100% तक छात्रवृत्ति जीतें

रजिस्टर करें

संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal January 02, 2026 05:00 52 0

कोल्लेरू झील

कोल्लेरू झील की ‘ब्लैक ड्राई फिश’ (करेलू/करीमीन) को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त हुई है, जिसका प्रतिवर्ष लगभग 90 टन का निर्यात किया जाता है। इससे स्थानीय आजीविका को उल्लेखनीय बढ़ावा मिला है।

‘ब्लैक ड्राई फिश’ (करेलू/करीमीन) के बारे में

  • परिचय: ‘ब्लैक ड्राई फिश’ आंध्र प्रदेश की एक पारंपरिक एवं पौष्टिक  खाद्य सामग्री है। यह उच्च प्रोटीन, ओमेगा-3 वसा अम्ल, विटामिन और खनिज से युक्त होती है तथा इसकी लंबी ‘शेल्फ-लाइफ’ होती है।
  • उत्पादन की प्रक्रिया:  ताजी पकड़ी गई मछलियों को साफ किया जाता है, नमक लगाया जाता है और फिर प्राकृतिक धूप में सुखाया जाता है। यह प्रक्रिया रसायन-मुक्त होती है, जिसमें नमक, हल्दी और मिर्च पाउडर का उपयोग किया जाता है, जिससे स्वाद और पोषण दोनों में वृद्धि होती है।
  • स्रोत: मछलियाँ मुख्यतः कोल्लेरू झील से पारंपरिक मछली पकड़ने की विधियों द्वारा प्राप्त की जाती हैं। स्थानीय समुदायों द्वारा प्रसंस्करण किया जाता है, जिससे विशेषकर महिलाओं के लिए मौसमी रोजगार सृजित होता है।

कोल्लेरू झील के बारे में

  • परिचय: कोल्लेरू भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झीलों में से एक है, जिसे प्रायः “मछुआरों का स्वर्ग और पक्षियों के आश्रय स्थल” के रूप में वर्णित किया जाता है, जो समृद्ध जलीय और पक्षी जैव विविधता का समर्थन करती है।
  • अवस्थिति: यह आंध्र प्रदेश में कृष्णा और गोदावरी नदी के डेल्टाओं के बीच स्थित है, जो एलुरु के पास कृष्णा और पश्चिम गोदावरी जिलों तक विस्तृत है।
  • पारिस्थितिक महत्त्व 
    • जैव विविधता: लगभग 90 मछली प्रजातियों और स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों की बड़ी आबादी का आवास स्थल।
    • बाढ़ नियंत्रण: कृष्णा-गोदावरी बेसिन के लिए एक प्राकृतिक बाढ़-संतुलन जलाशय के रूप में कार्य करता है।
    • रामसर स्थल: अंतरराष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्रभूमि (वर्ष 2002) के रूप में नामित, जो मत्स्यपालन और हजारों लोगों की आजीविका प्रदान करता है।

कोल्लेरू की ‘ब्लैक ड्राई फिश’ पारंपरिक ज्ञान, सतत् आजीविका और आर्द्रभूमि संरक्षण के बीच के संबंध को दर्शाती है।

प्रलय मिसाइल

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के तट से दो ‘प्रलय मिसाइलों’ का सफल प्रक्षेपण किया है।

‘प्रलय मिसाइल’ के बारे में

  • प्रलय एक स्वदेशी रूप से विकसित, अल्प दूरी की सेमी-बैलिस्टिक, भूमि-से-भूमि पर मार करने वाली मिसाइल है। इसका उद्देश्य शत्रु के महत्त्वपूर्ण लक्ष्यों पर उच्च-परिशुद्ध पारंपरिक प्रहार करना है।
  • विकसितकर्ता: अनुसंधान केंद्र इमारत, हैदराबाद, अन्य DRDO प्रयोगशालाओं के सहयोग से।
    • उत्पादन साझेदार: भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL)

मुख्य विशेषताएँ

  • प्रणोदन: ठोस-ईंधन आधारित, सेमी-बैलिस्टिक मिसाइल
  • मारक दूरी: 150–500 किलोमीटर, रणनीतिक एवं परिचालन स्तर के प्रहार हेतु उपयुक्त।
  • पेलोड क्षमता: 500–1,000 किलोग्राम, विभिन्न प्रकार के पारंपरिक वारहेड ले जाने में सक्षम।
  • सटीकता: उन्नत मार्गदर्शन एवं नौवहन प्रणाली, त्रुटि संभाव्यता 10 मीटर से कम।
  • गति: अंतिम चरण में मैक 6.1 तक, जिससे जीवित रहने की क्षमता बढ़ती है।
  • गतिशीलता: मध्य-मार्ग में पथ परिवर्तन की क्षमता, जिससे वायु-रक्षा प्रणालियों से बचाव संभव।
  • लक्ष्य: रडार प्रतिष्ठान, कमांड केंद्र, वायुसेना अड्डे, लॉजिस्टिक हब।
  • मोबिलिटी: चलित प्रक्षेपकों से प्रक्षेपण योग्य, जिससे अनुप्रयोग में लचीलापन बढ़ता है।

‘सल्वो’ परीक्षण (Salvo Test) क्या है

  • ‘सल्वो’ परीक्षण में युद्ध की स्थितियों का अनुकरण करने और दुश्मन की हवाई और मिसाइल रक्षा प्रणालियों का सामना करने के लिए एक ही लॉन्चर से तेजी से एक के बाद एक कई मिसाइलें दागी जाती हैं।
  • साल्वो परीक्षण का महत्त्व: यह परीक्षण प्रलय मिसाइल की परिचालन विश्वसनीयता, सटीकता और तीव्र-तीव्रता क्षमता को स्थापित करता है, जिससे भारत की पारंपरिक प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।

निमेसुलाइड 

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम, 1940 की धारा 26A के तहत 100 मिलीग्राम से अधिक मात्रा वाली ‘ओरल निमेसुलाइड’ के निर्माण, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगाया है।

निमेसुलाइड के बारे में

  • निमेसुलाइड एक डि-स्टेरॉयड विकार रोधी औषधि है, जिसका उपयोग तीव्र दर्द और बुखार के उपचार में किया जाता है।
  • इसमें दर्दनाशक और ज्वरनाशक गुण होते हैं।
  • भारत में यह दवा सामान्यतः नाइस, निमुलिड, निमटेक्स और निसिप जैसे नामों से उपलब्ध है।
  • यह दवा प्रायः अल्पकालिक दर्द निवारण के लिए दी जाती है और विभिन्न मौखिक रूपों में उपलब्ध है।
  • प्रतिबंध का दायरा
    • यह प्रतिबंध केवल 100 मिलीग्राम से अधिक मात्रा वाली ‘फास्ट रिलीज ओरल’ तैयारियों पर लागू है।
    • 100 मिलीग्राम या उससे कम मात्रा वाली औषधि प्रतिबंधित नहीं हैं।
    • यह प्रतिबंध निर्माण, वितरण और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से लागू होगा।

प्रतिबंध के पीछे कारण

  • स्वास्थ्य जोखिम: वैज्ञानिक साक्ष्यों के अनुसार, उच्च मात्रा वाली निमेसुलाइड से मानव स्वास्थ्य, विशेषकर यकृत विषाक्तता, का गंभीर खतरा हो सकता है।
  • विशेषज्ञ सिफारिशें: यह निर्णय औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड से परामर्श और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा जताई गई सुरक्षा चिंताओं के बाद लिया गया।
  • सुरक्षित विकल्पों की उपलब्धता: बाजार में अधिक सुरक्षित वैकल्पिक विकार रोधी दवाएँ उपलब्ध हैं, जिससे उच्च मात्रा के उपयोग की आवश्यकता नहीं रह जाती।
  • पृष्ठभूमि: निमेसुलाइड पिछले एक दशक से नियामक जाँच के दायरे में रही है; इससे पहले बाल चिकित्सा उपयोग पर प्रतिबंध और खुराक सीमित करने की सिफारिशें की जा चुकी हैं।

महत्त्व: यह प्रतिबंध मादक पदार्थों की सुरक्षा संबंधी नियमों को मजबूत करता है, मादक पदार्थों के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देता है और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति को साक्ष्य-आधारित चिकित्सा पद्धति के अनुरूप बनाता है।

‘जस्टिस मिशन 2025’

चीन ने ताइवान के आस-पास ‘जस्टिस मिशन 2025’ के तहत बड़े पैमाने के लाइव-फायर सैन्य अभ्यास आयोजित किए, जिनमें मिसाइल प्रक्षेपण, लड़ाकू विमान और नौसैनिक तैनाती शामिल रही, ताकि नाकेबंदी की स्थिति का अनुकरण किया जा सके।

‘जस्टिस मिशन 2025’ के बारे में

  • ‘जस्टिस मिशन 2025’ पीपुल्स लिबरेशन आर्मी द्वारा संचालित उच्च तीव्रता वाला, दो-दिवसीय सैन्य अभ्यास है। यह अभ्यास वायु, समुद्र, मिसाइल और थल सेना के संयुक्त अभियानों का प्रदर्शन करता है।
  • अवस्थिति और दायरा: ये अभ्यास ताइवान के आस-पास, जिसमें इसके उत्तर और दक्षिण के जलक्षेत्र भी शामिल हैं, में किए गए और ताइवान के सबसे निकटतम चीनी क्षेत्र पिंगटन द्वीप से मिसाइल प्रक्षेपण किए गए।
  • उद्देश्य
    • ताइवान की स्वतंत्रता संबंधी दावों को हतोत्साहित करना।
    • संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगियों को ताइवान को हथियार बिक्री और सैन्य समर्थन के विरुद्ध चेतावनी देना।
    • संभावित संघर्ष की स्थिति में ताइवान की नाकेबंदी और अलगाव की चीन की क्षमता का प्रदर्शन करना।

ताइवान के आस-पास हालिया अभ्यासों के निहितार्थ

  • क्षेत्रीय तनाव में वृद्धि: ताइवान जलडमरूमध्य में आकलन और आकस्मिक संघर्ष संबंधी जोखिम बढ़ता है।
  • अमेरिका–चीन प्रतिद्वंद्विता में तीव्रता: ताइवान को अमेरिकी हथियार बिक्री और सुरक्षा आश्वासनों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्द्धा और मजबूत होती है।
  • पूर्वी एशिया की सुरक्षा चिंताएँ: इससे जापान, आसियान देशों और क्षेत्रीय समुद्री स्थिरता पर निर्भर वैश्विक व्यापार मार्गों के लिए खतरे का संकेत प्राप्त होता है।

‘लंदन मेटल एक्सचेंज’ पर तांबे की कीमतें 

वर्ष 2025 के उत्तरार्द्ध में ताँबे की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गईं, जहाँ ‘लंदन मेटल एक्सचेंज’ पर कीमतें लगभग 12,000 अमेरिकी डॉलर प्रति टन के आस-पास रहीं और भारतीय वायदा बाजार में ₹1,240 प्रति किलोग्राम से अधिक हो गईं। इसका प्रमुख कारण माँग में वृद्धि, आपूर्ति में व्यवधान और नीतिगत परिवर्तन रहे।

ताँबा बाजार की प्रवृत्ति

  • मौद्रिक सहायक कारक: वर्ष 2025 में अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती से वास्तविक प्रतिफल और वित्तपोषण लागत घटी, जिससे ताँबे जैसी औद्योगिक धातुओं में निवेश माँग बढ़ी।
  • व्यापार नीति विकृतियाँ: अमेरिकी शुल्कों की आशंका के कारण अमेरिकी गोदामों में भंडारण बढ़ा, जिससे ‘लंदन मेटल एक्सचेंज’ पर आपूर्ति सख्त हुई।
  • आपूर्ति में व्यवधान: चिली (एल टेनिएंटे) और इंडोनेशिया (ग्रासबर्ग) की खानों में कार्य बंद होने से वैश्विक उत्पादन सीमित हुआ, जिससे तेजी का रुझान और मजबूत हुआ।
  • संरचनात्मक मांग: विद्युतीकरण, नवीकरणीय ऊर्जा, विद्युत वाहन, ग्रिड विस्तार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डेटा केंद्रों के कारण दीर्घकालिक तांबा मांग में तीव्र वृद्धि हुई।

तांबा उत्पादन के बारे में

  • रणनीतिक महत्त्व: ताँबा आधुनिक अवसंरचना, ऊर्जा प्रणालियों और उन्नत प्रौद्योगिकियों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण  औद्योगिक धातु है, क्योंकि इसकी विद्युत चालकता अत्यधिक उच्च होती है।
  • मुख्य गुण: उच्च विद्युत एवं ताप चालकता, उत्कृष्ट तन्यता, जंग-रोधक क्षमता और पुनर्चक्रण योग्यता, जो इसे बार-बार औद्योगिक उपयोग के लिए उपयुक्त बनाती हैं।
  • उपयोग: विद्युत संचरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डेटा केंद्र, विद्युत वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियाँ, निर्माण क्षेत्र और औद्योगिक मशीनरी।
  • प्रमुख वैश्विक उत्पादक देश: चिली (सबसे बड़ा उत्पादक), पेरू, चीन, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया।
  • घरेलू उत्पादन: मध्य प्रदेश भारत का अग्रणी ताँबा उत्पादक राज्य है, जहाँ मलांजखंड खदान (बालाघाट जिला) स्थित है।
    • इसके बाद राजस्थान (खेड़ी खदानें) और झारखंड (सिंहभूम क्षेत्र) प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।

वर्तमान ताँबा मूल्य वृद्धि संरचनात्मक माँग में तेजी, कमजोर वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं और नीतिगत व्यापार पुनर्संरेखण के संयुक्त प्रभाव को दर्शाती है। इसके कारण अल्पकालिक अस्थिरता के जोखिमों के बावजूद ताँबे की कीमतें ऊँचे स्तर पर बनी रहने की संभावना है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग (AI-ML) नीति-2026

राजस्थान मंत्रिमंडल ने नैतिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता को बढ़ावा देने, ई-गवर्नेंस को मजबूत करने और राज्य को प्रौद्योगिकी-संचालित निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग (AI-ML) नीति-2026 को मंजूरी दी।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग (AI-ML) नीति-2026 के बारे में

  • राजस्थान AI-ML नीति-2026 एक व्यापक राज्य स्तरीय ढाँचा है, जिसका उद्देश्य शासन, उद्योग और सार्वजनिक सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग को मुख्यधारा में लाना है।
  • उद्देश्य
    • सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी को त्वरित, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए, जिम्मेदारीपूर्ण AI का उपयोग करना।
    • प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना और नवाचार-आधारित आर्थिक विकास को बढ़ावा देना।
    • AI प्रणालियों की नैतिक, सुरक्षित और जवाबदेह तैनाती सुनिश्चित करना।
  • महत्त्वपूर्ण भाग 
    • नैतिक AI ढाँचा: पारदर्शिता, निष्पक्षता, व्याख्यात्मकता, लेखापरीक्षा योग्यता, पूर्वाग्रह में कमी और डेटा गोपनीयता संरक्षण पर जोर।
    • संस्थागत तंत्र: राज्य स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना और प्रत्येक विभाग में AI नोडल अधिकारियों की नियुक्ति।
    • डिजिटल अवसंरचना: AI क्लाउड सेवाओं, सुरक्षित डेटा भंडार, परीक्षण प्लेटफॉर्मों और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग सुविधाओं का विकास।
    • क्षमता निर्माण: विद्यालयों, ITI, पॉलिटेक्निक और कॉलेजों में AI शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देना तथा सरकारी अधिकारियों को प्रशिक्षण देना।
    • उद्योग समर्थन: राज्य की औद्योगिक और स्टार्ट-अप, लघु एवं मध्यम उद्यमों, उद्योगों और अनुसंधान संस्थानों के लिए प्रोत्साहन।
  • महत्त्व 
    • ई-गवर्नेंस और डेटा-आधारित निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करता है।
    • राजस्थान को नैतिक और उत्तरदायी AI नवाचार के क्षेत्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करता है।
    • राज्य की पहलों को ‘AI फॉर आल’ (AI for All) के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ संरेखित करता है, जिससे समावेशी डिजिटल परिवर्तन को बढ़ावा मिलता है।

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

THE MOST
LEARNING PLATFORM

Learn From India's Best Faculty

      

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.