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भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता

Lokesh Pal January 28, 2026 03:05 18 0

संदर्भ

भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने द्विपक्षीय व्यापार को प्रोत्साहित करने तथा आर्थिक संबंधों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते के लिए आधिकारिक-स्तर की वार्ताओं को पूर्ण कर लिया है।

भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता

  • भारत–EU मुक्त व्यापार समझौता भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच एक व्यापक व्यापार समझौता है, जिसका उद्देश्य शुल्कों में कमी करना तथा द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना है।
  • इतिहास: वार्ताएँ कई दशक पूर्व प्रारंभ हुई थीं (प्रारंभिक वार्ता 2007 में, वर्ष 2022 में पुनः आरंभ) और दीर्घकाल से लंबित चर्चाओं के पश्चात् 27 जनवरी, 2026 को इन्हें अंतिम रूप दिया गया।
  • इसमें क्या शामिल है: यह भारत और यूरोपीय संघ के बीच वस्तुओं, सेवाओं, निवेश, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR), सततता तथा मानकों से संबंधित प्रावधानों को सम्मिलित करता है।
  • अगले चरण: यद्यपि वार्ताएँ और राजनीतिक सहमति पूर्ण हो चुकी हैं, तथापि इस समझौते के पूर्ण रूप से प्रभावी होने से पूर्व, भारत की संसद तथा यूरोपीय संसद एवं यूरोपीय परिषद द्वारा औपचारिक अनुसमर्थन आवश्यक है।
  • इस समझौते के साथ ही यूरोपीय संघ भारत का 22वाँ FTA भागीदार बन गया है।

भारत–EU, FTA का महत्त्व 

  • भारत के लिए अभूतपूर्व बाजार पहुँच: व्यापार मूल्य के आधार पर भारत के 99% से अधिक निर्यातों को EU बाजार में अधिमान्य (शून्य या रियायती शुल्क) प्रवेश प्राप्त होगा।
  • रणनीतिक महत्त्व: इस FTA को वैश्विक व्यापार विविधीकरण में इसके महत्त्व को रेखांकित करते हुए नेताओं द्वारा प्रायः मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा जाता है।
    • यह समझौता लगभग 2 अरब लोगों के बाजार और वैश्विक GDP के लगभग 25% को आच्छादित करता है, जिससे यह एक प्रमुख वैश्विक व्यापार समझौता बन जाता है।
  • श्रम-प्रधान एवं निर्यात-उन्मुख क्षेत्रों को प्रोत्साहन: वस्त्र, परिधान, चमड़ा, जूते, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, हस्तशिल्प तथा इंजीनियरिंग वस्तुओं जैसे क्षेत्रों में समझौते के लागू होते ही शुल्क शून्य हो जाएगा।
  • कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में अवसर: चाय, कॉफी, मसाले, ताजे फल-सब्जियाँ तथा प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के लिए बेहतर बाजार पहुँच, जिससे ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ होगी और वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की स्थिति मजबूत होगी।
  • ऑटोमोबाइल क्षेत्र: पारस्परिक, कोटा-आधारित उदारीकरण के तहत EU वाहन निर्माताओं को भारत में उच्च-स्तरीय बाजार पहुँच मिलेगी, जबकि भविष्य मेंमेक इन इंडिया” के अंतर्गत भारत में उत्पादन तथा EU को निर्यात को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
  • सेवाएँ एवं गतिशीलता ढाँचा: सेवाओं में महत्त्वाकांक्षी प्रतिबद्धताएँ (भारत को IT/ITeS, व्यावसायिक सेवाओं, शिक्षा आदि में EU के 144 उप-क्षेत्रों तक पहुँच; EU को भारत के 102 उप-क्षेत्रों तक पहुँच)।
  • व्यापार विविधीकरण: वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं (जिसमें संभावित अमेरिकी शुल्क नीतियाँ भी शामिल हैं) के बीच यह FTA भारत के निर्यात बाजारों में विविधता लाता है, किसी एक साझेदार पर अत्यधिक निर्भरता को कम करता है तथा सुदृढ़ आपूर्ति शृंखलाओं का निर्माण करता है।
  • विकसित भारत @2047” के लिए समर्थन: समावेशी विकास, नवाचार, रोजगार सृजन तथा विनिर्माण एवं सेवाओं में प्रतिस्पर्द्धात्मकता के माध्यम से वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना के अनुरूप।

भारत–EU शिखर सम्मेलन के प्रमुख परिणाम

  • 16वाँ भारत–EU शिखर सम्मेलन जनवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित किया गया।
  • इसकी सह-अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन तथा यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने की।
  • भारत–EU मुक्त व्यापार समझौता (FTA): भारत–EU FTA को अंतिम रूप दिया गया।
  • टुवर्ड्स 2030’ को अपनाना: ‘टुवर्ड्स 2030: ए फॉरवर्ड-लुकिंग कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक एजेंडा’ को शिखर सम्मेलन में अनुमोदित किया गया, जिसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक सहयोग को सुदृढ़ करना है।
    • यह चार स्तंभों पर केंद्रित है—समृद्धि और सततता, प्रौद्योगिकी और नवाचार, सुरक्षा तथा रक्षा, संपर्कता एवं वैश्विक मुद्दे—साथ ही जन-से-जन संपर्क जैसे सहायक तत्त्व।
    • यह पूर्ववर्ती 2025 रोडमैप का स्थान लेता है और जटिल भू-राजनीतिक वातावरण में गहन एवं समन्वित कार्रवाई का लक्ष्य रखता है।
  • भारत–EU सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर: यह एक ऐतिहासिक ढाँचा है, जो समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग/प्रौद्योगिकी, साइबर एवं हाइब्रिड खतरों, आतंकवाद-रोधी प्रयासों, अंतरिक्ष, अप्रसार तथा संयुक्त पहल/अभ्यासों में घनिष्ठ सहयोग को सक्षम बनाता है।
  • गतिशीलता पर व्यापक सहयोग ढाँचा: यह EU स्तर पर भारत के साथ हस्ताक्षरित पहला गतिशीलता-संबंधी समझौता है, जिसका उद्देश्य कुशल पेशेवरों की संरचित आवाजाही को सुगम बनाना है।
  • ग्रीन हाइड्रोजन टास्क फोर्स: ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, प्रौद्योगिकी, मानकों तथा आपूर्ति शृंखलाओं में सहयोग को गहन करने हेतु स्थापित।
  • आपदा जोखिम प्रबंधन एवं आपात प्रतिक्रिया: भारत के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और EU के DG-ECHO के बीच प्राकृतिक आपदाओं के लिए बेहतर तैयारी, समन्वय तथा प्रतिक्रिया हेतु व्यवस्था।
  • वित्तीय/नियामक सहयोग: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और यूरोपीय सिक्योरिटीज एंड मार्केट्स अथॉरिटी (ESMA) के बीच क्लियरिंग हाउस की मान्यता तथा निकट सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन।
  • भारत–EU वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकीय सहयोग समझौते का नवीनीकरण: वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकीय सहयोग समझौते को वर्ष 2025–2030 की अवधि के लिए नवीनीकृत किया गया।

भारत–यूरोपीय संघ संबंध

  • भारत–EU संबंध लोकतंत्र, विधि के शासन, बहुपक्षवाद तथा नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था जैसे साझा मूल्यों पर आधारित एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी है।
  • यह व्यापार, निवेश, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, जलवायु कार्रवाई आदि क्षेत्रों में बहुआयामी सहभागिता में विकसित हो चुका है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: भारत ने वर्ष 1962 में यूरोपीय आर्थिक समुदाय (EU का पूर्ववर्ती) के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए, जो प्रारंभिक संबंधों में से एक था।
    • वर्ष 1993: संयुक्त राजनीतिक वक्तव्य पर हस्ताक्षर।
    • वर्ष 2000: लिस्बन में प्रथम भारत–EU शिखर सम्मेलन, जिससे नियमित शिखर-स्तरीय संवाद का शुभारंभ हुआ।
    • वर्ष 2004: हेग शिखर सम्मेलन में रणनीतिक साझेदारी का दर्जा।
    • वर्ष 2004 के बाद जनवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित 16वें ऐतिहासिक भारत–EU शिखर सम्मेलन से पूर्व 15 शिखर सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं।
  • वर्ष 2020 के बाद भू-राजनीतिक परिवर्तनों, आपूर्ति-शृंखला विविधीकरण तथा इंडो-पैसिफिक फोकस के कारण यह संबंध उल्लेखनीय रूप से गहरे हुए हैं।
  • प्रमुख संस्थागत तंत्र
    • भारत–EU व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (TTC): फरवरी 2023 में प्रारंभ (अप्रैल 2022 में घोषित); व्यापार, विश्वसनीय प्रौद्योगिकी, डिजिटल, हरित प्रौद्योगिकी और सुरक्षा पर समन्वय।
    • कनेक्टिविटी साझेदारी: वर्ष 2021 में प्रारंभ; परिवहन, डिजिटल, ऊर्जा और जन-से-जन संपर्क को समाहित करती है।
    • भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC): सितंबर 2023 में भागीदारों के साथ घोषित।

आर्थिक एवं व्यापारिक संबंध

  • EU भारत के प्रमुख व्यापार भागीदारों में से एक है; वर्ष 2024-25 में EU के साथ वस्तु व्यापार का मूल्य 136.53 अरब अमेरिकी डॉलर था (निर्यात 75.85 अरब डॉलर और आयात 60.68 अरब डॉलर)।
  • EU बाजार भारत के कुल निर्यात का लगभग 17% तथा भारत को EU के कुल विदेशी निर्यात का लगभग 9% हिस्सा है।
  • वृद्धि: पिछले एक दशक में लगभग 90% की वृद्धि।
  • निवेश: EU भारत में प्रमुख विदेशी निवेशक है (FDI स्टॉक वर्ष 2023 में €140.1 अरब, जो वर्ष 2019 में €82.3 अरब था); वर्तमान में 6,000 से अधिक यूरोपीय कंपनियाँ भारत में कार्यरत हैं।

यूरोपीय संघ (EU) के बारे में

  • यूरोपीय संघ 27 यूरोपीय देशों का एक आर्थिक और राजनीतिक संघ है।
  • ये देश शांति, स्थिरता, समृद्धि और साझा मूल्यों को बढ़ावा देने हेतु मिलकर कार्य करते हैं।
  • स्थापना: वर्ष 1951 में यूरोपीय कोयला और इस्पात समुदाय के रूप में 6 संस्थापक सदस्यों के साथ प्रारंभ; रोम संधि (1957) और लिस्बन संधि (2009) जैसे समझौतों के माध्यम से आधुनिक EU के रूप में विकसित।
  • सदस्य देश: 27 देश (यूनाइटेड किंगडम वर्ष 2020 में ब्रेक्जिट के माध्यम से बाहर हुआ)।
  • मुद्रा: यूरो (€) यूरोजोन के 21 सदस्य देशों में प्रयुक्त होती है (नवीनतम: बुल्गारिया ने 1 जनवरी, 2026 को यूरो अपनाया)।
  • प्रमुख संस्थाएँ: EU की एक विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय संरचना है, जिसमें साझा निर्णय-निर्माण होता है।
    • यूरोपीय आयोग: कार्यकारी संस्था; कानून प्रस्तावित करता है, EU नियमों को लागू करता है, बजट का प्रबंधन करता है।
    • यूरोपीय संसद: नागरिकों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित; सह-विधायी भूमिका और बजट अनुमोदन।
    • यूरोपीय परिषद: राष्ट्राध्यक्ष/सरकार प्रमुख समग्र राजनीतिक दिशा और प्राथमिकताएँ निर्धारित करते हैं।
    • यूरोपीय संघ का न्यायालय: EU कानून के एकरूप अनुप्रयोग को सुनिश्चित करता है।
    • यूरोपीय केंद्रीय बैंक: यूरो और यूरोजोन की मौद्रिक नीति का प्रबंधन करता है।

निष्कर्ष

समग्र रूप से, भारत–EU साझेदारी एक अग्रदर्शी, व्यापक गठबंधन में विकसित हो चुकी है। 16वाँ भारत–EU शिखर सम्मेलन और FTA का निष्कर्ष एक ऐतिहासिक छलांग का प्रतिनिधित्व करता है, जो भू-राजनीतिक परिवर्तनों के बीच दोनों को एक-दूसरे की वैश्विक रणनीतियों के प्रमुख स्तंभ के रूप में स्थापित करता है।

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