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संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal January 31, 2026 03:18 43 0

होया नागाएन्सिस
(Hoya nagaensis)

नागालैंड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने नागालैंड के एक समुदाय द्वारा संरक्षित अत्यधिक ऊँचाई पर अवस्थित वन में एक नई पादप प्रजाति, होया नागाएन्सिस (Hoya nagaensis) की खोज की है।

होया नागाएन्सिस के बारे में

  • होया नागाएन्सिस एक नवीन रूप से पहचानी गई पुष्पीय पादप प्रजाति है, जिसकी खोज नागालैंड के फेक (Phek) जिले में स्थित कावुनहौ समुदाय आरक्षित वन में की गई है, जो इस क्षेत्र की समृद्ध किंतु अब तक अल्प-अन्वेषित जैव विविधता को रेखांकित करती है।
  • विशेषताएँ
    • पत्तियों की विशिष्ट आकृति और पुष्प संरचनाएँ प्रदर्शित करती है, जो इसे ज्ञात होया प्रजातियों से स्पष्ट रूप से भिन्न बनाती हैं।
    • तारे के आकार के, ‘वैक्स फ्लॉवर’ उत्पन्न करती है तथा दूधिया लेटेक्स स्रावित करती है, जो एपोसाइनेसी कुल की विशिष्ट विशेषता है।
    • समशीतोष्ण, उच्च-ऊँचाई वाले वन पारितंत्रों में पाई जाती है, जिनका वैज्ञानिक रूप से विरल दस्तावेजीकरण हुआ है।
  • महत्त्व
    • उत्तर-पूर्व भारत को, विशेषकर पूर्वी हिमालय क्षेत्र में, एक जैव विविधता हॉटस्पॉट के रूप में पुनः सुदृढ़ करता है।
    • समुदाय-प्रबंधित वनों के संरक्षणात्मक महत्त्व को प्रदर्शित करता है।
    • केव बुलेटिन (Kew Bulletin) में प्रकाशित, जो वैश्विक पादप वर्गिकी और संरक्षण विज्ञान में योगदान देता है।
  • प्रजाति के लिए खतरे
    • अत्यंत सीमित वितरण, केवल एक ही स्थान से ज्ञात।
    • स्थानांतरण कृषि (झूम) और वन व्यवधान, जिसके कारण इसे अस्थायी रूप से अति संकटग्रस्त के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

‘होया जीनस’ के बारे में

  • होया, जिसे सामान्यतः ‘वैक्स प्लांट्स’ के नाम से जाना जाता है, एक जीनस है, जो अपने सजावटी पुष्पों और पारिस्थितिकी विविधता के लिए मूल्यवान है।
  • मुख्य विशेषताएँ: तारा-आकार के, ‘वैक्स फ्लॉवर’ तथा आरोही या फैलने वाली वृद्धि प्रवृत्ति।
  • मूल क्षेत्र: दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया और पोलिनेशिया।
  • वनस्पति: सामान्यतः उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय वन पाए जाते हैं, जो प्रायः एपिफाइट्स के रूप में होते हैं।

न्यायाधीश गीता मित्तल समिति

सर्वोच्च न्यायालय ने मणिपुर में पीड़ित सहायता में निरंतरता सुनिश्चित करने तथा इसके नियमितीकरण के लिए न्यायाधीश गीता मित्तल समिति के कार्यकाल को 31 जुलाई, 2026 तक बढ़ा दिया है।

न्यायमूर्ति गीता मित्तल समिति के बारे में

  • गठित करने वाला प्राधिकरण: अगस्त 2023 में भारत का सर्वोच्च न्यायालय, मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हुए गंभीर जातीय संघर्षों के बाद।
  • संरचना: यह तीन सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीशों की एक पूर्णतः महिला समिति है
    • अध्यक्ष: न्यायाधीश गीता मित्तल
    • सदस्य: न्यायाधीश शालिनी फणसलकर जोशी और न्यायमूर्ति आशा मेनन।
  • कार्यादेश: मई 2023 में मणिपुर में भड़की जातीय हिंसा के पीड़ितों के लिए राहत, पुनर्वास, मुआवजा और मानवीय उपायों की निगरानी करना।
  • रिपोर्टें: समिति समय-समय पर सर्वोच्च न्यायालय को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करती रही है।
  • कार्यकाल: समिति का प्रारंभिक कार्यकाल औपचारिक रूप से जुलाई 2025 में समाप्त हो गया था, किंतु उसने अपना कार्य जारी रखा।

भारत के प्रमुख डेल्टाओं का अवतलन

नेचर में प्रकाशित एक नए वैश्विक अध्ययन में पाया गया है कि भारत के कई प्रमुख नदी डेल्टा समुद्र-स्तर वृद्धि की तुलना में अधिक तेजी से अवतलित हो रहे हैं, जिससे बाढ़ का जोखिम उल्लेखनीय रूप से बढ़ रहा है।

नदी डेल्टा के बारे में

  • नदी डेल्टा वे निम्न-स्थलीय क्षेत्र होते हैं, जहाँ नदियाँ समुद्र से मिलती हैं।
  • ये विशाल जनसंख्या, कृषि, मत्स्यपालन, बंदरगाहों और व्यापार का समर्थन देते हैं, परंतु भूमि अवतलन, समुद्र-स्तर वृद्धि और अन्य दबावों के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं।
  • डेल्टा पृथ्वी की भूमि का केवल 1% भाग घेरते हैं, परंतु 350–500 मिलियन लोगों (वैश्विक जनसंख्या का लगभग 6%) का समर्थन करते हैं, जिनमें 10 मेगासिटी शामिल हैं।

प्रभावित प्रमुख भारतीय डेल्टा

  • गंगा-ब्रह्मपुत्र (बांग्लादेश के साथ साझा): 90% से अधिक क्षेत्र में व्यापक अवतलन; कोलकाता विशेष रूप से अवतलित हो रहा है।
  • ब्रह्मणी: सबसे तेजी से धँसने वाले डेल्टाओं में से एक; 77% क्षेत्र अवतलित हो रहा है, बड़े हिस्सों में >5 मिमी./वर्ष।
  • महानदी: सबसे तेजी से धँसने वाले क्षेत्रों में शामिल; 69% क्षेत्र अवतलित हो रहा है, बड़े हिस्सों में >5 मिमी./वर्ष।
  • गोदावरी: अत्यधिक अवतलन, कुछ हिस्सों में समुद्र-स्तर वृद्धि से भी तेज।
  • कावेरी और काबिनी: उल्लेखनीय भूमि अवतलन का अनुभव।

डेल्टाओं के धँसने के मुख्य कारण

  • अत्यधिक भूजल दोहन: कई डेल्टाओं में प्रमुख कारण, जिनमें गंगा-ब्रह्मपुत्र और कावेरी शामिल हैं।
    • कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग के लिए पंपिंग, पुनर्भरण की तुलना में तेजी से जलभृतों को खाली करती है, जिससे तलछट अपरिवर्तनीय रूप से संकुचित होती है।
  • अवसाद आपूर्ति में कमी: बाँध, तटबंध और नदी विनियमन प्राकृतिक अवसाद निक्षेप को रोकते हैं (जैसे- महानदी और काबिनी में), जिससे डेल्टा ऊँचे नहीं हो पाते।
  • अन्य कारक: शहरीकरण, भूमि-उपयोग परिवर्तन और जनसंख्या का भार बढ़ाकर अवतलन को तीव्र करते हैं।

भारत ने उच्च-वोल्टेज सुपरकैपेसिटर विकसित किया

भारतीय शोधकर्ताओं ने ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि प्राप्त की है, जिसमें 3.4 वोल्ट पर संचालित होने वाला एक सुपरकैपेसिटर विकसित किया गया है, जो पारंपरिक 2.5–3.0 वोल्ट सीमा से भी अधिक है।

संबंधित तथ्य

  • यह ‘नवाचार पाउडर धातुकर्म और नवीन सामग्री के लिए अंतरराष्ट्रीय उन्नत अनुसंधान केंद्र’ (ARCI) द्वारा विकसित किया गया है।
    • यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान है।
  • केमिकल इंजीनियरिंग जर्नल में प्रकाशित यह शोध, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की तकनीकी अनुसंधान केंद्र पहल द्वारा समर्थित था।
  • यह विद्युत वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों, ग्रिड भंडारण और पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए बेहतर प्रदर्शन का वादा करता है।

ARCI उच्च-वोल्टेज सुपरकैपेसिटर के बारे में

  • रिकॉर्ड उच्च परिचालन वोल्टेज: 3.4 वोल्ट पर सुरक्षित संचालन, पारंपरिक 2.5–3.0 वोल्ट सीमा को पार करते हुए, प्रति सेल अधिक ऊर्जा भंडारण सक्षम करता है।
  • उत्कृष्ट प्रदर्शन एवं स्थायित्व: 33% अधिक ऊर्जा घनत्व, 17,000 वाट/किलोग्राम तक शक्ति घनत्व, तथा 15,000 चक्रों के बाद 96% क्षमता संरक्षण।
  • उन्नत PGCN इलेक्ट्रोड प्रौद्योगिकी: जल-प्रतिरोधी और इलेक्ट्रोलाइट-अनुकूल गुणों वाले छिद्रयुक्त ग्राफीन कार्बन नैनो इलेक्ट्रोड का उपयोग, जो स्थिर उच्च-वोल्टेज संचालन सुनिश्चित करता है।
  • व्यापक अनुप्रयोग एवं रणनीतिक प्रभाव: विद्युत वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियाँ, ग्रिड भंडारण और पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए उपयुक्त, भारत के स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता लक्ष्यों को समर्थन।

सुपरकैपेसिटर क्या हैं?

  • सुपरकैपेसिटर ऊर्जा भंडारण उपकरण हैं, जो बैटरियों की तुलना में विद्युत ऊर्जा को बहुत तीव्रता से संचित और मुक्त करते हैं, साथ ही लंबा चक्र जीवन प्रदान करते हैं।
  • ये तीव्र शक्ति आपूर्ति की आवश्यकता वाले अनुप्रयोगों (विद्युत वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रिड स्थिरीकरण) के लिए आदर्श हैं, किंतु बैटरियों की तुलना में कम ऊर्जा घनत्व की सीमा रखते हैं।
  • बैटरियों के विपरीत (जो रासायनिक अभिक्रियाओं के माध्यम से ऊर्जा संगृहीत करती हैं), सुपरकैपेसिटर मुख्यतः निम्न माध्यम से ऊर्जा संगृहीत करते हैं:
    • इलेक्ट्रोड-इलेक्ट्रोलाइट इंटरफेस पर विद्युत स्थैतिक आवेश संचय।
    • इससे एक द्विस्तरीय विद्युत परत का निर्माण होता है, जो तीव्र आवेश और निर्वहन को सक्षम बनाती है।

पंचम डिजिटल चैटबॉट

पंचायती राज मंत्रालय ने पूरे भारत में ग्राम पंचायतों का कार्य आसान बनाने के लिए पंचम चैटबॉट लॉन्च किया है।

पंचम डिजिटल चैटबॉट के बारे में

  • पूर्ण रूप: पंचम का अर्थ है पंचायत सहायता और संदेश चैटबॉट।
  • लॉन्चकर्ता: पंचायती राज मंत्रालय और यूनिसेफ के सहयोग से विकसित।
  • प्लेटफॉर्म: व्हाट्सऐप-आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता चैटबॉट।
  • मुख्य उद्देश्य: पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों (जैसे- सरपंच, वार्ड सदस्य), अधिकारियों और जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मियों के लिए एक डिजिटल सहयोगी के रूप में कार्य करता है।
  • उद्देश्य: उत्तरदायी, पारदर्शी और जवाबदेह जमीनी शासन को सशक्त बनाना, ग्रामीण स्थानीय निकायों को सक्षम करना, सेवा वितरण में सुधार करना और गाँव स्तर पर सूचना उपलब्ध कराना।
  • मुख्य विशेषताएँ और लाभ
    • द्वि-दिशात्मक संचार: प्रतिनिधि प्रश्न पूछ सकते हैं और प्रतिक्रिया भेज सकते हैं; मंत्रालय अपडेट प्रसारित कर सकता है।
    • 22 भारतीय भाषाएँ: बहुभाषी समर्थन के लिए भाषिणी मंच के साथ एकीकृत।
    • अभिव्यक्ति और पाठ मार्गदर्शन: योजनाओं और कार्य प्रणालियों पर संदर्भ-आधारित सहायता एवं वास्तविक समय की जानकारी प्रदान करता है।
    • प्रशिक्षण सहायता: शासन से जुड़े कार्यों पर लघु वीडियो और मार्गदर्शन मॉड्यूल भेजता है।
    • प्रत्यक्ष आधिकारिक अपडेट: परिपत्र, परामर्श और नीतिगत संदेश स्पष्ट और शीघ्रता से प्रदान किए जाते हैं।

गुजरात में बाघ

33 वर्षों के बाद, रतनमहल–जाम्बुघोड़ा वन गलियारे में रॉयल बंगाल टाइगर की उपस्थिति के साथ गुजरात ने पुनः अपना ‘टाइगर स्टेट’ का दर्जा प्राप्त किया है।

  • रतनमहल–जाम्बुघोड़ा वन गलियारा मध्य गुजरात में एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण पारिस्थितिकिी संपर्क बिंदु है, जो रतनमहल स्लॉथ भालू अभयारण्य (दाहोद) और जाम्बुघोड़ा वन्यजीव अभयारण्य (पंचमहल) को जोड़ता है।
  • यह 30–60 किलोमीटर लंबा गलियारा स्लॉथ बीयर्स, तेंदुओं और अन्य वन्यजीवों को संरक्षित आवासों के बीच आवागमन की सुविधा देता है, जो विखंडित परिदृश्य में उनके अस्तित्व के लिए आवश्यक है।

गुजरात में बाघ आबादी को समर्थन देने के प्रयास

  • शिकार संसाधन को सुदृढ़ करना: गुजरात ने जाम्बुघोड़ा के निकट एक शाकाहारी प्रजनन केंद्र स्थापित किया है, जहाँ चीतल और साँभर का प्रजनन कर उन्हें छोड़ा जा रहा है, जिससे पर्याप्त शिकार उपलब्ध हो सके और मानव–बाघ संघर्ष में कमी आए।
  • आवास प्रबंधन एवं निगरानी: सघन वन गलियारे, जलस्रोत, प्राकृतिक गुफाएँ तथा निरंतर कैमरा-ट्रैप निगरानी को बनाए रखा जा रहा है, ताकि बाघों की आवाजाही और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
  • दीर्घकालिक जनसंख्या योजना: राज्य ने एक व्यवहार्य प्रजनन आबादी स्थापित करने के उद्देश्य से मादा बाघ के परिचय हेतु राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से संपर्क किया है।

जाम्बुघोड़ा वन्यजीव अभयारण्य

  • जाम्बुघोड़ा वन्यजीव अभयारण्य गुजरात के मध्य भाग के पंचमहल जिले में स्थित है और यह पारिस्थितिकी रूप से समृद्ध रतनमहल–कांजेता–केवड़ी वन गलियारे का हिस्सा है।
  • पारिस्थितिकी महत्त्व
    • यह सागौन, बाँस और महुआ के वनों, पहाड़ी भू-भाग तथा कड़ा बाँध जैसे जलाशयों द्वारा विशेषीकृत है।
    • यह तेंदुए, स्लॉथ बीयर, नीलगाय, जंगली सूअर तथा अब बाघ जैसे विविध जीवों को आश्रय प्रदान करता है।
  • संरक्षण पहल
    • जलस्रोतों का विकास, फलदार वृक्षारोपण तथा प्राकृतिक आश्रयों का निर्माण।
    • सड़क पारगमन और आवास विखंडन जैसे खतरों को कम करने हेतु उपाय।

रतनमहल वन्यजीव अभयारण्य के बारे में

  • रतनमहल वन्यजीव अभयारण्य अपने सघन वनों, दुर्गम भू-भाग और स्लॉथ भालुओं की उच्च सघनता के कारण पारिस्थितिकी रूप से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, जिससे यह गुजरात का एक प्रमुख वन्यजीव आवास बनता है।
  • अवस्थिति: यह अभयारण्य मध्य गुजरात के दाहोद जिले में, बड़िया और छोटा उदेपुर के समीप, गुजरात–मध्य प्रदेश सीमा के साथ स्थित है।
  • वनस्पतियाँ: इसमें तलहटी क्षेत्रों में शुष्क सागौन वन, मिश्रित पर्णपाती वन, शुष्क बाँस क्षेत्र तथा तिमरू और सदड़ वृक्ष शामिल हैं।
  • वन्यजीव: रतनमहल में गुजरात की सबसे बड़ी स्लॉथ बियर आबादी पाई जाती है और यह तेंदुओं की भी पर्याप्त संख्या को समर्थन प्रदान करता है।
  • केंद्रीय संरक्षण: प्रचुर मात्रा में महुआ और जामुन के वृक्ष महत्त्वपूर्ण खाद्य संसाधन उपलब्ध कराते हैं, जिससे यह अभयारण्य स्लॉथ बीयर के व्यवहार के अध्ययन के लिए आदर्श बनता है।
  • पारिस्थितिकी महत्त्व: ये वन पनम नदी के जलग्रहण क्षेत्र का निर्माण करते हैं, जो मध्य गुजरात में जल संरक्षण और सिंचाई आवश्यकताओं का समर्थन करता है।
    बाघ की निरंतर उपस्थिति गुजरात में आवास गुणवत्ता में सुधार को दर्शाती है और पारंपरिक बाघ अभयारण्यों से परे परिदृश्य-स्तरीय संरक्षण में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि को चिह्नित करती है।

ग्रीन हाइड्रोजन हब 

भारत स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और समुद्री डी-कार्बोनाइजेशन को समर्थन देने के लिए राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत काँडला पोर्ट पर एक ग्रीन हाइड्रोजन हब विकसित कर रहा है।

‘ग्रीन हाइड्रोजन हब’ के बारे में

  • ग्रीन हाइड्रोजन हब एक स्थानीयकृत, एकीकृत पारितंत्र है, जो लागत कम करने और औद्योगिक डी-कार्बोनाइजेशन को तेज करने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण, वितरण और अंतिम उपयोग को एक साथ जोड़ता है।
    • ग्रीन हाइड्रोजन को वह हाइड्रोजन माना जाता है, जो नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग कर इलेक्ट्रोलिसिस के माध्यम से या बायोमास रूपांतरण द्वारा उत्पादित की जाती है, जिसमें ‘वेल-टू-गेट’ उत्सर्जन सीमा 1 किलोग्राम हाइड्रोजन पर 2 किलोग्राम CO₂ समतुल्य से अधिक नहीं होती।
    • इस सीमा में जल उपचार, इलेक्ट्रोलिसिस, गैस शुद्धिकरण, सुखाने और संपीडन शामिल हैं तथा निगरानी के लिए ऊर्जा दक्षता ब्यूरो को नोडल प्राधिकरण बनाया गया है।
  • स्थान: प्रस्तावित हब का विकास दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण, काँडला, गुजरात में किया जाएगा, जहाँ बड़े पैमाने पर उत्पादन, घरेलू उपयोग और ग्रीन हाइड्रोजन व उसके व्युत्पन्नों के निर्यात के लिए बंदरगाह अवसंरचना का उपयोग किया जाएगा।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • इंटीग्रेटेड ग्रीन मॉलिक्यूल्स इकोसिस्टम: नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग कर ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन मेथनॉल और ग्रीन अमोनिया का उत्पादन।
    • बंदरगाह-नेतृत्व आधारित अवसंरचना: परिवहन और हैंडलिंग लागत कम करने के लिए मौजूदा बंदरगाह लॉजिस्टिक्स, गहरे समुद्र में कनेक्टिविटी और भंडारण सुविधाओं का उपयोग।
    • सार्वजनिक–उद्योग सहयोग: पारंपरिक से ग्रीन मेथेनॉल उत्पादन की ओर संक्रमण के लिए दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण और असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड के बीच साझेदारी।
  • महत्त्व
    • ऊर्जा संक्रमण और जलवायु लक्ष्य: 5 मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के भारत के लक्ष्य और वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन प्राप्त करने के लक्ष्य को समर्थन।
    • समुद्री डी-कार्बोनाइजेशन: वैकल्पिक समुद्री ईंधनों को अपनाने में सहायता, हरित सागर–ग्रीन पोर्ट दिशा-निर्देशों के अनुरूप तथा बंदरगाहों और शिपिंग से उत्सर्जन में कमी।
    • आर्थिक और रणनीतिक लाभ: बंदरगाह-आधारित औद्योगिकीकरण को बढ़ावा, जीवाश्म ईंधन आयात में कमी, आत्मनिर्भर भारत को सुदृढ़ करना और भारत को ग्रीन ईंधन व व्यापार के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना।

काँडला हाइड्रोजन हब बंदरगाह-केंद्रित स्वच्छ ऊर्जा पारितंत्र की दिशा में एक रणनीतिक परिवर्तन को दर्शाता है, जो भारत की हरित विकास राह में उद्योग, लॉजिस्टिक्स और सततता का एकीकरण करता है।

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