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Lokesh Pal
April 06, 2026 02:00
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हाल ही में केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के ‘असंगठित क्षेत्र के उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण’ (ASUSE) 2025 के निष्कर्षों से यह पता चलता है कि क्या भारत का असंगठित क्षेत्र संरचनात्मक परिवर्तन को दर्शाता है या फिर इसमें अभी भी अनौपचारिकता बनी हुई है।




औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्र अलग-थलग होने के बजाय आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं।
5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और ‘विकसित भारत’ की ओर भारत की यात्रा केवल ‘सर्वाइवलिस्ट’ (केवल जीवित रहने के लिए संघर्ष करने वाले) श्रम के भरोसे पूरी नहीं की जा सकती है। मजबूरी में अनौपचारिक क्षेत्र में रहने के बजाय स्वेच्छा से औपचारिक क्षेत्र में आने के इस बदलाव के लिए नीतिगत दृष्टिकोण को बदलना होगा। अब फोकस केवल ‘गरीबों के संरक्षण’ पर ही नहीं, बल्कि ‘श्रमिकों के उत्पादक सशक्तिकरण’ पर केंद्रित करने की आवश्यकता है।
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