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संक्षिप्त समाचार

Lokesh Pal March 26, 2026 05:30 54 0

गर्भ-इनि (GARBH-INi)

गर्भ-इनि (Interdisciplinary Group for Advanced Research on Birth Outcomes/GARBH-INi) एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य स्वदेशी और AI-आधारित अनुसंधान के माध्यम से समय से पूर्व के प्रसव को कम करना है।

गर्भ-इनि (GARBH-INi) के बारे में

  • प्रारंभ: इसकी शुरुआत वर्ष 2015 में एक राष्ट्रीय मातृ स्वास्थ्य अनुसंधान पहल के रूप में की गई।
  • कार्यान्वयन: इसे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा संचालित किया जाता है।
  • अध्ययन का दायरा: इस कार्यक्रम ने लगभग 12,000 महिलाओं का भारत का सबसे बड़ा गर्भावस्था समूह तैयार किया है, जिससे मातृ स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए जनसंख्या-विशिष्ट डेटा प्राप्त होता है।
  • प्रौद्योगिकी एकीकरण: यह पहल क्लिनिकल एपिडेमियोलॉजी, मल्टी-ओमिक्स बायोमार्कर्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को एकीकृत कर गर्भावस्था से जुड़े जोखिमों की व्यक्तिगत भविष्यवाणी सक्षम बनाती है।
  • मुख्य परिणाम: इसके प्रमुख परिणामों में AI-आधारित गर्भावस्था डेटिंग मॉडल, माइक्रोबायोम-आधारित पूर्वानुमान, त्वरित निदान और आनुवंशिक मार्कर्स शामिल हैं, जो अकाल प्रसव के जोखिम की प्रारंभिक पहचान में सहायक हैं।
  • डिजिटल एवं अनुसंधान मंच: इसने गर्भ-इनि-दृष्टि प्लेटफॉर्म स्थापित किया है, जो डेटा साझाकरण, सहयोग और वैश्विक वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देता है।
  • गर्भ-इनि (GARBH-INi)–आनंदी माँ: यह कार्यक्रम का एक व्यावहारिक अंग है, जिसका उद्देश्य अनुसंधान परिणामों को वास्तविक मातृ स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों में लागू करना है।
  • महत्त्व: GARBH-INi भारत में अकाल प्रसव की उच्च दर की समस्या का समाधान करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण है, जो नवजात मृत्यु दर और दीर्घकालिक स्वास्थ्य जटिलताओं का एक प्रमुख कारण है।

ग्लोबई नेटवर्क (GlobE Network)

भारत ने नई दिल्ली में भ्रष्टाचार विरोधी कानून प्रवर्तन प्राधिकरणों के वैश्विक परिचालन नेटवर्क (GlobE Network) की 12वीं संचालन समिति की बैठक की मेजबानी की।

12वीं संचालन समिति बैठक के मुख्य बिंदु

  • संपत्ति की वसूली पर जोर: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस बात पर बल दिया कि संपत्ति की वसूली भ्रष्टाचार-रोधी प्रयासों की वास्तविक सफलता का मापदंड है।
    • उदाहरण: भारत ने अब तक 5.6 बिलियन डॉलर से अधिक की संपत्तियों की वसूली की है।
  • भारतीय एजेंसियों की भूमिका: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने इंटरपोल के नेशनल सेंट्रल ब्यूरो के रूप में अपनी भूमिका को रेखांकित किया, जो वैश्विक सहयोग को सुगम बनाता है। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) के तहत अपराध से अर्जित संपत्तियों पर कार्य करता है।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता: बैठक में यह रेखांकित किया गया कि भ्रष्टाचार अब अंतरराष्ट्रीय और प्रौद्योगिकी-आधारित हो गया है, जिसके लिए वास्तविक समय और समन्वित वैश्विक प्रवर्तन आवश्यक है।
  • सुरक्षित संचार मंच का उपयोग: ग्लोबई नेटवर्क का सुरक्षित संचार मंच (SCP) सदस्य एजेंसियों के बीच एन्क्रिप्टेड और वास्तविक समय में सूचना साझा करने की सुविधा प्रदान करता है।
  • रणनीतिक विचार-विमर्श: सदस्य देशों ने संचालन प्राथमिकताओं, रणनीतिक दिशा तथा वैश्विक भ्रष्टाचार-रोधी ढाँचों को मजबूत करने पर चर्चा की।

ग्लोबई नेटवर्क के बारे में

  • ग्लोबई नेटवर्क एक वैश्विक मंच है, जिसमें भ्रष्टाचार-रोधी कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ शामिल हैं। इसका उद्देश्य प्रत्यक्ष सहयोग के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अपराधों से मुकाबला करना है।
  • उत्पत्ति: इसकी परिकल्पना रियाद पहल (Riyadh Initiative, 2020) के अंतर्गत सऊदी अरब की G20 अध्यक्षता के दौरान की गई थी तथा इसे वर्ष 2021 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के भ्रष्टाचार-विरोधी विशेष सत्र (UNGASS) में औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया।
  • सदस्य: यह संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों और संयुक्त राष्ट्र भ्रष्टाचार विरोधी अभिसमय (UNCAC) के पक्षकार देशों के लिए खुला है। इसमें 135 से अधिक देश और 250 से अधिक एजेंसियाँ शामिल हैं।
    • भारत की भागीदारी: भारत ने वर्ष 2022 में ग्लोबई नेटवर्क में शामिल हुआ, जिसमें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) इसकी दो नामित सदस्य एजेंसियाँ हैं।
  • सचिवालय: इसका समर्थन संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (UNODC) द्वारा किया जाता है, जिसका मुख्यालय वियना, ऑस्ट्रिया में स्थित है।
  • उद्देश्य
    • त्वरित सूचना आदान-प्रदान और खुफिया साझाकरण को बढ़ावा देना।
    • सीमापार जाँच और संपत्ति की वसूली को सुदृढ़ करना।
    • क्षमता निर्माण और सर्वोत्तम प्रथाओं को प्रोत्साहित करना।
  • संरचना: एक पूर्ण सत्र और संचालन समिति द्वारा संचालित, जो रणनीति और परिचालन का मार्गदर्शन करती है।
  • महत्त्व
    • पारस्परिक कानूनी सहायता जैसी औपचारिक प्रक्रियाओं में होने वाली देरी को दरकिनार करते हुए, एजेंसियों के बीच सीधा सहयोग संभव बनाता है।
    • यह UNCAC के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धता को मजबूत करता है तथा जटिल, अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार से निपटने की प्रभावशीलता को बढ़ाता है।

विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट, 2025

IQAir द्वारा जारी विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट, 2025 के अनुसार, PM2.5 स्तरों में मामूली गिरावट के बावजूद भारत विश्व का छठा सबसे प्रदूषित देश बन गया है।

विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट, 2025  के मुख्य निष्कर्ष

  • भारत की रैंकिंग और PM2.5 प्रवृत्ति: भारत वैश्विक स्तर पर छठे स्थान पर रहा, जहाँ जनसंख्या-भारित औसत PM2.5 स्तर 48.9 µg/m³ दर्ज किया गया, जो पिछले तीन वर्षों में धीरे-धीरे घटने की प्रवृत्ति दर्शाता है।
    • 3-वर्षीय प्रवृत्ति: भारत की रैंकिंग वर्ष 2023 में तीसरे, 2024 में 5वें और 2025 में 6वें स्थान पर रही, जो पिछले तीन वर्षों में PM2.5 स्तरों में सापेक्ष सुधार को दर्शाता है।
  • सबसे प्रदूषित शहर और क्षेत्र: लोनी (उत्तर प्रदेश) 2025 में भारत का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जबकि नई दिल्ली विश्व की सबसे प्रदूषित राजधानी बनी रही।
  • वैश्विक प्रदूषण परिदृश्य: पाकिस्तान सबसे प्रदूषित देश रहा, इसके बाद बांग्लादेश और ताजिकिस्तान का स्थान रहा, जो दक्षिण एशिया में गंभीर वायु गुणवत्ता समस्या को दर्शाता है।
  • WHO मानक और अनुपालन: केवल 13 देशों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के PM2.5 मानक (<5 µg/m³) को पूरा किया, जबकि लगभग 90% देश सुरक्षित वायु गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में असफल रहे।
  • भारत में नीतिगत और संरचनात्मक चिंताएँ: राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के अंतर्गत धन का बड़ा हिस्सा (64%) सड़क की धूल के नियंत्रण पर खर्च होता है, जबकि औद्योगिक और वाहन उत्सर्जन पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया जाता है।

विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट के बारे में

  • यह एक वार्षिक वैश्विक रिपोर्ट है, जो मुख्यतः सूक्ष्म कण (PM2.5) के स्तरों के आधार पर वायु प्रदूषण का आकलन करती है।
    • PM2.5 वे सूक्ष्म कण होते हैं, जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। ये फेफड़ों और रक्त प्रवाह में गहराई तक प्रवेश कर गंभीर स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न करते हैं।
    • इसमें सल्फेट्स, नाइट्रेट्स, अमोनिया, ब्लैक कार्बन, जैविक यौगिक, धूल और धातु कण शामिल होते हैं, जो मुख्यतः वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक प्रक्रियाओं, बायोमास जलाने और जीवाश्म ईंधन के दहन से उत्पन्न होते हैं।
  • प्रकाशन: यह रिपोर्ट स्विट्जरलैंड-आधारित वायु गुणवत्ता प्रौद्योगिकी कंपनी IQAir द्वारा जारी की जाती है।
  • प्रमुख मापदंड: PM2.5 सांद्रता स्तर (µg/m³) पर आधारित, जो मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक महीन कणों को मापता है।
    • वास्तविक जोखिम स्तरों को दर्शाने के लिए जनसंख्या-भारित औसत का उपयोग करता है।
  • डेटा स्रोत और कवरेज: यह रिपोर्ट सरकारी निगरानी केंद्रों और सत्यापित सेंसरों से प्राप्त डेटा पर आधारित है।
    • वर्ष 2025 की रिपोर्ट में 143 देशों और 9,400 से अधिक शहरों को शामिल किया गया, जिससे यह सबसे व्यापक वैश्विक वायु गुणवत्ता डेटासेट में से एक बनती है।

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