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संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal January 12, 2026 03:07 25 0

ओरेशनिक मिसाइल

(Oreshnik Missile)

रूस ने यूक्रेन पर किए गए एक बड़े हमले में ओरेशनिक बैलिस्टिक मिसाइल का उपयोग किया है।

ओरेशनिक मिसाइल के बारे में

  • प्रकार: ओरेशनिक एक रूस द्वारा निर्मित मध्यम दूरी की हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) है।
  • नाम और उत्पत्ति: ओरेशनिक (रूसी भाषा में हेजल वृक्ष/झाड़ी”) को ‘RS-26 रुबेझ’ मिसाइल के एक संस्करण के रूप में विकसित किया गया है।
  • प्रथम सार्वजनिक जानकारी: यूक्रेन युद्ध के बढ़ते तनाव के बीच वर्ष 2024–25 में रूस द्वारा सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया।
  • मारक दूरी (Range): अनुमानित 3,000–5,500 किमी.।
  • गति (Speed): हाइपरसोनिक गति (10 मैक से अधिक)।
  • वारहेड: पारंपरिक या परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम; MIRV (Multiple Independently Targetable Reentry Vehicles) क्षमता से युक्त है।
  • रणनीतिक भूमिका: NATO के निरोधक (Deterrence) रूप में तथा कमांड सेंटरों, एयरबेस और महत्त्वपूर्ण अवसंरचना को लक्ष्य बनाने के लिए अभिकल्पित।
  • वायु रक्षा चुनौती: अत्यधिक गति और प्रक्षेप पथ के कारण पैट्रियट/THAAD जैसी मौजूदा प्रणालियों के लिए अवरोधन (Interception) कठिन।

नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD)

केंद्रीय गृह मंत्री ने नई दिल्ली में आयोजित नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 9वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक में भारत में नशीली दवाओं के संकट के उन्मूलन हेतु तीन वर्षीय राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा की।

नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD)

  • NCORD भारत में मादक पदार्थों की तस्करी और नशीले पदार्थों के दुरुपयोग से निपटने के लिए एक बहु-एजेंसी समन्वय तंत्र है।
  • स्थापना: गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा वर्ष 2016 में स्थापित।
    • वर्ष 2019 में बेहतर परिचालन प्रभावशीलता हेतु पुनर्गठित एवं सुदृढ़ किया गया।
  • उद्देश्य
    • केंद्र और राज्यों के बीच अंतर-एजेंसी समन्वय में सुधार।
    • ड्रग नेटवर्क पर वास्तविक समय (रियल-टाइम) आधारित खुफिया सूचना साझा करना।
    • प्रवर्तन, रोकथाम और पुनर्वास को प्रभावी बनाना।
  • संगठनात्मक संरचना (चार-स्तरीय)
    • शीर्ष स्तर (Apex Level): केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता।
    • कार्यकारी स्तर (Executive Level): विशेष सचिव, MHA की अध्यक्षता।
    • राज्य स्तर (State Level): मुख्य सचिवों की अध्यक्षता।
    • जिला स्तर (District Level): जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता।
  • NCORD पोर्टल: ज्ञान प्रबंधन, डेटा साझाकरण, सर्वोत्तम प्रथाओं तथा ड्रग्स और प्रवर्तन से संबंधित जानकारी हेतु एक केंद्रीकृत मंच।
  • समर्थित पहलें
    • मानस (मादक-पदार्थ निषेध सूचना केंद्र) हेल्पलाइन (1933 — 24×7 टोल-फ्री)।
    • निदान (नेशनल इंटीग्रेटेड डेटाबेस ऑन अरेस्टेड नार्को-ऑफेंडर्स) पोर्टल।
    • मिशन स्पंदन (स्पिरिचुअल पार्टनरशिप अगेंस्ट नार्कॉटिक ड्रग एब्यूज – नेशनवाइड)।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा में भूमिका: मादक पदार्थों की तस्करी को केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में मानता है।
    • ड्रग्स, आतंकी वित्तपोषण और संगठित अपराध के बीच संबंधों को संबोधित करता है।

तीन-वर्षीय राष्ट्रीय नशा-विरोधी अभियान (2026–2029)

  • भारत को नशा-मुक्त बनाने हेतु एक समयबद्ध और लक्ष्य-आधारित अभियान।
  • 31 मार्च, 2026 के बाद तत्काल प्रारंभ किया जाएगा, जो नक्सल-विरोधी अभियानों की समय-सीमा की समाप्ति के साथ संरेखित है।

IED विस्फोट पर डिजिटल डेटाबेस

हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री ने IED और बम विस्फोट घटनाओं के व्यवस्थित अभिलेखन, विश्लेषण और डेटा साझाकरण हेतु भारत के पहले राष्ट्रीय डिजिटल डेटाबेस का उद्घाटन किया।

राष्ट्रीय तात्कालिक विस्फोटक उपकरण डेटा प्रबंधन प्रणाली (NIDMS)

  • परिचय: NIDMS एक सुरक्षित, केंद्रीकृत डिजिटल मंच है, जिसे वर्ष 1999 से भारत में हुए बम विस्फोटों और IED घटनाओं के डेटा को संकलित और विश्लेषित करने के लिए विकसित किया गया है।
  • उद्देश्य: डेटा-आधारित खुफिया जानकारी और अंतर-एजेंसी समन्वय के माध्यम से आतंकवाद-रोधी जाँच को सुदृढ़ करना।
  • नोडल एजेंसी: राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) NIDMS की नोडल एजेंसी है।
    • NSG पोस्ट-ब्लास्ट’ विश्लेषण और तकनीकी आकलन के लिए प्रमुख बल के रूप में कार्य करता है।
  • मुख्यालय: NSG गैरीसन, मानेसर (हरियाणा)।
  • पहुँच: राज्य पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs) तथा अन्य अधिकृत जाँच एजेंसियाँ गृह मंत्रालय (MHA) के अंतर्गत इस मंच तक पहुँच प्राप्त कर सकती हैं।

प्रमुख विशेषताएँ

  • केंद्रीकृत भंडार: पूरे देश में बम और IED घटनाओं से संबंधित डेटा को एक मंच पर समेकित करता है, जो पहले विभिन्न एजेंसियों से संबंधित था।
  • AI-सक्षम विश्लेषण: उन्नत पैटर्न पहचान, प्रवृत्ति विश्लेषण और पूर्वानुमानात्मक आकलन को समर्थन।
  • सिग्नेचर लिंकिंग: स्थान, प्रयुक्त विस्फोटक और सर्किट/कार्य-प्रणाली (Modus Operandi) के आधार पर घटनाओं के बीच संबंध स्थापित करता है।
  • सुरक्षित डेटा साझाकरण: अधिकृत एजेंसियों के लिए वन-क्लिक एक्सेस’ विंडो प्रदान करते हुए डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
  • परिचालन एकीकरण: तेज फॉरेंसिक और जाँच प्रतिक्रिया के लिए ‘NSG रीजनल हब्स’ से जुड़ा हुआ।

महत्त्व

NIDMS आतंकवाद-रोधी क्रिया को सुदृढ़ करता है, जाँच की गुणवत्ता में सुधार करता है, प्रारंभिक खतरा पहचान को सक्षम बनाता है तथा केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच वास्तविक समय खुफिया साझाकरण के माध्यम से सहकारी संघवाद को मजबूत करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान देता है।

जेहनपोरा स्तूप

हाल ही में उत्तरी कश्मीर के जेहनपोरा में हुए पुरातात्त्विक उत्खननों में कुषाण-कालीन विशाल स्तूपों का पता चला है।

जेहनपोरा स्तूपों के बारे में

  • बारामूला जिले में स्थित जेहनपोरा स्थल लगभग 10 एकड़ में फैला एक विशाल पुरातात्त्विक परिसर है, जिसे हाल ही में एक प्रमुख बौद्ध स्तूप परिसर के रूप में चिह्नित किया गया है।
  • लंबे समय तक प्राकृतिक टीले माने जाने वाले इस स्थल को अब कश्मीर की सबसे बड़ी बौद्ध संरचनाओं में से एक के रूप में मान्यता दी गई है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • कुषाण-कालीन उत्पत्ति: उत्खननों से संकेत मिलता है कि ये संरचनाएँ कुषाण काल की हैं, जिनका संबंध कनिष्क जैसे शासकों से है और इनकी तिथि 2000 वर्ष से अधिक प्राचीन है।
  • स्तूप-सदृश पठार: इनकी आकृति मानव-निर्मित पठार के समान है, जो विशाल बौद्ध स्तूपों के समान प्रतीत होते हैं, संभवतः इनके ऊपर लकड़ी की अधिरचना (Superstructure) रही होगी।
  • आकार और संरचनात्मक अखंडता: कश्मीर में कोई अन्य ज्ञात पुरातात्त्विक स्थल आकार में जेहनपोरा के समकक्ष नहीं है; कई टीले अब भी अक्षुण्ण हैं।
  • आधुनिक प्रलेखन: स्थल का मानचित्रण ड्रोन, रिमोट सेंसिंग तथा फ्राँस से प्राप्त अभिलेखीय फोटोग्राफिक साक्ष्यों के माध्यम से किया गया है।

सांस्कृतिक महत्त्व

  • बौद्ध केंद्र: यह स्थल कश्मीर को बौद्ध अध्ययन और आचरण के एक प्रारंभिक एवं प्रभावशाली केंद्र के रूप में स्थापित करने वाले साक्ष्यों को सुदृढ़ करता है।
  • व्यापार मार्ग: यह कश्मीर से होकर गुजरने वाले प्राचीन ट्रांस-हिमालयी व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान मार्गों की जानकारी प्रदान करता है।
  • महायान का आधार: यह ऐतिहासिक विवरणों का समर्थन करता है कि महायान बौद्ध धर्म ने कश्मीर में स्वरूप ग्रहण किया, जिसके बाद यह मध्य एशिया और चीन तक विस्तृत हुआ।
  • विरासत: जेहनपोरा कश्मीर के बौद्ध स्थलों के नेटवर्क में एक महत्त्वपूर्ण शृंखला को जोड़ता है, जो क्षेत्र के बहुलतावादी और सभ्यतागत अतीत को रेखांकित करता है।

डिस्ट्रिक्ट-लेड टेक्सटाइल्स ट्रांसफॉर्मेशन (DLTT) योजना

हाल ही में वस्त्र मंत्रालय ने गुवाहाटी, असम में आयोजित राष्ट्रीय वस्त्र मंत्रियों के सम्मेलन में ‘डिस्ट्रिक्ट-लेड टेक्सटाइल्स ट्रांसफॉर्मेशन’ (DLTT) योजना का शुभारंभ किया।

डिस्ट्रिक्ट-लेड टेक्सटाइल्स ट्रांसफॉर्मेशन’ (DLTT) योजना के बारे में

  • डिस्ट्रिक्ट-लेड टेक्सटाइल्स ट्रांसफॉर्मेशन (DLTT) एक रणनीतिक पहल है, जिसका उद्देश्य जिला-विशिष्ट विकास दृष्टिकोण अपनाकर भारत के वस्त्र क्षेत्र में समावेशी, सतत् और निर्यात-उन्मुख वृद्धि को प्रोत्साहित करना है।
  • नोडल मंत्रालय: यह पहल भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय द्वारा संचालित है, जिसमें राज्य सरकारों, उद्योग हितधारकों और शैक्षणिक संस्थानों का सक्रिय सहयोग है।
  • लक्ष्य
    • 100 उच्च-संभावनाशील जिलों को वैश्विक निर्यात चैंपियन के रूप में विकसित करना।
    • 100 आकांक्षी जिलों को आत्मनिर्भर वस्त्र हब में परिवर्तित करना।
    • प्रतिस्पर्द्धात्मकता और उत्पादकता बढ़ाने हेतु जिला-स्तरीय वस्त्र क्लस्टरों को सुदृढ़ करना।
  • जिलों का वर्गीकरण: जिलों को डेटा-आधारित स्कोरिंग पद्धति के माध्यम से वर्गीकृत किया जाता है, जो निम्नलिखित मानकों पर आधारित है: निर्यात प्रदर्शन, MSME पारितंत्र की मजबूती और कार्यबल की उपलब्धता।
  • चैंपियन जिले: उच्च निर्यात प्रदर्शन, सशक्त MSME पारितंत्र और पर्याप्त कुशल कार्यबल वाले जिले, जिन्हें विस्तार, तकनीकी उन्नयन और वैश्विक बाजारों से गहन एकीकरण के लिए चुना गया है।
  • आकांक्षी जिले: कम या निहित निर्यात क्षमता और कमजोर MSME/कार्यबल आधार वाले जिले, जिन्हें कौशल विकास, औपचारिकीकरण और जमीनी स्तर पर उद्यम विकास के माध्यम से पारितंत्र निर्माण हेतु चुना गया है।
  • सहायता ढाँचा
    • चैंपियन जिले: मेगा कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFCs) में उन्नयन, इंडस्ट्री 4.0 तकनीकों को अपनाना और प्रत्यक्ष निर्यात बाजार संपर्क स्थापित करना।
    • आकांक्षी जिले: बुनियादी कौशल प्रशिक्षण और प्रमाणन, ‘रॉ मेटेरियल बैंक’ की स्थापना तथा स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और सहकारी संस्थाओं के माध्यम से सूक्ष्म उद्यमों का प्रोत्साहन।
  • दृष्टिकोण
    • निर्यात प्रदर्शन, MSME पारितंत्र की मजबूती और कार्यबल उपलब्धता के आधार पर डेटा-आधारित जिला चयन।
    • पूर्वोदय अभिसरण, जिसमें पूर्वी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान, जनजातीय क्षेत्र विकास, बेहतर संपर्क और भौगोलिक संकेत (GI) टैगिंग शामिल है।

महत्त्व

DLTT स्थानीय मूल्य शृंखलाओं को सुदृढ़ करता है, MSME की भागीदारी बढ़ाता है, क्षेत्रीय समानता को प्रोत्साहित करता है, वस्त्र निर्यात को बढ़ावा देता है तथा आत्मनिर्भर भारत और संतुलित क्षेत्रीय विकास के लक्ष्यों के अनुरूप है।

व्हीकल-टू-व्हीकल’ (V2V) संचार प्रौद्योगिकी

हाल ही में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री ने सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाने के उद्देश्य से भारत में ‘व्हीकल-टू-व्हीकल’ (V2V) संचार प्रौद्योगिकी को चरणबद्ध रूप से लागू करने की घोषणा की।

व्हीकल-टू-व्हीकल’ (V2V) संचार प्रौद्योगिकी के बारे में

  • व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) संचार एक उन्नत सड़क सुरक्षा प्रौद्योगिकी है, जो वाहनों को मोबाइल या इंटरनेट नेटवर्क पर निर्भर हुए बिना वास्तविक समय की सुरक्षा-संबंधी जानकारी सीधे एक-दूसरे के साथ साझा करने में सक्षम बनाती है, जिससे दुर्घटना-निवारण और चालक जागरूकता में वृद्धि होती है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • प्रत्यक्ष वाहन संचार: वाहन सेल्युलर या इंटरनेट कनेक्टिविटी का उपयोग किए बिना निकटवर्ती वाहनों के साथ सुरक्षा अलर्ट साझा करते हैं।
  • 360-डिग्री आधारित खतरे की पहचान: आगे, पीछे और पार्श्व दिशाओं में कार्य करता है और सड़क के मोड़ों तथा भू-आकृति को ध्यान में रखता है।
  • दृष्टि-रेखा से परे चेतावनी: मोड़ों के आस-पास या कम दृश्यता की स्थितियों में छिपे अवरोधों जैसे खतरों के प्रति चालक को सतर्क करता है।
  • ADAS के साथ एकीकरण: स्वचालित ब्रेकिंग को बेहतर बनाने के लिए एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम्स (ADAS) में एकीकरण।
  • किफायती परिनियोजन: प्रति वाहन अनुमानित लागत ₹5,000–₹7,000 तथा प्रथम चरण में नए वाहनों में अनिवार्य स्थापना की योजना।
  • स्पेक्ट्रम समर्थन: राष्ट्रीय आवृत्ति आवंटन योजना के तहत दूरसंचार विभाग द्वारा निशुल्क स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराया जाएगा।

महत्त्व

  • सड़क दुर्घटनाओं में कमी: प्रारंभिक चेतावनियाँ और स्वचालित हस्तक्षेप सक्षम कर टक्कर के जोखिम को घटाता है।
  • ADAS की प्रभावशीलता में वृद्धि:व्हीकल-टू-व्हीकल’ AI से जोड़कर सेंसर-आधारित प्रणालियों को पूरक बनाता है।
  • भविष्य के अनुरूप गतिशीलता: भारत को वैश्विक AI परिवहन प्रणालियों और कनेक्टेड मोबिलिटी प्रवृत्तियों के अनुरूप बनाता है।
  • सार्वजनिक सुरक्षा में वृद्धि: कैशलेस दुर्घटना उपचार और कड़े वाहन सुरक्षा मानकों के साथ भारत के सड़क सुरक्षा ढाँचे को सुदृढ़ करता है।

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