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Lokesh Pal
March 20, 2026 02:00
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हाल ही में हुए भू-राजनीतिक व्यवधानों, विशेष रूप से लाल सागर संकट में जारी तनाव और वर्ष 2026 में होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने वैश्विक समुद्री नेटवर्क की प्रणालीगत कमजोरी को उजागर कर दिया है।
समुद्री अवरोधी बिंदु भूगोल, भू-राजनीति और भू-अर्थशास्त्र के संगम को दर्शाते हैं, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक स्थिरता और रणनीतिक स्वायत्तता को आकार देते हैं। प्रणालीगत कमजोरियों से निपटने के लिए, भारत को एक बहुआयामी रणनीति अपनानी होगी, जिसमें ऊर्जा परिवर्तन, समुद्री क्षमता, कूटनीति और विविध संपर्क (INSTC, IMEC) शामिल हों, ताकि अस्थिर वैश्विक व्यवस्था में स्थायी स्थिरता का निर्माण हो सके।
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