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संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal January 27, 2026 04:00 38 0

उदारीकृत प्रेषण योजना (LRS)

भारतीय रिजर्व बैंक की उदारीकृत प्रेषण योजना (Liberalised Remittance Scheme) के तहत भारत से बाहर भेजी गई निधियाँ नवंबर 2025 में दो वर्षों के निम्नतम स्तर पर पहुँच गईं, जिसका मुख्य कारण विदेशी शिक्षा और यात्रा व्यय में कमी है।

बाह्य प्रेषित निधियों में प्रमुख प्रवृत्तियाँ 

  • कुल प्रेषित निधियाँ: $1.94 अरब पर आ गईं, जो नवंबर 2023 के बाद सबसे कम हैं।
  • विदेशी शिक्षा पर व्यय: $120.9 मिलियन तक घट गया, जो अप्रैल 2020 के बाद न्यूनतम है और इसका कारण विदेशों में नामांकन में कमी को दर्शाता है।
  • विदेशी यात्रा पर व्यय: वैश्विक अनिश्चितताओं और सख्त वीजा व नीतिगत नियमों के बीच $1.1 अरब तक कम हो गया है।

उदारीकृत प्रेषण योजना (LRS)

  • LRS भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा संचालित एक ढाँचा है, जो निवासी व्यक्तियों को अनुमत चालू और पूँजी खाता लेन-देन के लिए विदेश में निधियाँ प्रेषित करने की अनुमति देता है।
  • आरंभ: वर्ष 2004 में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा।
  • प्रेषण सीमा: प्रत्येक वित्तीय वर्ष में प्रति व्यक्ति USD 2,50,000 तक।
    • सीमा से अधिक प्रेषण के लिए RBI का पूर्व अनुमोदन आवश्यक है।
  • उद्देश्य
    • शिक्षा, यात्रा, चिकित्सा उपचार और विदेश में परिजनों के निर्वाह को सुविधाजनक बनाना।
    • विदेश में निवेश, संपत्ति अधिग्रहण और वित्तीय विविधीकरण को सक्षम करना।
    • भारत को वैश्विक वित्तीय प्रणालियों के साथ सुव्यवस्थित रूप से एकीकृत करना।
  • पात्रता मानदंड
    • योजना सभी निवासी व्यक्तियों, जिनमें अवयस्क और विद्यार्थी शामिल हैं, के लिए उपलब्ध है।
    • अपवाद: निगम, साझेदारी फर्म, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF), ट्रस्ट और अन्य संस्थाएँ योजना से बाहर हैं।
  • अनुमत प्रयोजन: LRS के अंतर्गत प्रेषित निधियाँ शिक्षा, व्यवसाय यात्रा, रोजगार, चिकित्सा उपचार, उपहार, निवेश और अन्य व्यक्तिगत प्रयोजनों के लिए उपयोग की जा सकती हैं, बशर्ते कि यह FEMA और RBI के दिशा-निर्देशों के अनुसार हो।
  • प्रतिबंधित लेन-देन: लॉटरी टिकटों की खरीद, मार्जिन ट्रेडिंग, सट्टेबाजी या RBI द्वारा अधिसूचित कुछ अचल संपत्ति लेन-देन।
  • LRS के तहत कराधान
    • LRS के तहत प्रेषित निधियों पर स्रोत पर कर संग्रह (TCS) लागू है, जैसा कि आयकर अधिनियम में निर्दिष्ट है।
    • अपवाद: यदि प्रेषक घोषणा प्रस्तुत करता है कि निधियों का उपयोग विनिर्माण, प्रसंस्करण, उत्पादन या विद्युत उत्पादन के लिए हुआ है और पुनर्विक्रय के लिए नहीं किया गया, तो TCS लागू नहीं होता है।

ASC अर्जुन

भारतीय रेलवे ने यात्री सुरक्षा, संरक्षा और सेवा वितरण में सुधार के एक महत्त्वपूर्ण कदम के रूप में ‘ASC अर्जुन’ नामक मानवाकृति रोबोट को प्रस्तुत किया।

‘ASC अर्जुन’ के बारे में

  • यह भारतीय रेल नेटवर्क में पहला मानवाकृति रोबोट है।
  • स्थान: विशाखापत्तनम रेलवे स्टेशन में तैनात।
  • उद्देश्य: मुख्यतः यात्री सुरक्षा, संरक्षा और सेवा वितरण को बढ़ाना, साथ ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के कर्मियों के साथ समन्वय में कार्य करना।
  • विकास: पूरी तरह से विशाखापत्तनम में, स्वदेशी प्रौद्योगिकी का उपयोग करके डिजाइन और विकसित किया गया।
  • मुख्य विशेषताएँ और क्षमताएँ
    • पहचान: फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) से सुसज्जित।
    • कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी: वास्तविक समय में RPF नियंत्रण कक्षों को अलर्ट।
    • बहुभाषी घोषणाएँ: अंग्रेजी, हिंदी और तेलुगु में स्वचालित मार्गदर्शन।
    • सेमी-ऑटोनोमस नेविगेशन: अवरोध टालने के साथ पूर्व निर्धारित मार्गों पर चलने की क्षमता।
    • 24×7 गश्त: प्लेटफॉर्मों की  सतत् निगरानी।
    • आपातकालीन प्रतिक्रिया: समय पर चेतावनी हेतु आग और धुएँ का पता लगाने वाले तंत्र उपस्थित हैं।

टेरावेव कम्युनिकेशन नेटवर्क 

ब्लू ओरिजिन ने टेरावेव की घोषणा की, जो एक विशाल उपग्रह संचार नेटवर्क है, जिसका उद्देश्य ऑप्टिकल लेजर लिंक के माध्यम से अल्ट्रा-उच्च गति की वैश्विक कनेक्टिविटी प्रदान करना है।

टेरावेव कम्युनिकेशन के विषय में

  • टेरावेव’ ब्लू ओरिजिन द्वारा घोषित अगली पीढ़ी का उपग्रह संचार नेटवर्क है।
  • क्षमता एवं गति: पृथ्वी पर कहीं भी डेटा गति 6 टेराबिट प्रति सेकंड तक देने के लिए डिजाइन किया गया है।
    • यह मौजूदा उपग्रह नेटवर्क जैसे स्टारलिंक से कहीं अधिक तेज है।
  • मुख्य फोकस: सामान्य उपभोक्ता ब्रॉडबैंड की तुलना में यह उद्यम, सरकारी, डेटा सेंटर और मिशन-क्रिटिकल उपयोगकर्ताओं को लक्षित करता है।

टेरावेव की कार्यप्रणाली

  • LEO उपग्रह नेटवर्क: टेरावेव 5,408 LEO और MEO उपग्रहों के सघन नेटवर्क का उपयोग करता है, जो कम विलंबता और सतत् वैश्विक कवरेज सुनिश्चित करता है।
  • ऑप्टिकल इंटर-सैटेलाइट लिंक: उपग्रह ऑप्टिकल लेजर लिंक का उपयोग करके एक दूसरे के साथ संचार करते हैं, जिससे पृथ्वी के माध्यम से सभी डेटा को रूट किए बिना अति-उच्च गति से डेटा ट्रांसफर संभव हो पाता है।
  • अंतरिक्ष से पृथ्वी पर डेटा ट्रांसमिशन: डेटा उपग्रहों से ग्राउंड गेटवे टर्मिनल तक प्रेषित होता है।
  • स्थलीय नेटवर्क के साथ एकीकरण: ग्राउंड गेटवे मौजूदा उच्च क्षमता वाले फाइबर, क्लाउड और डेटा सेंटर अवसंरचना से जुड़े रहते हैं, जिससे अंतरिक्ष और पृथ्वी प्रणालियों के बीच डेटा प्रवाह सहज होता है।

ब्लू ओरिजिन के बारे में:

  • ब्लू ओरिजिन, अमेरिका स्थित एक निजी एयरोस्पेस कंपनी है।
  • स्थापना: वर्ष 2000 में जेफ बेजोस द्वारा स्थापित, जिसका दीर्घकालीन उद्देश्य लाखों लोगों को अंतरिक्ष में जीवन यापन और कार्य करने योग्य बनाना है।
  • पुन: प्रयोज्य रॉकेट पर फोकस: लॉन्च लागत को कम करने हेतु पुन: प्रयोज्य रॉकेटों पर बल।
  • मुख्य लॉन्च वाहन
    • न्यू शेपर्ड: अंतरिक्ष पर्यटन और अनुसंधान हेतु उप-कक्षीय रॉकेट।
    • न्यू ग्लेन: भारी-भारक कक्षीय रॉकेट, टेऱावेव जैसे बड़े उपग्रह नेटवर्क के प्रक्षेपण हेतु आवश्यक।

स्पेसएक्स स्टारलिंक:

  • स्टारलिंक एक मौजूदा LEO उपग्रह इंटरनेट नेटवर्क है, जो विश्वभर में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करता है।
  • इसका विकास और संचालन स्पेसएक्स द्वारा किया गया।
  • पैमाना: लगभग 10,000 उपग्रह पहले ही कक्षा में उपस्थित हैं (वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा नेटवर्क), और अधिक स्थापित करने की योजना है।
  • उपयोगकर्ता: उपभोक्ता, व्यवसाय, सरकार और रक्षा एजेंसियाँ।
  • कवरेज: 140 से अधिक देशों में उपलब्ध, विशेषकर दूरदराज और आपदा-प्रवण क्षेत्रों में उपयोगी।

उन्नत रासायनिक सेल–PLI (ACC-PLI) योजना

उन्नत बैटरी निर्माण के लिए भारत की ACC-PLI योजना को तकनीकी कमियों, स्थानीयकरण की चुनौतियों और आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं के कारण भारी देरी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि इसकी क्षमता सीमित रूप से ही चालू की गई है।

उन्नत रासायनिक सेल–PLI (ACC-PLI) योजना के बारे में

  • ACC-PLI योजना अक्टूबर 2021 में भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा घरेलू अगली पीढ़ी की बैटरी सेल निर्माण को प्रोत्साहित करने हेतु शुरू की गई।
  • उद्देश्य
    • वर्ष 2026 तक 50 GWh बैटरी सेल निर्माण क्षमता स्थापित करना।
    • विशेषकर चीन पर आयात निर्भरता कम करना।
    • स्थानीय बैटरी मूल्य शृंखला विकसित करना (कैथोड, एनोड, इलेक्ट्रोलाइट)।
    • प्रतिस्पर्द्धात्मक लागत पर इलेक्ट्रिक वाहन (EV) अपनाने और ऊर्जा भंडारण का समर्थन करना।
  • मुख्य घटक
    • अनुदान: ₹18,100 करोड़।
    • प्रोत्साहन: विक्रय योग्य बैटरी के प्रति kWh ₹2,000 तक।
    • स्थानीय मूल्य संवर्द्धन
      • 2 वर्षों में 25%
      • 5 वर्षों में 60%
    • पात्रता: न्यूनतम निवेश ₹1,100 करोड़।

योजना में प्रमुख अंतराल

  • क्षमता निर्माण में देरी
    • 50 गीगावाट के लक्ष्य के मुकाबले केवल 1.4 गीगावाट ही समय पर चालू हो पाया।
    • 8.6 GWh निर्माणाधीन, लेकिन विलंब।
  • प्रौद्योगिकी एवं कौशल अंतराल
    • घरेलू सेल निर्माण और खनिज शोधन में विशेषज्ञता की कमी।
    • चीनी तकनीकी विशेषज्ञों के वीजा में देरी से उपकरण स्थापना में बाधा।
  • कमजोर प्रोत्साहन के परिणाम
    • अक्टूबर 2025 तक कोई प्रोत्साहन नहीं।
    • रोजगार सृजन अपेक्षाओं से बहुत कम (0.12% लक्ष्य), केवल 1,118 नौकरियाँ, अनुमानित 1.03 मिलियन की तुलना में।

भारत में बैटरी की माँग

  • EV-चालित माँग: EV क्षेत्र लीथियम बैटरी की 70–80% माँग का प्रतिनिधित्व करता है।
  • ऊर्जा संक्रमण आवश्यकताएँ: नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की बढ़ती माँग।
  • विकास में मंदी के संकेत: EV बिक्री वृद्धि (वित्तीय वर्ष 2024-25)-15.3%, जबकि वर्ष 2022–2030 के लिए पूर्वानुमानित 49% वृद्धि से कम।

उन्नत रासायनिक सेल (ACC) के बारे में

  • उन्नत रासायनिक सेल (ACCs) अगली पीढ़ी के रिचार्जेबल बैटरी सेल हैं, जो उन्नत रासायनिक संरचनाओं (परंपरागत लेड-एसिड बैटरियों के अतिरिक्त) का उपयोग करती हैं, ताकि उच्च ऊर्जा घनत्व, दीर्घायु, तीव्र चार्जिंग और बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
  • मुख्यतः लीथियम-आयन और उभरती बैटरी रसायन अभिक्रियाओं, आधुनिक ऊर्जा और मोबिलिटी आवश्यकताओं के अनुरूप।
  • प्रमुख उपयोग
    • इलेक्ट्रिक वाहन (EVs): इलेक्ट्रिक कार, दोपहिया वाहन, बस और व्यावसायिक वाहनों को ऊर्जा प्रदान करना।
    • नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण: सौर और पवन ऊर्जा का संग्रहण, ग्रिड स्थिरता और तीव्र माँग प्रबंधन के लिए।
    • उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स: स्मार्टफोन, लैपटॉप, वियरेबल और पॉवर टूल्स में उपयोग।
    • ग्रिड-स्तरीय भंडारण: स्मार्ट ग्रिड, बैकअप पावर और फ्रीक्वेंसी नियमन का समर्थन।
    • रक्षा एवं अंतरिक्ष: मानव रहित प्रणालियाँ, उपग्रह और रणनीतिक उपकरणों के लिए विश्वसनीय ऊर्जा।

पांगोलाखा वन्यजीव अभयारण्य

हाल ही में वनाग्नि के कारण पांगोलाखा वन्यजीव अभयारण्य (Pangolakha Wildlife Sanctuary) के भीतर लगभग 12 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ, जिसे सूखा मौसम, तीव्र पवनों, खड़ी भौगोलिक ढलान और सीमित पहुँच ने और तीव्र बना दिया।

पांगोलाखा वन्यजीव अभयारण्य के बारे में

  • पांगोलाखा वन्यजीव अभयारण्य पूर्वी सिक्किम में स्थित उच्च-तुंगता वाला संरक्षित क्षेत्र है, जो अपनी समृद्ध जैव विविधता, रणनीतिक स्थिति और महत्त्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र (IBA) के रूप में भूमिका के लिए जाना जाता है।
  • स्थापना: वर्ष 2002।
  • स्थान: पूर्वी सिक्किम, भारत-चीन सीमा के निकट
    • भूटान के वनों और नेओरा वैली नेशनल पार्क (पश्चिम बंगाल) के साथ पारिस्थितिकी गलियारे का निर्माण करता है।
    • पांगोलाखा रेंज के समानांतर स्थित है, जो चोला रेंज के नीचे तक विस्तृत है और सिक्किम को भूटान से अलग करती है।
  • भूगोल
    • ऊँचाई: लगभग 1,300 मीटर से 4,000 मीटर से अधिक
    • भौगोलिक स्थलाकृति: खड़ी पर्वतीय ढलान, अल्पाइन घास के मैदान, दलदली क्षेत्र और वनाच्छादित घाटियाँ।
    • पर्वतीय दर्रे: नाथूला और जेलेप ला, ऐतिहासिक रूप से महत्त्वपूर्ण और पारिस्थितिकी दृष्टि से संवेदनशील।
    • जल स्रोत: उच्च-तुंगता वाली झीलें, जैसे- बेदांग त्सो और समीपवर्ती झीलें जैसे त्सोंगमो, प्रवासी पक्षियों के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।
    • नदियाँ: रंगपो और जलधका नदियाँ समीपवर्ती स्रोतों से निकलती हैं।
  • वनस्पतियाँ: अल्पाइन–समशीतोष्ण–उपोष्णकटिबंधीय क्रम
    • रोडोडेंड्रॉन, सिल्वर फर, जुनिपर, लाइकेन समृद्ध ओक वन और सघन बाँस के झुरमुट।
  • जीव-जंतु: बाघ, तेंदुआ, लाल पांडा, मस्क डियर, सेरो, एशियाई काला भालू
    • लाल पांडा सिक्किम का राजकीय पशु भी है।

रेड-ईयर्ड स्लाइडर टर्टल (Red-Eared Slider Turtle)

 

हाल ही में तमिलनाडु के कोयंबटूर के आर्द्रभूमि क्षेत्रों में ‘रेड-ईयर्ड स्लाइडर टर्टल’  पाए गए, जिससे मीठे जल के पारिस्थितिकी तंत्र पर आक्रामक प्रजातियों के खतरे को लेकर चिंता बढ़ी है।

  • पालतू जीव, व्यापार से छोड़े जाने के उपरांत, ये वर्तमान में भारतीय शहरी झीलों एवं आर्द्रभूमियों में प्रसारित हो रहे हैं।

रेड-ईयर्ड स्लाइडर टर्टल’  (Trachemys scripta elegans)

  • रेड-ईयर्ड स्लाइडर टर्टल’  विश्व की सर्वाधिक व्यापक रूप से प्रविष्ट मीठे जल की कछुआ प्रजातियों में से एक है, जिसका प्रसार मुख्यतः वैश्विक विदेशी पालतू जीव व्यापार के माध्यम से हुआ है।
  • मूल क्षेत्र: संयुक्त राज्य अमेरिका, विशेषतः मिसिसिपी नदी बेसिन एवं उससे संलग्न क्षेत्र।
  • वितरण: वर्तमान में अंटार्कटिका को छोड़कर सभी महाद्वीपों में स्थापित।
    • भारत में विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों के समीप स्थित झीलों, टैंकों एवं आर्द्रभूमियों में इनकी संख्या में वृद्धि हुई है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • आकृति: प्रत्येक कान के पीछे विशिष्ट लाल रंग की धारियाँ।
    • आवास: मुख्यतः जलीय, किंतु विस्तार की अवस्था में अर्द्ध-स्थलीय प्रवृत्ति प्रदर्शित करता है।
    • अनुकूलनशीलता: अल्प-अनुकूल तापमान एवं विविध आवासीय परिस्थितियों में जीवित रहने की क्षमता।
    • व्यवहार: विशेषकर प्रजनन काल में आक्रामक शिकारी स्वभाव।
    • आयु: प्राकृतिक अवस्था में 20–50 वर्ष।
  • IUCN स्थिति: कम चिंताग्रस्त (वैश्विक स्तर पर), किंतु मूल क्षेत्र के बाहर आक्रामक प्रजाति।

भारतीय पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव

  • प्राकृतिक परभक्षियों की अनुपस्थिति के कारण तीव्र प्रजनन।
  • प्रकाश स्थलों, प्रजनन क्षेत्रों एवं आहार हेतु देशी कछुआ प्रजातियों के साथ प्रतिस्पर्द्धा।
  • आक्रामक आहार व्यवहार के परिणामस्वरूप मत्स्य आबादी में ह्रास, जिससे मीठे जल की खाद्य शृंखलाएँ बाधित होती हैं।
  • आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी में परिवर्तन, जिसके फलस्वरूप स्थानीय जैव विविधता के लिए खतरा।

इसके आक्रमण से निपटने के उपाय

  • विदेशी पालतू जीव व्यापार एवं आयात का कठोर विनियमन एवं सतत् निगरानी।
  • पालतू कछुओं को प्राकृतिक जल निकायों में छोड़ने से हतोत्साहित करने हेतु जन-जागरूकता अभियानों का संचालन।
  • प्रारंभिक पहचान एवं निष्कासन, जिसमें मछुआरों, नागरिकों एवं स्थानीय प्राधिकरणों द्वारा सूचना-प्रदान।

शैडो फ्लीट

हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ (Shadow Fleet) पर नवीन प्रतिबंध अधिरोपित किए हैं, ताकि कथित रूप से विरोध-दमन एवं क्षेत्रीय अस्थिरता को वित्तपोषित करने वाले तेल निर्यात पर नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

शैडो फ्लीट क्या है?

  • शैडो फ्लीट से तात्पर्य पुराने, प्रायः गोपनीय स्वामित्व आधारित तेल टैंकरों के ऐसे नेटवर्क से है, जिनका उपयोग अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचाव हेतु किया जाता है, जिसमें कार्गो की उत्पत्ति, स्वामित्व एवं गंतव्य को छिपाया जाता है।
  • शैडो फ्लीट की प्रमुख विशेषताएँ
    • अस्पष्ट स्वामित्व: जहाजों का पंजीकरण विभिन्न अधिकार क्षेत्रों में शेल कंपनियों के माध्यम से।
    • बचाव प्रक्रिया: बार-बार नाम परिवर्तन, ध्वज परिवर्तन, स्वचालित पहचान प्रणाली (AIS) को निष्क्रिय करना तथा समुद्र में जहाज-से-जहाज स्थानांतरण करना।
    • अनौपचारिक लॉजिस्टिक्स: मुख्यधारा की बीमा, वित्तपोषण एवं अनुपालन प्रणालियों से बाहर संचालन।

शैडो फ्लीट का प्रभाव

  • प्रतिबंध-उल्लंघन: ईरान जैसे प्रतिबंधित देशों को प्रतिबंधों के बावजूद तेल एवं पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में सक्षम बनाता है।
  • सुरक्षा जोखिम: प्राप्त राजस्व का उपयोग हथियार, प्रॉक्सी समूहों एवं आंतरिक दमन हेतु किया जा सकता है।
  • समुद्री सुरक्षा एवं पर्यावरण: अपर्याप्त रूप से विनियमित जहाजों के कारण दुर्घटनाओं, तेल रिसाव एवं विधिक विवादों का बढ़ा हुआ जोखिम।

मेटियोसुनामी

हाल ही में अर्जेंटीना के तटीय नगर सांता क्लारा डेल मार में एक दुर्लभ मेटियोसुनामी की घटना घटित हुई।

मेटियोसुनामी क्या है?

  • परिभाषा: मेटियोसुनामी समुद्र-स्तर में सुनामी-सदृश दोलन है, जो भूकंपीय गतिविधियों के स्थान पर त्वरित वायुमंडलीय विक्षोभों के कारण उत्पन्न होता है।
  • भूकंप-जनित सुनामी से भिन्न: पारंपरिक सुनामियों के विपरीत, जो समुद्र के नीचे भूकंप से उत्पन्न होती हैं, मेटियोसुनामी का संघटन मौसम संबंधी कारकों के कारण होता है।
  • उत्प्रेरक तंत्र
    • वायुमंडलीय दाब परिवर्तन: महासागर की सतह के ऊपर वायु दाब में अचानक गिरावट या तीव्र उतार-चढ़ाव।
    • तरंग निर्माण प्रक्रिया: वायुमंडलीय विक्षोभ, महासागर की सतह को ऊर्जा स्थानांतरित करता है, जिससे दीर्घ तरंगों का निर्माण होता है, जो तट की ओर अग्रसर होती हैं और प्रायः उथले महाद्वीपीय शेल्फ, खाड़ियों, जलप्रवेशिकाओं या बंदरगाहों में प्रवर्द्धित हो जाती हैं।
  • व्यवहार एवं विशेषताएँ
    • त्वरित प्रारंभ: यह घटना अचानक घटित होती है, जिसमें बहुत अल्पावधि की या कोई पूर्व चेतावनी प्राप्त नहीं होती है।
    • समुद्री जल का अपसरण: प्रारंभ में जल तटरेखा से पीछे हट सकता है, जिसके पश्चात् तीव्र वेग से पुनः आगे बढ़ता है।
    • तरंग ऊँचाई एवं प्रभाव: मेटियोसुनामी की तरंग ऊँचाई 6 फीट या उससे अधिक हो सकती है, जो तटीय अवसंरचना, नौकाओं तथा मानव सुरक्षा के लिए जोखिम उत्पन्न करती है।
  • भौगोलिक उपस्थिति: इनका अभिलेखन ग्रेट लेक्स, गल्फ ऑफ अमेरिका, अटलांटिक तट, भूमध्य सागर तथा एड्रियाटिक सागर सहित अनेक क्षेत्रों में किया गया है।
  • भूकंपीय सुनामी से अंतर: जहाँ भूकंपीय सुनामियाँ विवर्तनिकी गतिविधियों से उत्पन्न होती हैं, वहीं मेटियोसुनामी मौसम-जनित होती हैं, यद्यपि उनका भौतिक व्यवहार एवं तटीय प्रभाव अत्यंत समान प्रतीत हो सकता है।

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