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इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0

Lokesh Pal February 03, 2026 02:57 8 0

संदर्भ

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 प्रस्तुत करते हुए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 के शुभारंभ की घोषणा की।

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के बारे में

  • ISM 2.0, पहले चरण की प्रगति पर आधारित है और भारत में एक आत्मनिर्भर, एंड-टू-एंड सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने का लक्ष्य रखता है।
  • बजट: वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹1000 करोड़

मुख्य फोकस क्षेत्र

  • चिप निर्माण में प्रयुक्त उपकरणों और सामग्रियों का निर्माण
  • पूर्ण-स्टैक भारतीय सेमीकंडक्टर IP का विकास
  • सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखलाओं को सुदृढ़ करना
  • कुशल मानव संसाधन के निर्माण हेतु उद्योग-नेतृत्व वाले R&D और प्रशिक्षण केंद्र।

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 1.0

  • शुभारंभ: वर्ष 2021 में, ₹76,000 करोड़ के परिव्यय के साथ।
  • उद्देश्य: सेमीकंडक्टर फैब्स, डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग और चिप डिजाइन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना तथा भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन में एकीकृत करना।
  • नोडल मंत्रालय: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)।
  • ISM के अंतर्गत प्रमुख योजनाएँ
    • सेमीकंडक्टर फैब्स योजना: वेफर फैब इकाइयों के लिए 50% तक वित्तीय सहायता।
    • डिस्प्ले फैब्स योजना: डिस्प्ले फैब्स के लिए परियोजना लागत का 50% तक समर्थन।
    • डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना: डिजाइन, विकास और परिनियोजन चरणों में वित्तीय सहायता।
    • सेमिकॉन इंडिया: उद्योग, नीति-निर्माताओं, अकादमिक जगत और स्टार्ट-अप्स को सहयोग और निवेश हेतु जोड़ने वाला प्रमुख मंच।
  • प्रमुख उपलब्धियाँ:
    • 10 सेमीकंडक्टर परियोजनाएँ स्वीकृत: छह राज्यों में, जिनमें कुल निवेश ₹1.6 लाख करोड़ से अधिक है।
    • इनमें फैब्रिकेशन प्लांट्स, OSAT/ATMP इकाइयाँ, कंपाउंड सेमीकंडक्टर सुविधाएँ (जैसे- सिलिकॉन कार्बाइड) और उन्नत पैकेजिंग शामिल हैं।

सेमीकंडक्टर के बारे में

  • सेमीकंडक्टर ऐसे पदार्थ होते हैं, जिनकी विद्युत चालकता चालक (जैसे ताँबा) और कुचालक (जैसे काँच या रबर) के मध्य होती है।
  • सेमीकंडक्टर को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स का “मस्तिष्क” कहा जाता है। इनके बिना डिजिटल दुनिया (कंप्यूटिंग, AI, इंटरनेट, स्मार्टफोन, स्वच्छ ऊर्जा तकनीक आदि) का अस्तित्व संभव नहीं है।
  • मुख्य विशेषता: इनकी चालकता को सटीक रूप से नियंत्रित और परिवर्तित किया जा सकता है, जैसे:
    • अशुद्धियाँ मिलाकर (डोपिंग)
    • तापमान
    • प्रकाश
    • वोल्टेज या विद्युत क्षेत्र
    • इस कारण ये विद्युत संकेतों को स्विच करने, प्रवर्द्धित करने या संसाधित करने के लिए आदर्श हैं।
  • सबसे सामान्य सामग्री: सिलिकॉन (Si) सेमीकंडक्टर के लिए प्रमुख सामग्री है। यह प्रचुर मात्रा में उपलब्ध, स्थिर और प्रसंस्करण में सरल है।
    • अन्य सामग्रियों में जर्मेनियम (Ge), गैलियम आर्सेनाइड (GaAs), सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) और गैलियम नाइट्राइड (GaN) शामिल हैं।

सेमीकंडक्टर द्वारा निर्मित प्रमुख उपकरण

  • ट्रांजिस्टर: स्विच/एंप्लीफायर के रूप में कार्य करते हैं (आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स के मूल घटक)।
  • डायोड: धारा को एक दिशा में प्रवाहित होने देते हैं।
  • इंटीग्रेटेड सर्किट (ICs) / माइक्रोचिप्स: अरबों ट्रांजिस्टर समाहित करते हैं।
  • माइक्रोप्रोसेसर (CPU), मेमोरी चिप्स, सेंसर, LED, सोलर सेल आदि।

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत के लिए अवसर

  • वैश्विक आपूर्ति शृंखला का पुनर्संरेखण: चीन+1 रणनीति और भू-राजनीतिक जोखिम भारत के लिए एक विश्वसनीय वैकल्पिक सेमीकंडक्टर आधार बनने का अवसर प्रदान करते हैं।
    • चीन+1 रणनीति वह दृष्टिकोण है, जिसमें कंपनियाँ चीन में निर्माण बनाए रखते हुए कम-से-कम एक अन्य देश को सोर्सिंग और उत्पादन के लिए जोड़ती हैं।
  • मजबूत नीति एवं वित्तीय समर्थन: इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन फैब्स, ATMP/OSAT इकाइयों और चिप डिजाइन के लिए लगभग 50% वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
  • डिजाइन एवं प्रतिभा लाभ: भारत में वैश्विक सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियरों का लगभग 20% मौजूद है, जिससे चिप डिजाइन और IP निर्माण में नेतृत्व की क्षमता बनती है।
  • पैकेजिंग एवं टेस्टिंग के माध्यम से कम बाधा: ATMP तेज स्केलेबिलिटी, कम लागत और प्रारंभिक निर्यात क्षमता प्रदान करता है।
  • घरेलू माँग में वृद्धि: EVs, 5G, AI, रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में तीव्र वृद्धि चिप्स के लिए एक स्थिर आंतरिक बाजार सुनिश्चित करती है।
    • भारत में सेमीकंडक्टर बाजार वर्ष 2030 तक $100–110 बिलियन तक पहुँचने की उम्मीद है।

भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण संबंधी चुनौतियाँ

  • उच्च पूँजी एवं प्रौद्योगिकी अंतर: उन्नत सेमीकंडक्टर फैब संयंत्रों की स्थापना के लिए अरबों डॉलर के निवेश और अत्याधुनिक तकनीक की आवश्यकता होती है, जिसकी भारत में वर्तमान में कमी है।
  • विशेषीकृत कुशल कार्यबल की कमी: बड़े इंजीनियरिंग आधार के बावजूद वेफर फैब्रिकेशन, प्रोसेस टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर विनिर्माण में विशेष कौशल अपर्याप्त हैं।
  • अविकसित आपूर्ति शृंखला एवं कच्चे माल पर निर्भरता: भारत सेमीकंडक्टर उपकरण, विशेष गैसों और कच्चे माल के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर है, जिससे आपूर्ति बाधा और निर्यात-नियंत्रण जोखिम बढ़ते हैं।
  • एकीकृत अवसंरचना की कमी: सेमीकंडक्टर फैब्स को उन्नत अवसंरचना (विश्वसनीय बिजली, जल, लॉजिस्टिक्स, क्लीन रूम, परीक्षण सुविधाएँ) की आवश्यकता होती है।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा: भारत को ताइवान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे स्थापित हब्स से प्रतिस्पर्द्धा करनी पड़ती है, जिनके पास पैमाने की अर्थव्यवस्थाएँ और परिपक्व इकोसिस्टम हैं।

आगे की राह 

  • फैब कार्यान्वयन में तेजी: स्वीकृत 10 सेमीकंडक्टर फैब परियोजनाओं के निर्माण और कमीशनिंग को शीघ्र पूरा कर वाणिज्यिक चिप उत्पादन प्रारंभ करना।
  • घरेलू आपूर्ति शृंखला का निर्माण: उपकरण, सामग्री, रसायन और टूल्स के स्थानीय निर्माण को सुदृढ़ कर आयात निर्भरता कम करना।
  • डिजाइन एवं IP क्षमताओं का विस्तार: लक्षित प्रोत्साहनों और उद्योग–अकादमिक सहयोग के माध्यम से चिप डिजाइन हाउस, R&D केंद्र और स्वदेशी IP विकास को बढ़ावा देना।
  • कुशल कार्यबल का विकास: फैब्रिकेशन, प्रोसेस टेक्नोलॉजी और उन्नत पैकेजिंग में विशेषीकृत प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार।
  • साझेदारी एवं निर्यात को बढ़ावा: प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, सह-निवेश और निर्यातोन्मुख विनिर्माण के लिए वैश्विक सेमीकंडक्टर अभिकर्ताओं को आकर्षित कर भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में एकीकृत करना।

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