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Lokesh Pal
February 20, 2026 03:21
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हाल ही में सैन्य क्षेत्र में उत्तरदायी AI पर तीसरा वैश्विक शिखर सम्मलेन (REAIM), कॉरुना, स्पेन में संपन्न हुआ, जिसने व्यापक नैतिक सिद्धांतों से व्यावहारिक संचालन की ओर महत्त्वपूर्ण परिवर्तन को चिह्नित किया।
सैन्य क्षेत्र में उत्तरदायी AI (REAIM) एक उच्च-स्तरीय, बहु-पक्षीय मंच के रूप में लॉन्च किया गया है, जिसका उद्देश्य युद्ध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक, कानूनी और तकनीकी चुनौतियों को संबोधित करना है।
सैन्य संघर्ष में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की परिवर्तनकारी और संभावित अस्थिर प्रकृति के कारण REAIM ढाँचे के तहत वैश्विक मार्गदर्शक आवश्यक हैं। नैतिक, कानूनी और परिचालनात्मक आवश्यकताओं को समेकित करते हुए, REAIM की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से पुष्ट होती है:
भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “निगरानी एवं प्रतीक्षा” (Watch-and-Wait) दृष्टिकोण अपनाया है, जबकि आक्रामक रूप से अपनी स्वदेशी क्षमताओं के आधुनिकीकरण में लगा हुआ है:
सैन्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता का शासन उच्च-स्तरीय राजनीतिक घोषणाओं, मानवीय पक्ष और “सुरक्षा-से-निर्माण” तकनीकी मानकों के मिश्रण के माध्यम से विकसित हो रहा है। ये पहल तीव्र नवाचार और अंतरराष्ट्रीय संधि निर्माण की धीमी गति के मध्य के समयांतराल को समाप्त करने के लक्ष्य निर्धारित करती हैं।
जैसे-जैसे वैश्विक युद्ध परिदृश्य मशीन-गति संचालित अभियानों की ओर अग्रसर हो रहा है, विनियमन के प्रति पारंपरिक “प्रतीक्षा और अवलोकन” दृष्टिकोण दायित्व में परिवर्तित होता जा रहा है। मानव सुरक्षा और रणनीतिक स्थिरता पर केंद्रित एक संतुलित एवं चरणबद्ध रोडमैप की आवश्यकता है, जिससे इस संक्रमण का सुचारु संचालन किया जा सके।
21वीं सदी में युद्ध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का एकीकरण एक अनिवार्य यथार्थ है। भारत के लिए रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने का अर्थ है सशक्त कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षमताओं का विकास करना, साथ ही सार्थक मानवीय नियंत्रण पर वैश्विक विमर्श का नेतृत्व करना। अंतरराष्ट्रीय मानवीय विधि की रक्षा करते हुए नवाचार को बाधित न करने वाले सुरक्षा-नियंत्रणों का समर्थन कर, भारत यह सुनिश्चित कर सकता है कि प्रौद्योगिकी सुरक्षा का साधन बनी रहे, न कि अनपेक्षित आपदा का कारण।
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