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संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal January 21, 2026 03:44 28 0

‘ब्लू इकोनॉमी’ के लिए एक हब के तौर पर अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह

हाल ही में केंद्र सरकार ने अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह को भारत की ‘ब्लू इकॉनॉमी’ का एक प्रमुख केंद्र विकसित करने की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।

‘ओपन-सी मरीन फिश फार्मिंग’ परियोजना के बारे में 

  • भारत ने अंडमान सागर के नॉर्थ बे में अपनी पहली ‘ओपन-सी मरीन फिश फार्मिंग’ परियोजना शुरू की, जो ‘ब्लू इकोनॉमी’ विजन के तहत महासागरीय संसाधनों के दोहन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
  • उद्देश्य
    • भारत के महासागरों की आर्थिक क्षमता का दोहन करना।
    • सतत् समुद्री जलीय कृषि और तटीय आजीविका को बढ़ावा देना।
    • वैज्ञानिक नवाचार को समुदाय-आधारित मत्स्यपालन के साथ एकीकृत करना।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (NIOT) तथा अंडमान एवं निकोबार केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन द्वारा कार्यान्वित।
    • प्राकृतिक महासागरीय परिस्थितियों में फिनफिश उत्पादन हेतु NIOT द्वारा विकसित ‘ओपन-सी केज’ का उपयोग किया जाता है।
    • स्थानीय मछुआरों को बीज वितरण के माध्यम से ‘ओपन-सी’ समुद्री शैवाल कृषि को शामिल किया गया।
    • भविष्य में सार्वजनिक–निजी भागीदारी मॉडलों के माध्यम से विस्तार योग्य स्वरूप में डिजाइन किया गया।

ब्लू इकोनॉमी के केंद्र के रूप में अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह

  • अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह रणनीतिक रूप से अवस्थित है तथा समृद्ध समुद्री जैव विविधता से युक्त है, जिससे यह भारत की उभरती ‘ब्लू इकोनॉमी’ रणनीति का केंद्रीय घटक बनता है।
  • विजन: महासागर विज्ञान, समुद्री प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी को एकीकृत कर आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देना।
  • संभावनाएँ: द्वीपों में रोजगार सृजन, निर्यातोन्मुख समुद्री उत्पादों, ‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ प्रौद्योगिकियों और वैकल्पिक समुद्री-आधारित पोषण के लिए व्यापक संभावनाएँ हैं।
  • स्व-सहायता समूहों और महिलाओं की बढ़ी हुई भागीदारी घरेलू आय को सुदृढ़ कर सकती है, साथ ही “वोकल फॉर लोकल, लोकल फॉर ग्लोबल” विजन को आगे बढ़ा सकती है।

सामूहिक रूप से, ये पहलें अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह को एक सतत् ‘ब्लू इकोनॉमी’ केंद्र में परिवर्तित कर सकती हैं।

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के बारे में

  • अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह भारत का एक केंद्रशासित प्रदेश है, जो अपनी रणनीतिक स्थिति, समृद्ध समुद्री जैव विविधता और पारिस्थितिकी महत्त्व के लिए जाना जाता है।
  • स्थिति: ये बंगाल की खाड़ी में, भारतीय मुख्य भूमि के दक्षिण-पूर्व में, दक्षिण-पूर्व एशिया के अधिक निकट स्थित हैं तथा इन्हें 10 डिग्री चैनल द्वारा पृथक किया गया है।
    • 6 डिग्री चैनल निकोबार द्वीपों को सुमात्रा (इंडोनेशिया) से अलग करता है।
  • मुख्य विशेषताएँ: इस द्वीपसमूह में लगभग 572 द्वीप शामिल हैं और सघन उष्णकटिबंधीय वन, प्रवाल भित्तियाँ पाई जाती हैं तथा यह भारत की समुद्री सुरक्षा एवं विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र का एक महत्त्वपूर्ण भाग है।
  • संरक्षण स्थल
    • महात्मा गांधी मरीन नेशनल पार्क – दक्षिण अंडमान द्वीप
    • रानी झांसी मरीन नेशनल पार्क – रिची द्वीपसमूह
    • कैंपबेल बे नेशनल पार्क – ग्रेट निकोबार द्वीप
    • गलाथिया नेशनल पार्क – ग्रेट निकोबार द्वीप

बागुरुम्बा धोउ 2026 (Bagurumba Dwhou 2026)

हाल ही में भारतीय प्रधानमंत्री ने असम के गुवाहाटी स्थित सरुसजाई स्टेडियम में बागुरुम्बा धोउ 2026 में भाग लिया।

संबंधित तथ्य

  • इस आयोजन में असम के 23 जिलों की 81 विधानसभा क्षेत्रों से 10,000 से अधिक बोडो कलाकारों द्वारा सामूहिक समन्वित बागुरुम्बा नृत्य प्रस्तुत किया गया।
  • शिल्पी दिवस (ज्योति प्रसाद अग्रवाल की पुण्यतिथि) के साथ आयोजित यह उत्सव वर्ष 2020 के बोडो शांति समझौते के बाद स्थापित “शांति युग” का प्रतीक था।

‘बागुरुम्बा धोउ’ के बारे में

  • अर्थ: “धोउ” शब्द का बोडो भाषा में अर्थ “लहर” होता है, जो सांस्कृतिक गर्व और पहचान की विशाल लहर को दर्शाता है।
  • समुदाय एवं उद्गम: यह बोडो जनजाति का पारंपरिक लोक नृत्य है, जो असम का सबसे बड़ा नृजातीय-भाषायी समूह है।
    • यह नृत्य उनकी कृषि-आधारित संस्कृति और प्रकृति-केंद्रित विश्वदृष्टि का कलात्मक प्रतिबिंब है।
  • प्रदर्शक एवं शैली
    • मुख्यतः समूहों में बोडो महिलाओं द्वारा प्रस्तुत किया जाता है, जिसमें धीमी, सौम्य गतियों और समन्वित कदम के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है।
    • कोमल हस्त मुद्राएँ तितलियों से प्रेरित होती हैं (इसी कारण इसे “तितली नृत्य” भी कहा जाता है), साथ ही पक्षियों, नदियों और लहराते खेतों से भी प्रेरणा ली जाती है।
  • अवसर: यह ब्विसागु पर्व से निकटता से जुड़ा है, जो बोडो नववर्ष और वसंत ऋतु के आगमन का उत्सव है।
  • प्रतीकात्मकता: यह नवोत्थान, उर्वरता और प्रकृति के साथ सामंजस्य का प्रतीक है।
  • संगीत एवं वाद्ययंत्र: यह प्रस्तुति पीढ़ियों के बीच सांस्कृतिक संप्रेषण का माध्यम है, जिसमें निम्नलिखित पारंपरिक वाद्ययंत्रों का प्रयोग किया जाता है:
    • खाम: एक पारंपरिक लंबा ढोल।
    • सिफुंग: पाँच छिद्रों वाली विशिष्ट बाँसुरी।
    •  सेरजा: धनुष से बजाया जाने वाला वायलिन जैसा वाद्य।
    • जोथा एवं गोंग्वना: झाँझ और वीणा।

बोडो पहचान के लिए नीतिगत उपलब्धियाँ

  • भाषायी दर्जा: बोडो भाषा को वर्ष 2020 में असम की सह-आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता दी गई तथा इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया।
  • शासन एवं शिक्षा: बोडो-कछारी कल्याण स्वायत्त परिषद तथा एक समर्पित बोडोलैंड प्रशासनिक स्टाफ कॉलेज की स्थापना।
    • स्वदेशी शिक्षा को सुदृढ़ करने हेतु बोडो माध्यम शिक्षा के लिए एक पृथक निदेशालय का गठन।

यूरोपियन संघ का ‘एंटी-कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट’

ग्रीनलैंड से संबंधित विवाद की पृष्ठभूमि में, यूरोपीय संघ (EU) डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय संघ के सदस्य देशों पर शुल्क (टैरिफ) लगाने की धमकी दिए जाने के उपरांत अपने ‘एंटी-कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट’ (Anti-Coercion Instrument) को सक्रिय करने पर विचार कर रहा है।

यूरोपीय संघ का एंटी-कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट (ACI) अथवा ‘ट्रेड बाजूका’

  • कानूनी आधार: ‘एंटी-कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट’ एक यूरोपीय संघीय विनियमन है, जिसे वर्ष 2023 में यूरोपीय संघ अथवा उसके सदस्य देशों के विरुद्ध अन्य देशों द्वारा अपनाई जाने वाली ‘एंटी-कोएर्शन’ का प्रतिकार करने हेतु अधिसूचित किया गया।
  • ‘एंटी-कोएर्शन’ की अवधारणा: व्यापार, निवेश अथवा वित्तीय उपायों के प्रयोग या उनकी धमकी के माध्यम से यूरोपीय संघ या उसके किसी सदस्य देश को नीतिगत परिवर्तन हेतु बाध्य करना ‘एंटी-कोएर्शन’ की श्रेणी में आता है।
  • प्राथमिक उद्देश्य: इस उपकरण का मूल उद्देश्य प्रतिरोधक क्षमता (Deterrence) का सृजन करना है। यूरोपीय संघ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई से पूर्व संवाद, कूटनीतिक सहभागिता एवं तनाव-न्यूनीकरण को प्राथमिकता देता है।
  • निर्णय-निर्माण प्रक्रिया: यूरोपीय आयोग द्वारा जाँच की जाती है, जिसके उपरांत यूरोपीय संघ परिषद, योग्य बहुमत (Qualified Majority) के माध्यम से इसकी पुष्टि करती है; सर्वसम्मति की आवश्यकता नहीं होती।
  • संभावित प्रतिकार उपाय: सक्रिय किए जाने की स्थिति में यूरोपीय संघ निम्नलिखित कठोर प्रतिकारात्मक उपाय अपना सकता है—
    • आयात पर उच्च टैरिफ अथवा प्रतिबंध
    • नए करों का आरोपण (प्रौद्योगिकी कंपनियों सहित)
    • निवेश प्रवाह पर नियंत्रण
    • यूरोपीय संघ के एकल बाजार तक पहुँच को सीमित करना
    • सार्वजनिक खरीद प्रक्रियाओं से विदेशी कंपनियों का बहिष्कार।
  • विशेषताएँ
    • ये उपाय आनुपातिक, लक्षित तथा प्रत्यावर्तनीय होंगे तथा जब आर्थिक जबरदस्ती समाप्त हो जाएगी, तब इन्हें वापस ले लिया जाएगा।
    • इसी कारण इसे यूरोपीय संघ का सर्वाधिक शक्तिशाली व्यापारिक प्रतिशोध उपकरण अथवा “ट्रेड बाजूका” कहा जाता है।
    • अब तक इसका प्रयोग नहीं हुआ है; इसका सक्रिय होना एक महत्त्वपूर्ण रणनीतिक उन्नयन को दर्शाएगा।

होप द्वीप (Hope Island)

आंध्र प्रदेश सरकार ने होप द्वीप पर एक उपग्रह प्रक्षेपण सुविधा विकसित करने की योजना की घोषणा की है, जो राज्य की महत्त्वाकांक्षी ‘स्पेस सिटी परियोजना’ का हिस्सा है।

होप द्वीप के बारे में

  • भौगोलिक स्थिति: होप द्वीप आंध्र प्रदेश में काकीनाडा खाड़ी में, बंगाल की खाड़ी में गोदावरी नदी के मुहाने पर स्थित है।
    • यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के मुख्य प्रक्षेपण स्थल, श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 600 किमी. से अधिक दूर स्थित है।
  • निर्माण: यह गोदावरी नदी द्वारा अवसाद निक्षेपण के कारण लगभग एक सदी पूर्व प्राकृतिक रूप से निर्मित हुआ।
  • आपदा संरक्षण भूमिका: यह द्वीप चक्रवातों, तूफानी ज्वार और तटीय अपरदन के विरुद्ध प्राकृतिक अवरोध के रूप में कार्य करता है, जिससे काकीनाडा शहर और निकटवर्ती तटीय क्षेत्रों की रक्षा होती है।
  • पारिस्थितिकी महत्त्व: होप द्वीप कोरिंगा वन्यजीव अभयारण्य का हिस्सा है, जो भारत के सबसे बड़े मैंग्रोव पारितंत्रों में से एक है।
  • जैव-विविधता हॉटस्पॉट: यह 42 प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों का शीतकालीन प्रवास स्थल तथा ‘ऑलिव रिडले टर्टल’ का प्रजनन स्थल है।
  • नौवहन एवं बंदरगाह: होप द्वीप काकीनाडा एंकरज पोर्ट और काकीनाडा डीप-सी पोर्ट के संचालन हेतु सुरक्षित नौवहन चैनल उपलब्ध कराता है।
  • रणनीतिक एवं विकासात्मक महत्त्व: यह मुख्य भूमि पर स्थित पूर्वी नौसेना कमान अड्डे के सामने स्थित है।
    • प्रस्तावित स्पेस सिटी और उपग्रह प्रक्षेपण सुविधा के कारण इस द्वीप का रणनीतिक और पर्यावरणीय महत्त्व बढ़ गया है।

स्कॉच अवॉर्ड 2025’

C-DOT को उसकी स्वदेशी ‘सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन’ के लिए ‘स्कॉच अवॉर्ड 2025’ (SKOCH Award) प्राप्त हुआ, जो भारत की आपदा और आपातकालीन संचार व्यवस्था को सुदृढ़ करने में उसकी भूमिका को मान्यता देता है।

स्कॉच अवॉर्ड के बारे में

  • परिचय: स्कॉच अवॉर्ड, भारत में शासन, प्रौद्योगिकी-आधारित विकास और सार्वजनिक सेवा वितरण में उत्कृष्टता को सम्मानित करता है।
  • आयोजक: स्कॉच समूह, जो सामाजिक-आर्थिक सुधारों और समावेशी विकास पर केंद्रित एक अग्रणी नीति थिंक टैंक है।
    • इसकी स्थापना वर्ष 2003 में स्कॉच समूह द्वारा की गई थी।
  • मानदंड: प्रौद्योगिकी, वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा, शासन और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण में प्रभावी पहलों को पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं।
  • स्कॉच अवॉर्ड 2025: “रिसोर्सिंग विकसित भारत” (Resourcing Viksit Bharat) विषय पर आयोजित 104वें स्कॉच शिखर सम्मेलन के दौरान प्रदान किया गया, जो राष्ट्रीय विकास और अनुकूलन संबंधी परियोजनाओं को मान्यता देता है।

C-DOT के सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन (CBS) के बारे में

  • C-DOT का सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन एक स्वदेशी आपदा और आपातकालीन अलर्ट प्लेटफॉर्म है, जो मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से लगभग वास्तविक समय में जीवनरक्षक सूचनाओं का प्रसार सक्षम बनाता है।

CBS की विशेषताएँ

  • सरकारी अलर्ट प्रणालियों और दूरसंचार नेटवर्क के बीच स्वचालित एकीकरण स्थापित करता है।
  • 2G, 3G, 4G और 5G प्रौद्योगिकियों का समर्थन
  • भू-लक्षित, बहु-आपदा अलर्ट सक्षम।
  • 21 भारतीय भाषाओं में संचार का समर्थन
  • निम्नलिखित अनेक अलर्ट-सृजन एजेंसियों का एकीकरण:
    • भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (मौसम संबंधी घटनाएँ)
    • केंद्रीय जल आयोग (बाढ़)
    • भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (सुनामी)
    • डिफेंस जियो-इन्फॉर्मेटिक्स रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (भूस्खलन)
    • भारतीय वन सर्वेक्षण (वनाग्नि)।
  • मोबाइल सेवा प्रदाताओं, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को एकीकृत अनुमोदन तथा वितरण प्रणाली के माध्यम से जोड़ता है।

पूर्व पुरस्कार प्राप्तकर्ता एवं लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार प्राप्तकर्ता व्यक्ति

  • नंदन नीलेकणी (2013) – इमैजिनिंग इंडिया
  • मोंटेक सिंह अहलूवालिया (2011) – ग्रोथ मेकर
  • सी. रंगराजन (2010) – फिलॉसफर किंग
  • दीपक पारेख (2014) – ग्रोथ टर्नपाइक
  • नितिन गडकरी (2018) – चैलेंजिंग पॉवर्टी
  • एम. वेंकैया नायडू (2016) – ए व्यू फ्रॉम द इनसाइड।

महत्त्व

  • समय पर और लक्षित संचार के माध्यम से आपदा जोखिम न्यूनीकरण को सुदृढ़ करता है।
  • विशेषकर दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में सार्वजनिक सुरक्षा में सुधार करता है।
  • संयुक्त राष्ट्र के “अर्ली वार्निंग्स फॉर ऑल” कार्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ के ‘कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल’ के अनुरूप है।
  • सतत् विकास लक्ष्यों और आत्मनिर्भर भारत के अनुरूप, भारत को आपातकालीन अलर्ट प्रौद्योगिकियों में वैश्विक अग्रणी के रूप में स्थापित करता है।

सेम्मोझी साहित्यिक पुरस्कार

हाल ही में तमिलनाडु ने साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर चिंताओं के मध्य ‘सेम्मोझी साहित्यिक पुरस्कार’ की शुरुआत की।

सेम्मोझी राष्ट्रीय साहित्यिक पुरस्कार के बारे में

  • यह एक वार्षिक, राज्य-प्रायोजित राष्ट्रीय स्तर का साहित्यिक सम्मान है।
  • भाषाएँ (चरण I): तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, ओड़िया, बंगाली, मराठी।
  • चयन प्रक्रिया: भाषा-वार स्वतंत्र जूरी, जिसमें किसी प्रकार का राजनीतिक या नौकरशाही हस्तक्षेप नहीं होगा।
  • पुरस्कार घटक: प्रत्येक चयनित साहित्यिक कृति के लिए ₹5 लाख।
  • विजन: रचनात्मक स्वतंत्रता, भाषायी विविधता और भारतीय साहित्य में उत्कृष्टता को बढ़ावा देना।

साहित्य अकादमी पुरस्कार के बारे में

  • साहित्य अकादमी पुरस्कार एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय साहित्यिक सम्मान है, जो कविता, उपन्यास, नाटक, निबंध और लघु कथा जैसी विधाओं में भारतीय साहित्य में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देता है।
  • भाषा श्रेणियाँ 
    • आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 22 भाषाएँ।
    • इसके अतिरिक्त अंग्रेजी और राजस्थानी,
    • भारतीय साहित्य के अनुवादित कार्यों को भी शामिल करता है।

अंतरराष्ट्रीय डुगोंग संरक्षण केंद्र

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने तटीय क्षेत्र की पारिस्थितिकी संवेदनशीलता के कारण तमिलनाडु को मनोर डुगोंग संरक्षण केंद्र के डिजाइन में संशोधन करने का निर्देश दिया है।

अंतरराष्ट्रीय डुगोंग संरक्षण केंद्र, मनोर (तंजावुर)

  • प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय डुगोंग संरक्षण केंद्र ₹40.94 करोड़ की परियोजना है, जिसे तंजावुर जिले के मनोर में, पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील तटीय विनियमन क्षेत्र में नियोजित किया गया है।
  • उद्देश्य
    • डुगोंग का संरक्षण और सीग्रास पारितंत्रों का संरक्षण
    • घायल समुद्री स्तनधारियों पर अनुसंधान, बचाव और पुनर्वास
    • जन-जागरूकता और समुद्री जैव-विविधता पर आधारित शिक्षा।
  • पर्यावरणीय चिंताएँ
    • परियोजना का लगभग 22,000 वर्ग मीटर क्षेत्र CRZ-III ‘नो डेवलपमेंट जोन’ में स्थित है और यह मैंग्रोव तथा ‘सीग्रास मीडोज’ वाले CRZ-I क्षेत्रों से भी आच्छादित है।
    • विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने कंक्रीट संरचनाओं के अत्यधिक उपयोग को चिह्नित किया।
    • कम प्रभाव वाले, पर्यावरण-अनुकूल निर्माण, प्री-फैब्रिकेटेड सामग्री के उपयोग और ‘नो डेवलपमेंट जोन’ के बाहर संरचनाओं के स्थानांतरण की सिफारिश की।

डुगोंग (Dugong dugon) के बारे में

  • डुगोंग एक बड़ा, धीमी गति से चलने वाला समुद्री स्तनधारी है, जिसे सामान्यतः “सी काउ” कहा जाता है, और यह एकमात्र पूर्णतः समुद्री शाकाहारी स्तनधारी है।
  • आवास: भारतीय और पश्चिमी प्रशांत महासागरों के गर्म, उथले तटीय जल में पाया जाता है।
  • पारिस्थितिकी भूमिका 
    • खाद्य के लिए केवल ‘सीग्रास’ पर निर्भर है, जिससे यह एक की-स्टोन प्रजाति के रूप में कार्य करता है।
    • सीग्रास मीडोज, लैगून, मुहाने और निकटवर्ती समुद्री क्षेत्रों में निवास करता है।
    • पारिस्थितिकी पारितंत्र अभियंता की भूमिका निभाता है, जिससे सीग्रास के पुनर्जनन और समुद्री जैव-विविधता को सहायता मिलती है।
  • संरक्षण स्थिति
    • IUCN रेड लिस्ट: सुभेद्य (Vulnerable)
    • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: अनुसूची I (सर्वोच्च संरक्षण)
    • CITES: परिशिष्ट I

यह परियोजना समुद्री संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, लेकिन साथ ही संवेदनशील तटीय पारितंत्रों के साथ अवसंरचना विकास में संतुलन की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।

सुखात्मे राष्ट्रीय सांख्यिकी पुरस्कार

राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल के माध्यम से वर्ष 2026 के लिए सुखात्मे राष्ट्रीय सांख्यिकी पुरस्कार के लिए नामांकन आमंत्रित किए गए हैं।

सुखात्मे राष्ट्रीय सांख्यिकी पुरस्कार के बारे में

  • सुखात्मे राष्ट्रीय सांख्यिकी पुरस्कार एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान है, जिसे प्रो. पी. वी. सुखात्मे की स्मृति में स्थापित किया गया है।
    • प्रो. पी. वी. सुखात्मे कृषि सांख्यिकी और बायोमेट्री में यादृच्छिक नमूनाकरण विधियों के अनुप्रयोग में अपने अग्रणी कार्य के लिए जाने जाते हैं।
    • विज्ञान और मानव कल्याण में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1973 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
  • आयोजक: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI), भारत सरकार।
  • अवधि: यह पुरस्कार वर्ष 2000 से प्रत्येक दो वर्ष में एक बार (द्विवार्षिक) प्रदान किया जाता है।
  • पुरस्कार समारोह: सांख्यिकी दिवस (29 जून) को प्रदान किया जाता है, जो प्रो. पी. वी. सुखात्मे की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
  • पात्रता 
    • सांख्यिकी के क्षेत्र में आजीवन योगदान के लिए प्रतिष्ठित भारतीय सांख्यिकीविद्।
    • 45 वर्ष या उससे अधिक आयु के सांख्यिकीविदों के लिए भी उपलब्ध।
    • यदि नामांकित व्यक्ति का निधन नामांकन से एक वर्ष के भीतर हुआ हो, तो मरणोपरांत पुरस्कार की अनुमति है।
  • नामांकन प्रक्रिया: आवेदन राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल (awards.gov.in) के माध्यम से प्रस्तुत किए जाते हैं।
    • स्व-नामांकन की अनुमति है।
    • संस्थानों द्वारा भी नामांकन प्रस्तावित किए जा सकते हैं।
  • पुरस्कार घटक: प्रशस्ति-पत्र, शॉल और स्मृति-चिह्न।
    • पुरस्कार प्राप्तकर्ता अपने कार्य के महत्त्व को रेखांकित करते हुए एक विशेष व्याख्यान देता है।

महत्त्व

यह पुरस्कार सांख्यिकीय अनुसंधान में उत्कृष्टता को बढ़ावा देता है, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को सुदृढ़ करता है तथा योजना, शासन एवं सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए आवश्यक योगदानों को चिह्नित करता है।

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