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महात्मा अय्यंकाली

Lokesh Pal August 30, 2025 02:53 9 0

संदर्भ 

भारतीय  प्रधानमंत्री ने महात्मा अय्यंकाली को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की।

महात्मा अय्यंकाली (Mahatma Ayyankali) के बारे में

प्रारंभिक जीवन

  • 28 अगस्त 1863 को वेंगनूर, त्रावणकोर (वर्तमान केरल) में जन्म हुआ।
  • ये केरल की सबसे उत्पीड़ित जातियों में से एक, पुलायार समुदाय से संबंधित थे।
  • बचपन से ही जाति-आधारित भेदभाव का सामना करना पड़ा (शिक्षा से वंचित, सड़कों, मंदिरों और स्कूलों में प्रवेश वर्जित)।

प्रमुख योगदान

  1. शिक्षा के लिए संघर्ष (Struggle for Education)
    • वर्ष 1904: सरकारी विद्यालयों में दलित बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए प्रसिद्ध “विलायकल समरम (Vilaykal Samaram)” (शिक्षा के लिए संघर्ष) शुरू किया।
    • इसके परिणामस्वरूप उच्च जातियों ने हिंसक विरोध किया, लेकिन अंततः त्रावणकोर राज्य ने इसे स्वीकार कर लिया।
    • अय्यंकाली ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा ही मुक्ति का एकमात्र मार्ग है, जैसा कि अंबेडकर के दर्शन में निहित था।
  2. कृषि श्रमिक आंदोलन
    • वर्ष 1907: दलित कृषि श्रमिकों के लिए बेहतर वेतन और सम्मान की माँग करते हुए भारतीय इतिहास में पहली कृषि श्रमिक हड़ताल का आयोजन किया गया।
      • इसने जमींदारों को कार्य करने की स्थिति में सुधार करने के लिए मजबूर किया।
  3. विभिन्न संगठनों का निर्माण
    • वर्ष 1907: दलितों के उत्थान, शिक्षा का प्रसार और जाति उत्पीड़न से लड़ने के लिए साधु जन परिपालन संघम (Sadhu Jana Paripalana Sangham- SJPS) की स्थापना की।
  4. सार्वजनिक अधिकारों के लिए संघर्ष
    • दलितों के सार्वजनिक सड़कों पर चलने और सार्वजनिक स्थानों तक पहुँचने के अधिकार के लिए संघर्ष किया, जो पहले उन्हें अस्वीकार कर दिया गया था।
      • उनके संघर्षों ने बाद में वायकोम सत्याग्रह (Vaikom Satyagraha) (वर्ष 1924-25) जैसे आंदोलनों का मार्ग प्रशस्त किया।
  5. राजनीतिक प्रतिनिधित्व
    • वर्ष 1912: श्री मूलम प्रजा सभा (त्रावणकोर की विधान परिषद) के लिए मनोनीत।
    • इस मंच का प्रयोग भूमि सुधार, शिक्षा और दलितों के लिए समान अधिकारों की माँग के लिए किया।

विरासत और मान्यता

  • जातिगत उत्पीड़न के विरुद्ध अपने अथक संघर्ष के लिए उन्हें “महात्मा अय्यंकाली” के नाम से जाना जाता है।
  • दलित मुक्ति में उनकी भूमिका के लिए उन्हें ‘केरल का अंबेडकर’ कहा जाता है।
  • उन्होंने केरल में उत्तरोत्तर सामाजिक सुधार आंदोलनों और नेताओं को प्रेरित किया।
  • केरल सरकार और भारत सरकार ने उन्हें सामाजिक न्याय, समानता और सशक्तीकरण के प्रतीक के रूप में मान्यता दी है।

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