निगरानी तथा प्रवर्तन के अंतराल उत्पन्न हुए।
  • FATF सिफारिशों के साथ संरेखण: FATF के AML/CFT मानकों, उन्नत KYC मानदंडों, रिपोर्टिंग दायित्वों और ‘ट्रैवल रूल’ के अनुरूप भारत के क्रिप्टो नियामक तंत्र को संरेखित करने हेतु यह अद्यतन आवश्यक था।
  • PMLA में शामिल होने के बाद प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करना: वर्ष 2023 में VDA सेवा प्रदाताओं को PMLA के अंतर्गत रिपोर्टिंग एंटिटी घोषित किए जाने के बाद, एकरूप अनुपालन और प्रभावी पर्यवेक्षण सुनिश्चित करने हेतु विस्तृत परिचालन दिशा-निर्देश आवश्यक थे।

वित्तीय आसूचना इकाई-भारत (FIU-IND) के बारे में

  • स्वरूप: FIU-IND संदिग्ध लेन-देन से संबंधित वित्तीय खुफिया जानकारी का प्रबंधन करने वाली केंद्रीय राष्ट्रीय एजेंसी है।
    • FIU भारत में क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों के लिए एकल-बिंदु नियामक के रूप में कार्य करता है।
    • यह घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनी लॉण्ड्रिंग और आतंक वित्तपोषण से निपटने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • स्थापना: नवंबर 2004 में भारत सरकार के एक आदेश द्वारा इसकी स्थापना की गई थी (वैधानिक निकाय नहीं)।
  • शासन व्यवस्था: यह एक स्वतंत्र निकाय के रूप में कार्य करता है और सीधे केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक खुफिया परिषद (EIC) को रिपोर्ट करता है।

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