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Lokesh Pal
December 29, 2025 02:44
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20वीं सदी की शुरुआत में चीन और दक्षिण कोरिया जैसी पूर्वी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के समान परिस्थितियों के बावजूद, भारत का विनिर्माण क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग 17% पर ही स्थिर रहा है और आर्थिक वृद्धि एवं रोजगार के प्रमुख इंजन के रूप में उभरने में विफल रहा है।
भारत के विनिर्माण क्षेत्र का खराब प्रदर्शन मूलतः चक्रीय के बजाय संरचनात्मक है। बुनियादी ढाँचे की कमियाँ, नियामक जटिलताएँ, श्रम की अनौपचारिकता और कमजोर नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र इसके कारण हैं। हालाँकि हालिया सुधार एक रणनीतिक बदलाव का संकेत देते हैं, लेकिन विनिर्माण क्षेत्र में निरंतर परिवर्तन के लिए केवल प्रोत्साहन-आधारित विस्तार के बजाय गहन संस्थागत सुधार, कौशल-प्रधान विकास, नवाचार-आधारित उन्नयन और मजबूत वैश्विक मूल्य शृंखला एकीकरण की आवश्यकता होगी।
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