ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) एक ऐसा मौद्रिक उपकरण है, जिसका उपयोग भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जैसे केंद्रीय बैंक वित्तीय प्रणाली में तरलता का प्रबंधन करने के लिए करते हैं।
इसमें मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित करने एवं वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए खुले बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद एवं बिक्री शामिल है।
महत्त्व
अर्थव्यवस्था में तरलता को नियंत्रित करता है।
ब्याज दरों एवं ऋण की उपलब्धता को प्रभावित करता है।
वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करके आर्थिक विकास का समर्थन करता है।
OMO कैसे कार्य करता है?
OMO खरीद (तरलता लाना)
केंद्रीय बैंक बाजार से सरकारी प्रतिभूतियाँ खरीदता है।
इससे बैंकिंग प्रणाली में पैसा आता है, जिससे तरलता में वृद्धि में मदद मिलती है।
OMO बिक्री (तरलता का अवशोषण)
केंद्रीय बैंक बाजार में सरकारी प्रतिभूतियाँ बेचता है।
इससे प्रणाली से अतिरिक्त पैसा निकल जाता है, जिससे मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है।
‘पेंटेड लेडी’ तितलियाँ
हाल ही में वैज्ञानिकों ने आनुवंशिक अंतर को समझने के लिए आनुवंशिक ‘पेंटेड लेडी’ तितलियों का अध्ययन किया।
‘पेंटेड लेडी’ तितलियों के बारे में
वैज्ञानिक नाम:वैनेसा कार्डुई, ये तितलियाँ सबसे व्यापक प्रजातियों में से एक हैं, जो अंटार्कटिका एवं दक्षिण अमेरिका को छोड़कर हर महाद्वीप पर पाई जाती हैं।
वे समशीतोष्ण घास के मैदानों से लेकर रेगिस्तानों तक विविध जलवायु में पाई जाती हैं।
पक्षियों के विपरीत, उनका प्रवास बहु-पीढ़ीगत होता है – प्रत्येक तितली केवल 2-4 सप्ताह जीवित रहती है एवं प्रवास 8-10 पीढ़ियों तक जारी रहता है।
वसंत में, वे प्रजनन के लिए सहारा से उत्तर की ओर यूरोप की ओर पलायन करती हैं।
गर्मियों एवं शरद ऋतु के अंत तक, उनकी संतानें दक्षिण की ओर उत्तरी अफ्रीका लौट जाती हैं।
‘पेंटेड लेडी’ अपने लंबी दूरी के प्रवास के लिए जानी जाती है।
अभ्यास ‘टाइगर ट्रायंफ’ 2025
भारत एवं संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्य ‘टाइगर ट्रायंफ’ अभ्यास का चौथा संस्करण 1 अप्रैल से 13 अप्रैल, 2025 तक पूर्वी समुद्र तट, विशाखापत्तनम में आयोजित किया जाएगा।
टाइगर ट्रायंफ अभ्यास के बारे में
वर्ष 2019 में प्रारंभ हुआ टाइगर ट्रायंफ अभ्यास एक द्विपक्षीय त्रि-सेवा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (Humanitarian Assistance and Disaster Relief- HADR) अभियान है।
प्रतिभागी: इस अभ्यास में भारतीय सेना, नौसेना एवं वायु सेना के साथ-साथ उनके अमेरिकी समकक्षों की भागीदारी शामिल है।
टाइगर ट्रायंफ अभ्यास के उद्देश्य
इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाना – कुशल आपदा प्रतिक्रिया के लिए भारतीय एवं अमेरिकी संयुक्त कार्य बलों (Joint Task Forces- JTF) के मध्य सुचारू समन्वय सुनिश्चित करना।
SOP तैयार करना – HADR परिदृश्यों में निर्णय लेने एवं समन्वय को कारगर बनाने के लिए CCC प्रोटोकॉल स्थापित करना।
संयुक्त प्रशिक्षण – साझा प्रशिक्षण एवं अभ्यास के माध्यम से समुद्री चिकित्सा राहत कार्यों में सहयोग में सुधार करना।
फ्रैम2 (Fram2) मिशन
SpaceX का फ्रैम2 मिशन ध्रुवीय कक्षा में पहली बार मानव अंतरिक्ष उड़ान के रूप में इतिहास बनाने के लिए तैयार है।
फ्रैम2 मिशन के बारे में
फ्रैम2 मिशन स्पेसएक्स द्वारा प्रारंभ की गई एक मानव अंतरिक्ष उड़ान है, जिसमें चार निजी अंतरिक्ष यात्रियों का दल शामिल है।
फ्रैम2 चालक दल के सदस्यों में चुन वांग (मिशन कमांडर), जैनिके मिकेलसेन (वाहन कमांडर), एरिक फिलिप्स (मिशन विशेषज्ञ) एवं राबिया रोगे (पायलट) शामिल हैं।
इस मिशन का नाम फ्रैम जहाज के नाम पर रखा गया है, जो 20वीं सदी के शुरुआती ध्रुवीय अभियानों में प्रयोग किया जाने वाला एक ऐतिहासिक जहाज था।
प्रक्षेपण स्थल: प्रक्षेपण फ्लोरिडा में NASA के कैनेडी स्पेस सेंटर से हुआ।
कक्षीय पथ: पारंपरिक अंतरिक्ष मिशनों के विपरीत, फ्रैम2 को ध्रुव-से-ध्रुव तक उड़ान भरने के लिए डिजाइन किया गया है, जो पृथ्वी के चारों ओर एक ऐसी कक्षीय यात्रा पूरी करता है, जिसे पहले किसी भी मानव ने नहीं किया है।
फ्रैम2 ने चार अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी के चारों ओर 90-डिग्री की गोलाकार कक्षा में पहुँचाया, जिससे वे उत्तरी एवं दक्षिणी दोनों ध्रुवों पर उड़ान भर सके।
अंतरिक्ष यान: अंतरिक्ष यात्री क्रू ड्रैगन अंतरिक्ष यान पर सवार हैं, जो प्रत्येक परिक्रमा लगभग 46 मिनट में पूरी करते हैं।
मिशन का महत्त्व
यह मिशन दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष उड़ान एवं स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव को समझने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
इसके अतिरिक्त, यह भविष्य के ध्रुवीय कक्षा मिशनों के लिए आधार तैयार करता है, जो जलवायु अनुसंधान, उपग्रह परिनियोजन एवं गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण का समर्थन कर सकता है।
वैज्ञानिक उद्देश्य एवं प्रयोग
फ्रैम2 अंतरिक्ष में मानव स्वास्थ्य पर केंद्रित 22 शोध अध्ययन करेगा।
प्रमुख प्रयोगों में शामिल हैं:
अंतरिक्ष में पहला एक्स-रे: सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में मांसपेशियों एवं अस्थि द्रव्यमान में होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन।
सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में मशरूम उगाना – भविष्य के अंतरिक्ष आवासों के लिए कवक की क्षमता की खोज करना।
प्राकृतिक घटनाओं का अध्ययन – एक अद्वितीय सुविधाजनक बिंदु से ऑरोरा बोरेलिस का अवलोकन करना।
परिचालन स्वायत्तता – चिकित्सा या परिचालन सहायता के बिना अंतरिक्ष यान से बाहर निकलने की क्षमता का परीक्षण करना।
ध्रुवीय पर्यावरणीय डेटा संग्रह: चालक दल पृथ्वी के ध्रुवीय क्षेत्रों के बारे में जानकारी लेगा।
यह डेटा जलवायु परिवर्तन को समझने एवं आपदा प्रतिक्रिया रणनीति तैयार करने के लिए महत्त्वपूर्ण है।
मिशन के बाद शारीरिक तत्परता का परीक्षण: चालक दल मिशन के बाद की रिकवरी के लिए अपनी शारीरिक तत्परता पर परीक्षण करेगा।
यह समझने में मदद करेगा कि मंगल ग्रह पर अंतरिक्ष यात्रियों को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
ध्रुवीय कक्षा क्या है?
ध्रुवीय कक्षा एक प्रकार की उपग्रह आधारित कक्षा है, जो पृथ्वी के ध्रुवों के ऊपर से गुजरती है, तथा उत्तर-से-दक्षिण (या इसके विपरीत) की ओर यात्रा करती है।
भूमध्यरेखीय कक्षाओं के विपरीत, जो भूमध्य रेखा के साथ ग्रह का चक्कर लगाती हैं, ध्रुवीय कक्षाएँ अंतरिक्ष यान को समय के साथ पृथ्वी की पूरी सतह को कवर करने की अनुमति देती हैं।
ध्रुवीय कक्षाओं का अध्ययन क्यों महत्त्वपूर्ण है?
वैश्विक कवरेज एवं पृथ्वी अवलोकन: चूँकि एक ध्रुवीय-परिक्रमा उपग्रह पृथ्वी के विभिन्न भागों पर गति करता है, इसलिए यह कई कक्षाओं में संपूर्ण वैश्विक कवरेज प्रदान कर सकता है।
यह इसे जलवायु निगरानी, मौसम पूर्वानुमान एवं पर्यावरण अध्ययन के लिए आदर्श बनाता है।
ध्रुवीय क्षेत्र अध्ययन: आर्कटिक एवं अंटार्कटिक जलवायु परिवर्तन को समझने के लिए महत्त्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे ग्लोबल वार्मिंग के लिए सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से हैं।
वैज्ञानिक एवं अंतरिक्ष उड़ान अनुसंधान: ध्रुवीय कक्षा में प्रयोग करने से पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र, ऑरोरा की वायुमंडलीय गतिशीलता पर अद्वितीय दृष्टिकोण प्राप्त होते हैं।
यह इस बारे में भी जानकारी प्रदान करता है कि विभिन्न अक्षांशों पर माइक्रोग्रैविटी एवं विकिरण जोखिम कैसे भिन्न होते हैं।
शनि के नए उपग्रह
ताइवान में खगोलविदों ने शनि की परिक्रमा करते हुए 128 नए उपग्रहों की खोज की।
संबंधित तथ्य
सबसे अधिक संख्या में उपग्रह: एकेडेमिया सिनिका में एडवर्ड एश्टन के नेतृत्व में की गई इस खोज ने शनि को सौरमंडल में सबसे अधिक पुष्टि किए गए उपग्रहों वाला ग्रह बना दिया है।
कुल 274 उपग्रहों के साथ, शनि के पास सभी अन्य ग्रहों की तुलना में अधिक उपग्रह हैं।
उपग्रहों की खोज कैसे हुई?
वैज्ञानिकों ने इन उपग्रहों का पता लगाने के लिए कनाडा-फ्राँस-हवाई दूरबीन से छवियों को एकत्रित किया।
कुछ उपग्रहों की खोज पहले अंतरिक्ष मिशनों के दौरान की गई थी, जैसे कि वॉयजर 1, एवं ‘रिंग-प्लेन क्रॉसिंग’ के माध्यम से जब शनि के वलय पृथ्वी के किनारे पर दिखाई देते हैं।
नए उपग्रहों की विशेषताएँ
सभी नए खोजे गए उपग्रहों को “अनियमित” उपग्रहों के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
नियमित उपग्रहों के विपरीत, अनियमित उपग्रह ग्रह के भूमध्य रेखा के चारों ओर वृत्ताकार पथों के बजाय विभिन्न कोणों पर अंडाकार कक्षाओं का अनुसरण करते हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि ये उपग्रह कभी शनि के गुरुत्वाकर्षण द्वारा आकर्षित किए गए छोटे ग्रह थे एवं बाद में टकराव के कारण खंडित हो गए।
शनि एवं बृहस्पति के बीच प्रतिस्पर्द्धा
शनि एवं बृहस्पति सर्वाधिक उपग्रहों के लिए प्रतिस्पर्द्धा कर रहे हैं।
वर्ष 2019 में, शनि ने 82 उपग्रहों के साथ बढ़त हासिल की, लेकिन बृहस्पति ने वर्ष 2023 में कुछ समय के लिए यह खिताब फिर से हासिल कर लिया।
बाद में वर्ष 2023 में, शनि के चारों ओर 62 एवं उपग्रहों की खोज की गई, जिससे इसकी बढ़त और मजबूत हो गई।
वर्तमान में बृहस्पति के 95 उपग्रह हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ द्वारा आधिकारिक तौर पर मान्यता दी गई है।
खोज का वैज्ञानिक महत्त्व
ये उपग्रह शनि के वलय निर्माण के बारे में जानकारी देते हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि शनि के वलय नष्ट हो चुके उपग्रहों, क्षुद्रग्रहों एवं धूमकेतुओं से निकले बर्फ एवं चट्टान के टुकड़ों से बने हैं।
अनियमित उपग्रहों के अध्ययन से सौरमंडल के विकास को समझने में सहायता मिलती है।
नए उपग्रहों का नामकरण
अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ, खगोलीय पिंडों के नामकरण को नियंत्रित करता है।
शनि के उपग्रहों का नाम पारंपरिक रूप से ग्रीको-रोमन एवं अन्य संस्कृतियों के पौराणिक पात्रों के नाम पर रखा गया है।
नए खोजे गए उपग्रहों को वर्तमान में “S/2020 S 27” जैसे तकनीकी पदनाम दिए गए हैं, जब तक कि आधिकारिक नाम नहीं दिए जाते।
INSV तारिणी
INSV तारिणी दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन पहुँची, जो इसकी वैश्विक जलयात्रा, नाविका सागर परिक्रमा II में अंतिम अंतरराष्ट्रीय पड़ाव था।
संबंधित तथ्य
पोत का चालक दल लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना एवं लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा है, जिसने तीन महासागरों में 23,400 समुद्री मील से अधिक की यात्रा पूरी की।
यह अभियान 2 अक्टूबर, 2024 को गोवा में शुरू हुआ एवं मई 2025 में भारत लौटने पर समाप्त होगा।
INSV तारिणी के बारे में
INSV तारिणी एक स्वदेशी रूप से निर्मित, 56-फुट का नौकायन पोत है, जिसे फरवरी 2017 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था।
इसे मेक इन इंडिया पहल के तहत गोवा के एक्वेरियस शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा बनाया गया था।
पोत का नाम ओडिशा में तारा-तारिणी पहाड़ी मंदिर के नाम पर रखा गया है, जिसे ऐतिहासिक रूप से नाविकों द्वारा सुरक्षित यात्राओं के लिए याद किया जाता है।
INSV तारिणी की विशेषताएँ
रेमरीन नेविगेशन सूट, सैटेलाइट संचार प्रणाली एवं आपातकालीन स्टीयरिंग तंत्र से लैस।
तीव्र गति की पवनों एवं उबड़-खाबड़ समुद्रों सहित चरम समुद्री परिस्थितियों का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया।
डच ‘टोंगा 56’ पोत की डिजाइन पर आधारित, यह एक मजबूत एवं समुद्र में चलने योग्य नौकायन पोत है।
अभियान का महत्त्व
नाविक सागर परिक्रमा II का उद्देश्य समुद्री नौकायन को बढ़ावा देना एवं समुद्री अन्वेषण में महिलाओं के नेतृत्व को प्रदर्शित करना है।
यह मिशन भारत की नौसैनिक क्षमताओं एवं अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग को मजबूत करता है।
INSV तारिणी को इससे पूर्व तब पहचान मिली थी, जब वर्ष 2017-18 में एक महिला चालक दल ने वैश्विक परिक्रमा पूरी की थी।
‘ब्लाइंडसाइट’ चिप
एलन मस्क के ब्रेन चिप स्टार्टअप न्यूरालिंक का लक्ष्य वर्ष 2025 के अंत तक पहली बार किसी इंसान में अपना कृत्रिम दृश्य कृत्रिम अंग, ‘ब्लाइंडसाइट चिप’ स्थापित करना है।
ब्लाइंडसाइट चिप के बारे में
ब्लाइंडसाइट एक प्रायोगिक प्रत्यारोपण उपकरण है, जो मस्तिष्क के दृश्य प्रांतस्थ को सीधे उत्तेजित करके कार्य करता है, जिससे आँखों या ऑप्टिक तंत्रिकाओं को काम करने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
विजुअल कॉर्टेक्स: यह सेरेब्रल कॉर्टेक्स (तंत्रिका कोशिका ऊतकों की सबसे बाहरी परत) का एक क्षेत्र है, जो रेटिना से रिले किए गए दृश्य डेटा को संसाधित करता है।
घटक: ब्लाइंडसाइट में एक माइक्रोइलेक्ट्रोड सरणी शामिल है, जो विजुअल कॉर्टेक्स में एम्बेडेड है, मस्तिष्क का वह हिस्सा जो विजुअल डेटा को संसाधित करने के लिए उत्तरदायी है।
कार्य तंत्र: यह कथित तौर पर कैमरे से रिले किए गए पैटर्न के आधार पर विजुअल कॉर्टेक्स में स्थित न्यूरॉन्स या तंत्रिका कोशिकाओं को उत्तेजित करने में सक्षम है।
उद्देश्य: चिप का उद्देश्य स्थायी अंधेपन (दोनों आँखें एवं ऑप्टिक तंत्रिका खो चुके) वाले लोगों को देखने में सक्षम बनाना है, बशर्ते कि दृश्य प्रांतस्थ बरकरार हो।
यह उन लोगों को भी देखने में सक्षम बनाएगा जो जन्म से अंधे हैं।
प्रौद्योगिकी: ब्लाइंडसाइट चिप को ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (Brain-Computer Interface- BCI) तकनीक का उपयोग करके विकसित किया गया था।
BCI तकनीक का उद्देश्य एक सार्वभौमिक मस्तिष्क इंटरफेस बनाना है, जो गंभीर चिकित्सा स्थितियों वाले व्यक्तियों के लिए स्वतंत्रता को बढ़ाता है।
पुनः प्राप्त दृष्टि: ब्लाइंडसाइट केवल ‘अटारी ग्राफिक्स’ की तरह कम-रिजॉल्यूशन दृष्टि प्रदान करने में सक्षम होगी, लेकिन अंततः इसमें प्राकृतिक दृष्टि को पार करने की क्षमता है, जिससे व्यक्ति अवरक्त, पराबैंगनी या यहाँ तक कि रडार तरंगदैर्ध्य में भी देख सकता है।
मान्यता: प्रायोगिक उपकरण को अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (Food and Drug Administration- FDA) द्वारा ‘सफलता’ का दर्जा दिया गया था।
FDA का सफल टैग उन चिकित्सा उपकरणों को दिया जाता है, जो संकटकालीन स्थितियों का उपचार या निदान प्रदान करते हैं।
बिम्सटेक (BIMSTEC)
‘बहु-क्षेत्रीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल’ (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation- BIMSTEC) के’ छठे शिखर सम्मेलन का आयोजन बैंकॉक, थाईलैंड में होगा जिसकी थीम “समृद्ध, लचीला तथा खुला BIMSTEC” है।
BIMSTEC के बारे में
BIMSTEC एक बहुपक्षीय क्षेत्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में तटीय एवं समीपवर्ती देशों के बीच साझा विकास तथा सहयोग को गति देने के उद्देश्य से की गई है।
इसकी स्थापना जून 1997 में बैंकॉक घोषणा को अपनाने के साथ BIST-EC के रूप में की गई थी, जिसमें बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका एवं थाईलैंड सदस्य थे।
वर्ष 1997 के अंत में म्याँमार के प्रवेश के साथ यह BIMSTEC (बांग्लादेश, भारत, म्यांमार, श्रीलंका एवं थाईलैंड आर्थिक सहयोग) बन गया।
अंततः, इसका वर्तमान स्वरूप तब प्रभाव में आया, जब वर्ष 2004 में नेपाल एवं भूटान इसके सदस्य बन गए।
सचिवालय: ढाका, बांग्लादेश।
सदस्यता: इसके कुल सात सदस्य देश हैं:
दक्षिण एशिया से पाँच, जिनमें बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल एवं श्रीलंका शामिल हैं;
दक्षिण-पूर्व एशिया से दो, जिनमें म्याँमार एवं थाईलैंड शामिल हैं।
चिली
हाल ही में चिली गणराज्य के राष्ट्रपति, महामहिम श्री गेब्रियल बोरिक फॉन्ट 1-5 अप्रैल, 2025 तक भारत की राजकीय यात्रा पर हैं, जो दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 76 वर्ष पूर्ण होने का स्मरणोत्सव है।
चिली के बारे में
स्थान: दक्षिण अमेरिका में, पूर्व में एंडीज पर्वतमाला एवं पश्चिम में प्रशांत महासागर के मध्य भूमि की एक सँकरी पट्टी पर स्थित है।
सीमाएँ: यह उत्तर में पेरू, उत्तर-पूर्व में बोलीविया एवं पूर्व में अर्जेंटीना से घिरा है।
रेगिस्तान: अटाकामा रेगिस्तान, दुनिया के सबसे शुष्क गैर-ध्रुवीय रेगिस्तानों में से एक, उत्तरी चिली में स्थित है।
सबसे लंबी नदी: लोआ नदी।
सबसे ऊँची चोटी: एंडीज में ओजोस डेल सलाडो (पृथ्वी पर सबसे ऊँचा ज्वालामुखी)
राजधानी: सैंटियागो।
आधिकारिक भाषा: स्पेनिश।
खनिज
ताँबा: ताँबे का खनन चिली की अर्थव्यवस्था का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है, जो इसके सकल घरेलू उत्पाद एवं निर्यात के एक बड़े हिस्से में योगदान देता है।
लीथियम त्रिभुज: अर्जेंटीना एवं बोलीविया के साथ “लीथियम त्रिभुज” का हिस्सा।
चिली: दुनिया का सबसे बड़ा लीथियम भंडार।
OECD: चिली मई 2010 में OECD में शामिल होने वाला पहला दक्षिण अमेरिकी देश बन गया।
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