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संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal January 08, 2026 04:20 33 0

एमपेंबा प्रभाव (Mpemba Effect)

 

भारतीय वैज्ञानिकों ने एमपेंबा प्रभाव (Mpemba Effect) के लंबे समय से संचालित विरोधाभास को समझने के लिए पहली बार सुपरकंप्यूटर आधारित सिमुलेशन विकसित किया है।

एमपेंबा प्रभाव के बारे में

  • एमपेंबा प्रभाव वह प्रतिकूल-बुद्धिगम्य (Counterintuitive) घटना है, जिसमें कुछ परिस्थितियों में गर्म जल, ठंडे जल की तुलना में अधिक तेजी से जम जाता है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: इसका नाम तंजानिया के छात्र एरास्टो एमपेंबा के नाम पर रखा गया, जिन्होंने वर्ष 1963 में इस प्रभाव की रिपोर्ट की थी।
    • हालाँकि नाम हालिया घटना से संबंधित है, लेकिन इस घटना का उल्लेख अरस्तू ने किया था, और बाद में फ्राँसिस बेकन तथा रेने डेसकार्टेस ने भी किया।
  • प्रस्तावित वैज्ञानिक व्याख्याएँ: संभावित कारणों में वाष्पीकरण से द्रव्यमान में कमी, संवहन धाराएँ, गैसें, और सुपरकूलिंग में अंतर शामिल हैं, कोई एक व्याख्या सभी मामलों पर लागू नहीं होती।
  • परिस्थितियाँ: यह प्रभाव पात्र (कंटेनर) के आकार, परिवेश, प्रारंभिक तापमान, जल की शुद्धता और फ्रीजर की स्थितियों जैसे कारकों पर निर्भर करता है।

एमपेंबा प्रभाव के अनुप्रयोग

  • खाद्य प्रसंस्करण में फास्ट फ्रीजिंग: ‘फास्ट फ्रीजिंग’ की तकनीकों में सहायक, जिससे बर्फ के क्रिस्टल का आकार कम होता है और भोजन की बनावट, स्वाद और पोषण गुणवत्ता संरक्षित रहती है।
  • क्रायोप्रिजर्वेशन एवं सामग्री विज्ञान: तरल पदार्थों के नियंत्रित ठोसकरण में सहायक, जो जैविक नमूनों के संरक्षण और सामग्रियों में अवस्था परिवर्तन के अध्ययन में उपयोगी है।
  • बेहतर शीतलन एवं प्रशीतन प्रणालियाँ: इस प्रभाव की समझ शीतलन चक्रों के अनुकूलन में मदद कर सकती है, जिससे औद्योगिक प्रशीतन में ऊर्जा दक्षता बढ़ सकती है।
  • जलवायु एवं पर्यावरणीय अध्ययन: प्राकृतिक प्रणालियों में बर्फ निर्माण की प्रक्रियाओं—जैसे बादल संबंधी भौतिकी, झीलों का जमना और ध्रुवीय जलवायु प्रक्रियाएँ—के बारे में संकेत प्रदान करता है।
  • वैज्ञानिक मॉडलिंग एवं शिक्षा: ऊष्मागतिकीय मॉडलों के परीक्षण के लिए एक मानक घटना के रूप में उपयोग किया जाता है और भौतिकी शिक्षा में आलोचनात्मक चिंतन को बढ़ावा देता है।

ग्रीनलैंड (Greenland)

हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा कि सुरक्षा उद्देश्यों के लिए अमेरिका को ग्रीनलैंड की आवश्यकता है, जिस पर डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने कड़ा विरोध जताया।

ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से क्यों महत्त्वपूर्ण है?

  • रणनीतिक अवस्थिति: उत्तरी अमेरिका और यूरोप के बीच ग्रीनलैंड की स्थिति इसे आर्कटिक सुरक्षा संरचना में एक महत्त्वपूर्ण केंद्र बनाती है, जिसमें अमेरिका की बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के प्रमुख तत्त्व स्थित हैं।
  • संसाधन एवं भू-राजनीतिक महत्त्व: इस द्वीप में दुर्लभ मृदा तत्त्वों और खनिजों के महत्त्वपूर्ण भंडार हैं, जो चीन पर निर्भरता कम करने के अमेरिकी प्रयासों के अनुरूप हैं और बढ़ती आर्कटिक भू-राजनीति तथा महाशक्ति प्रतिस्पर्द्धा के बीच इसके महत्त्व को बढ़ाते हैं।

ग्रीनलैंड

  • यह विश्व का सबसे बड़ा द्वीप है, जो उत्तरी अटलांटिक महासागर में स्थित है।
    • ग्रीनलैंड के लोग अपने देश को कालालित नुनाअत (Kalaallit Nunaat) कहते हैं (ग्रीनलैंडवासियों का देश)।
  • राजधानी: नूक (Nuuk)
  • सर्वोच्च बिंदु: गुनब्योर्न्स फ्येल्ड (Gunnbjorn’s Fjeld)
  • स्थिति: यह कनाडा के उत्तर-पूर्वी तट के पास उत्तरी अटलांटिक महासागर में स्थित है।
  • इसके उत्तर में आर्कटिक महासागर, पश्चिम में स्मिथ साउंड, बैफिन बे और डेविस जलडमरूमध्य, तथा पूर्व में आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक महासागर हैं।
    • यह विश्व का सबसे बड़ा (गैर-महाद्वीपीय) द्वीप है।
    • इसके समुद्री सीमाएँ कनाडा, आइसलैंड और नॉर्वे से मिलती हैं।
    • यह पृथ्वी के उत्तरी और पश्चिमी दोनों गोलार्द्धों में स्थित है।
  • भौतिक विशेषताएँ: यह अपने विशाल टुंड्रा और अत्यंत विशाल हिमनदों के लिए जाना जाता है।
    • सबसे बड़े हिमनदों में से एकपेटरमैन’ है।
    • ग्रीनलैंड की प्रमुख भौतिक विशेषता इसकी विशाल आइस शीट’ है, जो आकार में अंटार्कटिका के बाद दूसरी सबसे बड़ी है और ग्रीनलैंड के कुल भूमि क्षेत्र के हिस्से से अधिक को ढकती है।
    • ग्रीनलैंड में 25 मई से 25 जुलाई तक सूर्य अस्त नहीं होता और जुलाई एकमात्र महीना है, जब तापमान हिमांक से ऊपर पहुँचता है।
  • ग्रीनलैंड सागर: यह आर्कटिक महासागर का एक बाह्य भाग है, जो मुख्य आर्कटिक बेसिन के दक्षिण में स्थित है और ग्रीनलैंड (पश्चिम), स्वालबार्ड (पूर्व), मुख्य आर्कटिक महासागर (उत्तर) तथा नॉर्वेजियन सागर और आइसलैंड (दक्षिण) से घिरा है।
  • राष्ट्रीय उद्यान: नॉर्थईस्ट ग्रीनलैंड नेशनल पार्क विश्व का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है।
  • ग्रीनलैंड का प्रशासन: ग्रीनलैंड डेनमार्क साम्राज्य के अंतर्गत एक स्वायत्त क्षेत्र है (डेनमार्क और फरो आइलैंड्स के साथ)।
    • इसकी प्रशासनिक संरचना वर्ष 2009 के स्व-शासन अधिनियम द्वारा परिभाषित है, जिसने द्वीप को होम रूल” से अधिक स्वतंत्र “स्व-शासित” स्थिति में परिवर्तित किया।
    • इसका अपना स्व-शासन और अपनी संसद (इनात्सिसार्तुत) है।

डब्ल्यू उर्से मेजोरिस तारे (W Ursae Majoris Stars)

डब्ल्यू उर्से मेजोरिस (W Ursae Majoris Stars) प्रकार के संपर्क द्वितारा प्रणालियों, जिन्हें तारकीय जुड़वाँ” कहा जाता है, पर किया गया एक नया अध्ययन द्वितारा प्रणालियों के विकास को समझने में महत्त्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान कर रहा है।

डब्ल्यू उर्से मेजोरिस’ तारों के बारे में

  • अत्यधिक निकटता: ‘डब्ल्यू यूमा’ तारे संपर्क द्वितारे होते हैं, दो तारे इतने पास होते हैं कि वे एक-दूसरे की परिक्रमा करते हुए भौतिक रूप से संपर्क में रहते हैं।
  • आकार और वायुमंडल: वे एक साझा बाहरी वायुमंडल साझा करते हैं, जिससे ‘मूँगफली या डंबल’ जैसा आकार बनता है।
  • तारकीय प्रयोगशालाएँ: इनकी निकट अंतःक्रिया से खगोलविद द्रव्यमान, त्रिज्या और तापमान जैसे मौलिक तारकीय मानकों की अत्यधिक सटीकता से गणना कर सकते हैं।
    • इससे ये तारकीय विकास मॉडलों के परीक्षण और तारों की आयु को समझने के लिए आदर्श स्थिति प्रस्तुत करते हैं।
  • द्रव्यमान स्थानांतरण एवं कक्षीय परिवर्तन: दोनों तारों के  बीच पदार्थ (द्रव्यमान) का प्रवाह होता है, जो उनके विकास को बदल देता है।
    • उनकी कक्षाएँ, अवधि में परिवर्तन और गुरुत्वीय अंतःक्रिया तथा द्रव्यमान विनिमय के कारण हल्के बदलाव दर्शाती हैं।
  • प्रबल चुंबकीय गतिविधि एवं ‘स्टार स्पॉट’: ये तारे तीव्र चुंबकीय गतिविधि प्रदर्शित करते हैं, जिससे गहरे तारा धब्बे (सनस्पॉट्स की तरह) बनते हैं।

द्वितारा प्रणालियों के बारे में

  • परिभाषा: द्वितारा प्रणाली दो तारों से बनी होती है, जो गुरुत्वाकर्षण से बँधे होते हैं और एक साझा द्रव्यमान केंद्र के चारों ओर परिक्रमा करते हैं।
  • द्वितारा और बहु-तारा प्रणालियाँ अत्यंत सामान्य हैं; ये हमारी आकाशगंगा में प्रमुख विन्यास हैं और हमारे सूर्य जैसे एकल तारों से अधिक संख्या में पाई जाती हैं।

वैश्विक न्यूनतम कर (Global Minimum Tax)

OECD/G20 समावेशी ढाँचे ने आधार क्षरण और लाभ स्थानांतरण’ या बेस इरोजन एंड प्रॉफिट शिफ्टिंग (BEPS) पर वैश्विक न्यूनतम कर नियमों के समन्वित कार्यान्वयन के लिए समीपस्थ या साइड-बाय-साइड अरेंजमेंट/व्यवस्था पर सहमति व्यक्त की।

वैश्विक न्यूनतम कर के बारे में

  • ग्लोबल एंटी-बेस इरोजन (GloBE) मॉडल नियमों पर आधारित वैश्विक न्यूनतम कर यह सुनिश्चित करता है कि बड़े बहुराष्ट्रीय उद्यमों द्वारा अपने संचालन के प्रत्येक क्षेत्राधिकार में न्यूनतम कर का भुगतान किया जाए।
  • प्रमुख बिंदु
    • BEPS, पिलर टू (BEPS Pillar Two) के अंतर्गत 15% न्यूनतम प्रभावी कॉरपोरेट कर दर निर्धारित करता है।
    • इसका उद्देश्य ब्याज, रॉयल्टी तथा समान कटौती योग्य भुगतानों के माध्यम से न्यूनतम-कर या शून्य-कर क्षेत्राधिकारों में लाभ स्थानांतरण को लक्षित करता है।
    • सीमा-पार संचालन (Cross-Border Operations) वाले बड़े बहुराष्ट्रीय उद्यम (MNE) समूहों पर लागू होता है।
    • अनुपालन भार को कम करने के लिए सरलीकरण उपाय और सुरक्षित आश्रय/सेफ हार्बर (Safe Harbours) शामिल करता है।
  • अपवाद: समीपस्थ या साइड-बाय-साइड अरेंजमेंट/व्यवस्था के अंतर्गत अमेरिका-आधारित बहुराष्ट्रीय निगमों को 15% वैश्विक न्यूनतम कर से प्रभावी रूप से छूट प्रदान की गई है।
    • अमेरिका ने अपने घरेलू न्यूनतम कॉरपोरेट कर (15%) और विदेशी लाभों पर 12.6–14% की दर से कर लगाने वाली अपनी अंतरराष्ट्रीय कर व्यवस्था का हवाला देते हुए छूट के लिए तर्क दिया।
    • अन्य देशों को अमेरिकी बहुराष्ट्रीय उद्यमों (MNEs) के न्यूनतम-कर आरोपित किए गए विदेशी लाभों पर टॉप-अप टैक्स/कर लगाने से प्रतिबंधित किया गया है।

वैश्विक न्यूनतम कर का महत्त्व

  • सरलीकृत और पूर्वानुमेय कर व्यवस्था: सरलीकरण उपायों और सुरक्षित आश्रय/सेफ हार्बर (Safe Harbours) की शुरुआत करता है, जिससे बहुराष्ट्रीय उद्यमों के लिए अनुपालन भार और कर प्राधिकरणों के लिए प्रशासनिक जटिलता कम होती है।
  • निष्पक्ष व्यवहार और समान अवसर: साक्ष्य-आधारित स्टॉकटेक तंत्र और समावेशी ढाँचे के सदस्यों के बीच समन्वित कर प्रोत्साहनों के माध्यम से समान अनुप्रयोग सुनिश्चित करता है।
  • राष्ट्रीय कर आधारों का संरक्षण: योग्य घरेलू न्यूनतम टॉप-अप करों को मजबूत करता है, जिससे देशों, विशेषकर विकासशील अर्थव्यवस्थाओं—को आधार क्षरण या बेस इरोजन (Base Erosion) से होने वाले राजस्व क्षति से सुरक्षा मिलती है।
  • हानिकारक कर प्रतिस्पर्द्धा पर अंकुश: कॉरपोरेट कर दरों के लिए वैश्विक न्यूनतम स्तर निर्धारित करता है, लाभ स्थानांतरण को सीमित करता है और कराधान को वास्तविक आर्थिक गतिविधि के अनुरूप करता है।

आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD)

  • आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) एक अंतर-सरकारी निकाय है, जो आर्थिक सहयोग और वैश्विक नीति मानकों को बढ़ावा देता है।
  • BEPS में नेतृत्व भूमिका: बहुराष्ट्रीय कर अपवंचन को रोकने के लिए OECD/G20 समावेशी ढाँचे का नेतृत्व करता है।
  • OECD की आधिकारिक स्थापना वर्ष 1961 में हुई थी। यह ‘यूरोपीय आर्थिक सहयोग संगठन’ या ‘ऑर्गनाइजेशन फॉर यूरोपियन इकोनॉमिक को-ऑपरेशन’ (OEEC) जिसकी स्थापना वर्ष  1948 में हुई, का उत्तरवर्ती है एवं इसका मुख्यालय पेरिस, फ्राँस में स्थित है।
  • सदस्यता: भारत सहित 147 देश और क्षेत्राधिकार।
  • टू पिलर सॉल्यूशन (Two-Pillar Solution)
    • पिलर वन कराधान अधिकारों का पुनर्वितरण करता है।
    • पिलर टू वैश्विक न्यूनतम कर को लागू करता है।

आधार क्षरण और लाभ स्थानांतरण’ या ‘बेस इरोजन एंड प्रॉफिट शिफ्टिंग’ (BEPS) से तात्पर्य उन कर बचत रणनीतियों से है, जिनका उपयोग  बहुराष्ट्रीय उद्यमों (MNEs) द्वारा किया जाता हैं, ताकि वे लाभ को उच्च-कर वाले देशों से न्यूनतम कर या शून्य-कर वाले क्षेत्राधिकारों में स्थानांतरित कर सकें, इस प्रकार उन देशों के कर आधार का क्षरण करते  हैं, जहाँ वास्तविक आर्थिक गतिविधि होती है।

भारत की पहली अर्बन नाइट सफारी: कुकरैल वन क्षेत्र 

उत्तर प्रदेश, लखनऊ के कुकरैल वन क्षेत्र (Kukrail Forest Area) में भारत की पहली अर्बन नाइट सफारी की घोषणा की गई है, जिसमें शहर की सीमा के अंदर वन्यजीव संरक्षण, इको-टूरिज्म और रात में वन्यजीवों को देखने की सुविधा को एकीकृत किया गया है।

भारत की प्रथम अर्बन नाइट सफारी

  • परिचय: भारत का पहला शहरी नाइट सफारी लखनऊ, उत्तर प्रदेश के कुकरैल वन क्षेत्र में विकसित की जा रही है, जिसका प्रेरणा स्रोत सिंगापुर नाइट सफारी है और इसे भारतीय पारिस्थितिकी स्थितियों के अनुसार अनुकूलित किया गया है।
  • नोडल संस्था: उत्तर प्रदेश इको-टूरिज्म बोर्ड।
  • मुख्य विशेषताएंँ
    • रात्रिकालीन वन्यजीव दर्शन: अंधेरा होने के बाद पशु व्यवहार का अवलोकन करने के लिए निर्धारित मार्गों पर ही संरचित शाम की सफारी।
    • न्यूनतम-प्रभाव वाला बुनियादी ढाँचा: वन्यजीवों को अधिक परेशानी न हो इसके लिए नियंत्रित प्रकाश व्यवस्था, सीमित पहुँच और इको-फ्रेंडली डिजाइन।
    • संरक्षण केंद्रों का उन्नयन: मगरमच्छ, घड़ियाल और कछुआ पुनर्वास सुविधाओं का आधुनिकीकरण।
    • पर्यटक सुविधाएँ: प्रकृति मार्ग, बाँस के झोपड़े, बच्चों के लिए पार्क, ओपन जिम और व्याख्यान केंद्र या इंटरप्रिटेशन सेंटर्स।
  • महत्त्व
    • शहरी संरक्षण मॉडल: वन्यजीव संरक्षण और शहर आधारित मनोरंजन के सह-अस्तित्व को दर्शाता है।
    • पर्यावरण जागरूकता: परिवारों और छात्रों के लिए रात्रिकालीन पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देता है।
    • आर्थिक लाभ: स्थानीय रोजगार के अवसर उत्पन्न करता है तथा लखनऊ को एक नए इको-टूरिज्म हब के रूप में स्थापित करता है।

कुकरेल वन क्षेत्र के बारे में

  • कुकरेल वन क्षेत्र लखनऊ के बाह्य इलाके में एक इकोलॉजिकली महत्त्वपूर्ण ग्रीन बफर जोन के रूप में है, जहाँ वन्यजीव संरक्षण की सुविधाएँ विद्यमान हैं।
  • अवस्थिति: यह लखनऊ के उत्तरी भाग में कुकरैल नदी के किनारे स्थित है, जो शहर को एक प्राकृतिक इकोलॉजिकल सुरक्षा कवच प्रदान करता है।
  • मुख्य विशेषताएंँ
    • मौजूदा मगरमच्छ, घड़ियाल और कछुआ संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र।
    • नियंत्रित इको-टूरिज्म गतिविधियों के लिए उपयुक्त वनों से आच्छादित  नदी तटीय पारिस्थितिकी तंत्र।
    • मानव गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए निर्धारित प्रकृति मार्ग और संरक्षित क्षेत्र।
  • वनस्पति: नदी तटीय वनस्पति, बाँस की प्रजातियाँ और स्थानीय वृक्षों की प्रचुर संख्या हैं, जो शहरी जैव विविधता को समृद्ध करते हैं।
  • जीवजंतु: मगरमच्छ और घड़ियाल जैसे सरीसृप, मीठे जल  के कछुए, पक्षी तथा अन्य छोटे वन एवं दलदली प्रजातियों का आवास-स्थल।
    • घड़ियाल (Gavialis gangeticus) आईयूसीएन की रेड लिस्ट में संकटग्रस्त (Critically Endangered) श्रेणी में शामिल है, इसका मुख्य कारण आवास क्षति, नदियों का रूपांतरण और मत्स्यपालन संबंधित गतिविधयाँ हैं।
    • मगरमच्छ (मगर/क्रोकोडायलस पैलस्ट्रिस) आईयूसीएन रेड लिस्ट की सुभेद्य  (Vulnerable) श्रेणी में शामिल है, जिसे मुख्यतः रूप से आवास में गिरावट और मानव–मगरमच्छ संघर्ष का खतरा है।

कुकरेल शहरी नाइट सफारी, शहरी वन्यजीव पर्यटन (Urban Wildlife Tourism) का एक नवोन्मेषी, सतत मॉडल प्रस्तुत करती है, जो महानगरीय परिवेश में संरक्षण, शिक्षा और मनोरंजन का संयोजन करती है।

वुल्फ सुपरमून (Wolf Supermoon)

जनवरी 2026 का वुल्फ सुपरमून (Wolf Supermoon) 2 जनवरी को अपने अधिकतम प्रकाशीय बिंदु पर पहुँचा, जिसने पूर्ण चंद्रमाओं के संयुक्त सांस्कृतिक और खगोलीय महत्त्व की ओर ध्यान आकर्षित किया।

वुल्फ सुपरमून (Wolf Supermoon)

  • वुल्फ सुपरमून एक प्रचलित शब्द है, जो जनवरी के पहले पूर्ण चंद्रमा का वर्णन करता है, जब चंद्रमा पृथ्वी के अपने निकटतम बिंदु के पास होता है।
  • सांस्कृतिक महत्त्व: यह नाम सर्दियों के दौरान भेड़ियों की आवाजें अधिक सुनाई देने से जुड़ी कहानियों से संबंधित है, हालाँकि इसका कोई विशेष खगोलीय प्रभाव नहीं होता।
  • चंद्रमा की कक्षीय स्थिति: चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर एक दीर्घवृत्ताकार कक्षा में घूमता है, जिससे वह पेरिजी’ के पास औरएपोजी’ से  दूर होता है।
    • जब कोई पूर्ण चंद्रमा ‘पेरिजी’ के समय या उसके पास होता है, तो उसे सुपरमून कहा जाता है, जिससे वह थोड़ा बड़ा और अधिक चमकीला दिखाई देता है।
  • चमक और आकार: वुल्फ सुपरमून के दौरान, चंद्रमा औसत पूर्ण आकार की तुलना में थोड़ा बड़ा और अधिक चमकीला दिखाई देता है, हालाँकि यह अंतर सूक्ष्म होता है।
  • मून इल्यूजन’ (Moon Illusion): क्षितिज के पास चंद्रमा मनोवैज्ञानिक प्रभाव के कारण कहीं अधिक बड़ा प्रतीत हो सकता है, जिसे मून इल्यूजन’ कहा जाता है, न कि वास्तविक आकार में परिवर्तन के कारण।

अन्य प्रकार के चंद्रमा

  • ब्लू मून: ‘ब्लू मून’ उस स्थिति को संदर्भित करता है, जब एक ही कैलेंडर महीने में दूसरा पूर्ण चंद्रमा होता है या, कम प्रचलित रूप में, किसी ऋतु में चार पूर्ण चंद्रमा होने पर तीसरा पूर्ण चंद्रमा होता है।
  • ब्लैक मून: ब्लैक मून एक कैलेंडर महीने में दूसरी अमावस्या होती है, जिसके दौरान चंद्रमा का पृथ्वी की ओर वाला भाग पूरी तरह अंधकारमय और अदृश्य रहता है।
  • ब्लड मून: ब्लड मून पूर्ण चंद्रग्रहण के दौरान होता है, जब पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य के प्रकाश को प्रकीर्णित करता है, जिससे ग्रहण द्वारा प्रभावित चंद्रमा लाल या लाल-भूरे रंग का दिखाई देता है।

सूर्यास्त्र मल्टी-कैलिबर रॉकेट लॉन्चर प्रणाली

हाल ही में भारतीय सेना ने स्वदेशी सूर्यास्त्र लंबी दूरी की रॉकेट लॉन्चर प्रणाली को शामिल करने के लिए NIBE लिमिटेड के साथ ₹293 करोड़ का आपातकालीन खरीद अनुबंध हस्ताक्षरित किया।

सूर्यास्त्र मल्टी-कैलिबर रॉकेट लॉन्चर प्रणाली

  • सूर्यास्त्र भारत की पहली स्वदेशी सार्वभौमिक मल्टी-कैलिबर लंबी दूरी की रॉकेट लॉन्चर प्रणाली है, जिसे 300 किमी. तक की सटीक सतह-से-सतह मारक क्षमता के लिए डिजाइन किया गया है।
  • निर्माता: नेशनल इंडस्ट्रियल एंड बिजनेस एंटरप्राइजेज (NIBE) लिमिटेड
  • प्रौद्योगिकी भागीदार: एल्बिट सिस्टम्स (इजरायल)।
  • प्रौद्योगिकी आधार: प्रौद्योगिकी सहयोग समझौते (जुलाई 2025) के तहत इजरायल के PULS से अनुकूलित।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • विस्तारित प्रहार सीमा: 150 किमी. और 300 किमी. तक के लक्ष्यों को भेदने में सक्षम, जिससे सामरिक ‘डीप-स्ट्राइक’ अभियानों को बल मिलता है।
    • सार्वभौमिक लॉन्चर क्षमता: एक ही प्लेटफॉर्म से कई रॉकेट कैलिबर (122 मिमी., 160 मिमी., 306 मिमी.) और संगत सामरिक मिसाइलों को दाग सकता है।
    • उच्च सटीकता: 5 मीटर से कम के सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) का प्रदर्शन, जिससे सटीक और लक्षित प्रहार संभव होता है।
    • संचालनात्मक लचीलापन: विभिन्न दूरी पर बहु-लक्ष्य संलग्नता का समर्थन करता है, और 4×4, 6×6 तथा 8×8 व्हीलर चेसिस पर तैनात किया जा सकता है।
  • महत्त्व
    • वर्धित प्रतिरोधक क्षमता: लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता के माध्यम से प्रतिद्वंद्वियों के विरुद्ध भारत की पारंपरिक प्रहार क्षमता को सुदृढ़ करता है।
    • बल गुणक: सीमा और सटीकता दोनों में मौजूदा पिनाका प्रणालियों की तुलना में एक महत्त्वपूर्ण प्रगति का प्रतिनिधित्व करता है।
    • आत्मनिर्भर भारत: आयातित लंबी दूरी की तोपखाना प्रणालियों पर निर्भरता कम करता है और स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देता है।

सूर्यास्त्र भारत की रॉकेट तोपखाना क्षमताओं में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है, जो सटीकता, सीमा और लचीलापन को एक साथ जोड़ते हुए भारतीय सेना के प्रहार और संयुक्त अग्नि-शक्ति अभियानों को सशक्त बनाता है।

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