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लॉन्जेविटी साइंस

Lokesh Pal January 07, 2026 03:44 24 0

संदर्भ

जैव प्रौद्योगिकी, जेरोसाइंस (Geroscience), कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा निवारक स्वास्थ्य देखभाल में हुई प्रगतियों ने मानव दीर्घायु के प्रति वैश्विक रुचि को पुनर्जीवित कर दिया है।

‘लॉन्जेविटी साइंस’ क्या है?

  • लॉन्जेविटी साइंस (या जेरोसाइंस) वृद्धावस्था की जैविक प्रक्रियाओं का अध्ययन करता है और वृद्धावस्था से संबंधित कमी को विलंबित करने के तरीकों की खोज करता है।
  • यह वृद्धावस्था का अंतःविषयक अध्ययन है और स्वास्थ्य, जैव प्रौद्योगिकी, सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक-आर्थिक नीति से संबंधित है।

‘लॉन्जेविटी साइंस’ में प्रमुख अवधारणाएँ

स्वास्थ्य अवधि और जीवनकाल

  • जीवनकाल से तात्पर्य ‘जीवन के कुल वर्षों’ से है।
  • स्वास्थ्यकाल से आशय अच्छे स्वास्थ्य की अवस्था में व्यतीत किए गए वर्षों से है, जिनमें दीर्घकालिक रोगों और दिव्यांगता का अभाव होता है।
  • आधुनिक ‘लॉन्जेविटी साइंस’ का लक्ष्य केवल जीवनकाल बढ़ाना नहीं, बल्कि स्वास्थ्यकाल बढ़ाना है।

बायोहैकिंग (Biohacking)

  • इसे स्वास्थ्य और प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए आहार, जीवनशैली या शरीर विज्ञान में जानबूझकर किए गए बदलावों के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • इसमें पहनने योग्य उपकरणों, सप्लीमेंट्स, उन्नत निदान और क्रायोथेरेपी या हाइपरबेरिक ऑक्सीजन चैंबर जैसी थेरेपी का उपयोग शामिल है।

ब्लू जोन (Blue Zones)

  • ऐसे भौगोलिक क्षेत्र, जहाँ शतायु व्यक्तियों की संख्या अधिक है और दीर्घकालिक रोगों की दर कम है।
  • मूल रूप से ओकिनावा (जापान), सार्डिनिया (इटली), निकोया (कोस्टा रिका), इकारिया (ग्रीस) और लोमा लिंडा (अमेरिका) में इनकी पहचान की गई थी।
  • हाल ही में सिंगापुर को इस सूची में जोड़ा गया है; केरल को कभी-कभी ‘इंडियन ब्लू जोन’ माना जाता है, हालाँकि इसका डेटा सीमित है।

वैश्विक दीर्घायु प्रवृत्ति और नवाचार

  • स्वास्थ्य उद्योग का विकास: वर्ष 2024 में वैश्विक स्तर पर इसका मूल्य 6.8 ट्रिलियन डॉलर था और वर्ष 2029 तक इसके 9.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।
  • प्रौद्योगिकी का एकीकरण: निदान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग, मस्तिष्क-मानचित्रण पहनने योग्य उपकरण (जैसे- ब्रेन एक्स360 हेलमेट), श्वास-विश्लेषण चयापचय परीक्षण।
  • दीर्घायु पर्यटन: रात्रि पर्यटन और विलासितापूर्ण स्वास्थ्य कार्यक्रमों जैसे उभरते रुझान।
  • औषधीय प्रगति: GLP-1 एगोनिस्ट जैसी दवाओं के पुनर्उपयोग पर शोध किया जा रहा है ताकि स्वास्थ्य अवधि को बढ़ाया जा सके।

भारत में ‘लॉन्जेविटी साइंस’

  • जनसांख्यिकीय परिवर्तन: वर्ष 2067 तक भारत में विश्व की सबसे बड़ी वृद्ध आबादी होगी।
  • लॉन्गेविटी इंडिया इनिशिएटिव (IISc): प्रमुख भारत अध्ययन का उद्देश्य पश्चिमी देशों पर केंद्रित चिकित्सा डेटा से आगे बढ़कर भारत-विशिष्ट बायोमार्कर और स्वास्थ्य एल्गोरिदम विकसित करना है।
  • आर्थिक क्षमता: भारत में दीर्घायु संबंधी अर्थव्यवस्था में वृद्धि हो रही है और निवारक स्वास्थ्य देखभाल बाजार का विस्तार हो रहा है।

भारत के सामने महत्त्वपूर्ण चुनौतियाँ

  • स्वास्थ्य संबंधी सोच: रोकथाम की तुलना में उपचारात्मक दृष्टिकोण अधिक; बीमारी से पहले स्वास्थ्य में निवेश करने की कम इच्छा।
  • आँकड़ों की कमी: सटीक आयु और स्वास्थ्य संबंधी आँकड़ों का अभाव, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और लक्षित हस्तक्षेपों में बाधा उत्पन्न करता है।
  • पहुँच और समानता: व्यक्तिगत दीर्घायु परामर्श (₹10,000 – ₹1 लाख) और उन्नत उपचारों की उच्च लागत।
  • बुनियादी ढाँचे की कमी: अपर्याप्त सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली और वृद्धावस्था देखभाल सुविधाएँ।
  • रोगों का शीघ्र आरंभ: जीवनशैली से संबंधित दीर्घकालिक रोग पश्चिमी देशों की तुलना में भारतीयों में शीघ्र (30-40 वर्ष की आयु में) दिखाई देने लगते हैं।

आगे की राह

  • सामाजिक-आर्थिक नीति का पुनर्गठन: सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाना और आजीवन शिक्षा को प्रोत्साहित करना।
    • स्वतंत्र जीवनयापन के लिए एजटेक (AgeTech) समाधान विकसित करना।
  • जन स्वास्थ्य प्राथमिकता: बुनियादी निवारक देखभाल, टीकाकरण, पोषण और वृद्धावस्था संबंधी सेवाएँ अत्याधुनिक जैव-तकनीकी तकनीकों से पूर्व मूलभूत आवश्यकताएँ हैं।
  • सांस्कृतिक परिवर्तन: आयु-भेदभावपूर्ण दृष्टिकोणों से हटकर वृद्ध वयस्कों (जिन्हें ‘अनुभवी पीढ़ी’ या ‘जेन ई’ कहा जाता है) को महत्त्व देना और उन्हें समाज में एकीकृत करना आवश्यक है।

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