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संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal February 02, 2026 03:30 15 0

ग्रीन स्टील

 

भारत अत्यधिक महत्त्वाकांक्षी ‘नेशनल डिटरमाइंड कंट्रीब्यूशंस’ (NDCs) की योजना बना रहा है, जिससे स्टील जैसे क्षेत्रों में ‘कार्बन उत्सर्जन को कम करने’ या  डीकार्बोनाइजेशन (Decarbonisation) जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति और दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने हेतु  केंद्रीय महत्त्व का बन गया है।

भारत में स्टील उत्पादन के बारे में

  • उत्पादन स्तर: भारत वार्षिक लगभग 125 मिलियन टन स्टील का उत्पादन करता है; अवसंरचना और औद्योगिक वृद्धि को समर्थन देने के लिए मध्य-शताब्दी तक माँग 400 मिलियन टन से अधिक होने का अनुमान है।
  • आर्थिक भूमिका: स्टील GDP वृद्धि, रोजगार और अवसंरचना विकास का एक प्रमुख प्रेरक है।
  • कार्बन योगदान: स्टील क्षेत्र भारत के कुल कार्बन उत्सर्जन में लगभग 12% का योगदान देता है, मुख्यतः कोयला-आधारित ब्लास्ट फर्नेस मार्गों के कारण।
  • जलवायु चुनौती: कोयला-प्रधान प्रौद्योगिकियों में निरंतर निवेश से ‘कार्बन लॉक-इन’, आर्थिक अक्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता में कमी का जोखिम है।
  • ग्रीन स्टील की आवश्यकता: ‘लो-कार्बन स्टील’ की ओर संक्रमण भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने, भविष्य की व्यापार बाधाओं (जैसे- ईयू CBAM) से बचने और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्द्धी बने रहने के लिए आवश्यक है।

ग्रीन स्टील के बारे में

  • ग्रीन स्टील से तात्पर्य ऐसे इस्पात से है, जिसका उत्पादन कम-या लगभग शून्य-कार्बन प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके किया जाता है, जैसे-ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, बढ़ा हुआ स्क्रैप रीसाइक्लिंग और कार्बन कैप्चर, न कि कोयला-आधारित प्रक्रियाओं से।
  • भारत में ग्रीन स्टील
    • नीतिगत पहलों में ग्रीनिंग स्टील रोडमैप, ग्रीन स्टील टैक्सोनॉमी (2024), राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, और कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) के तहत कार्बन तीव्रता लक्ष्य शामिल हैं।
    • टाटा स्टील, JSW स्टील, सेल और JSPL जैसी कंपनियाँ हाइड्रोजन उपयोग, नवीकरणीय ऊर्जा और कम-कार्बन उपायों का पायलट परीक्षण कर रही हैं।
  • ग्रीन स्टील के लाभ
    • ग्रीन स्टील कोयला-आधारित प्रक्रियाओं को नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और स्क्रैप रीसाइक्लिंग से प्रतिस्थापित करके CO₂ उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी लाने में सक्षम बनाता है।
    • यह EU के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) जैसे कार्बन करों और व्यापार बाधाओं के विरुद्ध भारतीय उद्योग को भविष्य-सुरक्षित बनाता है।
    • ग्रीन स्टील को अपनाने से प्रीमियम वैश्विक बाजारों तक पहुँच सुधरती है और औद्योगिक वृद्धि भारत के नेट जीरो 2070 लक्ष्य तथा उन्नत NDCs के साथ संरेखित होती है।

वैश्विक परिदृश्य

  • यूरोपीय संघ दो दशकों से अधिक समय से ‘स्टील डीकार्बनाइजेशन’ का अनुसरण कर रहा है, जिसमें CBAM सक्रिय रूप से ‘लो-कार्बन स्टील’ उत्पादन को प्रोत्साहित कर रहा है।
  • चीन कोयले पर निर्भरता घटाने के लिए स्क्रैप-आधारित स्टील निर्माण कर रहा है और हाइड्रोजन-आधारित प्रौद्योगिकियों में निवेश कर रहा है।
  • वैश्विक स्तर पर, ग्रीन स्टील में शुरुआती कदम उठाने वाले लागत, प्रतिष्ठा और बाजार लाभ प्राप्त करते हैं, जिससे भविष्य के औद्योगिक मानक आकार लेते हैं।

भारत के लिए रणनीतिक महत्त्व

ग्रीन स्टील अब वैकल्पिक नहीं बल्कि भारत के जलवायु नेतृत्व के लिए एक रणनीतिक अनिवार्यता है। यह औद्योगिक प्रतिस्पर्द्धात्मकता बनाए रखने, ‘कार्बन लॉक-इन’ से बचने और दीर्घकालिक सतत् आर्थिक वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC)

यूरोपीय संघ (EU) ने ईरान द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की गई घातक कार्रवाई के जवाब में ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को अपनी आतंकवादी सूची में शामिल किया है।

संबंधित तथ्य

  • आतंकवादी सूचीकरण के साथ-साथ, EU ने मानवाधिकार उल्लंघनों, इंटरनेट सेंसरशिप और दमन में शामिल ईरानी अधिकारियों और संस्थाओं पर नए प्रतिबंध लगाए हैं।
  • इन प्रतिबंधों में लक्षित व्यक्तियों/संस्थाओं की परिसंपत्ति फ्रीज और यात्रा प्रतिबंध जैसे उपाय शामिल हैं।

इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बारे में

  • इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC), जिसे सेपाह (Sepah) भी कहा जाता है, ईरान का एक शक्तिशाली वैचारिक सैन्य और सामरिक संगठन है।
  • स्थापना: वर्ष 1979 में ईरानी क्रांति के तुरंत बाद अयातुल्ला रुहोल्लाह खामेनेई  द्वारा स्थापित।
  • उद्देश्य: इस्लामिक गणराज्य और उसके क्रांतिकारी आदर्शों की रक्षा करना।
    • यह ईरान में आंतरिक सुरक्षा और राजनीतिक नियंत्रण का एक प्रमुख साधन है, जिसमें विरोध-प्रदर्शनों और असहमति का दमन भी शामिल है।
    • इसकी बसीज (Basij) मिलिशिया देशव्यापी अशांति को दबाने में केंद्रीय भूमिका निभाती रही है।
  • रिपोर्टिंग: यह सीधे ईरान के सर्वोच्च नेता (वर्तमान में अयातुल्ला अली खामेनेई) को रिपोर्ट करता है।
  • संरचना और शाखाएँ: IRGC एक बहु-सेवा बल है, जिसके पास अपनी समानांतर थलसेना, नौसेना और वायुसेना है।
  • अंतरराष्ट्रीय नामांकन और प्रतिबंध
    • वर्ष 2019 में अमेरिका द्वारा इसे विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) घोषित किया गया था।
    • हालिया EU प्रतिबंध IRGC को EU कानून के तहत इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा जैसे समूहों की श्रेणी में रखता है।

मेघालय के ‘लिविंग रूट ब्रिज’ 

भारत ने मेघालय के ‘लिविंग रूट ब्रिज’ (Living Root Bridges) को वर्ष 2026–27 विश्व धरोहर मूल्यांकन चक्र के तहत यूनेस्को में नामांकित किया है।

मेघालय के ‘लिविंग रूट ब्रिज’ के बारे में

  • स्थान: मेघालय में, मुख्यतः खासी और जयंतिया पहाड़ियों में पाए जाते हैं।
  • ये रबर फिग वृक्ष (Ficus elastica) की हवाई जड़ों को नदियों और नालों के पार मार्गदर्शित कर प्राकृतिक रूप से बनाए गए पुल हैं।
  • सांस्कृतिक परिदृश्य: स्थानीय रूप से “जिंगकियेंग ज्री / ल्यु च्राई” के नाम से जाने जाते हैं, जो एक विशिष्ट जीवित सांस्कृतिक परिदृश्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • जीवित संरचनाएँ: पारंपरिक पुलों के विपरीत, ये जीवित होते हैं, समय के साथ और मजबूत होते जाते हैं, तथा इनकी आयु 100–300 वर्ष तक होती है।
  • स्वदेशी ज्ञान: खासी और जयंतिया जनजातीय समुदायों द्वारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित पारंपरिक पारिस्थितिकी ज्ञान से विकसित और संरक्षित।
  • आध्यात्मिक विश्वास: मेई रामेव (मदर अर्थ) के प्रति श्रद्धा में निहित, जो मानव और प्रकृति के बीच सामंजस्य को दर्शाता है।
  • सततता: जलवायु-लचीले, स्वयं-मरम्मत करने वाले और पर्यावरण-अनुकूल; इनमें कंक्रीट, स्टील या बाहरी सामग्री का उपयोग नहीं होता।
  • सामुदायिक शासन: स्थानीय संस्थाओं और प्रथागत कानूनों के माध्यम से प्रबंधित, जो सामूहिक स्वामित्व और देखभाल सुनिश्चित करते हैं।

कालबेलिया समुदाय

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने राजस्थान में कालबेलिया समुदाय द्वारा अपने मृतकों के लिए नामित कब्रिस्तान की माँग को लेकर किए गए विरोध प्रदर्शन पर स्वतः संज्ञान लिया है।

कालबेलिया समुदाय के बारे में 

  • कालबेलिया राजस्थान की एक घुमंतू जनजाति है।
  • पारंपरिक व्यवसाय: कालबेलिया पारंपरिक रूप से सपेरा थे और सार्वजनिक आयोजनों में सर्पों के साथ प्रदर्शन करने तथा विष के व्यापार से आजीविका का वहन करते थे।
  • इस समुदाय को अन्य नामों से भी जाना जाता है; जैसे—सपेरा, जोगीरा, गट्टिवाला और पूगीवारा।
  • धार्मिक और अंतेष्टि प्रथाएँ: यद्यपि कालबेलिया नाथ परंपरा के हिंदू हैं, वे अपने मृतकों का दाह-संस्कार नहीं करते हैं।
    • इसके बजाय, वे मृतकों को दफनाते हैं और सम्मान के प्रतीक के रूप में कब्र पर भगवान शिव के नंदी बैल की प्रतिमा स्थापित करते हैं।
    • राजस्थान में कालबेलिया समुदाय के लिए अंतेष्टि हेतु भूमि का संघर्ष वर्तमान में एक प्रमुख और निरंतर मुद्दा बना हुआ है।
  • सांस्कृतिक पहचान: सर्पों की गतियों से प्रेरित, जीवंत कालबेलिया लोकनृत्य और संगीत के लिए प्रसिद्ध।
  • यूनेस्को मान्यता: कालबेलिया लोकगीत और नृत्य को वर्ष 2010 में यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया गया था।
  • नृत्य की विशेषताएँ: मुख्यतः महिलाएँ काले रंग की घूमती हुई घेरदार स्कर्ट पहनकर प्रस्तुति देती हैं, जिन पर जटिल कढ़ाई और चाँदी के आभूषण होते हैं।

विश्व परमाणु प्रदर्शन रिपोर्ट, 2025

विश्व परमाणु प्रदर्शन रिपोर्ट 2025 में वर्ष 2024 में रिकॉर्ड 2667 टेरावाट-घंटा परमाणु विद्युत उत्पादन का उल्लेख किया गया है, जो वर्ष 2050 तक वैश्विक परमाणु क्षमता को तीन गुना करने की माँग को और बल प्रदान करता है।

विश्व परमाणु प्रदर्शन रिपोर्ट, 2025

  • विश्व परमाणु प्रदर्शन रिपोर्ट 2025 वैश्विक परमाणु बिजली उत्पादन, रिएक्टर प्रदर्शन, क्षमता प्रवृत्तियों और निर्माण दृष्टिकोण का व्यापक मूल्यांकन प्रदान करती है।
  • प्रकाशन: यह रिपोर्ट विश्व परमाणु संघ (World Nuclear Association – WNA) द्वारा प्रकाशित की जाती है।
  • उद्देश्य: यह परमाणु ऊर्जा की भूमिका का मूल्यांकन करती है, विशेषकर ऊर्जा सुरक्षा, डीकार्बनाइजेशन और बढ़ती विद्युत माँग के संदर्भ में, जिसमें विद्युतीकरण, डेटा सेंटर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से प्रेरित वृद्धि शामिल है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • रिकॉर्ड परमाणु उत्पादन: वैश्विक परमाणु रिएक्टरों ने वर्ष 2024 में 2667 टेरावाट-घंटा (TWh) विद्युत उत्पादन किया, जिससे 2006 का पूर्व रिकॉर्ड टूट गया। यह प्रदर्शन लगभग 83% उच्च औसत क्षमता गुणांक के कारण संभव हुआ।
    • किसी विद्युत संंयंत्र का क्षमता गुणांक किसी विद्युत संयंत्र की उस विशिष्ट अवधि में वास्तविक ऊर्जा उत्पादन और उस संभावित उत्पादन के अनुपात को कहते हैं, जो संयंत्र अपनी पूर्ण ‘नेमप्लेट’ क्षमता (nameplate capacity) पर लगातार 24/7 संचालन के दौरान उत्पन्न कर सकता था।
  • तेजी से विस्तार की आवश्यकता: वर्ष 2050 तक परमाणु उत्पादन को तीन गुना करने के लिए, वार्षिक क्षमता वृद्धि में तीव्र वृद्धि की आवश्यकता है, जो वर्तमान निर्माण दरों से कहीं अधिक होनी चाहिए और यह 1980 के दशक के बराबर या उससे भी अधिक हो सकती है।
  • रिएक्टरों की आयु को 60–80 वर्षों तक बढ़ाना बड़े पैमाने पर निम्न-कार्बन विद्युत सुनिश्चित करने के सबसे लागत-कुशल तरीकों में से एक के रूप में पहचाना गया है, जिससे यह समय से पहले बंद होने से बचा जा सकता है।

वैश्विक परमाणु विकास में भारत की स्थिति

  • वैश्विक अग्रणी देशों में: भारत को चीन, फ्राँस, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ उन पाँच देशों में शामिल किया गया है, जो मिलकर वर्ष 2050 तक लगभग 980 गीगावाट विद्युत (GWe) वैश्विक परमाणु क्षमता में योगदान कर सकते हैं।
  • डीकार्बनाइजेशन में रणनीतिक भूमिका: भारत का समावेश इसके लगातार परमाणु रिएक्टर बेड़े के विस्तार की अपेक्षाओं को दर्शाता है, जिससे परमाणु ऊर्जा को दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और निम्न-कार्बन संक्रमण रणनीति के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि वर्ष 2050 तक वैश्विक परमाणु क्षमता को तीन गुना करना संभव है, लेकिन इसके लिए नीतिगत स्पष्टता, तेज निर्माण कार्य, वित्तीय सुधार और अंतरराष्ट्रीय समन्वय की आवश्यकता होगी।

विश्व परमाणु संघ (World Nuclear Association)

  • विश्व परमाणु संघ (WNA) की स्थापना वर्ष 2001 में हुई थी तथा इसका मुख्यालय लंदन में स्थित है।
    • यह एक अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक संगठन है, जो वैश्विक नागरिक परमाणु क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है।
  • लक्ष्य और उद्देश्य: WNA परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण और सतत् उपयोग को सुगम बनाने, परमाणु ऊर्जा की जानकारीपूर्ण समझ को बढ़ावा देने और जलवायु परिवर्तन शमन एवं ऊर्जा सुरक्षा में इसकी भूमिका की वकालत करने के लिए काम करता है।
  • कार्य: यह संगठन प्रामाणिक डेटा और रिपोर्ट प्रकाशित करता है, उद्योग की सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को विकसित करता है, प्रमुख वैश्विक मंचों पर परमाणु हितों का प्रतिनिधित्व करता है और सुरक्षा, संरक्षा और अर्थशास्त्र पर सहयोग को बढ़ावा देता है।
  • सदस्यता: इसके सदस्य संपूर्ण परमाणु ईंधन चक्र में विस्तृत हैं और सामूहिक रूप से वैश्विक परमाणु ऊर्जा उत्पादन का लगभग 70% हिस्सा हैं, जो दुनिया भर की अग्रणी कंपनियों और हितधारकों को एक साथ लाते हैं।

धन धन श्री गुरु हर राय साहिब जी

केंद्रीय गृह मंत्री ने धन धन श्री गुरु हर राय साहिब जी के प्रकाश पर्व पर शुभकामनाएँ दीं और उनके करुणा, सेवा तथा समानता के आदर्शों को स्मरण किया।

धन धन श्री गुरु हर राय साहिब जी (1630–1661) के बारे में

  • सिखों के सातवें गुरु धन धन श्री गुरु हर राय साहिब जी ने 1644 से 1661 तक सिख पंथ का नेतृत्व किया।
  • उन्हें “कोमल हृदय वाले गुरु” के रूप में श्रद्धा से स्मरण किया जाता है, क्योंकि उन्होंने मीरी-पीरी की परंपरा को निभाते हुए शांति, उपचार और मानवीय सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
    • मीरी-पीरी की परंपरा, छठे सिख गुरु गुरु हरगोबिंद साहिब जी (1606) द्वारा प्रारंभ की गई थी, जो आध्यात्मिक अधिकार (पीरी) और लौकिक या सांसारिक शक्ति (मीरी) के अविभाज्य समन्वय को प्रदर्शित करती है।

मुख्य योगदान

  • करुणा और सामाजिक सेवा: उन्होंने लंगर और संगत की संस्थाओं को सुदृढ़ किया ताकि जाति, वर्ग और समुदाय की परवाह किए बिना सभी को सम्मान तथा देखभाल प्राप्त हो सके। उन्होंने अस्पताल और औषधालय स्थापित किए, जहाँ जड़ी बूटियाँ और औषधियों द्वारा नि:शुल्क उपचार प्रदान किया जाता था।
  • पर्यावरणीय चेतना: पर्यावरणीय संवेदनशीलता के अग्रदूत के रूप में उन्होंने कीरतपुर साहिब में बागों का विकास किया और वन्यजीवों की रक्षा की, जो प्रकृति के साथ सिखों की समरसता के मूल्यों को दर्शाता है।
  • सिख-मुगल संबंध: यद्दपि उन्होंने लगभग 2,200 घुड़सवारों की एक अनुशासित सेना बनाए रखी, परंतु संघर्ष से परहेज किया।
    • दारा शिकोह को उनकी चिकित्सा सहायता राजनीतिक मतभेदों से परे करुणा का प्रतीक थी।
  • सिख धर्म का विस्तार: उन्होंने 360 मिशनरी केंद्रों (मंजी) की स्थापना करके और गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं का पूरे पंजाब में प्रचार करके सिख धर्म का विस्तार किया।

विरासत: गुरु हर राय साहिब जी का जीवन निस्वार्थ सेवा, समानता, पर्यावरणीय नैतिकता और नैतिक साहस को प्रेरित करता रहता है, और सिख दर्शन तथा भारतीय इतिहास पर एक अमिट छाप छोड़ता है।

भारत-अरब लीग विदेश मंत्रियों की बैठक

हाल ही में भारत ने नई दिल्ली में दूसरे भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी की, जिसमें अरब जगत के साथ रणनीतिक जुड़ाव की पुष्टि की गई।

भारत-अरब लीग विदेश मंत्रियों की बैठक

  • दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक नई दिल्ली में आयोजित की गई, जिसमें अरब देशों के विदेश मंत्रियों, अरब लीग के महासचिव और वरिष्ठ अरब प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया।
  • उद्देश्य: व्यापार, निवेश, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा में भारत-अरब सहयोग को गहरा करना। इसने क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा के लिए एक मंच भी प्रदान किया।
  • महत्त्व: इस संवाद ने पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया, फिलिस्तीन और गाजा में शांति प्रयासों के लिए समर्थन की पुष्टि की तथा आर्थिक सहयोग एवं साझा सुरक्षा चिंताओं पर सहमति को उजागर किया।

अरब लीग (अरब राज्यों का संघ) के बारे में

  • अरब लीग की स्थापना 22 मार्च, 1945 को मिस्र के काहिरा शहर में अरब देशों के मध्य एकता तथा सहयोग को बढ़ावा देने के लिए की गई थी।
  • सदस्यता: इसमें पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका के 22 सदस्य देश शामिल हैं।
    • मिस्र, इराक, जॉर्डन, लेबनान, सऊदी अरब, सीरिया, लीबिया, ट्यूनीशिया, अल्जीरिया, बहरीन, कोमोरोस, जिबूती, कुवैत, मॉरिटानिया, मोरक्को, ओमान, फिलिस्तीन, कतर, सोमालिया, सूडान, संयुक्त अरब अमीरात और यमन।
  • उद्देश्य: लीग की संप्रभुता की रक्षा करना, राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देना तथा कूटनीति के माध्यम से क्षेत्रीय विवादों का समाधान करना है।
  • भारत-अरब लीग की सहभागिता: अरब-भारत सहयोग मंच (AICF) की स्थापना वर्ष 2008 में हुई थी, जिसकी पहली मंत्रिस्तरीय बैठक वर्ष 2016 में बहरीन के मनामा में आयोजित की गई थी, जिसने भारत-अरब संवाद को संस्थागत रूप दिया।

राष्ट्रीय कुष्ठ रोग दिवस

राष्ट्रीय कुष्ठ रोग दिवस 2026 के अवसर  पर, केंद्रीय कुष्ठ रोग प्रभाग ने जागरूकता, शीघ्र पहचान और इससे जुड़े कलंक में कमी को प्रोत्साहित करने के लिए दिल्ली हाट में एक सूचना, शिक्षा एवं संचार (Information, Education and Communication – IEC) आउटरीच कार्यक्रम का आयोजन किया।

राष्ट्रीय कुष्ठ रोग दिवस के बारे में

  • राष्ट्रीय कुष्ठ रोग दिवस भारत में प्रतिवर्ष 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि और कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों के लिए उनके आजीवन प्रयासों की स्मृति में मनाया जाता है।
  • उद्देश्य: इस दिवस का उद्देश्य जन जागरूकता बढ़ाना, शीघ्र निदान और पूर्ण उपचार को बढ़ावा देना तथा कुष्ठ रोग से जुड़े कलंक और भेदभाव को समाप्त करना है।
    • यह राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NLEP) के तहत वर्ष 2027 तक “कुष्ठ रोग मुक्त भारत” प्राप्त करने की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को भी सुदृढ़ करता है।
  •  प्रमुख गतिविधियाँ (2026): व्यवहार परिवर्तन और सामाजिक समावेश को प्रोत्साहित करने के लिए IEC अभियान, नुक्कड़ नाटक, आत्म-परीक्षण पहल, सामुदायिक प्रतिज्ञाएँ और शैक्षिक सामग्री का वितरण किया गया।

कुष्ठ रोग (हैनसेन रोग) के बारे में 

  • कुष्ठ रोग एक दीर्घकालिक संक्रामक रोग है, जो माइकोबैक्टीरियम लेप्री (Mycobacterium leprae) जीवाणु के कारण होता है और मुख्य रूप से त्वचा, परिधीय तंत्रिकाओं, आँखों तथा ऊपरी श्वसन पथ को प्रभावित करता है।
    • शीघ्र पहचान, संपर्क व्यक्तियों की जाँच तथा कुष्ठ रोग निवारण प्रमुख रोकथाम रणनीतियाँ हैं।
  • उपचार: कुष्ठ रोग पूर्णतः उपचार योग्य है और इसका इलाज मल्टी-ड्रग थैरेपी (Multi-Drug Therapy – MDT) से किया जाता है, जिसमें डैप्सोन, रिफैम्पिसिन और क्लोफैजिमिन शामिल हैं, जिन्हें विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निःशुल्क प्रदान किया जाता है।

विश्व कुष्ठ रोग दिवस

  • विश्व कुष्ठ रोग दिवस जनवरी के अंतिम रविवार को विश्व स्तर पर मनाया जाता है ताकि कुष्ठ रोग को एक उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (NTD) के रूप में उजागर किया जा सके।
  • थीम (2026): “लेप्रोसी इज क्योरबल, द रियल चैलेंज इज स्टिग्मा”।
  • वैश्विक महत्त्व: कई देशों में राष्ट्रीय स्तर पर उन्मूलन के बावजूद, प्रति वर्ष दो लाख से अधिक नए मामले सतत् वैश्विक कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।

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