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मिलिट्री क्वांटम मिशन नीति ढाँचा

Lokesh Pal January 24, 2026 03:41 16 0

संदर्भ

हाल ही में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) ने औपचारिक रूप से मिलिट्री क्वांटम मिशन (MQM) नीति ढाँचा जारी किया।

  • यह ढाँचा विभिन्न सरकारी क्षेत्रों के सदस्यों से युक्त समर्पित शासी निकायों के माध्यम से नागरिक-सैन्य एकीकरण पर जोर देता है।

मिलिट्री क्वांटम मिशन (MQM) नीतिगत ढाँचे के बारे में

  • यह आधुनिक युद्ध के तेजी से बदलते परिदृश्य में निर्णायक बढ़त और तकनीकी श्रेष्ठता हासिल करने के उद्देश्य से भारतीय सशस्त्र बलों में क्वांटम प्रौद्योगिकियों के एकीकरण के लिए एक व्यापक रणनीति और समयबद्ध रोडमैप स्थापित करता है।
  • चार मूलभूत स्तंभ
    • क्वांटम संचार: इसमें क्वांटम कुंजी वितरण (QKD) का उपयोग करके लगभग अभेद्य संचार चैनल बनाए जाते हैं।
      • पारंपरिक एन्क्रिप्शन के विपरीत, क्वांटम सिग्नल को इंटरसेप्ट करने का कोई भी प्रयास इसकी स्थिति को बदल देता है, जिससे उपयोगकर्ताओं को तुरंत अलर्ट मिल जाता है और इस प्रकार सूचना सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
      • क्वांटम कुंजी वितरण (QKD) एक सुरक्षित संचार तकनीक है, जो क्वांटम यांत्रिकी के सिद्धांतों का उपयोग करके दो पक्षों के बीच एन्क्रिप्शन कुंजी उत्पन्न और साझा करती है।
    • क्वांटम कंप्यूटिंग: यह स्तंभ कॉम्प्लेक्स बैटलफील्ड सिमुलेशन उन्नत क्रिप्टो विश्लेषण (विरोधी कोड को तोड़ने) के लिए आवश्यक अपार प्रसंस्करण शक्ति पर केंद्रित है।
      • यह बड़े पैमाने पर सैन्य गतिविधियों के लिए रसद और आपूर्ति शृंखला प्रबंधन को अनुकूलित करता है।
    • क्वांटम संवेदन और मेट्रोलॉजी: ये प्रौद्योगिकियाँ अति-उच्च परिशुद्धता पहचान प्रदान करती हैं।
      • क्वांटम सेंसर गुरुत्वाकर्षण में सूक्ष्म परिवर्तनों (गुरुत्वाकर्षण मापन) को मापकर पनडुब्बियों का पता लगा सकते हैं या उन वातावरणों में स्थिति निर्धारण, नेविगेशन और समय निर्धारण (PNT) की अनुमति दे सकते हैं, जहाँ GPS सिग्नल जाम या अनुपलब्ध हैं।
    • क्वांटम सामग्री और उपकरण: इसमें सुपरकंडक्टिंग सर्किट और टोपोलॉजिकल इंसुलेटर जैसे विशेष हार्डवेयर का स्वदेशी विकास शामिल हैं।
      • ये अगली पीढ़ी के सेंसर, स्टील्थ-काउंटर सिस्टम और उच्च-क्षमता वाले रक्षा प्लेटफॉर्मों की आधारशिला हैं।

PWOnlyIASविशेष

क्वांटम कंप्यूटिंग के बारे में

  • क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम यांत्रिकी के सिद्धांतों का उपयोग करते हुए, पारंपरिक कंप्यूटरों की तुलना में मौलिक रूप से भिन्न तरीकों से सूचना को संसाधित करती है।
  • पारंपरिक और क्वांटम कंप्यूटिंग में अंतर: पारंपरिक कंप्यूटर डेटा की सबसे छोटी इकाई के रूप में बिट्स (जो 0 या 1 हो सकते हैं) का उपयोग करते हैं, जबकि क्वांटम कंप्यूटर क्वांटम बिट्स (क्यूबिट्स) का उपयोग करते हैं, जो एक साथ कई अवस्थाओं में मौजूद हो सकते हैं।
  • क्वांटम कंप्यूटिंग के मूल सिद्धांत
    • क्वांटम कंप्यूटिंग क्वांटम यांत्रिकी के तीन प्रमुख सिद्धांतों पर आधारित है:
      • सुपरपोजिशन: क्वांटम कंप्यूटिंग में, एक क्यूबिट एक ही समय में 0 और 1 दोनों के सुपरपोजिशन में मौजूद हो सकता है।
        • इसका अर्थ है कि एक क्यूबिट एक साथ कई अवस्थाओं का प्रतिनिधित्व कर सकता है, जिससे क्वांटम कंप्यूटर समानांतर रूप से बड़ी मात्रा में जानकारी संसाधित कर सकते हैं।
      • इनटैंगलमेंट: इनटैंगलमेंट एक ऐसी घटना है, जहाँ दो या दो से अधिक क्यूबिट आपस में इस प्रकार जुड़ जाते हैं कि एक क्यूबिट की अवस्था दूसरे क्यूबिट की अवस्था से सीधे संबंधित होती है, चाहे वे कितनी भी दूर क्यों न हों।
    • क्वांटम व्यतिकरण (Quantum Interference): क्वांटम कंप्यूटर सही समाधानों को बढ़ाने और गलत समाधानों को रद्द करने के लिए व्यतिकरण का उपयोग करते हैं।
    • क्यूबिट्स को सावधानीपूर्वक नियंत्रित करके, क्वांटम एल्गोरिदम सिस्टम को सबसे संभावित सही उत्तर की ओर निर्देशित कर सकते हैं।

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM)

  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत वर्ष 2023 में ₹6,000 करोड़ के परिव्यय (2023-31) के साथ शुरू की गई इस परियोजना का उद्देश्य 50-1,000 क्यूबिट क्वांटम कंप्यूटर विकसित करना, 2,000 किलोमीटर से अधिक की सुरक्षित क्वांटम संचार व्यवस्था स्थापित करना और राष्ट्रीय क्वांटम नेटवर्क का निर्माण करना है।
    • यह मिशन क्वांटम कंप्यूटिंग, क्रिप्टोग्राफी और संचार के क्षेत्र में भारत के नेतृत्व को मजबूत करता है और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के विजन के अनुरूप है।

मिलिट्री क्वांटम मिशन नीति ढाँचे की आवश्यकता क्यों है?

  • पारंपरिक तकनीकों से क्वांटम तकनीकों की ओर परिवर्तन महज एक तकनीकी उन्नयन नहीं है; यह 21वीं सदी के युद्ध की बदलती प्रकृति से प्रेरित एक रणनीतिक आवश्यकता है:
    • हार्वेस्ट नाऊ, डिक्रिप्ट लेटर’ (HNDL) खतरों का मुकाबला: दुश्मन वर्तमान में एन्क्रिप्टेड सैन्य डेटा को इंटरसेप्ट और स्टोर कर रहे हैं, ताकि फाल्ट-टाॅलरेंट क्वांटम कंप्यूटर उपलब्ध होने पर इसे डिक्रिप्ट किया जा सके।
    • दीर्घकालिक राज्य रहस्यों की सुरक्षा के लिए पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC) में तुरंत संक्रमण के लिए एक समर्पित नीति की आवश्यकता है।
    • पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC) से तात्पर्य उन क्रिप्टोग्राफिक एल्गोरिदम से है, जो क्वांटम कंप्यूटरों द्वारा हमलों से सुरक्षित रहने के लिए डिजाइन किए गए हैं।
  • स्टील्थ तकनीकों को निष्क्रिय करना: आधुनिक स्टील्थ विमानों और पनडुब्बियों के विरुद्ध पारंपरिक रडार और सोनार की क्षमता तेजी से सीमित होती जा रही है।
    • क्वांटम रडार और क्वांटम ग्रेविमेट्री में वर्तमान स्टील्थ प्लेटफॉर्मों को दृश्यमान बनाने की क्षमता है, जिससे एक ऐसी नीति की आवश्यकता होती है, जो भारत को इस पहचान की परिधि में आक्रामक पक्ष को बनाए रखने में मजबूत करे।
  • GPS-बाधित वातावरण में नेविगेशन: आधुनिक संघर्ष क्षेत्रों में अक्सर भारी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (EW) और GPS जैमिंग का खतरा रहता है।
    • MQM फ्रेमवर्क ऐसे पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग (PNT) सिस्टम को प्राथमिकता देता है, जो उपग्रहों पर निर्भर नहीं होते, जिससे “ब्लाइंड” क्षेत्रों में परिचालन निरंतरता सुनिश्चित होती है।
  • निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज करना (OODA Loop): उच्च तीव्रता वाले युद्ध में, ऑब्जर्व-ओरिएंट-डिसाइड-एक्ट (OODA) चक्र की गति महत्त्वपूर्ण होती है। क्वांटम कंप्यूटिंग ड्रोन और उपग्रहों से प्राप्त विशाल डेटासेट को वास्तविक समय में संसाधित कर सकती है, जिससे कमांडरों को पारंपरिक प्रणालियों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी प्राप्त होती है।
  • क्षेत्रीय भू-राजनीतिक परिवर्तनों का समाधान: चीन जैसे पड़ोसी देशों द्वारा क्वांटम-सुरक्षित उपग्रह संपर्क स्थापित किए जाने के बाद, भारत को “क्वांटम गैप” को रोकने के लिए एक औपचारिक ढाँचे की आवश्यकता है।
    • इससे हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) और इसकी सीमाओं पर रणनीतिक असंतुलन उत्पन्न हो सकता है।

मिलिट्री क्वांटम प्रौद्योगिकी में वैश्विक पहल

राष्ट्र/ब्लाक प्राथमिक पहल
संयुक्त राज्य अमेरिका पेंटागन की “क्वांटम एंड बैटलफील्ड इन्फॉर्मेशन डोमिनेंस” (2025)
चीन पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) का क्वांटम साइबर वारफेयर प्रोग्राम (2026)
यूरोपीय संघ क्वांटम सेंसिंग स्पेस एंड डिफेंस रोडमैप (2026)
नाटो इनॉगरल क्वांटम स्ट्रेटेजी  (2024)
यूनाइटेड किंगडम राष्ट्रीय क्वांटम प्रौद्योगिकी कार्यक्रम (NQTP) और रक्षा मंत्रालय (MoD) का क्वांटम रोडमैप (2023-2033)।

मिलिट्री क्वांटम मिशन (MQM) नीतिगत ढाँचे का महत्त्व

  • तकनीकी संप्रभुता: राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) के साथ समंजस्य स्थापित कर, MQM यह सुनिश्चित करता है कि भारतीय सशस्त्र बल महत्त्वपूर्ण सुरक्षा अवसंरचना के लिए विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं (OEMs) पर निर्भर न रहें, जिससे आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिले।
  • एकीकरण को मजबूत करना: यह ढाँचा सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच तालमेल पर जोर देता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि तीनों सेवाएँ मानकीकृत क्वांटम प्रोटोकॉल का उपयोग करें, जो एकीकृत थिएटर कमांड की सफलता के लिए महत्त्वपूर्ण है।
  • नागरिक-सैन्य एकीकरण: यह नीति रक्षा आवश्यकताओं और नागरिक विशेषज्ञता के बीच एक सेतु का निर्माण करती है। यह नवाचार को गति देने के लिए सरकार, शिक्षा जगत और निजी डीप-टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम के सदस्यों से गठित समर्पित शासी निकायों को प्रोत्साहित करती है।
  • सामरिक प्रतिरोध: ऐसे युग में जहाँ शत्रु हार्वेस्ट नाऊ, डिक्रिप्ट लेटर’ (HNDL) जैसी रणनीति अपना सकते हैं, यह नीति आने वाले दशकों तक राज्य के रहस्यों की रक्षा के लिए पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC) का रोडमैप प्रदान करती है।

कार्यान्वयन में चुनौतियाँ

  • अत्यधिक परिचालन आवश्यकताएँ: वर्तमान में अधिकांश क्वांटम प्रणालियों को क्रायोजेनिक शीतलन (लगभग पूर्ण शून्य तापमान) की आवश्यकता होती है।
    • युद्धक्षेत्र के उच्च कंपन और अत्यधिक तापमान वाले वातावरण के लिए इन प्रणालियों को पर्याप्त रूप से “मजबूत” बनाना एक बहुत बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती है।
  • क्वांटम कौशल अंतर’: क्वांटम भौतिकविदों और इंजीनियरों की वैश्विक स्तर पर कमी है।
    • सेना के भीतर एक विशेष “क्वांटम कैडर” का निर्माण करने में काफी समय और विशेष प्रशिक्षण अवसंरचना की आवश्यकता होगी।
  • लंबी विकास अवधि: क्वांटम प्रौद्योगिकी अभी प्रारंभिक अवस्था में है।
    • अनुसंधान और विकास (R&D) की उच्च लागत के कारण तत्काल “बैटलफील्ड रेडी” परिणाम प्राप्त नहीं हो सकते हैं, जिसके लिए निरंतर राजनीतिक और वित्तीय इच्छाशक्ति की आवश्यकता होगी।

आगे की राह

  • चरणबद्ध शुरुआत: सेना को एक क्रमिक रोडमैप का पालन करना चाहिए, जिसकी शुरुआत स्थानीय सुरक्षित लिंक के लिए अल्प-श्रेणी के QKD से हो और फिर लंबी दूरी के उपग्रह-आधारित क्वांटम नेटवर्क की ओर बढ़ा जाए।
  • स्वदेशी आपूर्ति शृंखला: वास्तविक आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए, भारत को क्वांटम हार्डवेयर के लिए आवश्यक घटकों, जैसे कि डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर और उच्च-वैक्यूम लेजर सिस्टम, के घरेलू विनिर्माण में निवेश करना होगा।
  • क्वांटम परीक्षण केंद्रों की स्थापना: रक्षा मंत्रालय को समर्पित परीक्षण रेंज स्थापित करनी चाहिए, जहाँ स्टार्टअप और रक्षा प्रयोगशालाएँ नकली युद्ध स्थितियों में क्वांटम सेंसर और संचार लिंक को सत्यापित कर सकती हैं।

निष्कर्ष

मिलिट्री क्वांटम मिशन नीति ढाँचा एक दूरदर्शी कदम है, जो इस बात को स्वीकार करता है कि युद्ध का भविष्य “क्वांटम क्षेत्र” में तय होगा। तीन सेनाओं के समन्वित दृष्टिकोण के माध्यम से इन चार स्तंभों को एकीकृत करके, भारत न केवल एक क्षेत्रीय शक्ति के रूप में, बल्कि दूसरी क्वांटम क्रांति में एक वैश्विक नेता के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, जिससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि उसके रक्षा बलों के पास 21वीं सदी की प्रतिरोधक क्षमता के लिए आवश्यक “तकनीकी शक्ति” मौजूद है।

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