100% तक छात्रवृत्ति जीतें

रजिस्टर करें

संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal December 16, 2025 03:58 82 0

राष्ट्रीय मखाना बोर्ड 

राष्ट्रीय मखाना बोर्ड ने अपनी पहली बैठक आयोजित की, जिसमें अनुसंधान, मूल्य संवर्द्धन, ब्रांडिंग और निर्यात के माध्यम से मखाना मूल्य शृंखला के आधुनिकीकरण हेतु ₹476 करोड़ की केंद्रीय क्षेत्र योजना को स्वीकृति दी गई।

राष्ट्रीय मखाना बोर्ड के बारे में

  • राष्ट्रीय मखाना बोर्ड भारत के मखाना क्षेत्र के समग्र विकास तथा किसानों की आय बढ़ाने के लिए स्थापित एक समर्पित संस्थागत तंत्र है।
  • स्थापना: 15 सितंबर, 2025 को बिहार में स्थापित किया गया।
  • बजट: वर्ष 2025–26 से वर्ष 2030–31 की अवधि के लिए ₹476.03 करोड़
  • उद्देश्य
    • अनुसंधान, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन और प्रौद्योगिकी अपनाने को बढ़ावा देना।
    • प्रसंस्करण, मूल्य संवर्द्धन, ब्रांडिंग और निर्यात संवर्द्धन को सुदृढ़ करना।
    • संस्थागत समर्थन के माध्यम से मखाना उत्पादकों की आजीविका में सुधार करना।
  • भूमिका और कार्य
    • राष्ट्रीय स्तर पर बीज आवश्यकताओं का एकीकरण तथा गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री का समर्थन करना।
    • प्रशिक्षण, उन्नत कटाई एवं फसल कटाई-पश्चात प्रथाओं को प्रोत्साहन।
    • छंटाई, सुखाने और पैकेजिंग के लिए अवसंरचना को मजबूत करना।

मखाना के बारे में

  • मखाना एक जलीय पौधे यूरेल फेरॉक्स का सूखा खाद्य बीज है, जो दक्षिण और पूर्वी एशिया के मीठे जल निकायों में पाया जाता है।
  • यह पोषण से भरपूर, कम वसायुक्त होता है और स्वास्थ्य आहार, पारंपरिक चिकित्सा तथा स्नैक्स में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
  • कृषि की परिस्थितियाँ
    • उष्णकटिबंधीय–उपोष्णकटिबंधीय जलवायु में 4-6 फीट गहराई वाले स्थिर जल निकायों में कृषि।
    • 20–35 डिग्री सेल्सियस का उपयुक्त तापमान, उच्च आर्द्रता और पर्याप्त वर्षा।
  • उत्पादन और वितरण: भारत के कुल मखाना उत्पादन का लगभग 90 प्रतिशत बिहार में होता है, जिसमें मिथिलांचल प्रमुख क्षेत्र है।
  • मिथिला मखाना को वर्ष 2022 में भौगोलिक संकेतक (GI टैग) का दर्जा प्राप्त हुआ।

 अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD)

भारत ने रोम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD)–भारत दिवस कार्यक्रम में ग्रामीण विकास, महिला सशक्तीकरण और जलवायु-सहिष्णु कृषि के क्षेत्र में देश की अग्रणी उपलब्धियों का प्रदर्शन किया।

अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) के बारे में

  • अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष, संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी है।
  • यह विकासशील देशों के ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी और भुखमरी को कम करने के लिए विशेष रूप से समर्पित कोष है।
  • स्थापना: 15 दिसंबर, 1977
  • मुख्यालय: रोम, इटली
  • सदस्य देश: 180
  • फोकस: केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण समुदायों के सशक्तीकरण पर केंद्रित।
  • मुख्य कार्य: कृषि और ग्रामीण विकास परियोजनाओं के वित्तपोषण हेतु कम ब्याज वाले ऋण और अनुदान प्रदान करना।

IFAD के साथ भारत की भूमिका

  • भारत IFAD का संस्थापक सदस्य, प्रमुख योगदानकर्ता और एक महत्त्वपूर्ण विकास साझेदार है।
  • गहन सहयोग: 36 प्रमुख ग्रामीण विकास परियोजनाओं पर 48 वर्षों का सहयोग।
  • वैश्विक नेतृत्व: भारत इस साझेदारी के माध्यम से अपने सफल ग्रामीण मॉडलों (जैसे-महिला समूहों) का विस्तार करता है औरदक्षिण–दक्षिण सहयोग’ के तहत ग्लोबल साउथ’ के अन्य देशों के साथ विशेषज्ञता साझा करने में अग्रणी भूमिका निभाता है।

PMGKY बीमा पैकेज के लाभार्थी

हाल ही में, सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्णय दिया कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (PMGKY) के अंतर्गत बीमा लाभ उन सभी सार्वजनिक एवं निजी चिकित्सा पेशेवरों तक विस्तारित होंगे, जिन्हें कोविड-19 ड्यूटी के लिए तैनात किया गया था और जिनकी सेवा के दौरान मृत्यु हो गई।

निर्णय के प्रमुख बिंदु

  • न्यायालय ने माना कि महामारी जनित आपात स्थिति के कारण राज्यों ने आदेशों के माध्यम से डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की प्रभावी रूप से सेवाएँ ली थीं, चाहे वे सार्वजनिक क्षेत्र में कार्यरत हों या निजी क्षेत्र में।
  • PMGKY बीमा दावों का निपटारा प्रत्येक मामले के आधार पर किया जाएगा।
  • दावेदारों को यह प्रमाणित करना होगा कि मृत्यु कोविड-19 से संबंधित कर्तव्यों के दौरान हुई थी, जिसके लिए विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करना आवश्यक होगा।

PMGKY बीमा पैकेज के बारे में

  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत बीमा पैकेज, कोविड-19 के कारण प्रभावित स्वास्थ्यकर्मियों को व्यापक व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा सुरक्षा प्रदान करता है।
  • प्रारंभ: 26 मार्च, 2020 को ₹1.70 लाख करोड़ के राहत पैकेज के हिस्से के रूप में घोषित।
  • इसका उद्देश्य महामारी के दौरान कमजोर वर्गों की सुरक्षा करना था।
  • प्रारंभ में यह योजना 90 दिनों के लिए लागू की गई थी, जिसे आवश्यकता के अनुसार बढ़ाया गया।
  • पात्र लाभार्थी
    • स्वास्थ्यकर्मी, जिनमें डॉक्टर, नर्स, आशा कार्यकर्ता, पैरामेडिक्स, तकनीशियन, वार्ड स्टाफ और स्वच्छता कर्मचारी शामिल हैं।
    • केंद्र एवं राज्य सरकार के अस्पतालों, स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों तथा अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं में कार्यरत कर्मी।
    • कोविड-19 ड्यूटी के लिए अधिग्रहित निजी चिकित्सा पेशेवर भी, उपयुक्त प्रमाण प्रस्तुत करने की शर्त पर, पात्र हैं।
  • बीमा कवरेज: कोविड-19 रोगियों के उपचार के दौरान मृत्यु या दुर्घटना की स्थिति में ₹50 लाख का मुआवजा।

प्रोजेक्ट सनकैचर

प्रोजेक्ट सनकैचर’ गूगल की एक दीर्घकालिक पहल है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2027 तक अंतरिक्ष में सौर ऊर्जा से संचालित डेटा केंद्रों का निर्माण करना है।

प्रोजेक्ट सनकैचर’ के बारे में

  • प्रौद्योगिकी: उपग्रहों को जोड़ने और मशीन लर्निंग कार्यभार का विस्तार करने के लिए टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट्स तथा लेजर-आधारित प्रकाशीय संपर्कों का उपयोग।
    • गूगल का दावा है कि उसके चिप्स ने अंतरिक्ष परिस्थितियों के लिए विकिरण सहनशीलता परीक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिए हैं।
  • तर्क
    • पर्यावरणीय राहत: स्थलीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता डेटा केंद्रों की विद्युत और जल संबंधी आवश्यकताओं को कम करता है।
    • विश्वसनीयता: उपग्रह या कक्षीय स्थानों पर पूर्वानुमेय पर्यावरणीय स्थितियाँ और निरंतर सौर विकिरण उपलब्ध होता है, जिससे विद्युत संबंधी बाधाओं, प्राकृतिक आपदाओं और जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों में कमी आती है।
    • डेटा संप्रभुता: डेटा प्रोसेसिंग एवं स्टोरेज संबंधी नियामकीय प्रतिबंध वैश्विक स्तर पर केंद्रीकृत ग्राहक-होस्टिंग संरचनाओं के कार्यान्वयन में अवरोध उत्पन्न करते हैं।
      • वर्ष 1967 की ‘आउटर स्पेस ट्रीटी’ अंतरिक्ष पर राष्ट्रीय संप्रभुता के दावे को निषिद्ध करती है, जिससेलूनर डेटा सेंटर’ स्थानीय नियामकीय अधिकार-क्षेत्र का उल्लंघन किए बिना बहु-राष्ट्रीय ग्राहकों की होस्टिंग कर सकता है।
    • व्यवहार्यता: रॉकेट प्रौद्योगिकी में प्रगति के कारण प्रक्षेपण लागत में कमी आई है।
  • अंतरिक्ष-आधारित डेटा केंद्रों की चुनौतियाँ
    • उच्च लागत: अंतरिक्ष आधारित डेटा केंद्रों की स्थापना और रखरखाव में प्रारंभिक और परिचालन संबंधी व्यय बहुत अधिक होते हैं।
    • रखरखाव और मरम्मत: मरम्मत प्रक्रियाएँ अत्यधिक जटिल होती हैं तथा अंतरिक्ष में ऑन-साइट’ तकनीकी विशेषज्ञों की आवश्यकता उत्पन्न करती हैं।
    • विलंब संबंधी समस्याएँ: पृथ्वी से दूरी के कारण डेटा संप्रेषण में विलंब, जिससे वास्तविक-समय संगणना प्रभावित होती है।
    • साइबर सुरक्षा चिंताएँ: दूरस्थ और दुर्गम अंतरिक्ष वातावरण में डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है।
  • महत्त्व: यह पृथ्वी से परे डेटा केंद्र संचालन को स्थानांतरित कर, स्थलीय ऊर्जा माँग को घटाते हुए और अंतरिक्ष-आधारित AI प्रोसेसिंग की नई संभावनाएँ खोलते हुए, क्लाउड कंप्यूटिंग को पुनर्परिभाषित कर सकता है।

अन्य अंतरिक्ष-आधारित डेटा केंद्र परियोजनाएँ

  • परियोजना स्टारगेट (OpenAI): एनविडिया, सॉफ्टबैंक और ओरेकल के साथ साझेदारी में 500 अरब डॉलर की पहल, जिसका उद्देश्य सौरमंडल में ‘डाइसन-रिंग’ जैसी संरचना में कृत्रिम बुद्धिमत्ता डेटा केंद्र स्थापित करना है।
  • स्टारक्लाउड उपग्रह (एनवीडिया): 60 किलोग्राम का उपग्रह, जिसमें तीव्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रशिक्षण और अनुमान के लिए H100 ग्राफिक्स प्रोसेसर यूनिट भेजी गई।
  • लोनस्टार डेटा होल्डिंग्स’ परियोजना: इंट्यूटिव मशींस के चंद्र मिशन के तहत एक मिनी डेटा सेंटर को चंद्रमा पर भेजा गया था।
    • इस डेटा केंद्र का वजन एक किलोग्राम है और इसमें 8 टेराबाइट ठोस-अवस्था भंडारण क्षमता है।

राइनकोसॉरस (Rhynchosaurs)

ब्राजील के जीवाश्म वैज्ञानिकों ने ट्राइसिक युगीन जीवाश्म भंडारों से अब तक दर्ज किए गए सबसे छोटे और सबसे कम आयु के राइनकोसॉरस के बच्चे के जीवाश्म की पहचान की है।

खोज के बारे में

  • दक्षिणी ब्राजील में खोजा गया यह जीवाश्म, जिसकी पहचान मैक्रोसेफालोसॉरस मैरिएन्सिस के रूप में हुई है, 2.5 सेंटीमीटर से कम की खोपड़ी का है, जो अब तक दर्ज किया गया सबसे छोटा राइनकोसॉरस शिशु है।
  • माइक्रोटोमोग्राफी से पता चला कि इसके दाँत घिसे हुए नहीं थे, जो जन्म के तुरंत बाद मृत्यु का संकेत देते हैं, जबकि विशिष्ट दंत और खोपड़ी की विशेषताओं ने प्रजाति की पहचान की पुष्टि की।
    • माइक्रोटोमोग्राफी एक उच्च-रिजॉल्यूशन, 3D इमेजिंग तकनीक है, जिसमें एक्स-रे का उपयोग कर छोटे वस्तुओं की आंतरिक संरचना का विस्तृत अध्ययन किया जाता है।

राइनकोसॉर के बारे में 

  • राइनकोसॉर विलुप्त हो चुके शाकाहारी, सरीसृप जैसे आर्कियोसॉरोमॉर्फ थे जो ट्राइसिक काल के दौरान रहते थे और पैंजिया महाद्वीप में व्यापक रूप से विस्तृत थे।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • मजबूत खोपड़ी और विशेषीकृत दंत संरचना, जो कठोर वनस्पति को पीसने के लिए अनुकूलित थी।
    • वयस्क राइनकोसॉर दो मीटर से अधिक लंबाई तक बढ़ सकते थे। शाकाहारी आहार के कारण इनके दाँतों में अत्यधिक घिसाव देखा जाता था।

ट्राइसिक काल के बारे में

  • ट्राइसिक काल (लगभग 25.2 करोड़ से 20.1 करोड़ वर्ष पूर्व) मेसोजोइक युग का प्रथम काल था। यह काल पृथ्वी के इतिहास की सबसे गंभीर सामूहिक विलुप्तिकरण (पर्मियन–ट्राइसिक विलुप्ति) के बाद का एक निर्णायक चरण था।
  • इस समय पैंजिया विद्यमान था, जलवायु सामान्यतः गर्म थी और जीवन का पुनरुत्थान हो रहा था।
  • इसी काल में पहले डायनासोर, स्तनधारी, मगरमच्छ, कछुए, प्टेरोसॉर तथा समुद्री सरीसृप जैसे इक्थियोसॉर प्रकट हुए। इसने आगे चलकरसरीसृपों के युग’ अर्थात् मेसोजोइक युग की नींव रखी।

मावेन (MAVEN) मिशन

एक दशक से अधिक समय तक मंगल की कक्षा में कार्यरत रहने के बाद ‘मावेन’ अंतरिक्ष यान से संपर्क टूट गया है। संचार विफलता के कारणों की जाँच के लिए नासा के अभियंता तकनीकी परीक्षण और विश्लेषण कर रहे हैं।

महत्त्वपूर्ण तथ्य 

  • नासा के दो अन्य अंतरिक्ष यान अभी भी मंगल की कक्षा में सक्रिय हैं:-
    • मार्स रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर, जिसका प्रक्षेपण वर्ष 2005 में किया गया था।
    • मार्स ओडिसी, जिसका प्रक्षेपण वर्ष 2001 में हुआ था।

मावेन’ मिशन के बारे में

  • मावेन (मार्स वायुमंडल एवं वाष्पशील तत्वों का विकास) नासा का एक मिशन था।
  • इसका उद्देश्य मंगल के ऊपरी वायुमंडल, आयनमंडल तथा सूर्य के साथ उसकी पारस्परिक क्रिया का अध्ययन करना था।
  • प्रक्षेपण: नवंबर 2013 में प्रक्षेपित किया गया और वर्ष 2014 में मंगल की कक्षा में स्थापित हुआ। इसका लक्ष्य ग्रह के वायुमंडलीय विकास की जाँच करना था।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • वायुमंडलीय संरचना, सौर पवन के प्रभाव और वायुमंडलीय क्षरण को मापने वाले उन्नत उपकरणों से सुसज्जित।
    • आवेशित कणों और सौर विकिरण के कारण मंगल के ऊपरी वायुमंडल से गैसों के पलायन की प्रक्रिया का अध्ययन करने में सक्षम।

मावेन’ मिशन की प्रमुख उपलब्धियाँ

  • महत्त्वपूर्ण खोजें: यह स्थापित किया कि अंतरिक्ष में वायुमंडल का क्षय मंगल के गर्म और आर्द्र ग्रह से ठंडे और शुष्क ग्रह में परिवर्तित होने का प्रमुख कारण था।
    • इसने सिद्ध किया कि मंगल का अधिकांश कार्बन डाइऑक्साइड अंतरिक्ष में उत्सर्जित हो चुका है, जिससे वायुमंडलीय ताप के माध्यम से बड़े पैमाने पर मानवीकरण की संभावना समाप्त हो जाती है।
  • वैज्ञानिक अवलोकन: अरबों वर्षों में मंगल ग्रह के वायुमंडल के क्षरण को सौर गतिविधि और सौर पवन से जोड़ने वाले साक्ष्य प्रदान किए गए।
    • इसने वायुमंडल के संकुचन की व्याख्या करके तरल जल के नुकसान संबंधी समझ को बढ़ाया।
  • अतिरिक्त भूमिका: इसने नासा के क्यूरियोसिटी और पर्सिवियरेंस रोवर्स के लिए संचार रिले के रूप में भी कार्य किया।

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस, 2025

14 दिसंबर, 2025 को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस, 2025, मनाया गया, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार प्रदान किए।

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार (NECA) के बारे में 

  • राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार ऊर्जा दक्षता में सुधार करते हुए उत्पादकता बनाए रखने के लिए उद्योगों, संस्थानों और नवप्रवर्तकों के उत्कृष्ट प्रयासों को मान्यता देते हैं।
  • नोडल मंत्रालय: विद्युत मंत्रालय (भारत सरकार)
  • कार्यान्वयन एजेंसी: ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE)
  • चयन के मानदंड
    • ऊर्जा खपत में मापनीय कमी।
    • ऊर्जा-कुशल प्रौद्योगिकियों एवं सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाना।
    • नवाचार, विस्तार-योग्यता एवं क्षेत्रीय प्रभाव।
    • तकनीकी एवं पुरस्कार समितियों द्वारा पारदर्शी मूल्यांकन।
  • राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार, 2025 की मुख्य विशेषताएँ
    • उद्योग एवं भवन: उन्नत ऊर्जा-कुशल प्रक्रियाओं एवं प्रणालियों को अपनाना।
    • परिवहन एवं उपकरण: ईंधन और ऊर्जा दक्षता मानकों में सुधार करना।
    • नवाचार: ऊर्जा बचत के लिए नवीन समाधानों का विकास करना।
    • सामाजिक माध्यम प्रभावक एवं सामग्री निर्माता: ऊर्जा संरक्षण पर डिजिटल जागरूकता एवं व्यवहार परिवर्तन अभियान संचालित करना।
  • राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार ‘ऊर्जा की बचत ही ऊर्जा का उत्पादन है’ की अवधारणा को बढ़ावा देता है। इससे ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु कार्रवाई और सतत् आर्थिक विकास को मजबूती मिलती है।

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस के बारे में

  • राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस, वर्ष 1991 से प्रत्येक वर्ष 14 दिसंबर को मनाया जाता है।
  • इसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में ऊर्जा उपयोग में कमी और ऊर्जा-कुशल प्रथाओं को प्रोत्साहित करने के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

ऊर्जा दक्षता ब्यूरो के बारे में

  • ऊर्जा दक्षता ब्यूरो भारत में विभिन्न क्षेत्रों में ऊर्जा दक्षता और संरक्षण को बढ़ावा देने वाली शीर्ष संस्था है।
  • इसकी स्थापना 1 मार्च, 2002 को ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के अंतर्गत की गई थी।
  • भूमिका
    • नीतियों और बाजार-आधारित तंत्रों का निर्माण करना।
    • प्रदर्शन, उपलब्धि एवं व्यापार तथा मानक एवं लेबलिंग जैसे कार्यक्रमों का क्रियान्वयन करना।
    • राज्यों, उद्योगों और संस्थानों के साथ समन्वय कर भारत की ऊर्जा तीव्रता को कम करना।

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

THE MOST
LEARNING PLATFORM

Learn From India's Best Faculty

      

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.