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भूमि अधिग्रहण

Lokesh Pal January 05, 2026 03:07 178 0

संदर्भ 

50वींप्रगति’ बैठक के तहत उठाए गए सभी मुद्दों में से लगभग 35% भूमि अधिग्रहण से संबंधित हैं, जो परियोजना में विलंब का सबसे बड़ा कारण है।

प्रगति (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन) के बारे में

  • प्रगति एक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी आधारित, बहुआयामी प्लेटफॉर्म है, जिसे केंद्र और राज्य सरकारों की भागीदारी के साथ सक्रिय शासन और समयबद्ध कार्यान्वयन को बढ़ावा देने के लिए डिजाइन किया गया है।
  • विकास: इसे राष्ट्रीय सूचना केंद्र (NIC) के सहयोग से प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की टीम द्वारा आंतरिक रूप से विकसित किया गया है।
  • यह एक सशक्त प्रणाली है, जो ई-पारदर्शिता और ई-जवाबदेही लाती है, जिससे प्रमुख हितधारकों के बीच वास्तविक समय में संवाद तथा सूचना का आदान-प्रदान सुगम होता है।

भूमि अधिग्रहण

  • भूमि अधिग्रहण से तात्पर्य उस प्रक्रिया से है, जिसके द्वारा सरकार वैधानिक अधिकार के तहत सार्वजनिक उद्देश्य” के लिए निजी स्वामित्व वाली भूमि का अधिग्रहण करती है, जिसमें मुआवजे का भुगतान और पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन का प्रावधान शामिल है।
  • LARR अधिनियम, 2013 के अंतर्गत सार्वजनिक उद्देश्य में निम्नलिखित शामिल हैं:
    • अवसंरचना परियोजनाएँ (सड़कें, रेलवे, सिंचाई, बंदरगाह)
    • रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा परियोजनाएँ
    • आवास और सामाजिक अवसंरचना
    • औद्योगिक गलियारे और सरकारी नियंत्रण वाली परियोजनाएँ।

संवैधानिक स्थिति

  • अनुच्छेद-300A: संपत्ति का अधिकार संवैधानिक अधिकार है (मौलिक अधिकार नहीं)।
  • संपत्ति केवल विधिवत ही अधिग्रहित की जा सकती है, अतः विधिवत अनुपालन अनिवार्य है।

भारत में भूमि अधिग्रहण के लिए कानूनी ढाँचा 

  • वर्ष 2013 से पहले – भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894
    • भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 ने राज्य को न्यूनतम मुआवजे के साथ और बिना सहमति के भूमि अधिग्रहण करने का अधिकार दिया, जिसके कारण स्वतंत्रता के बाद के भारत में व्यापक विस्थापन और सामाजिक अशांति उत्पन्न हुई।
  • भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजे और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 (LARR अधिनियम)
    • इस अधिनियम ने औपनिवेशिक काल के वर्ष 1894 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम का स्थान लिया।
    • इसका उद्देश्य अधिग्रहण प्रक्रिया को अधिक मानवीय, पारदर्शी और सहभागी बनाना था।
    • LARR अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ
      • अनिवार्य सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA)
      • निजी क्षेत्र और PPP परियोजनाओं के लिए सहमति संबंधी आवश्यकताएँ।
      • प्रचलित बाजार मूल्य से जुड़ा मुआवजा।
      • ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च मुआवजा गुणक।
      • पुनर्वास और पुनर्स्थापन (R&R) के लिए वैधानिक प्रावधान।

मुआवजा

पुनर्वास

  • अधिग्रहित भूमि का बाजार मूल्य
  • गुणक (शहरी क्षेत्रों में 2 गुना तक और ग्रामीण क्षेत्रों में 4 गुना तक)
  • अनिवार्य अधिग्रहण के लिए मुआवजा।
  • आवास या आवास भत्ता उपलब्ध कराना
  • रोजगार के अवसर, वार्षिक या एकमुश्त वित्तीय सहायता।
  • बुनियादी नागरिक सुविधाओं का विकास।

बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में विलंब का सबसे बड़ा कारण भूमि अधिग्रहण क्यों बना हुआ है?

  • विखंडित भूमि स्वामित्व और अस्पष्ट दस्तावेज: भारत में भूमि स्वामित्व अत्यधिक विखंडित है और भूमि अभिलेखों में प्रायः पुरानी प्रविष्टियाँ तथा अस्पष्ट दस्तावेज होते हैं, जिससे वैध मालिकों की पहचान करना समय लेने वाला एवं मुकदमेबाजी से भरा हो जाता है।
  • भूमि पर आजीविका की निर्भरता: भारत में भूमि केवल एक उत्पादक संपत्ति नहीं है, बल्कि किसानों, आदिवासियों और अनौपचारिक श्रमिकों के लिए आजीविका का प्राथमिक स्रोत है, जिसके कारण अधिग्रहण से आर्थिक सुरक्षा को खतरा होने पर कड़ा विरोध होता है।
  • राज्य और स्थानीय समुदायों के बीच विश्वास का अभाव: निजी और कॉरपोरेट हितों के लिए भूमि अधिग्रहण कानूनों के ऐतिहासिक दुरुपयोग ने विश्वास का अभाव उत्पन्न कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप अवसंरचना परियोजनाओं के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन, सामाजिक आंदोलन और राजनीतिक लामबंदी हुई है।
  • भूमि संबंधी प्रशासन का संघीय स्वरूप: सातवीं अनुसूची के तहत भूमि राज्य का विषय है और बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं के लिए केंद्र तथा राज्यों के बीच समन्वय की आवश्यकता होती है, जिससे प्रायः अलग-अलग राजनीतिक प्राथमिकताओं एवं प्रशासनिक क्षमताओं के कारण देरी होती है।
  • न्यायिक जाँच और कानूनी चुनौतियाँ: भारत में न्यायालय प्रक्रियात्मक अनुपालन, सार्वजनिक उद्देश्य और पुनर्वास उपायों की बारीकी से जाँच करते हैं और अधिग्रहण प्रक्रिया में मामूली चूक भी प्रायः स्थगन आदेश का कारण बनती है।
  • अनिवार्य सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA): इस अधिनियम के तहत आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभावों का मूल्यांकन करने के लिए सामाजिक प्रभाव आकलन अनिवार्य है, जिससे पारदर्शिता में सुधार होता है, लेकिन परियोजनाओं की समय-सीमा में काफी वृद्धि हो जाती है।
  • PPP और निजी परियोजनाओं के लिए सहमति की आवश्यकता: PPP परियोजनाओं में 70% और निजी परियोजनाओं में 80% प्रभावित परिवारों से सहमति प्राप्त करने की आवश्यकता के कारण सामूहिक सौदेबाजी तथा स्थानीय विरोध के चलते अधिग्रहण में अक्सर विलंब होता है।
  • उच्च मुआवजे के कारण बढ़ा हुआ राजकोषीय बोझ: ग्रामीण क्षेत्रों में बाजार मूल्य के चार गुना तक मुआवजे का प्रावधान राज्य सरकारों पर वित्तीय दबाव बढ़ाता है, जिससे परियोजनाओं की स्वीकृति और कार्यान्वयन में देरी होती है।

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