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राष्ट्रीय युवा दिवस 2026

Lokesh Pal January 13, 2026 03:49 9 0

संदर्भ

प्रधानमंत्री ने स्वामी विवेकानंद की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

राष्ट्रीय युवा दिवस (12 जनवरी) के बारे में

  • राष्ट्रीय युवा दिवस प्रतिवर्ष 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
  • पहली बार वर्ष 1985 में मनाया गया।

  • उद्देश्य: युवाओं को प्रेरित करना, शिक्षा को बढ़ावा देना, चरित्र निर्माण और सामुदायिक सेवा को प्रोत्साहित करना।
  • नोडल मंत्रालय: युवा कार्य और खेल मंत्रालय।
  • दृष्टिकोण: युवाओं को विकास के निष्क्रिय लाभार्थी नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार के रूप में स्थापित करने हेतु अंतर-मंत्रालयी सहयोग।
  • यह अवसर भारत की युवा-केंद्रित नीतियों को रेखांकित करता है, यह मानते हुए कि भारत की 65 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है, जो युवाओं को विकसित भारत@2047 के आधार के रूप में स्थापित करता है।

स्वामी विवेकानंद (1863–1902) के बारे में

  • जन्म एवं प्रारंभिक जीवन: स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी, 1863 को कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) में एक बंगाली कायस्थ परिवार में नरेंद्र नाथ दत्त के रूप में हुआ।
  • गुरु: श्री रामकृष्ण परमहंस।
  • ग्रहण किया गया नाम: वर्ष 1893 में खेतड़ी के महाराजा अजीत सिंह के अनुरोध पर ‘विवेकानंद’ नाम अपनाया।
  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस: उन्हें आधुनिक भारत का निर्माता’ कहा।
  • निधन: स्वामी विवेकानंद का निधन 4 जुलाई, 1902 को 39 वर्ष की आयु में बेलूर मठ, पश्चिम बंगाल में हुआ।

धर्म और आध्यात्म की दृष्टि

  • विचारों का समन्वय: श्री रामकृष्ण की आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि को अद्वैत वेदांत के साथ संयोजित किया।
  • चेतना का विज्ञान के रूप में धर्म: धर्म को सत्य की सार्वभौमिक, अनुभवजन्य अनुभूति के रूप में देखा।
  • सार्वभौमिक धर्म: अंधविश्वास, मतांधता, असहिष्णुता और पुरोहितवाद से मुक्त।
  • जीवन का लक्ष्य: परम स्वतंत्रता, ज्ञान और आनंद की प्राप्ति।
  • आत्म-साक्षात्कार का मार्ग: आत्मा की दिव्यता को साकार करने हेतु निष्काम कर्म, भक्ति और मानसिक अनुशासन पर बल।

नैतिक और सामाजिक दर्शन

  • नैतिक सिद्धांत: स्वामी विवेकानंद ने आत्मा की अंतर्निहित पवित्रता और एकता पर आधारित नैतिकता का प्रस्ताव रखा।
  • नैतिक आधार: उनका विश्वास था कि नैतिकता इस बोध से उत्पन्न होती है कि सभी प्राणी ब्रह्म स्वरुप में एक हैं।
  • सेवा-भाव: प्रेम, करुणा और मानव-सेवा उनके नैतिक दृष्टिकोण के केंद्र में थे।
  • शिक्षा: उन्होंने आर्थिक उन्नति के लिए लौकिक शिक्षा और नैतिक शक्ति हेतु आध्यात्मिक शिक्षा के महत्त्व पर बल दिया।
  • अंत्योदय: उनका प्रतिपादन था कि वास्तविक विकास तभी संभव है, जब अंतिम और सबसे गरीब व्यक्ति का उत्थान हो।

प्रमुख योगदान और संस्थाएँ

  • शिकागो भाषण (1893): विश्व धर्म संसद में उनके भाषण ने सार्वभौमिक भाईचारा और सहिष्णुता पर जोर दिया।
  • रामकृष्ण मिशन: उन्होंने वर्ष 1897 में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की, जिसका उद्देश्य आध्यात्मिकता को सामाजिक सेवा के साथ जोड़ना था।
  • वेदांत सोसायटी: उन्होंने वर्ष 1894 में न्यूयॉर्क में वेदांत सोसायटी की स्थापना की, ताकि भारतीय दर्शन को विदेशों में प्रसारित किया जा सके।

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