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INS अरिदमन: भारत की तीसरी परमाणु पनडुब्बी

Lokesh Pal April 06, 2026 02:30 14 0

संदर्भ

भारत ने अपनी तीसरी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN), INS अरिदमन को शामिल किया, जिससे इसकी समुद्र-आधारित परमाणु निरोधक क्षमता में महत्त्वपूर्ण सुदृढ़ीकरण हुआ।

संबंधित तथ्य

  • भारत की अन्य दो परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियाँ (SSBN) INS अरिहंत और INS अरिघात हैं, जिन्हें क्रमशः वर्ष 2016 और 2024 में कमीशन किया गया था।
  • एक चौथी SSBNs वर्तमान में निर्माणाधीन है और अरिदमन की तरह, इसका बड़ा आकार होने के कारण यह भी अधिक K-4 मिसाइलें ले जाने में सक्षम होगी।

INS अरिदमन के बारे में

  • विस्थापन और प्रक्षेपण क्षमता: INS अरिदमन एक 7,000 टन की परमाणु-संचालित पनडुब्बी है, जो आठ ऊर्ध्वाधर प्रक्षेपण प्रणाली (VLS) ट्यूब्स से सुसज्जित है, जो इसके पूर्ववर्ती की तुलना में लगभग दोगुनी है।
  • मिसाइल क्षमता: यह पनडुब्बी निम्नलिखित ले जाने में सक्षम है:
    • K-15 (सागरिका), जिसकी मारक क्षमता 700 किमी. से अधिक है।
    • K-4, एक लंबी दूरी की पनडुब्बी से प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) है, जिसकी मारक क्षमता लगभग 3,500 किमी. है।
  • उन्नत परमाणु प्रणोदन: INS अरिदमन उन्नत परमाणु रिएक्टरों से संचालित है, जिन्हें पूर्ववर्ती पनडुब्बियों में प्रयुक्त रिएक्टरों की तुलना में उन्नत माना जाता है। यह इसे सक्षम बनाता है:
    • लंबी अवधि तक (कई महीनों तक) जलमग्न बने रहना।
    • बार-बार सतह पर आने से बचना, जिससे इसकी गोपनीयता और संचालनीयता संबंधी क्षमता बढ़ती है।

परमाणु त्रयी’ क्या है?

  • परमाणु त्रयी से तात्पर्य वायु, भूमि और समुद्र में स्थित प्लेटफॉर्म से परमाणु मिसाइलें प्रक्षेपित करने की क्षमता से है।

परमाणु त्रयी’ के घटक

  • भूमि-आधारित मिसाइलें (ICBMs)
    • भूमि से प्रक्षेपित परमाणु हथियार।
    • आमतौर पर साइलो या मोबाइल प्रक्षेपकों में तैनात किए जाते हैं।
  • वायु-आधारित वितरण प्रणाली
    • रणनीतिक बमवर्षकों जैसे विमानों द्वारा वितरित परमाणु हथियार।
    • हमले से पहले लचीलापन और वापस बुलाने की क्षमता प्रदान करती है।
  • समुद्र-आधारित प्रणालियाँ (पनडुब्बी से प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइलें – SLBMs):
    • परमाणु-संचालित पनडुब्बियों (SSBNs) से प्रक्षेपित।
    • गोपनीयता और गतिशीलता के कारण सबसे अधिक जीवित रहने योग्य घटक।
  • भारत ने INS अरिहंत के शामिल होने के साथ परमाणु त्रयी क्षमता प्राप्त की, जिससे इसके तीनों घटक पूर्ण हुए:
    • भूमि: अग्नि शृंखला की मिसाइलें।
    • वायु: मिराज 2000, Su-30 एमकेआई।
    • समुद्र: INS अरिहंत (SSBN)।

महत्त्व

  • विशिष्ट परमाणु त्रयी समूह का हिस्सा: INS अरिदमन के शामिल होने के साथ, भारत ने पूर्णतः संचालित परमाणु त्रयी रखने वाले देशों के एक विशिष्ट समूह में अपनी स्थिति को सुदृढ़ किया है। इनमें अमेरिका, रूस, चीन और फ्राँस शामिल हैं।
  • परमाणु त्रयी का सुदृढ़ीकरण: INS अरिदमन का शामिल होना भारत की परमाणु त्रयी को महत्त्वपूर्ण रूप से सुदृढ़ करता है, क्योंकि यह इसके समुद्र-आधारित निरोधक घटक को मजबूत करता है।
  • समुद्र में परिचालन क्षमता में वृद्धि: INS अरिदमन के शामिल होने के साथ, भारत के पास पहली बार समुद्र में तीन परिचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियाँ होंगी।
  • द्वितीय प्रहार क्षमता का आश्वासन: यद्यपि भारत का परमाणु सिद्धांत पहले उपयोग न करने” की नीति निर्धारित करता है, फिर भी यह परमाणु हथियारों का उपयोग केवल निरोध हेतु करने के लिए प्रतिबद्ध है, SSBN भारत की द्वितीय प्रहार क्षमता सुनिश्चित करते हैं।

SSBN क्या है?

  • SSBN का अर्थ है जलमग्न पोत बैलिस्टिक परमाणु पनडुब्बी (Ship Submersible Ballistic Nuclear Submarines)’
  • एक परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) एक प्रकार की पनडुब्बी है जो:
    • परमाणु रिएक्टर द्वारा संचालित होती है (ईंधन भरने के बिना दीर्घकालिक संचालन सक्षम बनाता है)।
    • परमाणु वारहेड से युक्त बैलिस्टिक मिसाइलें वहन करती है।
    • किसी देश की परमाणु निरोधक क्षमता का एक प्रमुख घटक होती है।

SSBNs की प्रमुख विशेषताएँ

  • नाभिकीय प्रणोदन: SSBN पारंपरिक डीजल इंजनों के बजाय ऑनबोर्ड नाभिकीय रिएक्टरों द्वारा संचालित होते हैं, जिससे वे लंबे समय तक, अक्सर कई महीनों तक बिना सतह पर आए जलमग्न रह सकते हैं, और इस प्रकार उच्च स्तर की सहनशक्ति तथा संचालनात्मक गोपनीयता सुनिश्चित होती है।

न्यूक्लियर-पॉवर्ड अटैक सबमरीन्स (SSN) कार्यक्रम

  • भारत अपनी न्यूक्लियर-पॉवर्ड अटैक सबमरीन्स (SSN) कार्यक्रम को सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहा है, ताकि अपनी जल के भीतर युद्ध क्षमता को सुदृढ़ किया जा सके। SSBN के विपरीत, SSN आक्रामक भूमिकाओं के लिए डिजाइन की जाती हैं, जिनमें शत्रु पनडुब्बियों का शिकार करना और नौसैनिक परिसंपत्तियों की रक्षा करना शामिल है।
  • भारतीय नौसेना दो SSN का स्वदेशी निर्माण करने की योजना बना रही है, जो प्रौद्योगिकीय आत्मनिर्भरता की दिशा में एक कदम है।
  • इसके अतिरिक्त, भारत, रूस से एक SSN लीज पर लेगा, जिसकी आपूर्ति वर्ष 2027–28 तक अपेक्षित है, ताकि स्वदेशी पनडुब्बियों के परिचालन होने तक क्षमता अंतर को पाटा जा सके।

भारत की पनडुब्बी शक्ति

  • स्वीकृत क्षमता: भारतीय नौसेना को 18 पनडुब्बियाँ बनाए रखने की स्वीकृति है।
  • पुनर्संरक्षण कारक: किसी भी समय लगभग 30% पनडुब्बियाँ पुनर्संरक्षण में होती हैं।
  • कुल पारंपरिक पनडुब्बियाँ: भारतीय नौसेना 16 पारंपरिक पनडुब्बियाँ संचालित करती है।
  • कलवरी-श्रेणी की पनडुब्बियाँ
    • कलवरी-श्रेणी की 6 पनडुब्बियाँ।
    • मझगाँव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड में नेवल ग्रुप के सहयोग से निर्मित।
  • शिशुमार-श्रेणी की पनडुब्बियाँ
    • शिशुमार-श्रेणी की 4 पनडुब्बियाँ।
  • किलो-श्रेणी (सिंधुघोष) पनडुब्बियाँ
    • सिंधुघोष-श्रेणी की 7 पनडुब्बियाँ।

वैश्विक तुलना

  • संयुक्त राज्य अमेरिका
    • 14 ओहायो-श्रेणी की SSBNs
    • 53 पॉवर्ड अटैक सबमरीन्स।
  • चीन
    • 12 परमाणु पनडुब्बियाँ।
    • इनमें 6 न्यूक्लियर-पॉवर्ड अटैक सबमरीन्स (SSNs) शामिल हैं।

  • बैलिस्टिक मिसाइलें: ये पनडुब्बी से प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइलों (SLBMs) से सुसज्जित होती हैं, जो परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम होती हैं और लंबी दूरी तक मार कर सकती हैं, जिससे एक विश्वसनीय और शक्तिशाली रणनीतिक प्रहार क्षमता प्राप्त होती है।
  • गोपनीयता क्षमता: SSBNs समुद्र की सतह के नीचे शांतिपूर्वक संचालन करती हैं, जिससे इनका पता लगाना अत्यंत कठिन होता है, जो उनकी जीवित रहने की क्षमता को बढ़ाता है और परमाणु संघर्ष की स्थिति में उनकी प्रभावशीलता सुनिश्चित करता है।

SSBNs के लाभ

  • उच्च जीवित रहने की क्षमता: SSBNs लंबे समय तक जल के भीतर छिपे रहने की क्षमता के कारण उच्च जीवित रहने की क्षमता सुनिश्चित करते हैं, जिससे वे शत्रु की पहचान और हमले के प्रति कम संवेदनशील होते हैं।
  • रणनीतिक स्थिरता: ये एक विश्वसनीय और सुनिश्चित परमाणु निरोधक बनाए रखकर रणनीतिक स्थिरता में योगदान देते हैं, जिससे प्रतिद्वंद्वियों को संघर्ष प्रारंभ करने से हतोत्साहित किया जाता है।
  • निरंतर निरोधक गश्त: SSBNs निरंतर निरोधक गश्त को सक्षम बनाते हैं, जिससे समुद्र में लगातार परमाणु उपस्थिति और आवश्यकता पड़ने पर प्रतिशोध के लिए तत्परता सुनिश्चित होती है।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा में वृद्धि: इनकी गोपनीयता और पता लगाने में कठिनाई राष्ट्रीय सुरक्षा को महत्त्वपूर्ण रूप से सुदृढ़ करती है, जिससे एक विश्वसनीय द्वितीय प्रहार क्षमता सुनिश्चित होती है।

सीमाएँ

  • विकास और रखरखाव की उच्च लागत: SSBNs में डिजाइन, निर्माण और दीर्घकालिक रखरखाव के संदर्भ में अत्यधिक लागत शामिल होती है, क्योंकि इनके जटिल परमाणु प्रणोदन तंत्र और उन्नत हथियार प्रणाली होती हैं।
    •  उदाहरण: भारत की उन्नत प्रौद्योगिकी पोत परियोजना (ATV) में दशकों में पर्याप्त वित्तीय और प्रौद्योगिकीय निवेश की आवश्यकता पड़ी है।
  • प्रौद्योगिकीय जटिलता: SSBNs के विकास के लिए परमाणु रिएक्टर के लघुकरण, मिसाइल एकीकरण और गोपनीयता प्रौद्योगिकी में उन्नत विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है, जो केवल कुछ देशों के पास है।
  • संचार सीमाएँ: जलमग्न SSBNs के साथ संचार बनाए रखना कठिन होता है, क्योंकि पारंपरिक रेडियो तरंगें गहरे जल में प्रवेश नहीं कर पातीं, जिसके लिए अत्यल्प आवृत्ति (VLF) या अत्यंत निम्न आवृत्ति (ELF) प्रणालियों का उपयोग आवश्यक होता है।
    • उदाहरण: भारत अपनी पनडुब्बियों से संपर्क बनाए रखने के लिए समर्पित VLF संचार सुविधाओं का उपयोग करता है।
  • उन्नत पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रौद्योगिकियों के प्रति संवेदनशीलता: अपनी गोपनीयता के बावजूद, SSBNs विकसित होती पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW) प्रौद्योगिकियों जैसे सोनार नेटवर्क, जल के नीचे ड्रोन, और उपग्रह निगरानी से बढ़ते खतरों का सामना करते हैं।

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