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संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal March 25, 2025 05:27 46 0

डॉगक्वेस्ट

डोगेक्वेस्ट एक विवादास्पद वेबसाइट है, जिसने हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका में टेस्ला कार मालिकों की व्यक्तिगत जानकारी प्रकाशित करने के लिए ध्यान आकर्षित किया है।

  • इस साइट ने अपनी आक्रामक प्रथाओं एवं व्यक्तियों की गोपनीयता तथा सुरक्षा के लिए संभावित जोखिमों के कारण काफी आक्रोश पैदा किया है।

डोगेक्वेस्ट के बारे में अधिक जानकारी

  • डोगेक्वेस्ट स्वयं को एक गुमनाम मंच बताता है जिसका उद्देश्य टेस्ला के खिलाफ प्रदर्शनकारियों को सशक्त बनाना है।
  • इस वेबसाइट में एक इंटरेक्टिव मानचित्र है, जो टेस्ला मालिकों के नाम, पते एवं फोन नंबर प्रदर्शित करता है।
  • इसके अतिरिक्त, इसमें टेस्ला डीलरशिप, चार्जिंग स्टेशनों के स्थान सूचीबद्ध हैं।
  • इस साइट में टेस्ला के CEO एलन मस्क से जुड़ी एजेंसी डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) के कर्मचारियों के एड्रेस भी हैं।

विवादास्पद विशेषताएँ

  • वेबसाइट की आलोचना मोलोटोव कॉकटेल को कर्सर के रूप में इस्तेमाल करने के लिए की गई है, जिसे कई लोग हिंसा भड़काने वाला मानते हैं।
  • इसके अलावा, डोगेक्वेस्ट में एक ऐसा खंड शामिल है, जो खुले तौर पर बर्बरता को प्रोत्साहित करता है, यह सुझाव देते हुए कि उपयोगकर्ता टेस्ला वाहनों पर “स्प्रे कैन के साथ अपनी कलात्मक प्रतिभा को उजागर कर सकते हैं”।
  • इस बयानबाजी से हिंसा की संभावना एवं टेस्ला मालिकों की सुरक्षा के बारे में गंभीर चिंताएंँ उत्पन्न हो गई हैं।

संगीत कलानिधि पुरस्कार

प्रसिद्ध वायलिन वादक आर.के. श्रीरामकुमार को संगीत अकादमी द्वारा प्रतिष्ठित संगीत कलानिधि पुरस्कार, 2025 के लिए चुना गया है।

संगीत कलानिधि पुरस्कार के बारे में

  • संगीत कलानिधि का अर्थ है “संगीत एवं कला का खजाना”।
  • पुरस्कार प्रदाता: यह पुरस्कार प्रत्येक वर्ष मद्रास संगीत अकादमी द्वारा असाधारण कर्नाटक संगीतकारों को सम्मानित करने के लिए दिया जाता है।
  • इतिहास
    • पुरस्कार का विचार वर्ष 1942 में अकादमी के अध्यक्ष के.वी. कृष्णस्वामी अय्यर द्वारा तैयार किया गया था।
    • 1 जनवरी, 1943 को, वर्ष 1929 से वर्ष 1942 तक वार्षिक सम्मेलनों की अध्यक्षता करने वाले सभी संगीतकारों को पूर्वव्यापी रूप से यह उपाधि प्रदान की गई।
  • पुरस्कार के घटक
    • स्वर्ण पदक एवं प्रशस्ति-पत्र: पुरस्कार में एक स्वर्ण पदक तथा एक बिरुदु-पत्र (प्रशस्ति पत्र) शामिल है।
    • वर्ष 2005 से अतिरिक्त पुरस्कार
      • वर्ष 2005 से संगीत कलानिधि पुरस्कार विजेता को एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी पुरस्कार भी मिलता है, जिसे द हिंदू द्वारा प्रायोजित किया जाता है।
      • पूर्व उपाध्यक्ष पी. ओबुल रेड्डी के बेटे पी. विजयकुमार रेड्डी के योगदान से नकद पुरस्कार राशि में वृद्धि की गई।

उल्लेखनीय प्राप्तकर्ता

  • पालमारनेरी स्वामीनाथ अय्यर (वर्ष 1931)।
  • उमय्यलपुरम स्वामीनाथ अय्यर (संभवतः वर्ष 1936 में सम्मानित)।
  • मंगुड़ी चिदंबरा भागवतार (वर्ष 1937)।

TB चैंपियन

मेघालय सरकार TB से ठीक हुए लोगों को TB चैंपियन’ के रूप में शामिल करके तपेदिक (Tuberculosis- TB) को समाप्त करने के लिए अभिनव कदम उठा रही है। 

TB चैंपियन के बारे में 

  • TB चैंपियन TB से ठीक हुए लोग हैं। 
  • उनका कार्य स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने एवं TB के प्रभाव को कम करने के लिए आदिवासी समुदायों को लक्षित करता है। 
  • TB चैंपियन की भूमिका: TB चैंपियन इन चुनौतियों का समाधान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, खासकर आदिवासी क्षेत्रों में: 
    • जागरूकता उत्पन्न करना: लोगों को TB के लक्षणों एवं शुरुआती जाँच के महत्त्व के बारे में शिक्षित करना। 
    • निःशुल्क जाँच एवं उपचार को बढ़ावा देना: रोगियों को निःशुल्क सरकारी कार्यक्रमों के बारे में सूचित करना तथा उन्हें अपना उपचार पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करना। 
    • मिथकों को कम करना: अपने स्वयं के अनुभव साझा करके TB से जुड़े मिथकों एवं भय से लड़ना।

लैपिस लाजुली: पृथ्वी का सबसे अच्छा नीला रंग

लैपिस लाजुली, सुनहरे धब्बों वाला एक गहरे नीले रंग का रत्न है, जिसे पूरे इतिहास में इसकी सुंदरता और प्रतीकात्मकता के लिए सराहा गया है।

लैपिस लाजुली के बारे में

  • लैपिस लाजुली एक अर्द्ध-कीमती रत्न है।
  • शब्द “लैपिस” लैटिन से आया है, जिसका अर्थ है “पत्थर”।
  • “लाजुली” फारसी शब्द “लाजवर्ड” से आया है, जिसका अर्थ है “नीला”।
  • संरचना
    • मुख्य खनिज: इसका नीला रंग लाजुराइट से प्राप्त होता है, जो चट्टान का 25-40% हिस्सा बनाता है।
    • खनिज प्रभाव
      • नीला रंग: लाजुराइट में सल्फर की मात्रा पर निर्भर करता है।
      • कैल्साइट की उपस्थिति: नीले रंग की तीव्रता को कम करती है।
      • सुनहरी चमक: पायराइट (एक खनिज) के कारण होती है।
  • लैपिस लाजुली के स्रोत
    • चिली, रूस, अमेरिका एवं अन्य देशों में पाया जाता है।
    • सर्वोत्तम गुणवत्ता: उच्चतम गुणवत्ता वाला लैपिस लाजुली बदख्शाँ प्रांत, अफगानिस्तान से आता है, जहाँ 6,000 से अधिक वर्षों से इसका खनन किया जा रहा है।
  • ऐतिहासिक महत्त्व
    • भारत के साथ व्यापार: लैपिस लाजुली को बदख्शाँ से भारत में 1000 ईसा पूर्व में आयात किया गया था।
    • सिंधु घाटी सभ्यता: पुरातत्त्वविदों को मोहनजोदाडो एवं हड़प्पा जैसी जगहों पर लैपिस लाजुली के आभूषण मिले।
    • प्राचीन मिस्र: मिस्र के लोग इसे पीसकर पाउडर बनाकर आभूषण एवं आई शैडो के रूप में प्रयोग करते थे।
    • यूरोपीय पुनर्जागरण: कलाकार लैपिस लाजुली को पीसकर अल्ट्रामरीन रंग बनाते थे, जो बहुत महंगा था और चित्रों में प्रयोग किया जाता था।

सहयोग पोर्टल

X कॉर्प (पूर्व में ट्विटर इंक) ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में भारत सरकार के कंटेंट ब्लॉकिंग आदेशों को चुनौती दी है।

  • कंपनी सहयोग पोर्टल का विरोध करती है, इसे “सेंसरशिप पोर्टल” कहती है, जो IT अधिनियम, 2000 के तहत कानूनी सुरक्षा उपायों को दरकिनार करता है।

सहयोग पोर्टल के बारे में

  • सहयोग पोर्टलन एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जिसे IT अधिनियम के तहत कंटेंट हटाने के लिए नोटिस को स्वचालित करने के लिए विकसित किया गया है।
  • मिशन: साइबर अपराध की रोकथाम, पता लगाने, जाँच एवं अभियोजन के लिए एक संरचित ढाँचा तैयार करना।
  • विकास: गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा।
  • कार्य: गैर-कानूनी ऑनलाइन सामग्री को हटाने या उस तक पहुँच को अक्षम करने में सक्षम बनाता है।
  • समन्वय: अधिकृत एजेंसियों और मध्यस्थों को एक साझा मंच पर लाना।

ब्लॉकिंग एवं मध्यस्थ दायित्व पर कानूनी ढाँचा 

  • IT अधिनियम, 2000 की धारा 69A: सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता एवं सार्वजनिक व्यवस्था की चिंताओं के लिए ऑनलाइन सामग्री तक सार्वजनिक पहुँच को अवरुद्ध करने का अधिकार देती है। इसे श्रेया सिंघल मामले (2015) में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित सुरक्षा उपायों का पालन करना चाहिए:
    • अवरुद्ध करने को एक तर्कसंगत आदेश द्वारा उचित ठहराया जाना चाहिए।
    • प्रभावित पक्ष को आदेश को चुनौती देने का अवसर मिलना चाहिए।
  • IT अधिनियम की धारा 79(3)(b): तृतीय पक्ष की सामग्री के लिए मध्यस्थ दायित्व को परिभाषित करती है। यह प्लेटफॉर्म्स को दायित्व से मुक्त करता है, जब तक कि वे अधिसूचित होने पर अवैध सामग्री को हटाने में विफल न हों।

X कॉर्प का तर्क: इस प्रावधान का उपयोग सीधे सामग्री को अवरुद्ध करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि यह उस उद्देश्य के लिए अभिप्रेत नहीं है।

स्टॉकहोम जल पुरस्कार

वर्ष 2025 के लिए स्टॉकहोम जल पुरस्कार जल इंजीनियरिंग के अग्रणी जल विज्ञानी गुंटर ब्लोस्चल को दिया गया है। 

जल विज्ञानी ‘गुंटर ब्लोस्चल’ के बारे में

  • वे वियना प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं एवं वियना प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग तथा जल संसाधन प्रबंधन संस्थान के वर्तमान प्रमुख हैं। 
  • योगदान
    • उनके व्यापक डेटाबेस एवं विश्लेषण ने बाढ़ जोखिम न्यूनीकरण तथा जल संसाधन प्रबंधन की वैश्विक समझ को गहरा किया है। 
    • उन्होंने जलवायु परिवर्तन के तहत बाढ़ के बढ़ते जोखिमों के कारणों को समझने में योगदान दिया, साथ ही क्षेत्रीय बाढ़ प्रक्रियाओं के मजबूत प्रभाव को भी समझने में योगदान दिया। 
    • उनके अवलोकन से पता चला कि पिछले दो दशक ऐतिहासिक रिकॉर्ड की तुलना में बाढ़-प्रवण रहे हैं।

स्टॉकहोम जल पुरस्कार के बारे में

  • स्टॉकहोम जल पुरस्कार एक अंतरराष्ट्रीय जल पुरस्कार है, जो वर्ष 1991 से स्टॉकहोम जल महोत्सव के भाग के रूप में असाधारण जल संबंधी उपलब्धियों के लिए लोगों एवं संगठनों को प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है।
  • प्रदाता: स्टॉकहोम जल पुरस्कार स्टॉकहोम जल फाउंडेशन द्वारा रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज के सहयोग से प्रदान किया जाता है।
  • आधिकारिक संरक्षक: स्वीडन के राजा कार्ल XVI गुस्ताफ पुरस्कार के प्रस्तुतकर्ता एवं आधिकारिक संरक्षक हैं।
  • प्रस्तुति: पुरस्कार अगस्त में स्टॉकहोम में विश्व जल सप्ताह के दौरान प्रदान किया जाएगा।
  • भारतीय विजेता: राजेंद्र सिंह (2015) एवं माधव आत्माराम चितले (1993) स्टॉकहोम जल पुरस्कार के केवल 2 भारतीय विजेता हैं।

ओटावा लैंडमाइन्स कन्वेंशन

पोलैंड, लिथुआनिया, लातविया एवं एस्टोनिया ने वर्ष 1997 के ओटावा कन्वेंशन से हटने की घोषणा की है, जो एंटी-पर्सनल माइंस के उपयोग तथा भंडारण पर प्रतिबंध लगाता है। 

वापसी के कारण 

  • रूस एवं बेलारूस से बढ़ते सैन्य खतरे के कारण बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के कारण संधि से हटने का उनका निर्णय लिया गया है। 
  • उनका मानना ​​है कि बारूदी सुरंगें दुश्मन की पैदल सेना की गतिविधियों के खिलाफ निवारक के रूप में कार्य करती हैं। 
  • इस बात की भी चिंता बढ़ रही है कि यूक्रेन-रूस युद्धविराम मास्को को अपनी सेना का पुनर्निर्माण करने एवं उन पर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति दे सकता है। 

लैंडमाइन्स  पर ओटावा कन्वेंशन के बारे में

  • ओटावा कन्वेंशन, जिसे आधिकारिक तौर पर ‘एंटी-पर्सनल माइन बैन संधि’ के रूप में जाना जाता है, वर्ष 1997 में अपनाया गया था एवं वर्ष 1999 में लागू हुआ था। 
  • इसका प्राथमिक लक्ष्य विश्व भर में ‘एंटी-पर्सनल लैंडमाइन्स’ के उपयोग, भंडारण, उत्पादन एवं हस्तांतरण पर प्रतिबंध लगाकर उन्हें समाप्त करना है। 

संधि के मुख्य प्रावधान

  • उपयोग पर प्रतिबंध- हस्ताक्षरकर्ता देश कभी भी ‘एंटी-पर्सनल माइंस’ का उपयोग नहीं करने पर सहमत हैं।
  • भंडार का विनाश- राष्ट्रों को हस्ताक्षर करने के चार वर्षों के भीतर अपने लैंडमाइन्स के भंडार को नष्ट करना होगा।
  • खदान क्षेत्रों को साफ करना- देशों को अनुसमर्थन के दस वर्षों के भीतर सभी खनन क्षेत्रों को साफ करना होगा।
  • पीड़ितों को सहायता- संधि लैंडमाइन्स के पीड़ितों को सहायता एवं उनके पुनर्वास को बढ़ावा देती है।

वैश्विक भागीदारी

  • 160 से अधिक देशों ने संधि की पुष्टि की है या उसमें शामिल हुए हैं।
  • रूस, चीन, भारत एवं संयुक्त राज्य अमेरिका ने संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
  • संधि ने लैंडमाइन्स  के उपयोग को काफी कम कर दिया है, लेकिन संघर्ष क्षेत्रों में चुनौतियाँ बनी हुई हैं।

ज्ञानपीठ पुरस्कार, 2025

ज्ञानपीठ पुरस्कार, 2025 प्रसिद्ध हिंदी लेखक, कवि एवं उपन्यासकार विनोद कुमार शुक्ल को प्रदान किया गया है।

वर्ष 2025 पुरस्कार विजेता: विनोद कुमार शुक्ल

  • वे इस प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मान को प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ के पहले व्यक्ति हैं।
  • अपनी सादगी, संवेदनशीलता एवं प्रयोगात्मक लेखन शैली के लिए जाने जाने वाले शुक्ल ने आधुनिक हिंदी साहित्य में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।
  • उल्लेखनीय कृतियाँ: उनके प्रसिद्ध उपन्यासों में नौकर की कमीज, दीवार में एक खिड़की रहती थी एवं खिलेगा तो देखेंगे शामिल हैं।
  • साहित्यिक योगदान: उनकी रचनाएँ आम जीवन, सामाजिक जटिलताओं एवं मानवीय भावनाओं पर केंद्रित हैं, जिन्हें सरल लेकिन गहन तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
  • पिछली मान्यता: उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार एवं कई अन्य साहित्यिक पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है।

ज्ञानपीठ पुरस्कार के बारे में

  • ज्ञानपीठ पुरस्कार भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान है, जो उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए प्रतिवर्ष दिया जाता है।
  • यह संविधान के तहत मान्यता प्राप्त भारतीय भाषाओं एवं वर्ष 2013 से अंग्रेजी भाषा के लेखकों को दिया जाता है।
  • स्थापना: इस पुरस्कार की स्थापना वर्ष 1961 में भारतीय ज्ञानपीठ, एक सांस्कृतिक संगठन द्वारा की गई थी।
    • पहला ज्ञानपीठ पुरस्कार वर्ष 1965 में प्रदान किया गया था।
  • श्रेणी एवं पात्रता: यह भारतीय नागरिकों को उनके असाधारण रचनात्मक साहित्यिक कार्य के लिए दिया जाता है।
    • यह भारतीय संविधान की 22 अनुसूचित भाषाओं में से किसी में लिखने वाले लेखकों को मान्यता देता है।
  • महत्त्व: यह पुरस्कार उल्लेखनीय प्रभाव डालने वाले लेखकों को सम्मानित करके भारतीय साहित्य को बढ़ावा देता है।
    • विजेता को 21 लाख रुपये का नकद पुरस्कार, एक प्रशस्ति-पत्र एवं ज्ञान तथा शिक्षा की देवी वाग्देवी (सरस्वती) की एक कांस्य प्रतिमा दी जाती है।
  • मान्यता प्राप्त भाषाएँ: यह पुरस्कार 22 अनुसूचित भाषाओं में प्रदान किया जाता है, जिनमें हिंदी, बंगाली, तमिल, तेलुगु, मराठी, उर्दू, संस्कृत, कन्नड़ एवं अन्य शामिल हैं।

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