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राष्ट्रीय युवा दिवस

Lokesh Pal January 15, 2026 01:55 21 0

संदर्भ

भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस प्रतिवर्ष 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद (1863-1902) की जयंती के उपलक्ष्य में और उनके आदर्शों के माध्यम से युवाओं को प्रेरित करने के लिए मनाया जाता है।

संबंधित तथ्य

  • वर्ष 1984 से भारत सरकार इस दिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाती आ रही है, ताकि युवाओं को विवेकानंद के दर्शन और आदर्शों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सके।
  • 12 जनवरी 2026 को स्वामी विवेकानंद की 163वीं जयंती है।

राष्ट्रीय युवा दिवस 2026 के बारे में

  • विषय: ‘स्वयं को जागृत करो, विश्व को प्रभावित करो’ (Ignite the Self, Impact the World) 
    • यह विषय स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं से प्रेरित एक सरल दो-चरणीय ढाँचा प्रस्तुत करता है:-
      • स्वयं को जागृत करना: आत्म-अनुशासन, चरित्र निर्माण, कौशल विकास और नैतिक उन्नति पर ध्यान केंद्रित करना।
      • विश्व को प्रभावित करना: अपनी व्यक्तिगत उत्कृष्टता को सामाजिक उत्तरदायित्व, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण में लगाना।

समसामयिक प्रासंगिकता

  • विकसित भारत @2047: राष्ट्रीय युवा दिवस भारत के युवाओं की आकांक्षाओं, ऊर्जा और 2047 तक एक विकसित भारत के निर्माण में उनकी जिम्मेदारियों पर विचार करने का अवसर प्रदान करता है।
  • संस्थागत ढाँचा
    • युवा मामले और खेल मंत्रालय (भारत सरकार) द्वारा संचालित और अंतर-मंत्रालयी सहयोग के माध्यम से इसे सशक्त किया गया।
    • इस रूपरेखा का उद्देश्य युवा भारतीयों को कल्याणकारी योजनाओं के मात्र प्राप्तकर्ता होने के स्थान पर शासन, विकास और सामाजिक परिवर्तन में भागीदार के रूप में सशक्त बनाना है।

युवावस्था की परिभाषा

  • संयुक्त राष्ट्र का परिप्रेक्ष्य: 15-24 वर्ष।
  • भारत (राष्ट्रीय युवा नीति, 2014): 15-29 वर्ष।
  • जनसांख्यिकीय लाभांश चरण: कार्यशील आयु वर्ग की बड़ी आबादी (15-64 वर्ष) छोटी आश्रित आबादी का समर्थन करती है → विकास की संभावना।
    • भारत की 65% से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है, जो अपार सामाजिक और आर्थिक संभावनाओं से परिपूर्ण है।
    • भारत में 15-29 वर्ष आयु वर्ग के 371 मिलियन युवा हैं, जो विश्व में सबसे बड़ी युवा आबादी है।

युवा बेरोजगारी दर

  • भारत में युवा बेरोजगारी दर 20-22% (NSO, 2024-25) होने का अनुमान है, जो समग्र बेरोजगारी दर (7%) से अधिक है।
  • शहरी युवाओं में बेरोजगारी दर (26%) ग्रामीण युवाओं (17%) की तुलना में अधिक है, जिसका कारण कौशल की कमी और शिक्षा-रोजगार के बीच का अंतर है।

युवा सशक्तिकरण के लिए सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम

  • शिक्षा एवं विद्यालय स्तर पर युवा विकास
    • राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 (NEP 2020): एक व्यवस्थित सुधार ढाँचा,  जिसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक सार्वभौमिक विद्यालय नामांकन, व्यावसायिक शिक्षा का प्रारंभिक एकीकरण, कौशल विकास, आलोचनात्मक सोच और बहुविषयक शिक्षा को बढ़ावा देना है।
    • पीएम स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम-श्री): भारत भर में NEP के अनुरूप 14,500 से अधिक मॉडल स्कूलों को विकसित करने के लिए केंद्र प्रायोजित योजना।
      • यह अनुभवात्मक शिक्षा, डिजिटल कक्षाओं, व्यावसायिक विकास, पर्यावरण जागरूकता और नेतृत्व उन्मुख शिक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रही है ताकि स्कूली स्तर से ही भविष्य के लिए तैयार युवाओं का पोषण किया जा सके।
  • युवा सहभागिता, नागरिक सहभागिता और नेतृत्व
    • राष्ट्रीय युवा नीति (NYP), 2014: 15-29 आयु वर्ग के युवाओं के लिए एक व्यापक युवा विकास ढाँचा, जिसका उद्देश्य शिक्षा, कौशल, रोजगार क्षमता, उद्यमिता, स्वास्थ्य, नेतृत्व और नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देना है, ताकि भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को एक उत्पादक राष्ट्रीय संपत्ति में परिवर्तित किया जा सके।
    • प्रमुख राज्य युवा नीतियाँ: कई राज्यों ने राष्ट्रीय युवा नीति, 2014 के अनुरूप समर्पित राज्य युवा नीतियाँ निर्मित की हैं।
      • उदाहरण: राजस्थान युवा नीति (2019), महाराष्ट्र राज्य युवा नीति (2021), तमिलनाडु युवा नीति (2023), कर्नाटक युवा नीति (2022), केरल युवा नीति (मसौदा)।
    • मेरा युवा भारत (MY भारत): युवा मामले और खेल मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त, प्रौद्योगिकी-आधारित राष्ट्रीय युवा मंच, जो एक एकीकृत डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से स्वयंसेवा, अनुभवात्मक शिक्षा, नेतृत्व विकास और कौशल विकास को एकीकृत करता है।
      • युवा शक्ति से जन भागीदारी’ के सिद्धांत पर आधारित यह कार्यक्रम, विकसित भारत @2047 के विजन के तहत युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदार के रूप में स्थापित करता है।
    • राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS): यह एक प्रमुख युवा कार्यक्रम है जो सामुदायिक सेवा के माध्यम से व्यक्तित्व विकास को बढ़ावा देता है।
      • यह विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और विद्यालयों के छात्रों में नागरिक जिम्मेदारी, सामाजिक जागरूकता, राष्ट्रीय एकता और नैतिक नेतृत्व को प्रोत्साहित करता है।
    • विकसित भारत युवा नेता संवाद (VBYLD): यह युवाओं के नेतृत्व में नीतिगत विचारों और नवाचारों के लिए एक नया राष्ट्रीय मंच है।
      • यह प्रतिस्पर्द्धी ‘चैलेंज ट्रैक’ और व्यापक डिजिटल आउटरीच के माध्यम से हजारों युवा नेतृत्त्वकर्ताओं को जोड़ता है, जिसका वार्षिक समापन राष्ट्रीय युवा दिवस पर होता है।
  • ग्रामीण युवा एवं समावेशी कौशल विकास
    • दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY): राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के अंतर्गत एक प्रमुख ग्रामीण कौशल विकास कार्यक्रम।
      • इसका उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को उद्योग से जुड़ा प्रशिक्षण और सुनिश्चित रोजगार प्रदान करना है, जिसकी रोजगार दर लगभग 65% है, जिससे ग्रामीण आय में विविधता आती है।
    • ग्रामीण स्वरोजगार एवं प्रशिक्षण संस्थान (RSETIs): बैंकों द्वारा संचालित एक उद्यमिता प्रशिक्षण प्रणाली जो निःशुल्क आवासीय कौशल प्रशिक्षण, प्रशिक्षण के बाद मार्गदर्शन और ऋण सहायता प्रदान करती है।
      • यह ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार और सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने में सक्षम बना रही है।
    • जन शिक्षण संस्थान (JSS): एक अनौपचारिक, समुदाय-आधारित कौशल विकास कार्यक्रम जो निरक्षर, स्कूल छोड़ने वाले, महिलाओं और हाशिए पर स्थित युवाओं को उनके घर पर ही व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करता है, जिससे कौशल विकास प्रणाली में समावेशिता मजबूत होती है।
  • कौशल विकास एवं रोजगार क्षमता
    • स्किल इंडिया मिशन (SIM): यह एक राष्ट्रीय मिशन है जो प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY 4.0), राष्ट्रीय शिक्षुता प्रोत्साहन योजना (NAPS) और जन शिक्षण संस्थान (JSS) जैसी एकीकृत योजनाओं के माध्यम से कौशल, पुनर्कौशल और उन्नत कौशल प्रशिक्षण प्रदान करता है।
      • यह युवाओं के कौशल को श्रम बाजार की बदलती मांगों के अनुरूप ढाल रहा है।
    • प्रधानमंत्री कौशल विकास एवं रोजगार क्षमता परिवर्तन उन्नत आईटीआई (PM-SETU): यह एक प्रमुख पहल है जिसके तहत सरकार के स्वामित्व वाले और उद्योग द्वारा प्रबंधितहब-एंड-स्पोक’ मॉडल के माध्यम से 1,000 सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।
      • यह उद्योग-प्रासंगिक प्रशिक्षण और भविष्य के लिए तैयार व्यावसायिक शिक्षा सुनिश्चित कर रहा है।
  • रक्षा, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण
    • अग्निपथ योजना: यह 17.5 से 21 वर्ष की आयु के युवाओं के लिए चार वर्षीय सैन्य सेवा कार्यक्रम है, जिसके तहत अग्निवीरों की भर्ती सशस्त्र बलों में की जाती है ताकि उनमें अनुशासन, नेतृत्व और तकनीकी कौशल विकसित हो सकें, साथ ही सेवा के बाद सुव्यवस्थित पुनर्वास और रोजगार सहायता प्रदान की जा सके।
  • रोजगार, उद्यमिता और आर्थिक सशक्तिकरण
    • प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना: यह एक व्यापक रोजगार सृजन पहल है जिसका उद्देश्य दो वर्षों में 3.5 करोड़ रोजगार सृजित करना है।
      • यह योजना नव नियुक्त युवाओं और नियोक्ताओं दोनों को औपचारिक रोजगार सृजन में तेजी लाने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है।
    • स्टार्टअप इंडिया पहल: यह एक प्रमुख उद्यमिता कार्यक्रम है जो अनुपालन में आसानी, वित्तीय सहायता, इनक्यूबेशन और बाजार संपर्कों के माध्यम से एक मजबूत स्टार्टअप और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देता है, जिसमें पहली पीढ़ी के उद्यमियों और टियर-II और टियर-III शहरों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
    • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY): यह एक बिना गारंटी वाली ऐतिहासिक ऋण योजना है जो सूक्ष्म और लघु उद्यमों को ₹20 लाख तक का ऋण प्रदान करती है, जिससे युवाओं, महिलाओं और जमीनी स्तर के उद्यमियों को सशक्त बनाया जा रहा है।
  • खेल, उत्कृष्टता और युवा नेतृत्व
    • खेलो इंडिया कार्यक्रम: एक राष्ट्रीय पहल, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर खेल संस्कृति को पुनर्जीवित करना, युवा प्रतिभाओं की पहचान करना और उन्हें व्यवस्थित प्रशिक्षण, बुनियादी ढाँचा और प्रतियोगिता का अनुभव प्रदान करना है।
    • टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS): एक विशिष्ट एथलीट विकास कार्यक्रम, जो भारत के शीर्ष पदक विजेताओं को अनुकूलित प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय अनुभव, कोचिंग और वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
  • स्वास्थ्य, फिटनेस और समग्र कल्याण
    • फिट इंडिया मूवमेंट: यह एक राष्ट्रव्यापी व्यवहार परिवर्तन अभियान है जो रविवार को साइकिल चलाना, फिट इंडिया स्कूल प्रमाणन, फिटनेस प्रतिज्ञा और डिजिटल फिटनेस ट्रैकिंग जैसी पहलों के माध्यम से दैनिक फिटनेस और सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा देता है।
    • राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK): यह एक व्यापक किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम है जो पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, मादक द्रव्यों के दुरुपयोग, यौन और प्रजनन स्वास्थ्य एवं गैर-संचारी रोगों को निवारक और समुदाय-आधारित दृष्टिकोण के माध्यम से संबोधित करता है।
    • युवा आध्यात्मिक शिखर सम्मेलन और काशी घोषणा: यह एक युवा-नेतृत्व वाला राष्ट्रीय रोडमैप है जो मानसिक स्वास्थ्य, मूल्य-आधारित नेतृत्व और नशामुक्त जीवन पर जोर देता है, जो विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा की परिकल्पना के अनुरूप है।

विकसित भारत की राह में भारत के युवाओं के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियाँ

  • विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी होने के बावजूद, भारत को जनसांख्यिकीय लाभांश का पूर्ण लाभ प्राप्त करने में गहरी संरचनात्मक, सामाजिक और संस्थागत बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
  • आर्थिक और रोजगार संबंधी चुनौतियाँ
    • NEET की अधिक आबादी: भारत के लगभग 30% युवा (15-29 वर्ष) शिक्षा, रोजगार या प्रशिक्षण (NEET) में नहीं हैं, जो वैश्विक औसत से कहीं अधिक है। यह उत्पादक मानव पूंजी के कम उपयोग को दर्शाता है।
    • प्रवेश स्तर की नौकरियों की कमी: स्वचालन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एजेंटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) नियमित शुरुआती नौकरियों को कम कर रहे हैं। परिणामस्वरूप, युवाओं को अनुभव प्राप्त करने के लिए आवश्यक पहली नौकरी के अवसर खोजने में कठिनाई हो रही है।
    • कौशल विषमता: हालाँकि रोजगार क्षमता में सुधार हुआ है और यह 56.35% हो गई है (भारत कौशल रिपोर्ट 2026), लगभग 44% स्नातक अभी भी नौकरी के लिए तैयार नहीं हैं।
      • AI, डिजिटल और हरित कौशल की मांग आपूर्ति से कहीं अधिक तेजी से बढ़ रही है।
    • अनौपचारिक और गिग रोजगार: 90% से अधिक युवा श्रमिक अनौपचारिक या गिग-आधारित काम में लगे हुए हैं, जो सीमित नौकरी सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और दीर्घकालिक कैरियर विकास प्रदान करता है।
  • स्वास्थ्य और कल्याण संबंधी चुनौतियाँ
    • मानसिक स्वास्थ्य संकट: 15-39 वर्ष की आयु के भारतीयों में आत्महत्या मृत्यु का प्रमुख कारण है। लगभग 7 में से 1 किशोर मानसिक स्वास्थ्य समस्या से ग्रस्त है।
    • प्रमुख कारक: शैक्षणिक दबाव, नौकरी की असुरक्षा, सोशल मीडिया पर दूसरों से तुलना और कमजोर पारिवारिक सहयोग प्रणाली।
    • नशीली दवाओं के दुरुपयोग का जोखिम: भारत की प्रमुख नशीली दवाओं के उत्पादक क्षेत्रों से निकटता ने नशीली दवाओं की तस्करी और लत के जोखिम को बढ़ा दिया है, जिससे विशेष रूप से कमजोर युवा आबादी प्रभावित होती है।
  • सामाजिक, डिजिटल और नागरिक चुनौतियाँ
    • डिजिटल क्षमता का अंतर: स्मार्टफोन की उपलब्धता बढ़ी है, लेकिन कई युवाओं में ऑनलाइन शिक्षा, दूरस्थ कार्य और उच्च-मूल्य वाले रोजगार के लिए आवश्यक उन्नत डिजिटल कौशल की कमी है।
    • लैंगिक असमानता: लैंगिक डिजिटल विभाजन अभी भी व्यापक है। विशेषकर शहरी क्षेत्रों में युवा महिलाओं की बेरोजगारी दर उच्च बनी हुई है, जिससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी सीमित हो जाती है।
    • शासन में युवाओं की सीमित भूमिका: सबसे बड़ा मतदाता समूह होने के बावजूद, निर्णय लेने, नेतृत्व करने और नीति निर्माण प्रक्रियाओं में युवाओं का प्रतिनिधित्व कम है।

स्वामी विवेकानंद के बारे में

  • प्रारंभिक जीवन और बौद्धिक विकास
    • जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि: नरेंद्रनाथ दत्त का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में एक ऐसे परिवार में हुआ, जहाँ पारंपरिक भारतीय मूल्यों के साथ-साथ आधुनिक पश्चिमी शिक्षा का भी समावेश था।
    • बौद्धिक जिज्ञासा: बचपन से ही उन्होंने दर्शन, इतिहास, धर्म और तार्किक चिंतन में उल्लेखनीय रुचि दिखाई और विभिन्न विषयों का व्यापक अध्ययन किया।
    • आध्यात्मिक खोज: किशोरावस्था के दौरान, उन्हें गहन आध्यात्मिक संशय का अनुभव हुआ और उन्होंने प्रसिद्ध रूप से धार्मिक नेताओं से पूछा कि क्या उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से ईश्वर को देखा है। यह उनके व्यक्तिगत आध्यात्मिक अनुभव की खोज को दर्शाता है, न कि मान्यताओं को।
    • मन-शरीर अनुशासन: उन्होंने शारीरिक शक्ति और मानसिक दृढ़ता के विकास पर जोर दिया, जिससे उनके “शक्ति और चरित्र” के दर्शन की नींव पड़ी, जिसे वे व्यक्तिगत और राष्ट्रीय प्रगति के लिए आवश्यक मानते थे।
  • आध्यात्मिक जागृति और मिशन
    • सेवा के लिए त्याग: उन्होंने संसार से विमुख होने के लिए नहीं, बल्कि मानवता की सेवा के लिए संन्यासी जीवन चुना, जो उनके आदर्श वाक्य में समाहित है: “आत्मनो मोक्षार्थं जगत हिताय च” – “आत्म-साक्षात्कार और जगत के कल्याण के लिए।”
    • रामकृष्ण संघ की स्थापना: वर्ष 1886 में अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस के निधन के बाद, उन्होंने एक सन्यासी संघ का गठन किया, जो अंततः विश्व प्रसिद्ध रामकृष्ण मिशन के रूप में विकसित हुआ।
    • वास्तविक भारत की खोज: उन्होंने एक घुमंतू साधु के रूप में पूरे भारत की व्यापक यात्रा की, जहाँ उन्होंने गरीबी, सामाजिक पिछड़ेपन और जनता के बीच आत्मविश्वास की कमी को देखा, जिसने उन्हें युवा सशक्तिकरण, शिक्षा और राष्ट्रीय पुनरुत्थान पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया।
    • युवाओं के लिए संदेश: उन्होंने युवा भारतीयों से जागृत होने और कार्य करने का आग्रह किया, और प्रसिद्ध रूप से घोषणा की: उठो, जागो, और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्र की प्रगति उसके युवाओं की ऊर्जा, साहस और नैतिक शक्ति पर निर्भर करती है।
  • दर्शन और योगदान
    • नव-वेदांत: आधुनिक जगत के लिए वेदांत और योग की पुनर्व्याख्या करते हुए, भौतिक प्रगति के साथ आध्यात्मिकता के सामंजस्य पर बल दिया।
    • सार्वभौमिक वेदांत: इसका सिद्धांत सार्वभौमिक है, जो संप्रदाय या धार्मिक सीमाओं से परे है, और अंतरधार्मिक सहिष्णुता और वैश्विक सद्भाव को बढ़ावा देता है।
    • व्यावहारिक आध्यात्मिकता: कर्मों के माध्यम से नैतिक जीवन जीने को प्रोत्साहित किया, और कर्मकांडों के बजाय सेवा, करुणा, अनुशासन और नैतिक अखंडता पर बल दिया।
    • चार योग: आध्यात्मिकता को सरल और सुलभ मार्गों में प्रस्तुत किया।
      • कर्म योग – निस्वार्थ कर्म, सेवा का एक रूप
      • भक्ति योग – उच्चतर सिद्धांत के प्रति समर्पण और निष्ठा
      • ज्ञान योग – ज्ञान, आत्म-अन्वेषण और बौद्धिक विवेक
      • राज योग – ध्यान और मन एवं इंद्रियों पर नियंत्रण
    • वैज्ञानिक दृष्टिकोण: उन्होंने भारतीय ग्रंथों के तर्कसंगत अध्ययन पर बल दिया, प्राचीन ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक समझ के साथ एकीकृत करने का समर्थन किया और आध्यात्मिक सिद्धांतों को वास्तविक जीवन की चुनौतियों पर लागू करने का समर्थन किया।
  • वैश्विक मान्यता
    • विश्व धर्म संसद, शिकागो (1893)
      • उन्होंने हिंदू दर्शन, वेदांत और योग को वैश्विक दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया और भारत के आध्यात्मिक राजदूत के रूप में मान्यता प्राप्त की।
      • उन्होंने धार्मिक सहिष्णुता, मानवता की एकता और सार्वभौमिक बंधुत्व को बढ़ावा दिया और सत्य के बहुलवादी स्वरूप पर प्रकाश डाला।
      • उन्होंने राष्ट्रीय आत्मसम्मान को बढ़ाया और भारत को एक औपनिवेशिक प्रजा के बजाय सभ्यता में योगदान देने वाले देश के रूप में प्रस्तुत किया।
    • अन्य अंतर्राष्ट्रीय संबोधन: उन्होंने लंदन हिंदू एसोसिएशन (1896) और अन्य वैश्विक मंचों पर भारतीय आध्यात्मिकता, नैतिक सिद्धांतों और नैतिक नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए भाषण दिए।
  • प्रमुख साहित्यिक कृतियाँ
    • राज योग: ध्यान, मन पर नियंत्रण और आत्म-अनुशासन पर व्यवस्थित मार्गदर्शन
    • कर्म योग: निस्वार्थ कर्म के दर्शन और आध्यात्मिक विकास में इसकी भूमिका का अन्वेषण
    • ज्ञान योग: ज्ञान और आत्म-साक्षात्कार के मार्ग का स्पष्टीकरण
    • कोलंबो से अल्मोड़ा तक व्याख्यान: युवाओं को प्रेरित करने वाले भाषण, जिनमें राष्ट्रीय गौरव और चरित्र निर्माण पर जोर दिया जाता है।
    • भगवद् गीता की व्याख्या: प्राचीन ज्ञान को व्यावहारिक, आधुनिक संदर्भों में प्रस्तुत करना, जो नेतृत्व, नैतिकता और व्यक्तिगत विकास के लिए उपयोगी है।
  • संबद्ध संगठन
    • रामकृष्ण मिशन (1897): आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, युवा सशक्तिकरण और राहत कार्यों को बढ़ावा देता है।
    • बेलूर मठ (1899): रामकृष्ण मिशन का आध्यात्मिक मुख्यालय और प्रशासनिक केंद्र।
    • अद्वैत आश्रम, मायावती: अद्वैत वेदांत के अध्ययन और प्रसार, आध्यात्मिक साहित्य के प्रकाशन और ध्यान साधनाओं के आयोजन पर केंद्रित है।
    • वेदांत सोसायटी (वैश्विक): विश्व भर के आध्यात्मिक साधकों के लिए वेदांत का अध्ययन करने और आत्म-विकास में संलग्न होने के लिए मंच स्थापित करता है।
  • भारतीय राष्ट्रवाद पर प्रभाव
    • आध्यात्मिक राष्ट्रवाद: स्वामी विवेकानंद ने भारतीय राष्ट्रवाद को वेदांत में निहित एक आध्यात्मिक और सभ्यतागत परियोजना के रूप में परिकल्पित किया, जहाँ राष्ट्रीय पुनरुत्थान नैतिक शक्ति, आंतरिक जागृति और सामूहिक आत्मविश्वास से अविभाज्य था।
    • सांस्कृतिक राष्ट्रीय चेतना: भारत की आध्यात्मिक विरासत को मानवता के लिए उसका सबसे बड़ा योगदान बताते हुए, उन्होंने हीनता की औपनिवेशिक धारणाओं को चुनौती दी और भारतीयों में सांस्कृतिक गौरव, मनोवैज्ञानिक विऔपनिवेशीकरण और राष्ट्रीय आत्मसम्मान को बढ़ावा दिया।
    • मातृभूमि-केंद्रित देशभक्ति: उन्होंने राष्ट्र को भारत माता के रूप में प्रस्तुत किया और मातृभूमि के प्रति भक्ति को सर्वोच्च पूजा बताया, जिससे राष्ट्रवाद एक पवित्र नैतिक कर्तव्य में परिवर्तित हो गया जो जनभावनात्मक प्रतिबद्धता को जुटाने में सक्षम था।
    • मानव-निर्माण राष्ट्रवाद: विवेकानंद ने तर्क दिया कि राष्ट्रों का निर्माण सशक्त व्यक्तियों द्वारा होता है, और उन्होंने मानव-निर्माण शिक्षा का समर्थन किया जो शारीरिक शक्ति, नैतिक साहस, बौद्धिक स्पष्टता और आध्यात्मिक आत्मविश्वास को राष्ट्रीय शक्ति की नींव के रूप में जोड़ती है।
    • कर्म योग को राष्ट्र सेवा के रूप में: उन्होंने कर्म योग को समाज की निस्वार्थ सेवा के रूप में पुनर्परिभाषित किया, आध्यात्मिकता को व्यक्तिगत मोक्ष से सामाजिक उत्थान की ओर मोड़ा, और इस विचार को समाहित किया कि जनसेवा ही राष्ट्रसेवा है।
    • स्वतंत्रता आंदोलन का प्रेरक सेतु: उनके विचारों ने भारत के सभ्यतागत अतीत और राजनीतिक भविष्य के बीच एक दार्शनिक सेतु का कार्य किया, जिसने सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी, श्री अरबिंदो और बाल गंगाधर तिलक जैसे वैचारिक रूप से भिन्न नेताओं को गहराई से प्रभावित किया।
  • आधुनिक प्रासंगिकता और राष्ट्रीय युवा दिवस
    • राष्ट्रीय युवा दिवस (12 जनवरी) उनके जन्म और भारत के युवाओं के लिए उनके अद्वितीय दृष्टिकोण की स्मृति में मनाया जाता है।
    • युवा सशक्तिकरण: उन्होंने आत्मविश्वास, साहस, दृढ़ता और समाज में सक्रिय योगदान को प्रोत्साहित किया; उनका दर्शन उद्यमशीलता, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण के आधुनिक लक्ष्यों का आधार है।
    • सामाजिक उत्तरदायित्व: उन्होंने नैतिक कार्यों को राष्ट्रीय कल्याण से जोड़ते हुए, समाज सेवा को आध्यात्मिक साधना के रूप में बढ़ावा दिया।
    • लोकतंत्र के साथ सामंजस्य: उन्होंने विविधता में एकता, समावेशिता और बहुलवाद की वकालत की, और आधुनिक भारत की नैतिक और सांस्कृतिक नींव का समर्थन किया।

निष्कर्ष

राष्ट्रीय युवा दिवस 2026 भारत के युवाओं की ऊर्जा, रचनात्मकता और नेतृत्व का उत्सव मनाता है। MY भारत, राष्ट्रीय सामाजिक सेवा (NSS), कौशल विकास और उद्यमिता पहलों के माध्यम से, युवा नागरिकों को राष्ट्र निर्माण, सामाजिक उत्तरदायित्व, नवाचार और समावेशी प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए सशक्त बनाया जाता है, ताकि वे विकसित भारत 2047 की ओर अग्रसर हो सकें।

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