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संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal January 05, 2026 03:47 41 0

मन्नथु पद्मनाभन

भारतीय प्रधानमंत्री ने मन्नथु पद्मनाभन की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें एक दूरदर्शी व्यक्ति के रूप में याद किया, जिन्होंने अपना जीवन सामाजिक सुधार, गरिमा और समानता के लिए समर्पित कर दिया था।

मन्नथु पद्मनाभन के बारे में

  • मन्नाथु पद्मनाभन, जिन्हें मन्नम के नाम से जाना जाता है, का जन्म 2 जनवरी, 1878 को केरल के चंगनास्सेरी के पास पेरुन्ना में हुआ था।
  • नायर सर्विस सोसायटी (NSS): वर्ष 1912 में, उन्होंने केरलिया नायर समाजम की स्थापना की, जो बाद में नायर सर्विस सोसायटी (वर्ष 1915) में विकसित हुई।
    • जहाँ एक ओर NSS ने नायर समुदाय के सामाजिक और शैक्षिक उत्थान पर ध्यान केंद्रित किया, वहीं पद्मनाभन की दृष्टि क्षेत्रीय हितों से परे थी और केरल के व्यापक सामाजिक पुनर्जागरण के साथ संरेखित थी।
  • सामाजिक सुधार संबंधी पहल: मंदिर में प्रवेश, साथ में भोजन करने और सामाजिक गतिशीलता का समर्थन किया।
    • हिंदू समाज में अस्पृश्यता और जाति आधारित भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष किया।
    • रूढ़िवादी ढाँचों के भीतर महिलाओं की शिक्षा और सामाजिक सुधार को बढ़ावा दिया।
    • वैकोम सत्याग्रह: अस्पृश्यता के विरुद्ध वायकॉम सत्याग्रह (वर्ष 1924-25) में सहायक भूमिका निभाई।
    • गुरुवयूर सत्याग्रह (वर्ष 1931): वर्तमान त्रिशूर जिले में गुरुवयूर मंदिर में अछूतों को प्रवेश की अनुमति देने के लिए गुरुवयूर सत्याग्रह में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से सक्रिय रूप से जुड़े रहे।
    • भारत छोड़ो आंदोलन (वर्ष 1942) में भाग लिया; राष्ट्रवादी गतिविधियों के लिए कारावास की सजा हुई।
    • त्रावणकोर राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष रहे।
    • त्रावणकोर में निरंकुश शासन का विरोध किया और उत्तरदायी सरकार की माँग की।
    • त्रावणकोर विधान सभा के सदस्य रहे।
  • सम्मान: उन्हें भारत केसरी’ की उपाधि से सम्मानित किया गया और बाद में पद्म भूषण से नवाजा गया।

गांबिया

हाल ही में 200 से अधिक लोगों को ले जा रही एक प्रवासी नाव गांबिया के तट के पास पलट गई, जिसमें कम-से-कम 7 लोगों की मृत्यु हो गई। इस घटना ने यूरोप की ओर जाने वाले अटलांटिक प्रवासन मार्ग पर मौजूद गंभीर जोखिमों को उजागर किया।

गांबिया के बारे में

  • परिचय: गांबिया पश्चिमी अफ्रीका का एक छोटा देश है, जो अपने संकीर्ण आकार, अटलांटिक तटरेखा तथा नदी-आधारित भूगोल और व्यापार पर निर्भरता के लिए जाना जाता है।
  • अवस्थिति: यह पश्चिमी अफ्रीका में स्थित है, जिसकी अटलांटिक महासागर के साथ संक्षिप्त तटरेखा है। देश के उत्तर, दक्षिण और पूर्व में लगभग पूरी तरह से सेनेगल स्थित है।
  • भूगोल: देश का केंद्र गांबिया नदी के चारों ओर स्थित है, जो पूर्व से पश्चिम की ओर प्रवाहित होते हुए अटलांटिक महासागर में मिलती है। इसके परिणामस्वरूप मुहाने, आर्द्रभूमियाँ तथा रेतीले समुद्र तट का निर्माण करते हैं।
    • तटीय क्षेत्र बंदरगाहों, मत्स्यपालन, पर्यटन तथा प्रवासन मार्गों को समर्थन प्रदान करता है।
  • वनस्पति और जलवायु: यहाँ मैंग्रोव, सवाना घासभूमि, आर्द्रभूमियाँ तथा नदी-तटीय वन पाए जाते हैं। जलवायु उष्णकटिबंधीय है, जिसमें वर्षा एवं शुष्क ऋतुएँ होती हैं।
  • रणनीतिक महत्त्व: बंजुल बंदरगाह, जो गांबिया नदी के मुहाने पर स्थित है, व्यापार और परिवहन के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
    • गांबिया की तटरेखा यूरोप के कैनरी द्वीपों तक पहुँचने का प्रयास करने वाले प्रवासियों का एक प्रमुख प्रस्थान बिंदु भी है।

असम में जनजातीय स्थिति

हाल ही में असम की सर्वोच्च जनजातीय संस्था, असम जनजातीय संगठनों की समन्वय समिति  (CCTOA) ने राज्य सरकार के प्रस्ताव का विरोध किया है, जिसमें छह समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की बात कही गई है। समिति ने इसके पीछे संवैधानिक और राजनीतिक चिंताओं को आधार बताया है।

असम में जनजातीय दर्जे की माँग

  • विचाराधीन समुदाय: असम सरकार ने चुटिया, कोच-राजबोंगशी, मटक, मोरान, ताई-अहोम तथा चाय जनजातियाँ (आदिवासी) को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की अनुशंसा की है।
  • राज्य की अनुशंसा: मंत्रियों के एक समूह ने इन्हें अनुसूचित जनजाति (मैदानी), अनुसूचित जनजाति (पर्वतीय) तथा अनुसूचित जनजाति (घाटी) श्रेणियों में वर्गीकृत करने का प्रस्ताव रखा।
  • उद्देश्य: यह पहल विशेष रूप से स्थानीय निकायों और राज्य विधानसभा में राजनीतिक प्रतिनिधित्व तथा आरक्षण की माँगों से संबंधित बताई गई है।

असम जनजातीय संगठनों की समन्वय समिति (CCTOA) द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दे

  • संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन: समिति का तर्क है कि अनुसूचित जनजाति की पहचान जनजातीय विशेषताओं पर आधारित होनी चाहिए, न कि राजनीतिक या चुनावी कारणों पर।
  • मौजूदा अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों पर खतरा: छह समुदायों को शामिल करने से वर्तमान अनुसूचित जनजातियों के राजनीतिक और शैक्षणिक आरक्षण में कटौती हो सकती है।
  • विशेषज्ञ निष्कर्षों से विरोधाभास: पूर्व की विशेषज्ञ समितियों ने इनमें से कई समुदायों को अन्य पिछड़ा वर्ग या अनुसूचित जाति में वर्गीकृत किया था, न कि अनुसूचित जनजाति में।
  • आरक्षण सीमा की चिंता: असम में पहले से ही 50% आरक्षण सीमा (जो सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित है) से अधिक आरक्षण लागू है और नई प्रक्रिया से संवैधानिक अनुपालन और कमजोर हो सकता है।

अनुसूचित जनजाति दर्जे के मानदंड

  • पारंपरिक अर्थव्यवस्था: पारंपरिक आजीविका तथा पूर्व-आधुनिक सामाजिक-आर्थिक विशेषताओं की उपस्थिति।
  • विशिष्ट संस्कृति और अलगाव: अलग भाषा, रीति-रिवाज, संस्कार तथा तुलनात्मक भौगोलिक अलगाव
  • सामाजिक पिछड़ापन: राज्य की अन्य आबादी की तुलना में शैक्षणिक और सामाजिक-आर्थिक पिछड़ापन।

अनुसूचित जनजाति दर्जा प्रदान करने की प्रक्रिया

  • राज्य स्तर पर पहल: राज्य या केंद्रशासित प्रदेश सरकार द्वारा प्रदत्त अध्ययन के साथ प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाता है।
  • केंद्र स्तर पर जाँच: प्रस्ताव की जाँच भारत के महापंजीयक तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा की जाती है।
  • अंतिम स्वीकृति: केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद, संसद द्वारा संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश, 1950 में संशोधन किया जाता है तथा राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त होती है।

विश्व का पहला कार्बन सीमा कर

यूरोपीय संघ ने 1 जनवरी से कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) के अंतर्गत विश्व का पहला कार्बन सीमा कर लागू करना प्रारंभ कर दिया है।

महत्त्वपूर्ण तथ्य 

  • यह कर कार्बन-गहन वस्तुओं के आयात पर कार्बन संबंधी शुल्क आरोपित करता है, जिसका भारत के इस्पात और एल्युमिनियम निर्यात पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा।

कार्बन कर के बारे में

  • कार्बन कर एक प्रकार का दंडात्मक कर है, जो स्वीकार्य सीमा से अधिक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर व्यवसायों से वसूला जाता है।
  • यह सामान्यतः वायुमंडल में उत्सर्जित प्रत्येक टन उत्सर्जन के आधार पर लगाया जाता है।
  • कार्बन कर का प्राथमिक उद्देश्य उत्सर्जन को आर्थिक रूप से महँगा बनाकर कार्बन-गहन गतिविधियों को हतोत्साहित करना है, जिससे स्वच्छ उत्पादन विधियों और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी को प्रोत्साहन मिल सके।

कार्बन मूल्य निर्धारण तंत्र के प्रकार

  • उत्सर्जन-आधारित कर: किसी इकाई द्वारा उत्पन्न ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की मात्रा पर सीधे आरोपित किया जाता है।
  • वस्तु-आधारित कर: कोयला, पेट्रोल, डीजल जैसी कार्बन-गहन वस्तुओं या सेवाओं पर उनके उत्पादन और उपभोग से होने वाले अनुमानित उत्सर्जन के आधार पर लगाया जाता है।
  • सीमा और व्यापार प्रणाली: एक बाजार-आधारित तंत्र, जिसमें सरकार कुल उत्सर्जन की सीमा तय करती है तथा कंपनियों को इस सीमा के भीतर उत्सर्जन परमिट खरीदने, बेचने या व्यापार करने की अनुमति होती है।
  • कार्बन शुल्क: आयातित वस्तुओं में निहित कार्बन मात्रा के आधार पर लगाया गया पर्यावरणीय शुल्क, जिसका उद्देश्य कार्बन रिसाव को रोकना है, विशेषकर उन देशों से जहाँ समान कार्बन मूल्य निर्धारण व्यवस्था नहीं है।

कार्बन सीमा समायोजन तंत्र

  • कार्बन सीमा समायोजन तंत्र यूरोपीय संघ द्वारा कार्बन-गहन वस्तुओं के आयात पर लगाया गया जलवायु-आधारित शुल्क है।
  • यह वर्ष 2030 तक 55 प्रतिशत उत्सर्जन कटौती पैकेज का हिस्सा है।
    • इसका उद्देश्य वर्ष 1990 के स्तर की तुलना में वर्ष 2030 तक ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन में 55% की कमी के लक्ष्य को प्राप्त करना है।
  • आयातकों को कार्बन प्रमाण-पत्र खरीदने होते हैं, जिनकी कीमत यूरोपीय उत्सर्जन व्यापार प्रणाली की नीलामी दरों के अनुरूप होती है।
  • प्रत्येक वर्ष जमा किए जाने वाले प्रमाण-पत्रों की संख्या आयातित वस्तुओं की मात्रा और उनसे जुड़े उत्सर्जन स्तर पर निर्भर करती है।
  • क्षेत्रीय कवरेज: यह विद्युत क्षेत्र और ऊर्जा-गहन उद्योगों जैसे सीमेंट, इस्पात, एल्युमीनियम, तेल शोधन, कागज, काँच, रसायन और उर्वरक से संबंधित वस्तुओं पर लागू होता है।

सोशल मीडिया का विनियमन

हाल ही में केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को अपने AI चैटबॉट ग्रोक की जाँच करने का निर्देश दिया है, क्योंकि यह महिलाओं की विकृत और अश्लील तस्वीरें जेनरेट कर रहा था।

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी हालिया सलाह

  • मंत्रालय ने X को अश्लील या अपमानजनक कंटेंट के निर्माण को रोकने के लिए ग्रोक का व्यापक तकनीकी, प्रक्रियात्मक और शासन-स्तरीय ऑडिट करने का आदेश दिया।
  • प्लेटफॉर्मों को यह निर्देश दिया गया कि वे अवैध सामग्री को बिना किसी विलंब के हटाएँ अथवा उसकी पहुँच को निष्क्रिय करें तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर अनुपालन कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

भारत में सोशल मीडिया के विनियमन के प्रावधान

  • कानूनी ढाँचा: सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, साथ ही IT (मध्यस्थ दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया नैतिकता संहिता) नियम, 2021, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और AI-सक्षम मध्यस्थों को नियंत्रित करते हैं।
    • IT अधिनियम की धारा 79 मध्यस्थों को सशर्त सुरक्षित आश्रय प्रदान करती है, बशर्ते वे उचित सावधानी संबंधी दायित्वों का कड़ाई से अनुपालन करें।
  • उचित सावधानी और जवाबदेही: प्लेटफॉर्मों को अश्लील, पोर्नोग्राफिक या हानिकारक कंटेंट, विशेष रूप से महिलाओं से संबंधित कंटेंट की मेजबानी और प्रसार को रोकने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठाने चाहिए।
    • अनुपालन में विफलता पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत जुर्माना लगाया जा सकता है।
  • नियामक एवं निगरानी निकाय: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) डिजिटल प्लेटफॉर्मों को विनियमित करने वाला नोडल प्राधिकरण है।
    • सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समितियाँ ऑनलाइन कंटेंट के सख्त विनियमन के लिए नीतिगत और विधायी उपायों की सिफारिश करती हैं।
  • प्रवर्तन शक्तियाँ: सरकार अनुपालन न करने पर प्लेटफॉर्मों और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध सामग्री हटाने, पहुँच अवरुद्ध करने, ऑडिट करने और कानूनी कार्रवाई का आदेश दे सकती है।

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