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संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal January 13, 2026 04:22 20 0

ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक

संयुक्त राज्य अमेरिका ने ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक के तहत सीरिया में व्यापक हवाई हमले किए हैं, जिनका उद्देश्य इस्लामिक स्टेट (ISIS) के कई ठिकानों को लक्ष्य बनाना था।

ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक

  • पृष्ठभूमि: ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक अमेरिका के नेतृत्व में एक सैन्य अभियान है, जिसे सीरिया के पाल्माइरा में ISIS से जुड़े हमले के बाद शुरू किया गया था, जिसमें दो अमेरिकी सैनिकों की मृत्यु हो गई थी।
  • नाम: इस ऑपरेशन का नाम शहीद सैनिकों को सम्मान देने के लिए, अमेरिका के आयोवा राज्य के निकनेम, हॉकआई स्टेट” के नाम पर रखा गया है।

हाल के अमेरिकी सैन्य अभियान

  • ऑपरेशन सदर्न स्पीयर
    • अवस्थिति : लाल सागर-अदन की खाड़ी क्षेत्र।
    • पक्ष: संयुक्त राज्य अमेरिका, यू.के., सहयोगी नौसैनिक बल बनाम हूती विद्रोही (यमन)।
    • उद्देश्य: सटीक हवाई और नौसैनिक हमले करके हूती हमलों को रोकना, वाणिज्यिक नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करना और समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता बनाए रखना।
  • ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व
    • स्थान: सीरिया और इराक सीमा क्षेत्र
    • पक्ष: संयुक्त राज्य अमेरिका और संयुक्त सेना बनाम ISIS।
    • उद्देश्य: ISIS के नेतृत्व, लॉजिस्टिक्स (आपूर्ति तंत्र) और स्लीपर सेल्स को ध्वस्त करने के लिए लक्षित हवाई हमले तथा विशेष बलों द्वारा कार्रवाइयाँ करना।
  • ऑपरेशन मिडनाइट हैमर/हंटर 
    • अवस्थिति : सीरिया
    • पक्ष: संयुक्त राज्य अमेरिका के विशेष अभियान आधारित बल बनाम ISIS नेतृत्व
    • उद्देश्य: रात्रिकालीन सटीक छापेमारी के माध्यम से ISIS के सक्रिय आतंकियों को समाप्त करना और उनके कमांड ढाँचे को बाधित करना।
  • ऑपरेशन प्रॉस्पेरिटी गार्जियन
    • स्थान : लाल सागर 
    • पक्ष : संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व वाला बहुराष्ट्रीय नौसैनिक गठबंधन।
    • उद्देश्य: मिसाइल और ड्रोन खतरों से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा करना।

वाइमर त्रिकोण

भारत ने पहली बार वाइमर त्रिकोण फॉर्मेट में भाग लिया, जो यूरोप के साथ इसके संबंधों को मजबूत करने की दृष्टि से एक महत्त्वपूर्ण निर्णय हो सकता है।

संबंधित तथ्य

  • विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पेरिस में फ्राँस, जर्मनी और पोलैंड के विदेश मंत्रियों के साथ एक विस्तारित बैठक में भाग लिया।

वाइमर त्रिकोण के बारे में

  • वाइमर त्रिकोण एक त्रिपक्षीय राजनीतिक और कूटनीतिक क्षेत्रीय गठबंधन है, जो जर्मनी, फ्राँस और पोलैंड के बीच समन्वय और सहयोग के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है।
  • स्थापना: इसे 28 अगस्त, 1991 को जर्मनी के वाइमर में तीनों देशों द्वारा एक संयुक्त घोषणा के माध्यम से स्थापित किया गया था।
  • प्राथमिक लक्ष्य: इसे साम्यवाद के पतन के बाद पोलैंड (और बाद में अन्य मध्य यूरोपीय देशों) को NATO और यूरोपीय संघ (EU) में एकीकरण में समर्थन देने के लिए स्थापित किया गया।
  • इसका उद्देश्य ऐतिहासिक विभाजनों को दूर करना था।
  • हालिया पुनरुद्धार और महत्त्व (वर्ष 2022 के बाद): 2010 के दशक में यह काफी हद तक निष्क्रिय था (खासकर पोलैंड की पिछली सरकार के तहत), लेकिन वर्ष 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमले के बाद इसे पुनः शुरू किया गया।
    • यह यूक्रेन को समर्थन देने, रूस पर प्रतिबंध लगाने, यूरोपीय रक्षा को सशक्त बनाने, और NATO के पूर्वी भाग पर निवारक उपाय सुनिश्चित करने के लिए एक प्रमुख समन्वय मंच बन गया है।

कैटास्ट्रॉफ बॉण्ड्स

केरल ने केंद्र सरकार से प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान के खिलाफ वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के एक उपाय  के रूप में कैटास्ट्रॉफ बॉण्ड्स (CAT Bonds) जारी करने का आग्रह किया है।

संबंधित तथ्य 

  • हाल के वर्षों में केरल को बार-बार और गंभीर प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ा है, खासकर मानसून के दौरान, जिसमें भयानक बाढ़ और भूस्खलन शामिल हैं।

कैटास्ट्रॉफ बॉण्ड्स क्या है (CAT Bonds)?

  • कैट बॉण्ड्स ऐसी बीमा-संबद्ध प्रतिभूतियाँ हैं, जो आपदा से जुड़े वित्तीय जोखिम को जारीकर्ता (जैसे- सरकार या बीमा कंपनी) से पूँजी बाजार में निवेशकों तक स्थानांतरित करती हैं।
  • कैट बॉण्ड्स की विशेषताएँ 
    • निवेशक बॉण्ड्स खरीदते हैं और धन (मूलधन) प्रदान करते हैं।
    • यदि बॉण्ड की अवधि के दौरान कोई बड़ी आपदा घटित नहीं होती, तो निवेशकों को उच्च ब्याज सहित उनका मूलधन वापस कर दिया जाता है।
    • यदि बॉण्ड की अवधि में कोई आपदा घटती है, जो पूर्वनिर्धारित मानदंडों (जैसे- हानि सीमा) पर आधारित होती है, तो मूलधन का कुछ या पूरा हिस्सा राहत कार्यों के लिए उपयोग किया जाता है और निवेशकों को हानि वहन करनी होती हैं।
  • महत्व: यह नवोन्मेषी वित्तीय संरचना तेज और संपार्श्विक  (Collateralized) वित्त उपलब्ध कराती है, जिससे सरकार के बजट पर पूर्णता निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होती।
    • वैश्विक उदाहरण: मैक्सिको और फिलीपींस जैसे देश पहले ही भूकंप, तूफान और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए CAT बॉण्ड्स का सफलतापूर्वक उपयोग कर रहे हैं।

कैटास्ट्रॉफ बॉण्ड्स के मुख्य लाभ

  • बिना तत्काल बजटीय दबाव के, आपदा के बाद धन तक तुरंत पहुँच संभव बनाता है।
  • जोखिम को वैश्विक पूँजी बाजार में स्थानांतरित करता है, जिससे राज्य/केंद्र सरकार पर दबाव कम होता है।
  • पारंपरिक बीमा की तरह महँगा या सीमित नहीं है तथा कई वर्षों तक संरक्षण प्रदान करता है।

पूँजी बाजार में प्रचलित अन्य प्रकार के बॉण्ड्स 

  • ग्रीन  बॉण्ड्स: ऐसे ऋण साधन हैं, जो नवीनीकृत ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता और प्रदूषण नियंत्रण जैसी जलवायु-अनुकूल परियोजनाओं को वित्तपोषित करने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
    • भारत में, SBI, IREDA जैसी संस्थाओं द्वारा जारी किए जाते हैं; भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं (NDCs) के अनुरूप होते हैं।
  • ब्लू बॉण्ड्स: ऐसे बॉण्ड्स जो मत्स्यपालन, समुद्री संरक्षण और अपशिष्ट जल प्रबंधन जैसी सतत् महासागर और जल-संबंधित परियोजनाओं के समर्थन के लिए जारी किए जाते हैं।
    • ब्लू इकोनॉमी तथा तटीय एवं समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण को बढ़ावा देना।
  • मसाला बॉण्ड्स: भारतीय संस्थाओं द्वारा विदेशों में जारी किए गए रुपये-निर्धारित बॉण्ड्स, जिनका उद्देश्य विदेशी पूँजी जुटाना है।
    • भारतीय जारीकर्ताओं के लिए मुद्रा विनिमय जोखिम को कम करना; पहली बार वर्ष 2014 में जारी किए गए।
  • एग्री बॉण्ड्स: कृषि अवसंरचना, सिंचाई, भंडारण और ग्रामीण विकास को वित्तपोषित करने के लिए जारी किए जाते हैं।
    • कृषि क्षेत्र में कृषि ऋण प्रवाह और दीर्घकालिक निवेश को समर्थन देना।
  • म्यूनिसिपल बॉण्ड्स: जल आपूर्ति और परिवहन जैसी शहरी अवसंरचना को वित्तपोषित करने के लिए शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) द्वारा जारी किए जाते हैं।
  • सस्टेनेबिलिटी/सततता बॉण्ड्स: ग्रीन और सोशल बॉण्ड्स के उद्देश्यों को संयोजित करते हैं (पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कल्याण)।
    • स्वच्छ ऊर्जा और किफायती आवास जैसी परियोजनाओं के लिए उपयोग किया जाता है।
  • सोशल बॉण्ड्स: स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और रोजगार सृजन जैसी सामाजिक परियोजनाओं के लिए धन जुटाने के लिए जारी किए जाते हैं।
    • COVID-19 महामारी से उबरने के लिए वित्तपोषण के दौरान इसका महत्त्व बढ़ गया।
  • अवसंरचना बॉण्ड्स: दीर्घ अवधि के लिए जारी बॉण्ड्स, जो सड़कों, रेलवे, बिजली और बंदरगाहों को वित्तपोषित करने के लिए होते हैं।
    • स्थिर रिटर्न प्रदान करते हैं और भारत की राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) का समर्थन करते हैं।

परम शक्ति सुपरकंप्यूटिंग सुविधा

भारत ने IIT मद्रास में अपना पहला पूर्णता स्वदेशी रूप से विकसित सुपरकंप्यूटिंग सिस्टम, जिसका नाम परम शक्ति’ है, का उद्घाटन किया।

परम शक्ति के बारे में

  • परम शक्ति एक 3.1-पेटाफ्लॉप सुपरकंप्यूटर है, अर्थात् यह प्रति सेकंड 3.1 क्वाड्रिलियन से अधिक गणनाएँ करने में सक्षम है।
  • विकसितकर्ता: सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) द्वारा विकसित।
  • मुख्य घटक: इसे C-DAC की स्वदेशी रूप से विकसित रूद्र सर्वर शृंखला का उपयोग करके बनाया गया है तथा यह ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर स्टैक (जिसमें AlmaLinux शामिल है) पर चलता है।
  • वित्तपोषण: यह राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) का हिस्सा है।
  • उद्देश्य: इस सुपरकंप्यूटर को भारत के शोध समुदाय को सशक्त बनाने के लिए डिजाइन किया गया है, ताकि वे जटिल और बड़े पैमाने के सिमुलेशन तथा गणनाएँ कर सकें।
  • मुख्य शोध क्षेत्र: एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, सामग्री विज्ञान, जलवायु मॉडलिंग, दवा खोज और उन्नत विनिर्माण।

राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM)

  • भारत सरकार की एक प्रमुख पहल, जिसे देश की उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC) क्षमताओं को मजबूत करने के लिए शुरू किया गया।
  • उद्देश्य: एक मजबूत सुपरकंप्यूटिंग इकोसिस्टम बनाने, शोध, नवाचार और उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC) प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए।
  • प्रारंभ: वर्ष 2015 में लॉन्च किया गया।
  • प्रमुख मंत्रालय: इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा संयुक्त रूप से।
  • कार्यान्वयनकर्ता: उन्नत संगणना विकास केंद्र (C-DAC), पुणे और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बंगलूरू।

NSM के तहत विकसित स्वदेशी प्रौद्योगिकियाँ और प्रमुख प्रणाली

  • परम शृंखला के सुपरकंप्यूटर (जैसे, परम शिवाय – पहला देशी रूप से संयोजित, भारतीय विज्ञान संस्थान परम प्रवेग, परम रुद्र शृंखला)।
    • परम 8000 (PARAM 8000) भारत में विकसित पहला सुपरकंप्यूटर था, जिसे उन्नत संगणना विकास केंद्र (C-DAC) द्वारा निर्मित और वर्ष 1991 में जारी किया।
    • PARAM का अर्थ पैरलेल मशीन’ (PARAllel Machine) है और संस्कृत में इसका अर्थ सर्वोच्च’ भी होता है।
  • रुद्र सर्वर: देश में डिजाइन किए गए उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC) सर्वर, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप निर्मित किए गए हैं।
  • त्रिनेत्र: स्वदेशी हाई-स्पीड इंटरकनेक्ट नेटवर्क (जिसे 100–200 Gbps तक चरणबद्ध रूप से तैनात किया गया है)।
  • परम शावक: शैक्षणिक संस्थानों के लिए सुपरकंप्यूटिंग-इन-ए-बॉक्स समाधान।
  • फ्लैगशिप प्रणालियाँ, जैसे- AIRAWAT (कृत्रिम बुद्धिमत्ता-केंद्रित, वैश्विक स्तर पर रैंक प्राप्त)।

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