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भारत-मलेशिया संबंध

Lokesh Pal February 10, 2026 05:04 5 0

संदर्भ

हाल ही में भारतीय प्रधानमंत्री ने मलेशिया का दौरा (7-8 फरवरी, 2026) किया, और भारत-मलेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी (2024) की पुष्टि की।

संबंधित तथ्य

प्रधानमंत्री मोदी की मलेशिया की यह तीसरी यात्रा थी और अगस्त 2024 में भारत-मलेशिया द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिए जाने के बाद यह उनकी पहली यात्रा थी।

यात्रा के प्रमुख परिणाम

  • राजनीतिक ढाँचा और बहुपक्षीय सामंजस्य
    • संबंधों में प्रगाढ़ता: दोनों नेताओं ने वर्ष 2024 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी (CSP) की पुष्टि करते हुए इस बात पर जोर दिया कि संबंध पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़कर उच्च-तकनीकी सामंजस्य और रणनीतिक विश्वास पर आधारित साझेदारी की ओर अग्रसर हो गए हैं।
    • आसियान की केंद्रीयता और एक्ट ईस्ट नीति: भारतीय प्रधानमंत्री ने वर्ष 2025 में दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) की सफल अध्यक्षता के लिए मलेशिया की सराहना की।
      • दोनों देशों ने एक स्वतंत्र और खुले समुद्री क्षेत्र को सुनिश्चित करने के लिए भारत की हिंद-प्रशांत महासागर पहल (IPOI) के साथ आसियान आउटलुक ऑन द इंडो-पैसिफिक  (AOIP) को संरेखित करने का संकल्प लिया।

    • ब्रिक्स और वैश्विक शासन: एक महत्त्वपूर्ण परिणाम ब्रिक्स के भागीदार देश के रूप में मलेशिया के लिए भारत का समर्थन रहा
      • मलेशिया ने भारत की वर्ष 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता का स्वागत किया और दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि अधिक प्रतिनिधि और न्यायसंगत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए ऐसे मंच आवश्यक हैं।
    • संयुक्त राष्ट्र सुधार: मलेशिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की माँग के प्रति अपने निरंतर समर्थन को दोहराया।
      • इसके अतिरिक्त, दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा सहयोग पर समझौता ज्ञापन का नवीनीकरण किया।
  • आर्थिक, डिजिटल और वित्तीय संपर्क
    • फिनटेक एकीकरण (UPI-PayNet): डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए, NPCI इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) और पेनेट मलेशिया ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को मलेशिया के ड्यूटनाउ (DuitNow) से जोड़ने के लिए एक समझौता किया है।
      • इससे पर्यटकों, छात्रों और व्यवसायों के लिए वास्तविक समय में, कम लागत पर सीमा पार धन प्रेषण और क्यूआर-आधारित भुगतान संभव हो सकेंगे।
    • स्थानीय मुद्रा निपटान ढाँचा: अमेरिकी डॉलर जैसी तृतीय-पक्ष मुद्राओं पर निर्भरता कम करने के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और बैंक नेगारा मलेशिया (BNM) को भारतीय रुपये (INR) और मलेशियाई रिंगिट (MYR) में द्विपक्षीय व्यापार की बिलिंग और निपटान की प्रक्रिया को शीघ्रता से लागू करने का निर्देश दिया गया है।
    • मलेशिया-भारत डिजिटल परिषद (MIDC): यह नवगठित निकाय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए सर्वोच्च रणनीतिक तंत्र के रूप में कार्य करेगा।
  • व्यापार सुगमता और औद्योगिक सहयोग
    • व्यापार समझौतों की समीक्षा: दोनों नेताओं ने आधुनिक व्यापार प्रथाओं के अनुरूप और अधिक सुगम बनाने के लिए आसियान-भारत व्यापार समझौते (AITIGA) की समीक्षा के महत्त्व पर बल दिया।
      • उन्होंने मलेशिया-भारत व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (MICECA) के अधिकतम उपयोग को भी प्रोत्साहित किया।

    • सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला: एक सुदृढ़ सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला के निर्माण के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसमें कार्यबल विकास और तकनीकी नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास ग्लोबल और मलेशिया की एडवांस्ड सेमीकंडक्टर एकेडमी के बीच एक ऐतिहासिक साझेदारी शामिल है।
    • खाद्य सुरक्षा हेतु सतत् ताड़ तेल सहयोग: भारत को एक प्रमुख उपभोक्ता के रूप में स्वीकार करते हुए, मलेशिया ने निरंतर ताड़ के तेल का एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता बने रहने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
      • दोनों पक्ष मूल्य वर्द्धित ताड़ उत्पादों पर सहयोग करने और मुख्य खाद्य पदार्थों के लिए सुदृढ़ आपूर्ति शृंखला स्थापित करने पर सहमत हुए।
  • रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग
    • Su-30 फोरम: Su-30 फोरम के लिए कार्यक्षेत्र को अंतिम रूप दिया गया, जो भारतीय वायु सेना और रॉयल मलेशियाई वायु सेना को अपने साझा सुखोई-30 लड़ाकू जेट बेड़े के रखरखाव, पुर्जों और उन्नयन पर सहयोग करने के लिए एक समर्पित मंच प्रदान करता है।
    • आतंकवाद विरोधी पहल: दोनों देशों ने आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टालरेंस’ की नीति पर सहमति व्यक्त की।
      • उन्होंने क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी तैयारियों को बढ़ाने के लिए वर्ष 2026 में आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक प्लस (ADMM-Plus) ढाँचे के तहत एक टेबल-टॉप एक्सरसाइज (TTX) की सह-अध्यक्षता करने पर सहमति व्यक्त की।
    • शासन और भ्रष्टाचार विरोधी: भ्रष्टाचार से निपटने और रोकथाम में सहयोग के लिए एक नए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे भारत के केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) और मलेशियाई भ्रष्टाचार विरोधी आयोग (MACC) के बीच बेहतर समन्वय को बढ़ावा मिलेगा।
    • समुद्री सुरक्षा: रणनीतिक मामलों के कार्य समूह (SAWG) की स्थापना और पहले मलेशिया-भारत सुरक्षा वार्ता का मुख्य उद्देश्य खुफिया जानकारी साझा करना और संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (1982) के अनुरूप नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना होगा।
  • सामाजिक कल्याण, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक संबंध
    • श्रम एवं सामाजिक सुरक्षा: मलेशिया में कार्यरत भारतीय श्रमिकों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा की रक्षा के लिए भारत के कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) और मलेशिया के सामाजिक सुरक्षा संगठन (PERKESO) के बीच एक सहयोग ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
    • स्वास्थ्य सेवा एवं पारंपरिक चिकित्सा: नेताओं ने मलेशियाई अस्पतालों में पारंपरिक भारतीय चिकित्सा (TIM) विशेषज्ञों की तैनाती पर सहमति व्यक्त की।
      • इसके अलावा, होम्योपैथी अनुसंधान के लिए केंद्रीय परिषद (CCRH) और साइबरजाया विश्वविद्यालय के बीच एक समझौता ज्ञापन संयुक्त अनुसंधान और अकादमिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा।
    • शिक्षा एवं कौशल: भारत ने मलेशियाई छात्रों को “स्टडी इन इंडिया” कार्यक्रम का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया।
      • दोनों देशों ने छात्रों के कौशल को उच्च-तकनीकी उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के लिए तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (TVET) पर एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए।
    • तिरुवल्लुवर केंद्र और छात्रवृत्तियाँ: सभ्यतागत संबंधों का लाभ उठाने के लिए, यूनिवर्सिटी मलाया में एक तिरुवल्लुवर केंद्र स्थापित किया गया, साथ ही भारत में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक मलेशियाई छात्रों के लिए विशेष तिरुवल्लुवर छात्रवृत्तियाँ शुरू की गईं।
    • पर्यावरण प्रतिबद्धता: मलेशिया ने भारत के नेतृत्व वाले इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) के फ्रेमवर्क समझौते की आधिकारिक रूप से पुष्टि की, जिससे वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के प्रति साझा प्रतिबद्धता को बल मिला।

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मलेशिया के बारे में

  • भू-राजनीति और समुद्री रणनीति: मलेशिया, मलक्का जलडमरूमध्य का एक प्रमुख तटीय देश है, जो विश्व का सबसे व्यस्त समुद्री परिवहन मार्ग है और जहाँ से भारत का लगभग 60% पूर्वी व्यापार गुजरता है।
    • यह आसियान का संस्थापक सदस्य है और वर्ष 2025 में आसियान की अध्यक्षता की, जिससे यह भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का एक प्रमुख स्तंभ बन जाता है।
  • अद्वितीय राजनीतिक प्रणाली: यह एक संघीय संवैधानिक राजतंत्र है, जिसमें एक अनूठी चक्रीय राजतंत्र प्रणाली है, जहाँ राजा (यांग दी-पर्टुआन अगोंग) का चुनाव नौ वंशानुगत मलय शासकों में से हर पाँच वर्ष में होता है।
    • सरकार वेस्टमिंस्टर संसदीय मॉडल का अनुसरण करती है।
  • भौगोलिक विभाजन: दक्षिण चीन सागर द्वारा देश को विशिष्ट रूप से प्रायद्वीपीय मलेशिया (पश्चिम) और पूर्वी मलेशिया (बोर्नियो द्वीप पर) में विभाजित किया गया है।
    • पश्चिम में इसकी सीमा थाईलैंड और सिंगापुर से लगती है, जबकि पूर्व में इंडोनेशिया और ब्रुनेई से।
  • जलवायु एवं भू-भाग: मलेशिया में भूमध्यरेखीय जलवायु पाई जाती है, जिसमें उच्च आर्द्रता और नियमित वर्षा होती है।
    • यह दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे ऊँची चोटी माउंट किनाबालू (सबाह) और लेंगगोंग घाटी का आवास है, जहाँ अफ्रीका के बाहर पाए गए सबसे प्राचीन मानव अवशेष मौजूद हैं।
  • आर्थिक कारक: मलेशिया निरंतर ताड़ के तेल के उत्पादन में वैश्विक स्तर पर अग्रणी है और वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला का एक महत्त्वपूर्ण केंद्र है, जो वैश्विक बैक-एंड विनिर्माण (परीक्षण और पैकेजिंग) का लगभग 13% हिस्सा है।
  • बुमिपुतेरा और प्रवासी: यहाँ की आबादी बहुजातीय है, जिसमें बुमिपुतेरा (नृजातीय मलय और स्वदेशी समूह) लगभग 70% हैं।
    • मलेशिया में लगभग 29 लाख की संख्या वाला विश्व का तीसरा सबसे बड़ा भारतीय प्रवासी समुदाय और दूसरा सबसे बड़ा PIO समुदाय उपस्थित है।

भारत-मलेशिया संबंधों के बारे में

  • ऐतिहासिक और सभ्यतागत आधार: भारत और मलेशिया के मध्य संबंध हिंद महासागर में दो सहस्राब्दियों से अधिक के साझा समुद्री इतिहास पर आधारित हैं।
    • प्राचीन समुद्री नेटवर्क: व्यापार, धर्म और भाषायी आदान-प्रदान ने सभ्यताओं के मध्य निरंतर और गहन संपर्क को बढ़ावा दिया।
      • हिंदू-बौद्ध परंपराओं और संस्कृत का प्रभाव मलय प्रायद्वीप के सांस्कृतिक तथा ऐतिहासिक ताने-बाने में गहराई से समाया हुआ है।
    • चोल विरासत: 9वीं और 13वीं शताब्दी के बीच, चोल साम्राज्य ने एक महत्त्वपूर्ण सेतु का काम किया।
      • राजराजा चोल प्रथम और राजेंद्र चोल प्रथम जैसे सम्राटों के शासनकाल में, इस राजवंश ने विशाल समुद्री मार्ग स्थापित किए और वर्तमान मलेशिया (श्रीविजय और केदाह/कडाराम) के कुछ हिस्सों पर राजनीतिक प्रभाव स्थापित किया।
      • इस युग ने एक स्थायी सांस्कृतिक छाप छोड़ी, जो मलेशिया की स्थापत्य शैली और शाही उपाधियों में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
    • साहित्यिक रूपांतरण: रामायण साझा विरासत का प्रमाण है।
      • मलय साहित्यिक रूपांतरण, हिकायत सेरी रामा, संस्कृत महाकाव्य को स्थानीय भाषा और परंपरा के अनुरूप पुनर्सृजित करता है, साथ ही इसके धर्म के मूल आदर्शों को भी संरक्षित रखता है।
      • श्री वीर हनुमान मंदिर जैसे सांस्कृतिक स्थल इस स्थापत्य और कथात्मक मिश्रण का और भी बेहतर उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
  • राजनीतिक और रणनीतिक अभिसरण: भारत और मलेशिया ऐतिहासिक मित्र से आधुनिक रणनीतिक साझेदार बन गए हैं, विशेष रूप से एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत।
  • व्यापक रणनीतिक साझेदारी (CSP): अगस्त 2024 में उन्नत हुई यह साझेदारी गहरे राजनीतिक विश्वास और संस्थागत सहयोग की ओर एक परिवर्तन का संकेत देती है।
    • बहुपक्षीय गठबंधन: फरवरी 2026 की यात्रा जैसी उच्च स्तरीय वार्ताएँ वैश्विक शासन के लिए एक साझा दृष्टिकोण को मजबूत करती हैं।
      • मलेशिया ने लगातार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की वकालत की है और भारत की वर्ष 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता का समर्थन किया है।
    • क्षेत्रीय सुरक्षा: दोनों देश आसियान की केंद्रीयता पर जोर देते हैं। मलक्का जलडमरूमध्य पर मलेशिया की रणनीतिक स्थिति इसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की समुद्री संपर्क और सुरक्षा रणनीति में एक महत्त्वपूर्ण कड़ी बनाती है।
  • व्यापार और आर्थिक संतुलन: मजबूत संस्थागत ढाँचों द्वारा संचालित द्विपक्षीय संबंधों का आधार आज भी अर्थशास्त्र ही है।
    • व्यापार परिदृश्य (2024-25): कुल द्विपक्षीय व्यापार 19.86 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया। इसमें भारत का 7.32 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात (खनिज ईंधन, इंजीनियरिंग सामान, जैविक रसायन और बीफ) और 12.54 अरब अमेरिकी डॉलर का आयात (ताड़ का तेल, विद्युत मशीनरी और लकड़ी) शामिल है।
    • निवेश और वित्त: वर्ष 2000 से वर्ष 2025 के बीच, भारत में मलेशिया का संचयी निवेश लगभग 1.27 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
    • मुद्रा और फिनटेक नवाचार: जुलाई 2022 में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि ने भारतीय रुपये (INR) में व्यापार निपटान की सुविधा प्रदान की। हाल ही में, वर्ष 2026 में, भारत के यूपीआई को मलेशिया के पेनेट (DuitNow) से जोड़ने से सीमा पार वित्तीय लेन-देन में क्रांतिकारी परिवर्तन आया है।
    • नियामक ढाँचा: व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) और आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौते (AITIGA) के माध्यम से व्यापार को सुगम बनाया जाता है, जिनमें से AITIGA की वर्तमान में बाजार पहुँच को और आसान बनाने के लिए समीक्षा की जा रही है।
  • रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग: सुरक्षा साझेदारी क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक परिष्कृत ढाँचे के रूप में विकसित हो चुकी है।
    • आधारभूत समझौता ज्ञापन: वर्ष 1993 का रक्षा सहयोग समझौता ज्ञापन, जिसमें जुलाई 2023 में महत्त्वपूर्ण संशोधन किए गए, व्यापक संयुक्त उद्यमों और खरीद परियोजनाओं को सक्षम बनाता है।
    • सैन्य अंतरसंचालनीयता: नियमित संयुक्त अभ्यासों के माध्यम से रणनीतिक संबंध सुदृढ़ होते हैं:
      • हरिमाऊ शक्ति (सेना)
      • समुद्र लक्ष्मण (नौसेना)
      • उदरा शक्ति (वायु सेना)
    • औद्योगिक सहयोग: कुआलालंपुर में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन, विशेष रूप से साझा सुखोई-30 प्लेटफॉर्मों के संबंध में, एयरोस्पेस और रखरखाव सहयोग के एक नए युग का प्रतीक है।
  • प्रवासी और जन-जन संबंध: दोनों देशों के बीच मानवीय संबंध विश्व के सबसे मजबूत संबंधों में से एक है।
    • जनसांख्यिकी: मलेशिया में लगभग 29 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो विश्व स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा भारतीय मूल का समुदाय है।
      • यह मुख्य रूप से तमिल भाषी समुदाय मलेशिया के सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
    • सांस्कृतिक कूटनीति: कुआलालंपुर स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारतीय सांस्कृतिक केंद्र (NSCBICC) भारतीय शास्त्रीय कला, योग और हिंदी भाषा की शिक्षा का केंद्र है।
    • सामाजिक और कांसुलर सहायता: इस समुदाय की बेहतर सेवा करने और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए, भारत ने वर्ष 2026 में कोटा किनाबालू, सबाह में एक नए वाणिज्य दूतावास की घोषणा की।
    • चुनौतियों का समाधान: दोनों सरकारें अवैध प्रवासन, मानव तस्करी और वर्ष 2026 के ईएसआईसी-पेरकेसो सामाजिक सुरक्षा समझौते के तहत श्रम अधिकारों की सुरक्षा सहित गैर-पारंपरिक सुरक्षा मुद्दों को हल करने में लगी हुई हैं।

आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौते (AITIGA) के बारे में

  • संस्थागत उत्पत्ति एवं कार्यक्षेत्र: AITIGA की उत्पत्ति वर्ष 2003 के फ्रेमवर्क समझौते से हुई और यह 1 जनवरी, 2010 को लागू हुआ।
    • महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इसमें केवल भौतिक वस्तुओं का ही समावेश है; सेवाओं और निवेश में व्यापार अलग-अलग समझौतों (जिन पर वर्ष 2014 में हस्ताक्षर किए गए) द्वारा नियंत्रित होता है, जो मिलकर आसियान-भारत मुक्त व्यापार क्षेत्र (AIFTA) का निर्माण करते हैं।
  • आधुनिकीकरण’ अधिदेश (2026): 21वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन के बाद, एक व्यापक समीक्षा चल रही है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2026 के आरंभ से मध्य तक पूरा करना है।
    • इसका उद्देश्य समझौते को आधुनिक और संतुलित’ बनाना है, विशेष रूप से भारत द्वारा RCEP से बाहर निकलने के बाद, AITIGA को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत का प्राथमिक व्यापार माध्यम बनाना।
  • व्यापार विषमता का सुधार: भारत का मुख्य उद्देश्य भारी व्यापार घाटे को कम करना है, जो 8 अरब डॉलर (2010) से बढ़कर 45 अरब डॉलर (2025) से अधिक हो गया है।
    • भारत समान टैरिफ उदारीकरण के लिए प्रयासरत है और चाहता है कि आसियान सदस्य देश कम-से-कम 80% टैरिफ लाइनों के उदारीकरण के लिए भारत की प्रतिबद्धता का समर्थन करें।
  • उत्पाद-विशिष्ट मूल नियम (PSR): भारत सामान्य 35% स्थानीय मूल्यवर्द्धन नियम से हटकर सख्त उत्पाद-विशिष्ट नियमों की ओर बढ़ने के लिए बातचीत कर रहा है।
    • यह एक रणनीतिक कदम है, जिसका उद्देश्य ‘चोरी’ को रोकना है- अर्थात चीनी निर्मित वस्तुओं को आसियान देशों के माध्यम से भारतीय बाजार में शून्य शुल्क पर प्रवेश दिलाने के प्रयास को रोकना।
  • टैरिफ वर्गीकरण और “विशेष उत्पाद”: समझौते में एक स्तरीय प्रणाली का उपयोग किया गया है – सामान्य ट्रैक (0% शुल्क), संवेदनशील ट्रैक (4-5%), और एक बहिष्करण सूची।
    • विशेष रूप से, भारत “विशेष उत्पादों” (कच्चा और परिष्कृत ताड़ का तेल, कॉफी, काली चाय और काली मिर्च) के लिए विशेष संरक्षण बनाए रखता है, जो घरेलू कृषि सुरक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।
  • टैरिफ से परे (गैर-टैरिफ बाधाएँ और डिजिटल): वर्ष 2026 के अद्यतन में जटिल कोटा और तकनीकी मानकों जैसी गैर-टैरिफ बाधाओं (NTB) को हटाने पर जोर दिया गया है।
    • इसके अतिरिक्त, यह लेन-देन लागत को कम करने के लिए स्थानीय मुद्रा निपटान (जैसे- INR-रिंगिट) और ASEAN भुगतान प्रणालियों के साथ सीमा पार UPI लिंकेज जैसे आधुनिक वित्तीय स्तंभों को एकीकृत करता है।

भारत-मलेशिया संबंधों का रणनीतिक महत्त्व

वर्ष 2026 में भारत-मलेशिया संबंधों का महत्त्व पारंपरिक कूटनीति से उच्च तकनीक वाले, सुरक्षा-उन्मुख गठबंधन में परिवर्तन द्वारा परिभाषित किया जाएगा।

  • समुद्री संप्रभुता और हिंद-प्रशांत संतुलन: भूगोल के अनुसार, मलेशिया भारत की “एक्ट ईस्ट” नीति का प्रवेश द्वार है।
    • महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्ग सुरक्षा: मलक्का जलडमरूमध्य की साझा सुरक्षा (जिससे होकर भारत का 60% पूर्वी व्यापार गुजरता है) नौकायन की स्वतंत्रता के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
    • भू-राजनीतिक विश्वास: दक्षिण चीन सागर के निकट कोटा किनाबालू (सबाह) में भारतीय वाणिज्य दूतावास का खुलना रणनीतिक तालमेल और समुद्री क्षेत्र की जागरूकता के एक नए स्तर का प्रतीक है।
    • आसियान की केंद्रीय भूमिका: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए मलेशिया का समर्थन और वर्ष 2025 में आसियान की अध्यक्षता और ब्रिक्स की आकांक्षाओं के लिए भारत का समर्थन क्षेत्रीय स्थिरता में उनकी भूमिका को मजबूत करता है।
  • सिलिकॉन शील्ड’-औद्योगिक परस्पर निर्भरता: इस संबंध का सबसे परिवर्तनकारी स्तंभ सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन का एकीकरण है।
    • आपूर्ति शृंखला लचीलापन: मलेशिया के परिपक्व बैक-एंड इकोसिस्टम (वैश्विक परीक्षण और पैकेजिंग का 13%) और भारत की फ्रंट-एंड डिजाइन प्रतिभा के संयोजन से, दोनों देशों ने भू-राजनीतिक झटकों से होने वाले जोखिम को कम करने के लिए एक “सिलिकॉन शील्ड” का निर्माण किया है।
    • उच्च-तकनीकी तालमेल: मलेशिया की एडवांस्ड सेमीकंडक्टर अकादमी और IIT मद्रास के बीच सहयोग वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करने के लिए विशेषज्ञ कार्यबल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
  • रणनीतिक स्वायत्तता और डॉलर पर निर्भरता में कमी: भारत और मलेशिया पश्चिमी वित्तीय प्रणालियों पर निर्भरता कम करने के लिए वैश्विक दक्षिण के लिए एक अग्रणी मॉडल प्रस्तुत कर रहे हैं।
    • स्थानीय मुद्रा निपटान (LCS): व्यापार निपटान के लिए INR और रिंगिट को बढ़ावा देने से द्विपक्षीय व्यापार को अमेरिकी डॉलर की अस्थिरता से सुरक्षा मिलती है।
    • फिनटेक एकीकरण: UPI और पेनेट (DuitNow) का एकीकरण वास्तविक समय में कम लागत वाले सीमा पार भुगतान को सुगम बनाता है, जिससे लघु एवं मध्यम उद्यमों और प्रतिवर्ष मलेशिया आने वाले 14 लाख भारतीय पर्यटकों को लाभ मिलता है।
  • रक्षा एवं सुरक्षा अभिसरण: यह संबंध ऐतिहासिक मतभेदों से आगे बढ़कर सुरक्षा खतरों के प्रति “शून्य-सहिष्णुता” के रुख की ओर अग्रसर हो चुका है।
    • औद्योगिक सहयोग: चूँकि दोनों देश Su-30 लड़ाकू जेट और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का संचालन करते हैं, इसलिए कुआलालंपुर स्थित HAL का क्षेत्रीय कार्यालय साझा रखरखाव, मरम्मत और नवीनीकरण (MRO) के केंद्र के रूप में कार्य करता है।
    • आतंकवाद विरोधी अभियान: ADMM-Plus विशेषज्ञ कार्य समूह की संयुक्त सह-अध्यक्षता करते हुए, दोनों देशों ने सीमा पार आतंकवाद और समुद्री डकैती से निपटने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने में समन्वय स्थापित किया है।
  • जीवंत सेतु’- सभ्यतागत सौम्य शक्ति: यह संबंध अपनी गहरी मानवीय नींव के कारण भविष्य के लिए अद्वितीय रूप से सुरक्षित है।
    • प्रवासी प्रभाव: मलेशिया में रहने वाले 29 लाख भारतीय मूल के लोग (विश्व स्तर पर तीसरे सबसे बड़े) एक स्थायी आर्थिक और सांस्कृतिक संपर्क सूत्र का काम करते हैं।
    • नॉलेज डिप्लोमेसी: तिरुवल्लुवर केंद्र की स्थापना और आयुर्वेद की साझा मान्यता 2000 वर्षों के इतिहास को आधुनिक संस्थागत सहयोग से जोड़ती है।

भारत-मलेशिया संबंधों में चुनौतियाँ और संघर्ष के बिंदु

हालाँकि यह साझेदारी “गति और गहराई के अभूतपूर्व चरण” में है, फिर भी इसे गहरी जड़ें जमा चुकी ऐतिहासिक समस्याओं और उभरती संरचनात्मक प्रतिस्पर्द्धा से निपटना होगा।

  • राजनीतिक और वैचारिक संघर्ष
    • आंतरिक मामलों की संवेदनशीलता: जम्मू-कश्मीर और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) पर बाहरी टिप्पणियों को लेकर भारत बेहद संवेदनशील बना हुआ है।
      • हालांकि प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने वर्ष 2024-2026 के दौरान कश्मीर को “घरेलू मुद्दा” बताते हुए अधिक व्यावहारिक रुख अपनाया, लेकिन संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों की छिटपुट गूँज राजनयिक तनाव को भड़काने का एक संभावित कारण बनी हुई है।
    • जाकिर नाइक का गतिरोध: मलेशिया में भगोड़े उपदेशक की उपस्थिति एक लगातार बनी रहने वाली “कम तीव्रता वाली” समस्या है।
      • फरवरी 2026 की यात्रा के दौरान हुई चर्चाओं के बावजूद, मलेशिया में तकनीकी कानूनी प्रक्रियाओं और घरेलू राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण प्रत्यर्पण रुका हुआ है।
    • आतंकवाद विरोधी गठबंधन: हालाँकि दोनों देश सीमा पार आतंकवाद की निंदा करते हैं, लेकिन उनकी परिभाषाएँ कभी-कभी भिन्न होती हैं।
      • भारत के सुरक्षा-प्रथम दृष्टिकोण और मलेशिया के मानवाधिकार-केंद्रित कानूनी ढाँचे के बीच की खाई को पाटना एक निरंतर राजनयिक चुनौती है।
  • व्यापार असंतुलन और आर्थिक बाधाएँ
    • 5 अरब अमेरिकी डॉलर का घाटा: भारत को मलेशिया के साथ लगातार व्यापार घाटे का सामना करना पड़ रहा है (वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 5.22 अरब अमेरिकी डॉलर)।
      • भारत गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने और अपने फार्मास्यूटिकल्स और IT सेवाओं के लिए बेहतर बाजार पहुँच प्राप्त करने के लिए AITIGA (आसियान-भारत व्यापार समझौता) की समीक्षा के लिए आक्रामक रूप से प्रयास कर रहा है।
    • ताड़ के तेल पर निर्भरता: भारत मलेशियाई ताड़ के तेल का विश्व का सबसे बड़ा खरीदार है, लेकिन खाद्य तेलों पर राष्ट्रीय मिशन के माध्यम से आत्मनिर्भरता के लिए किए जा रहे प्रयासों से मलेशिया की दीर्घकालिक बाजार हिस्सेदारी खतरे में पड़ रही है।
    • उत्पत्ति के नियम (ROO): भारत “छूट” को लेकर चिंतित है, जहाँ चीनी सामानों को कम टैरिफ का लाभ उठाने के लिए मलेशिया के रास्ते भेजा जाता है, जिसके कारण प्रवर्तन सख्त हो सकता है और वैध व्यापार की गति धीमी पड़ सकती है।
  • सामरिक और भूराजनीतिक भिन्नता
    • चीन का प्रभाव: मलेशिया अपने सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार बीजिंग के साथ “संतुलन” बनाए रखने की रणनीति अपनाता है।
      • भारत के विपरीत, मलेशिया RCEP का सदस्य है और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) में महत्त्वपूर्ण निवेश करता है, यह आसियान की सहमति-आधारित ‘शांत कूटनीति’ और भारत के अधिक मुखर हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण के बीच नीतिगत संतुलन की चुनौती को उजागर करता है।
    • सेमीकंडक्टर प्रतिस्पर्द्धा: हालाँकि सेमीकंडक्टर पर वर्ष 2026 के समझौता ज्ञापन में सहयोग को बढ़ावा दिया गया है, लेकिन दोनों देश मूल रूप से एक ही वैश्विक निवेश पूल के लिए प्रतिस्पर्द्धा कर रहे हैं।
      • भारत की PLI (उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन) योजनाएँ उसी “बैक-एंड” विनिर्माण को आकर्षित करने का लक्ष्य रखती हैं, जिस पर वर्तमान में मलेशिया का दबदबा है।
    • क्वाड बनाम आसियान केंद्रीयता: मलेशिया क्वाड को लेकर सतर्क रहता है, क्योंकि उसे डर है कि यह आसियान केंद्रीयता को कमजोर कर सकता है।
      • भारत के सुरक्षा-केंद्रित दृष्टिकोण और मलेशिया की आर्थिक-केंद्रित तटस्थता के बीच संतुलन बनाए रखना एक महत्त्वपूर्ण कूटनीतिक कार्य बना हुआ है।
  • श्रम एवं मानवीय संबंध संबंधी मुद्दे
    • श्रमिक कल्याण: लगभग 29 लाख भारतीय मूल के लोगों और बढ़ते प्रवासी श्रमिक वर्ग के साथ, “लिविंग ब्रिज” भी विवादों का एक स्रोत है।
      • नैतिक भर्ती, मानव तस्करी और नाविकों की सुरक्षा से संबंधित मुद्दों के लिए निरंतर, उच्च स्तरीय संस्थागत निगरानी की आवश्यकता है।
    • डिजिटल मानक: मलेशिया-भारत डिजिटल परिषद (MIDC) AI और फिनटेक पर काम कर रही है, ऐसे में डेटा संप्रभुता और साइबर सुरक्षा पर विभिन्न राष्ट्रीय मानक पूर्ण डिजिटल एकीकरण में बाधा बन सकते हैं।

आगे की राह

  • आर्थिक परिवर्तन – “वस्तुओं से चिप्स की ओर”: इसका प्राथमिक उद्देश्य ताड़ के तेल पर पारंपरिक निर्भरता से आगे बढ़कर मूल्य-शृंखला एकीकरण की ओर बढ़ना है।
    • सेमीकंडक्टर कॉरिडोर: वर्ष 2026 के समझौता ज्ञापन को क्रियान्वित करते हुए, दोनों देश भारत की फ्रंट-एंड डिजाइन प्रतिभा (इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के माध्यम से) को मलेशिया की असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग (ATP) में बैक-एंड विशेषज्ञता से जोड़ेंगे।
    • डिजिटल वित्तीय एकीकरण: मलेशिया में फरवरी 2026 में UPI के लॉन्च के बाद, अगला कदम UPI-पेनेट लिंकेज का विस्तार करके इसमें छोटे पैमाने के व्यापार और वास्तविक समय में B2B प्रेषण को शामिल करना है, जिससे सीमा पार व्यापार घरेलू लेन-देन की तरह ही सुगम हो जाएगा।
    • AITIGA समीक्षा: दोनों देशों ने व्यापार असंतुलन को दूर करने और “उत्पत्ति के नियमों” को आधुनिक बनाने के लिए वर्ष के अंत तक आसियान-भारत व्यापार समझौते (AITIGA) की समीक्षा को अंतिम रूप देने का संकल्प लिया है।
  • रणनीतिक एवं सुरक्षा संरचना: यह साझेदारी अब मलक्का जलडमरूमध्य को एक साझा सुरक्षा जिम्मेदारी के रूप में देखती है।
    • समुद्री क्षेत्र जागरूकता (MDA): समुद्री डकैती और गैर-पारंपरिक खतरों से निपटने के लिए व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पर वास्तविक समय के डेटा साझाकरण को संस्थागत रूप देना।
    • रक्षा औद्योगिक केंद्र: संयुक्त अभ्यासों से संयुक्त उत्पादन की ओर अग्रसर होना। HAL का क्षेत्रीय कार्यालय Su-30 लड़ाकू जेट और डॉर्नियर विमान जैसे साझा प्लेटफॉर्मों के लिए एक क्षेत्रीय रखरखाव, मरम्मत और नवीनीकरण (MRO) केंद्र के विकास का नेतृत्व करेगा।
    • आतंकवाद विरोधी सह-अध्यक्षता: सीमा पार आतंकवाद के प्रति “शून्य-सहिष्णुता” की क्षेत्रीय प्रतिक्रिया को मजबूत करने के लिए, मलेशिया वर्ष 2026 में भारत के साथ सह-अध्यक्षता में ADMM-प्लस विशेषज्ञ कार्य समूह की तालिका-शीर्ष अभ्यास की मेजबानी करेगा।
  • संस्थागत एवं सांस्कृतिक आधार: राजनीतिक परिवर्तनों के बावजूद दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए “लिविंग ब्रिज” को संस्थागत रूप दिया जा रहा है।
    • वाणिज्य दूतावास की उपस्थिति: जोहोर बह्रू (Johor Bahru) में वाणिज्य दूतावास का उद्घाटन और सबाह में प्रस्तावित कार्यालय 30 लाख से अधिक प्रवासी भारतीयों की सेवा करेगा और समुद्री व्यापार को बढ़ावा देगा।
    • सामाजिक सुरक्षा समझौता: मलेशिया में भारतीय कामगारों के लिए कल्याणकारी संरक्षण प्रदान करने और श्रम कल्याण और नैतिक भर्ती से संबंधित लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को दूर करने के लिए ESIC-PERKESO समझौते को अंतिम रूप देना।
    • नॉलेज डिप्लोमेसी: यूनिवर्सिटी मलाया में तिरुवल्लुवर केंद्र की स्थापना और हरित ऊर्जा और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों के लिए विशेष प्रतिभा समूह बनाने हेतु IIT मद्रास-मलेशिया सहयोग का विस्तार करना।
  • भू-राजनीतिक समन्वय
    • ब्रिक्स और आसियान: भारत, वर्ष 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान मलेशिया को ब्रिक्स की पूर्ण सदस्यता दिलाने में सक्रिय रूप से सहयोग करेगा, जबकि मलेशिया संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सीट के लिए लगातार प्रयास करता रहेगा।
    • हिंद-प्रशांत समन्वय: आसियान की केंद्रीयता का सम्मान करने वाली नियम-आधारित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए भारत की IPOI (इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव) को आसियान आउटलुक ऑन द इंडो-पैसिफिक (AOIP) के साथ समन्वित करना।

निष्कर्ष

वर्ष 2026 तक संबंधों को उच्च स्तर पर ले जाना एक रणनीतिक मोड़ है, जो साझेदारी को तकनीकी परस्पर निर्भरता और समुद्री सुरक्षा के आधार पर सुदृढ़ करता है। आपसी विश्वास को संस्थागत रूप देकर, दोनों देशों ने सभ्यतागत बंधन को एक लचीले, आधुनिक गठबंधन में बदल दिया है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा देता है।

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