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Lokesh Pal
February 28, 2026 03:00
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भारतीय प्रधानमंत्री ने इजरायल की यात्रा के दौरान भारत की “वेस्ट एशिया नीति” को फिर से स्पष्ट किया, जिसमें रणनीतिक स्वतंत्रता, रक्षा सहयोग में निरंतरता, और प्रौद्योगिकी व सुरक्षा साझेदारी को गहरा करने पर जोर दिया गया।
भारत का इजरायल के साथ संपर्क केवल कूटनीतिक नहीं है; यह भारत के वैश्विक शक्ति के रूप में उभरने के लिए एक मौलिक आवश्यकता है।
भारत–इजरायल संबंध पारस्परिक आवश्यकता पर आधारित एक “रणनीतिक धुरी” के रूप में परिपक्व हो चुके हैं। वर्ष 2026 की यात्रा यह सिद्ध करती है कि नई दिल्ली के लिए “विकसित भारत” का मार्ग इजरायल के साथ एक गहरी और व्यावहारिक साझेदारी से होकर गुजरता है, जिसमें उच्च-प्रौद्योगिकी सह-निर्माण तथा क्षेत्रीय स्थिरता के बीच संतुलन स्थापित किया जाता है।
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