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भारत-यू.ए.ई. संबंध

Lokesh Pal January 21, 2026 03:26 32 0

संदर्भ

हाल ही में शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने भारत का दौरा किया इस यात्रा के दौरान, भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक गहरा करने पर सहमति व्यक्त की।

परिणामों की सूची

  • सामरिक रक्षा सहयोग
    • भारत और संयुक्त अरब अमीरात के मध्य सामरिक रक्षा साझेदारी ढाँचागत समझौते की शुरुआत और रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने के लिए आशय-पत्र (LOP) पर हस्ताक्षर किए गए।
  • व्यापार और आर्थिक विस्तार
    • वर्ष 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 200 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य।
    • पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरेशिया में MSME उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए भारत मार्ट, वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर और भारत-अफ्रीका सेतु के माध्यम से MSME संबंधों को मजबूत करना।
    • भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र (गुजरात) में UAE के निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक अनुबंध-पत्र (LoI) पर हस्ताक्षर किए।
  • ऊर्जा सुरक्षा सहयोग
    • HPCL और ADNOC गैस के बीच 10 वर्ष का LNG आपूर्ति समझौता संपन्न हुआ, जिससे भारत वर्ष 2028 से प्रति वर्ष 0.5 मिलियन मीट्रिक टन LNG का आयात कर सकेगा।
  • नागरिक परमाणु सहयोग
    • बड़े रिएक्टरों और लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) सहित उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों में सहयोग का विस्तार किया जाएगा।
    • यह साझेदारी भारत के शांति (SHANTI) अधिनियम, 2025 द्वारा संभव होगी, जिसमें परमाणु सुरक्षा और संचालन एवं रखरखाव शामिल हैं।
  • डिजिटल और वित्तीय एकीकरण
    • गिफ्ट सिटी में यू.ए.ई. की कंपनियों के कार्यालय: फर्स्ट अबू धाबी बैंक (FAB) गुजरात के गिफ्ट सिटी में एक शाखा खोलेगा।
    • भारत और यू.ए.ई. आपसी मान्यता प्राप्त संप्रभुता ढाँचों के तहत डिजिटल/डेटा दूतावासों की स्थापना की संभावनाओं का पता लगाएँगे।
  • अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग
    • संयुक्त अंतरिक्ष अवसंरचना विकसित करने, वाणिज्यिक अंतरिक्ष गतिविधियों को बढ़ावा देने, स्टार्ट-अप्स को समर्थन देने और प्रशिक्षण एवं विनिमय कार्यक्रमों को सक्षम बनाने के लिए IN-SPACe (भारत) और UAE अंतरिक्ष एजेंसी के बीच एक आशय-पत्र (LoI) हस्तक्षरित किया गया है।
  • खाद्य सुरक्षा और कृषि व्यापार
    • भारत में एपीडा (APEDA) और संयुक्त अरब अमीरात के जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने भारत से चावल तथा कृषि उत्पादों के निर्यात को सुगम बनाने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं तकनीकी मानकों पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
  • विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार
    • भारत और यू.ए.ई. ने एआई इंडिया मिशन के तहत भारत में एक सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमति व्यक्त की है।
    • यह सुविधा सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के लिए अनुसंधान, नवाचार और वाणिज्यिक अनुप्रयोगों को बढ़ावा देगी।
  • सांस्कृतिक सहयोग
    • संयुक्त अरब अमीरात राष्ट्रीय समुद्री धरोहर परिसर (लोथल) के लिए कलाकृतियाँ प्रदान करेगा।
    • अबू धाबी में हाउस ऑफ इंडिया’ स्थापित करने के लिए समझौता।
    • युवा आदान-प्रदान, विश्वविद्यालय संबंधों और छात्र गतिशीलता को बढ़ावा देना।

भारत-UAE द्विपक्षीय संबंध

  • राजनीतिक संबंध
    • राजनयिक संबंध (1972-73): वर्ष 1972 में स्थापित, दोनों देशों में भारत का दूतावास खोला गया।
    • वर्ष 2015 के बाद का परिवर्तन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्ष 2015 में संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा, जो 34 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा थी, ने एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत को चिह्नित किया।
  • बहुपक्षीय सहयोग
    • ये दोनों BRICS, I2U2 (भारत-इजरायल-यूएई-अमेरिका), UFI त्रिपक्षीय (यू.ए.ई.-फ्राँस-भारत) और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEEC) जैसे प्रमुख समूहों का हिस्सा हैं।

  • रक्षा सहयोग
    • गल्फ स्टार-1 (Gulf Star-1), पासेक्स (PASSEX), डेजर्ट साइक्लोन (भारत-यूएई) और डेजर्ट नाइट (भारत-फ्राँस-यू.ए.ई.) जैसे द्विपक्षीय और बहुपक्षीय अभ्यास समुद्री सुरक्षा और अंतरसंचालनीयता को बढ़ाते हैं।
  • आर्थिक एवं वाणिज्यिक संबंध
    • द्विपक्षीय व्यापार 1970 के दशक में 180 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 100.05 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया।
    • संयुक्त अरब अमीरात वर्तमान में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और दूसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है, जबकि भारत संयुक्त अरब अमीरात का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
  • निवेश सहयोग
    • फरवरी 2024 में हस्ताक्षरित द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) (अगस्त 2024 से प्रभावी) निवेशकों के संरक्षण और पारदर्शिता को मजबूत करती है।
    • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश: संयुक्त अरब अमीरात भारत के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का सातवाँ सबसे बड़ा स्रोत है, जिसमें वर्ष 2000-2025 के बीच कुल 22.85 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश हुआ है।
    • भारतीय प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (ODI): संयुक्त अरब अमीरात में भारत का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (ODI) वर्ष 2000-2025 के मध्य 16.54 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
    • भारत-संयुक्त अरब अमीरात व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) (2022): व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) पर 18 फरवरी, 2022 को हस्ताक्षर किए गए, जो 1 मई, 2022 से प्रभावी हुआ।
      • 80 प्रतिशत से अधिक उत्पादों पर टैरिफ या तो कम कर दिए गए अथवा समाप्त कर दिए गए, जिसके परिणामस्वरूप मई 2022 से अप्रैल 2023 के मध्य गैर-तेल व्यापार 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया।
      • CEPA का लक्ष्य वर्ष 2030 तक गैर-तेल व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाना है।
  • वित्तीय और डिजिटल कनेक्टिविटी
    • स्थानीय मुद्रा निपटान प्रणाली (2023): RBI और यू.ए.ई. के केंद्रीय बैंक के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत रुपये और दिरहम में व्यापार संभव हुआ।
    • पहलें
      • UPI को यू.ए.ई. की ANI भुगतान प्रणाली के साथ एकीकृत करना।
      • रुपे (भारत) और जयवान (यू.ए.ई.) कार्ड नेटवर्क को आपस में जोड़ना।
    • प्रेषण: वर्ष 2024 में, भारतीय प्रवासियों ने संयुक्त अरब अमीरात से भारत को 21.6 बिलियन डॉलर भेजे, जो देश में कुल डॉलर प्रवाह का 19.2% था, जिससे यह अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा स्रोत बन गया।
  • ऊर्जा सुरक्षा: संयुक्त अरब अमीरात कच्चे तेल का भारत का चौथा सबसे बड़ा स्रोत और LNG और LPG का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है।
  • सांस्कृतिक संबंध
    • भारतीय प्रवासी: संयुक्त अरब अमीरात में लगभग 43 लाख भारतीय रहते हैं, जो इसे सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय बनाता है।
    • सांस्कृतिक उपलब्धि: अबू धाबी में BAPS मंदिर का उद्घाटन (2024) सभ्यतागत संबंधों को और मजबूत करने का प्रतीक है।
  • शिक्षा सहयोग
    • भारतीय विद्यालय: संयुक्त अरब अमीरात में 108 भारतीय पाठ्यक्रम (CBSE और केरल बोर्ड) वाले विद्यालय संचालित हैं, जिन्हें दुबई स्थित CBSE क्षेत्रीय कार्यालय का सहयोग प्राप्त है।
    • उच्च शिक्षा: संयुक्त अरब अमीरात में IIT दिल्ली-अबू धाबी परिसर, BITS पिलानी, मणिपाल, एमिटी, सिम्बायोसिस और IIM अहमदाबाद (दुबई) तथा भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (IIFT एक्सपो सिटी दुबई) जैसे संस्थान कार्यरत हैं।

भारत-यू.ए.ई. संबंधों के लिए चुनौतियाँ

  • व्यापार में गैर-टैरिफ बाधाएँ (NTBs): संयुक्त अरब अमीरात के सैनिटरी एंड फाइटोसैनिटरी (SPS) उपायों और व्यापार में तकनीकी बाधाओं (TBT) ने भारतीय निर्यात को सीमित कर दिया है।
    • विशेष रूप से कुक्कुट पालन, मांस और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों में हलाल प्रमाणन अनिवार्य है।
  • चीन की चेक-बुक कूटनीति: खाड़ी देशों में कम ब्याज वाले ऋणों, अवसंरचना वित्तपोषण और निवेशों के आक्रामक उपयोग ने प्रतिस्पर्द्धा को तीव्र कर दिया है।
    • बंदरगाहों, रसद, दूरसंचार और अवसंरचना जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में चीनी कंपनियाँ अक्सर भारतीय कंपनियों को पीछे धकेल देती हैं, जिससे इस क्षेत्र में भारत की आर्थिक उपस्थिति सीमित हो जाती है।
  • पाकिस्तान को संयुक्त अरब अमीरात की वित्तीय सहायता: संयुक्त अरब अमीरात पाकिस्तान को महत्त्वपूर्ण ऋणदाता बना हुआ है, जो सीमा पार आतंकवाद में पाकिस्तान की संलिप्तता को देखते हुए भारत के लिए चिंता का विषय है।
    • जनवरी 2025 में, संयुक्त अरब अमीरात ने 2 अरब डॉलर के ऋण की चुकौती अवधि बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
    • भारत को यह आशंका है कि इस तरह की वित्तीय सहायता अप्रत्यक्ष रूप से उसके राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को नुकसान पहुँचा सकती है।
  • पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय अस्थिरता: ईरान और अमेरिका की अप्रत्यक्ष भागीदारी वाले इजरायल-फिलिस्तीन-लेबनान संघर्ष क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा उत्पन्न करते हैं।
    • ईरान में जारी संकट क्षेत्र की स्थिरता को और भी चुनौती देता है।
  • व्यापार असंतुलन और आर्थिक समायोजन: व्यापार की मात्रा में वृद्धि के बावजूद, व्यापार घाटा लगातार बना हुआ है।
    • वित्त वर्ष 2025 में संयुक्त अरब अमीरात को भारत का कुल माल निर्यात 36.63 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 63.40 अरब डॉलर रहा, जिससे 26.76 अरब डॉलर का व्यापार घाटा हुआ।
  • कफाला प्रणाली और श्रमिक कल्याण संबंधी चिंताएँ: कफाला प्रायोजन प्रणाली भारतीय प्रवासी श्रमिकों, विशेषकर श्रमिक वर्ग के अधिकारों और कल्याण को लेकर चिंताएँ उत्पन्न करती रहती है।

आगे की राह

  • रणनीतिक संवाद तंत्रों को संस्थागत रूप प्रदान करना: भारत को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ अमेरिका और रूस के साथ स्थापित व्यवस्थाओं के समान एक संस्थागत 2+2 संवाद (विदेश और रक्षा मंत्रियों का) स्थापित करना चाहिए, ताकि तेजी से बदलते पश्चिम एशियाई परिदृश्य में सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता, रक्षा सहयोग और रणनीतिक चिंताओं को संबोधित करने के लिए एक संरचित मंच प्रदान किया जा सके।
  • श्रम कल्याण और मानवाधिकारों पर संवाद को बढ़ावा देना: भारत को कफाला प्रायोजन प्रणाली से संबंधित चिंताओं को दूर करने के लिए यू.ए.ई. अधिकारियों के साथ निरंतर और रचनात्मक संवाद में संलग्न होना चाहिए।
    • भारत, UAE द्वारा किए गए हालिया सुधारों को मान्यता देते हुए, अधिक श्रम गतिशीलता, बेहतर कार्य परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के साथ संरेखण की वकालत कर सकता है।
  • व्यापार विविधीकरण को बढ़ावा देना: CEPA के प्रभावी कार्यान्वयन में गैर-टैरिफ बाधाओं (NTBs) के उपयोग में पारदर्शिता और पूर्वानुमान में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। इसके लिए लेबलिंग, लाइसेंसिंग, आयात निगरानी और पर्यवेक्षण आवश्यकताओं पर नियमित सूचना साझाकरण आवश्यक है, जिससे भारतीय निर्यात के लिए सुगम बाजार पहुँच सुनिश्चित हो सके।
  • आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना: दोनों देशों को व्यापार असंतुलन को कम करने के लिए अवसंरचना, रसद, फिनटेक, स्वास्थ्य सेवा तथा स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में संयुक्त उद्यमों एवं रणनीतिक साझेदारियों को प्रोत्साहित करना चाहिए।
    • संयुक्त अरब अमीरात की पूँजी अधिशेष और भारत की विशाल बाजार तथा विनिर्माण क्षमताओं का लाभ उठाकर पारस्परिक आर्थिक लचीलापन सुनिश्चित किया जा सकता है और उच्च मूल्य वाले आयातों पर निर्भरता कम की जा सकती है।

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