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समाचार संक्षेप में

Lokesh Pal February 05, 2026 04:44 8 0

अभ्यास खंजर

भारत और किर्गिस्तान के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास खंजर का 13वाँ संस्करण (KHANJAR-XIII) शुरू हो गया है।

अभ्यास खंजर के बारे में

  • शुरुआत: यह 2011 में शुरू किया एक वार्षिक अभ्यास है, जो बारी-बारी से दोनों देशों में आयोजित किया जाता है।
  • स्थान: अभ्यास खंजर का 13वाँ संस्करण मिसामारी, असम में आयोजित किया जा रहा है।
  • प्रतिभागी बल: इसमें दोनों देशों की विशिष्ट ‘स्पेशल फोर्सेज’ इकाइयाँ – भारत की ओर से पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्सेज) और किर्गिस्तान की ओर से स्कॉर्पियन ब्रिगेड शामिल हैं।
  • प्राथमिक उद्देश्य: इसका उद्देश्य दोनों देशों के विशेष बलों के बीच अंतःक्रियाशीलता को बढ़ाना है।
    • यह अभ्यास संयुक्त राष्ट्र के जनादेश के तहत शहरी युद्ध और आतंकवाद विरोधी परिदृश्यों में संयुक्त अभियानों पर केंद्रित है।
  • व्यापक उद्देश्य: द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को मजबूत करना, स्थायी सैन्य साझेदारी को गहरा करना और क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा के लिए भारत और किर्गिस्तान के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों को प्रतिबिंबित करना।
  • पिछला संस्करण: इसका 12वाँ संस्करण मार्च 2025 में तोकमोक (Tokmok), किर्गिस्तान में आयोजित किया गया था।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने स्पष्ट किया कि हाल ही में घोषित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में संवेदनशील कृषि वस्तुओं एवं डेयरी उत्पादों को बाहर रखा जाएगा।

मुख्य बिंदु

  • टैरिफ में कटौती: अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर अपने 25% के पारस्परिक शुल्क (Reciprocal tariffs) को घटाकर 18% करने पर सहमत हो गया है। साथ ही, रूसी तेल आयात करने के कारण भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25% दंडात्मक शुल्क (penalty tariffs) को भी हटा दिया गया है।
  • तुलनात्मक लाभ: संशोधित टैरिफ दर भारत को वियतनाम, बांग्लादेश, पाकिस्तान और कई दक्षिण-पूर्वी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं (जिन पर 19% टैरिफ है) की तुलना में बढ़त दिलाती है, जबकि यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, जापान और दक्षिण कोरिया पर 10-15% की कम दरें लागू हैं।

भारत-अमेरिका व्यापार संबंध

  • द्विपक्षीय व्यापार (FY25): वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड 132.2 बिलियन डॉलर रहा, जो वित्त वर्ष 2023-24 में 119.71 बिलियन डॉलर था।
  • व्यापार संतुलन: वित्त वर्ष 2024-25 में अमेरिका के साथ भारत का व्यापार अधिशेष 40.82 बिलियन डॉलर था।
  • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI): अमेरिका, भारत में तीसरा सबसे बड़ा निवेशक है, जिसमें अप्रैल 2000 से मार्च 2025 तक कुल 70.65 बिलियन डॉलर का FDI प्रवाह हुआ है।
  • भारत से अमेरिका को होने वाले प्रमुख निर्यात
    • भारत का अमेरिका को निर्यात वित्त वर्ष 2023-24 के 77.51 बिलियन डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 86.51 बिलियन डॉलर हो गया।
    • भारत के निर्यात में मुख्य रूप से विद्युत मशीनरी, कीमती और अर्द्ध-कीमती पत्थर एवं धातु, फार्मास्युटिकल उत्पाद (दवाएँ), मशीनरी एवं यांत्रिक उपकरण, खनिज ईंधन तथा लोहे एवं इस्पात की वस्तुएँ शामिल थीं।
  • भारत द्वारा अमेरिका से होने वाले प्रमुख आयात
    • अमेरिका से भारत का आयात वित्त वर्ष 2023-24 के 42.19 बिलियन डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 45.69 बिलियन डॉलर हो गया।
    • भारत का आयात मुख्य रूप से खनिज ईंधन एवं तेल, कीमती पत्थर एवं धातु, परमाणु रिएक्टर तथा मशीनरी एवं विद्युत उपकरण पर केंद्रित रहे हैं, जो मजबूत ऊर्जा और तकनीकी संबंधों को दर्शाते हैं।
  • शिक्षा और मानव पूँजी संबंध
    • उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका सबसे पसंदीदा गंतव्य बना हुआ है।
    • सितंबर 2023 तक, लगभग 3.2 लाख भारतीय छात्र अमेरिका में अध्ययनरत थे, जिनमें से अधिकांश STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी और गणित) से संबंधित स्नातक कार्यक्रमों में थे।
    • अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, भारतीय छात्र अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सालाना लगभग 7.7 बिलियन डॉलर का योगदान देते हैं।

विश्व कैंसर दिवस 2026

विश्व कैंसर दिवस 2026 पर, भारत एक ओर बढ़ते कैंसर के बोझ का सामना कर रहा है, तथा दूसरी ओर रोकथाम, शीघ्र पहचान, किफायती उपचार और स्वदेशी अनुसंधान पहल को तेजी से बढ़ा रहा है।

विश्व कैंसर दिवस के बारे में

  • विश्व कैंसर दिवस प्रतिवर्ष 4 फरवरी को कैंसर की रोकथाम, शीघ्र निदान और उपचार तक समान पहुँच के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है।
  • उत्पत्ति: इसकी शुरुआत वर्ष 2000 में पेरिस, फ्रांस में आयोजित न्यू मिलेनियम के लिए कैंसर के खिलाफ विश्व शिखर सम्मेलन’ के बाद हुई थी, जिसका नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण संघ (UICC) ने किया था।
  • विषय (Theme): यूनाइटेड बाय यूनिक” (2025-2027 अभियान) यह स्वीकार करते हुए कि प्रत्येक कैंसर यात्रा अलग होती है, रोगी-केंद्रित और व्यक्तिगत कैंसर देखभाल पर जोर देता है।
  • महत्त्व: यह दिन कैंसर से होने वाली मृत्यु दर को कम करने, स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने और सार्वजनिक नीति में कैंसर नियंत्रण को प्राथमिकता देने के लिए विश्व भर की सरकारों, नागरिक समाज और स्वास्थ्य प्रणालियों को एकजुट करता है।

भारत और कैंसर

  • बढ़ता कैंसर बोझ: भारत में सालाना 15 लाख से अधिक नए कैंसर मामले दर्ज किए जाते हैं, जिनके वर्ष 2045 तक बढ़कर 24.5 लाख से अधिक होने का अनुमान है। मध्यम आयु वर्ग और बुजुर्ग आबादी में इसकी घटनाएँ अधिक देखी जाती हैं।
  • सामान्य कैंसर और कारण: स्तन, मुख और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की संभावना सबसे अधिक है। मुख्य कारणों में तंबाकू और शराब का सेवन, अस्वास्थ्यकर आहार, मोटापा और पर्यावरणीय प्रदूषण शामिल हैं।
  • प्रमुख चुनौतियाँ: 75% से अधिक रोगियों में कैंसर का निदान उन्नत चरणों (Advanced stages) में होता है, जो जागरूकता, स्क्रीनिंग और शुरुआती पहचान में कमी को दर्शाता है।
  • सरकारी पहल राष्ट्रीय: कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम (NCCP) को 1975 में शुरू किया गया था और बाद में इसे कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (NPCDCS) में एकीकृत कर दिया गया, जो 2010 से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित है।
    • आयुष्मान भारत-PMJAY: राष्ट्रीय कैंसर ग्रिड और किफायती दवा योजनाएँ उपचार तक पहुँच प्रदान करने के लिए कार्यरत हैं।
    • स्वदेशी नवाचार: CAR-T सेल थेरेपी (NexCAR19) जैसे स्वदेशी नवाचारों का उद्देश्य रोकथाम, उपचार और अनुसंधान को मजबूत करना है।

विश्व कैंसर दिवस 2026 प्रारंभिक पहचान, जीवनशैली में बदलाव और स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने की तात्कालिकता पर जोर देता है क्योंकि भारत तेजी से बढ़ते कैंसर के बोझ से निपटने की तैयारी कर रहा है।

WHO स्वास्थ्य आपातकालीन अपील 2026

हाल ही में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने दानदाताओं के घटते समर्थन और बढ़ते वैश्विक स्वास्थ्य जोखिमों के बीच अपनी स्वास्थ्य आपातकालीन अपील को घटाकर 1 बिलियन डॉलर कर दिया है।

  • वर्ष 2026 की स्वास्थ्य आपातकालीन अपील का उद्देश्य संघर्ष, विस्थापन और आपदाओं के बीच जीवनयापन कर रहे लाखों लोगों को आवश्यक और जीवन रक्षक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए धन जुटाना है।

वित्त पोषण में मुख्य परिवर्तन

  • आपातकालीन अपील में कमी: WHO ने अपनी वर्ष 2026 की स्वास्थ्य आपातकालीन अपील में एक-तिहाई की कटौती कर इसे 1 बिलियन डॉलर कर दिया है, जो स्वैच्छिक दान में कमी और राजकोषीय अनिश्चितता को दर्शाता है।
  • बदलता डोनर परिदृश्य: जनवरी 2026 में अमेरिका के विश्व स्वास्थ्य संगठन से पीछे हटने के  कारणों ने वित्तपोषण की चिंताओं को और गहरा कर दिया है, हालाँकि हालिया आपातकालीन वित्तपोषण के लिए यूरोपीय संघ, जर्मनी और सऊदी अरब पर निर्भरता बढ़ी है।
  • स्थायी वित्त पोषण की ओर कदम: 14वें सामान्य कार्य कार्यक्रम (2025-2028) के तहत, WHO चिह्नित दान (earmarked donations) पर निर्भरता कम करने के लिए निर्धारित योगदान और पुनर्भरण-आधारित वित्त पोषण को प्राथमिकता दे रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के विभिन्न कार्यक्रम

  • पोलियो उन्मूलन: वैश्विक पोलियो उन्मूलन पहल (2022-2026) के माध्यम से, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, यमन और सोमालिया में वायरस के अंतिम भंडारों को लक्षित करते हुए टीकाकरण प्रयास जारी हैं।
  • मलेरिया नियंत्रण और टीकाकरण: ‘हाई बर्डन टू हाई इंपैक्ट’ दृष्टिकोण ने घाना, केन्या और मलावी सहित 24 अफ्रीकी देशों में मलेरिया वैक्सीन के रोलआउट को सक्षम बनाया है।
  • उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (NTDs): प्रगति में “Zero by 30” रेबीज उन्मूलन और गिनी-वॉर्म उन्मूलन शामिल है। मिस्र को मलेरिया मुक्त घोषित किया गया है और सात देशों ने कम-से-कम एक उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारी को समाप्त कर दिया है।
  • टीकाकरण और डिजिटल स्वास्थ्य: टीकाकरण एजेंडा 2030′ खसरा, एचपीवी और टाइफाइड के विरुद्ध कवरेज को मजबूत करता है, जबकि भारत में U-WIN डिजिटल प्लेटफॉर्म वैक्सीन ट्रैकिंग को बेहतर बनाता है।
  • महामारी की तैयारी: महामारी समझौते और संशोधित अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों को अपनाने का उद्देश्य टीकों तक समान पहुँच और त्वरित आपातकालीन प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है।

वित्तपोषण में कमी का प्रभाव

  • स्वास्थ्य प्रणालियों पर दबाव: वित्तपोषण में कटौती ने निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में आवश्यक सेवाओं को बाधित कर दिया है, जबकि अभी भी 4.6 बिलियन लोगों के पास बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है।
  • कार्यबल और क्षमता की कमी: वर्ष 2030 तक दुनिया में 1.1 करोड़ स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की कमी होने का अनुमान है, जो अंतरराष्ट्रीय सहायता में कमी के कारण और भी बदतर हो गई है।
  • बढ़ते वैश्विक स्वास्थ्य जोखिम: कम वित्तपोषण के कारण महामारियों, रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) और जलवायु-जनित रोगों के विरुद्ध तैयारी खतरे में है, जिससे सामूहिक वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा कमजोर हो रही है।

करिमपुझा वन्यजीव अभयारण्य

हाल ही में किए गए एक जीव-जंतु सर्वेक्षण ने केरल के करिमपुझा वन्यजीव अभयारण्य में दर्ज जैव विविधता का विस्तार किया है।

  • यह सर्वेक्षण राज्य वन विभाग द्वारा ‘उष्णकटिबंधीय पारिस्थितिकी एवं अनुसंधान सोसायटी’ (STEAR), नीलांबूर औरत्रावणकोर नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी’ (TNHS), तिरुवनंतपुरम् के सहयोग से आयोजित किया गया था।

सर्वेक्षण के मुख्य निष्कर्ष

  • पक्षी विविधता का विस्तार: सर्वेक्षण में पक्षियों की 171 प्रजातियाँ दर्ज की गईं, जिनमें पहली बार प्रलेखित आठ प्रजातियाँ शामिल हैं। इससे अभयारण्य में पक्षियों की कुल संख्या बढ़कर 247 हो गई है।
  • कीट और ओडोनेट (Odonate) रिकॉर्ड: शोधकर्ताओं ने तितलियों की 177 प्रजातियों और ओडोनेट की 42 प्रजातियों को दर्ज किया। नई शामिल की गई प्रजातियों के साथ, कुल तितली विविधता 223 और ओडोनेट 63 प्रजातियों तक पहुँच गई है।
  • पारिस्थितिकी निरंतरता के प्रमाण: ऊँचाई के अनुसार, तितलियों के प्रवास और हाथियों की बार-बार होने वाली आवाजाही, आवासों के बीच मजबूत जुड़ाव और पारिस्थितिकी अखंडता को उजागर करती है।

करिमपुझा वन्यजीव अभयारण्य के बारे में

  • स्थान: यह केरल के मलप्पुरम जिले में नीलगिरी की पश्चिमी ढलानों पर स्थित है।
    • इसका नाम करिमपुझा नदी के नाम पर रखा गया है, जो चालियार नदी की एक सहायक नदी है।
    • इसे आधिकारिक तौर पर वर्ष 2020 में स्थापित किया गया था।
  • पारिस्थितिकी महत्त्व: 227.21 वर्ग किलोमीटर में विस्तृत यह अभयारण्य नीलगिरी जैवमंडल निचय के भीतर स्थित है और नीलांबूर हाथी अभ्यारण्य का हिस्सा है।
    • यह शांत घाटी राष्ट्रीय उद्यान और मुकुर्थी राष्ट्रीय उद्यान के साथ अपनी सीमाएँ साझा करता है।
  • अद्वितीय स्थलाकृति: इसकी ऊँचाई 40 मीटर से 2,550 मीटर तक है, जिससे यहाँ केरल में पाए जाने वाले सभी सात प्रकार के वन (सदाबहार वर्षावनों से लेकर पर्वतीय घास के मैदानों तक) मौजूद हैं।
  • वनस्पतियाँ एवं वन्यजीव: अभयारण्य में सागौन, शीशम, बाँस, स्थानिक ऑर्किड तथा लुप्तप्राय जीव जैसे नीलगिरी तहर, लायन-टेल्ड मकाक, बाघ, हाथी और मालाबार महसीर पाए जाते हैं।
  • समुदाय: यह चोलनाइकन (Cholanaikan) जनजाति का भी आवास है, जो एक विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) है।

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