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भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम

Lokesh Pal January 02, 2026 04:00 82 0

संदर्भ

चंद्रमा की सतह से लेकर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक, अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियाँ पहचान, नीति और आकांक्षाओं को नया आकार दे रही हैं।

भारत की अंतरिक्ष यात्रा में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ

  • भारत का चंद्र (चंद्रयान) कार्यक्रम
    • चंद्रयान-1 (2008): भारत का पहला चंद्र मिशन। इसके ऑर्बिटर और मून इम्पैक्ट प्रोब (MIP) ने चंद्रमा पर जल/हाइड्रॉक्सिल अणुओं की खोज की पुष्टि करने में मदद की।
      • इसने वर्ष 2009 में संचार बंद कर दिया।
    • चंद्रयान-2 (2019): ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) के साथ लॉन्च किया गया संयुक्त चंद्र मिशन। ऑर्बिटर सफल रहा और अभी भी कार्यरत है, लेकिन लैंडर सतह पर उतरने के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
  • चंद्रयान-3 (2023): सुरक्षित सॉफ्ट लैंडिंग और रोविंग पर केंद्रित एक अनुवर्ती मिशन।
    • यह मिशन 23 अगस्त, 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफलतापूर्वक उतरा और विक्रम लैंडर तथा प्रज्ञान रोवर को स्थापित किया।
  • मंगलयान (मंगल कक्षा मिशन-2014): भारत अपने पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा में पहुँचकर ऐसा करने वाला पहला एशियाई देश बन गया।
  • भारतीय अंतरिक्ष यात्री (2025): ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने एक्सिओम मिशन 4 (जून 2025 में लॉन्च) के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा की, जहाँ उन्होंने प्रयोग किए और भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिए अनुभव प्राप्त किया।
  • स्पैडेक्स
    • ऑर्बिटल डॉकिंग में सफलता (2025): इसरो ने स्वायत्त अंतरिक्ष यान डॉकिंग का प्रदर्शन किया और इस तरह वह चुनिंदा देशों (अमेरिका, रूस, चीन) के समूह में शामिल हो गया।
  • निसार: नासा-इसरो का संयुक्त पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (जुलाई 2025) लॉन्च किया गया, जो अभी वैज्ञानिक चरण में है।
  • आदित्य-L1 (2023): सूर्य के कोरोना और अंतरिक्ष मौसम का अध्ययन।
    • सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंज बिंदु 1 (L1) पर स्थित यह उपग्रह सूर्य का निरंतर अवलोकन प्रदान करता है, जिससे सौर गतिविधियों और अंतरिक्ष मौसम के बारे में हमारी समझ बढ़ती है।
  • XPoSat (2024): XPoSat (एक्स-रे पोलारिमीटर उपग्रह) ब्रह्मांडीय एक्स-रे के ध्रुवीकरण का अध्ययन करने के लिए भारत का पहला समर्पित खगोल विज्ञान मिशन है।

ISRO के आगामी लक्ष्य

  • गगनयान कार्यक्रम: भारत की पहली स्वदेशी मानव अंतरिक्ष उड़ान, जिसका लक्ष्य वर्ष 2027 है।
  • शुक्रयान: शुक्र ग्रह की परिक्रमा करने वाला मिशन (2028)।
  • भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS): वर्ष 2035 तक भारत का अंतरिक्ष स्टेशन।
  • चंद्रमा पर भारतीय मानव: लक्ष्य वर्ष 2035 तक निर्धारित।

भविष्य के चंद्र मिशन

  • चंद्रयान-4: यह वर्ष 2027-2028 में चंद्रमा से नमूने वापस लाने का मिशन है।
    • मुख्य उद्देश्य: दक्षिणी ध्रुव के पास उतरना, सतह और उपसतह की मृदा/चट्टान के लगभग 3 किलोग्राम नमूने एकत्र करना और विश्लेषण के लिए इसे पृथ्वी पर वापस लाना।
    • प्रमुख तकनीकी उपलब्धियाँ: पृथ्वी और चंद्र कक्षा में डॉकिंग, चंद्रमा से आरोहण और नमूनों के साथ पृथ्वी पर सुरक्षित पुनः प्रवेश का प्रदर्शन करने वाला पहला भारतीय मिशन।
  • चंद्रयान-5 (LUPEX): यह एक चंद्र ध्रुवीय अन्वेषण मिशन है, जिसमें लैंडर और रोवर दोनों शामिल हैं और इसे वर्ष 2028-2029 में लॉन्च किया जाना है।
    • मुख्य उद्देश्य: दक्षिणी ध्रुव के निकट स्थायी रूप से छायांकित क्षेत्र (PSR) में जल, बर्फ और वाष्पशील पदार्थों का आंतरिक अध्ययन।
    • अंतरराष्ट्रीय सहयोग: JAXA (जापान) के साथ एक प्रमुख संयुक्त मिशन।

अंतरिक्ष क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग

  • दक्षिण एशिया उपग्रह: दक्षिण एशिया में पड़ोसी देशों को संचार क्षमता प्रदान करता है।
  • G20 उपग्रह (2023): जलवायु/पर्यावरण निगरानी के लिए, डेटा वैश्विक स्तर पर साझा किया जाता है।
  • संयुक्त मिशन: निसार (नासा के साथ), त्रिशना (CNES, फ्राँस के साथ), लूपेक्स (JAXA, जापान के साथ), प्रोबा-3 (यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के साथ)
  • वसुधैव कुटुंबकम्’ (विश्व एक परिवार है) के सिद्धांत से प्रेरित।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)

  • इसरो भारत की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी है, जो अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और राष्ट्रीय विकास के लिए इसके अनुप्रयोगों को विकसित करने के लिए उत्तरदायी है।
  • स्थापना: वर्ष 1969 में स्थापित, इसने वर्ष 1962 में स्थापित भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (INCOSPAR) का स्थान लिया।
  • मुख्यालय: बंगलूरू।
  • यह अंतरिक्ष विभाग (DoS) के अधीन कार्य करता है और भारत के प्रधानमंत्री द्वारा सीधे तौर पर इसकी देख-रेख की जाती है।

इसरो का आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

  • बजट: वर्ष 2025-26 के लिए ₹13,416 करोड़, जो वर्ष 2013-14 की तुलना में लगभग तीन गुना है।
  • अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था: वर्ष 2025 में लगभग $9 बिलियन मूल्य की, वर्ष 2033 तक $44 बिलियन तक पहुँचने का अनुमान है।
  • निजी क्षेत्र: 300 से अधिक स्टार्ट-अप; IN-SPACe और NSIL के माध्यम से किए गए सुधार नवाचार को बढ़ावा देते हैं।
  • उपयोग: उपग्रह आपदा प्रबंधन, कृषि, नौवहन (NavIC) और कनेक्टिविटी में सहायक हैं।

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