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संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal February 09, 2026 03:57 22 0

वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट प्राधिकरण (VOC पोर्ट) पर उन्नत एंटी-ड्रोन सुरक्षा प्रणाली

तमिलनाडु के थूथुकुडी (तूतीकोरिन) में स्थित वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट प्राधिकरण (VOC पोर्ट) उन्नत एंटी-ड्रोन सुरक्षा प्रणाली के कार्यान्वयन की शुरुआत करने वाला भारत का पहला बंदरगाह बन गया है।

एंटी-ड्रोन प्रणाली की प्रमुख विशेषताएँ

  • स्वदेशी रक्षा क्षमता: यह प्रणाली स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-मेजर प्रौद्योगिकी में एक बड़ी प्रगति का प्रतिनिधित्व करती है, जो महत्त्वपूर्ण सुरक्षा अवसंरचना में भारत की आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करती है।
  • एकीकृत प्रौद्योगिकी: यह एक व्यापक, एकीकृत रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) और रडार-आधारित ड्रोन पहचान और जैमिंग प्रणाली है।
  • 360° कवरेज: जटिल बंदरगाह परिवेश के लिए अनुकूलित, यह 360-डिग्री कवरेज और सर्वदिशात्मक बेयरिंग प्रदान करती है।
  • प्रयुक्त घटक: इसमें ड्रोन डिटेक्टर, ड्रोन डिटेक्शन रडार, और मैन-पैक जैमर शामिल हैं।
  • परिचालन सीमा: यह 5 किमी. तक की प्रभावी सीमा के साथ सर्वदिशात्मक कवरेज प्रदान करती है।
  • क्षमताएँ: यह अनधिकृत ड्रोन की वास्तविक समय में पहचान, निगरानी, वर्गीकरण, और निष्क्रियकरण को सक्षम बनाती है।
    • त्वरित तैनाती के लिए डिजाइन की गई है और संवेदनशील परिचालन क्षेत्रों में सुरक्षा को सुदृढ़ करती है।
  • कार्यान्वयन भागीदार: VOC पोर्ट प्राधिकरण और सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (CEL) के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) सहयोग

भारत सरकार ने अपने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI), जिसे इंडिया स्टैक (India Stack) के नाम से भी जाना जाता है, पर सहयोग हेतु 23 देशों के साथ समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं।

DPI सहयोग समझौते

  • उद्देश्य: ये MoUs मुख्य रूप से भारत के डिजिटल शासन प्लेटफॉर्म के साझा करने, प्रतिकृति बनाने और अपनाने पर केंद्रित हैं।
  • फोकस क्षेत्र: सहयोग में डिजिटल पहचान, डिजिटल भुगतान, डेटा विनिमय, और नागरिक-केंद्रित सेवा प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
    • इंडिया स्टैक के घटकों में डिजिटल पहचान के लिए आधार, भुगतान के लिए UPI, दस्तावेज भंडारण के लिए डिजिलॉकर, CoWIN, API सेतु, डेटा विनिमय, और सेवा वितरण प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
  • यह पहल भारत को डिजिटल शासन में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करती है और वित्तीय समावेशन तथा कुशल सार्वजनिक सेवाओं के लिए DPI कूटनीति को बढ़ावा देती है।
  • डिजिलॉकर: क्यूबा, केन्या, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), और लाओ पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक (Lao PDR/LPDR) के साथ विशेष रूप से डिजिलॉकर हेतु MoUs पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
  • व्यापक DPI सहयोग (जिसमें पहचान, भुगतान आदि शामिल हैं) सभी 23 देशों तक विस्तृत है।

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का अंतरराष्ट्रीय विस्तार

  • भारत का प्रमुख यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) अब संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्राँस, मॉरीशस और कतर सहित आठ से अधिक देशों में परिचालित है।
  • यह विस्तार सीमा-पार प्रेषण को समर्थन देता है, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देता है, और वैश्विक फिनटेक पारिस्थितिकी तंत्र में भारत की भूमिका को सुदृढ़ करता है।

‘डीप टेक’ स्टार्ट-अप

केंद्र सरकार ने स्टार्ट-अप इंडिया के अंतर्गत वित्तपोषण, विनियमन, और दीर्घकालीन प्रौद्योगिकी नवाचार का मार्गदर्शन करने हेतु “डीप टेक स्टार्ट-अप्स” को आधिकारिक रूप से परिभाषित किया है।

  • स्टार्ट-अप इंडिया योजना उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) द्वारा संचालित एक प्रमुख पहल है, जिसे वर्ष 2016 में नवाचार को बढ़ावा देने हेतु शुरू किया गया था और यह मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप्स को कर छूट, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) की त्वरित प्रक्रिया, तथा आसान अनुपालन जैसे लाभ प्रदान करती है।

‘डीप टेक’ स्टार्ट-अप के बारे में

  • डीप टेक स्टार्टअप वे कंपनियाँ हैं, जो मुख्यतः नए वैज्ञानिक या इंजीनियरिंग ज्ञान पर आधारित समाधान विकसित करती हैं, जिनमें उच्च अनुसंधान एवं विकास (R&D) तीव्रता, लंबी विकास अवधि, और महत्त्वपूर्ण तकनीकी अनिश्चितता होती है। इनमें प्रायः उल्लेखनीय बौद्धिक संपदा (IP) सृजन तथा उच्च पूँजी, अवसंरचना, और प्रतिभा की आवश्यकता होती है।
  • ऐसे स्टार्ट-अप ₹300 करोड़ की टर्नओवर सीमा के साथ 20 वर्षों तक “स्टार्ट-अप” का दर्जा बनाए रख सकते हैं, जो लंबे व्यावसायीकरण समय-सीमा को दर्शाता है।

डीप टेक क्या है?

  • डीप टेक उन अत्याधुनिक और प्रायः विघटनकारी प्रौद्योगिकियों को संदर्भित करता है, जो गहन वैज्ञानिक खोजों, इंजीनियरिंग नवाचारों, या अनुसंधान क्षेत्रों में प्रगति पर आधारित होती हैं, और जिनमें उद्योगों, अर्थव्यवस्थाओं, तथा जीवन को मूल रूप से परिवर्तित करने की क्षमता होती है।
  • डीप टेक के अनुप्रयोग
    • स्वास्थ्य सेवा: प्रिसीजन मेडिसिन, निदान, चिकित्सा उपकरण
    • कृषि एवं ऊर्जा: जलवायु-सहिष्णु फसलें, नवीकरणीय ऊर्जा समाधान
    • विनिर्माण एवं रक्षा: रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण प्रणालियाँ
    • जलवायु एवं पर्यावरण: कार्बन कैप्चर, जलवायु मॉडलिंग, आपदा पूर्वानुमान, स्मार्ट पर्यावरण निगरानी, और सतत् सामग्री
    • अंतरिक्ष एवं गतिशीलता: उपग्रह प्रौद्योगिकियाँ, पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण प्रणालियाँ, स्वायत्त वाहन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, और उन्नत नेविगेशन प्रणालियाँ
    • डिजिटल एवं कंप्यूटिंग: क्वांटम कंप्यूटिंग, उन्नत AI प्रणालियाँ, साइबर सुरक्षा, उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग, और अगली पीढ़ी के संचार नेटवर्क
    • शहरी अवसंरचना: स्मार्ट सिटी, बुद्धिमान परिवहन प्रणालियाँ, डिजिटल ट्विन्स, और सुदृढ़ अवसंरचना योजना।

महत्व: डीप टेक की एक स्पष्ट परिभाषा लक्षित वित्तपोषण, विनियामक स्पष्टता, और उच्च-प्रभावी प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप्स के लिए दीर्घकालिक समर्थन सक्षम बनाकर भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करती है।

‘न्यू स्टार्ट ट्रीटी’ का विस्तार

‘न्यू स्टार्ट ट्रीटी’ की समाप्ति ने अमेरिका को एक नए, विस्तारित परमाणु हथियार नियंत्रण समझौते की माँग करने के लिए प्रेरित किया है, जिससे वैश्विक परमाणु प्रतिस्पर्द्धा के पुनः उभरने की आशंकाएँ बढ़ गई हैं।

‘न्यू स्टार्ट ट्रीटी’ के बारे में

  • न्यू स्टार्ट (Strategic Arms Reduction Treaty) संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस के बीच अंतिम प्रमुख परमाणु हथियार नियंत्रण समझौता था, जिसका उद्देश्य रणनीतिक स्थिरता बनाए रखना था।
  • समझौता: यह संधि वर्ष 2010 में अमेरिका और रूस द्वारा हस्ताक्षरित की गई थी, जो शीतयुद्ध काल के परमाणु भंडार सीमित करने के प्रयासों को आगे बढ़ाती थी।
  • नवीनीकरण और वैधता: मूल रूप से 10 वर्षों के लिए वैध इस संधि की समय सीमा वर्ष 2021 में एक बार बढ़ाई गई थी और आगे न बढ़ाए जाने के कारण फरवरी 2026 में समाप्त हो गई।
  • मुख्य प्रावधान
    • अमेरिका और रूस दोनों के लिए तैनात परमाणु वारहेड की संख्या 1,550 तक सीमित की गई थी।
    • अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBMs), पनडुब्बी-प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइल (SLBMs), और भारी बमवर्षकों जैसे तैनात वितरण प्रणालियों को सीमित किया गया था।
    • आपसी निरीक्षण, डेटा आदान-प्रदान, और पारदर्शिता उपायों का प्रावधान किया गया था ताकि विश्वास का निर्माण हो सके।

हथियार नियंत्रण पर अमेरिका का नया दृष्टिकोण

  • अमेरिका ने न्यू स्टार्ट के स्थान पर एक नई, आधुनिकीकृत परमाणु संधि का प्रस्ताव रखा है।
  • अमेरिका का कहना है कि चीन को इसमें शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि उसका परमाणु भंडार तेजी से बढ़ रहा है।
  • अमेरिका ने चीन पर गोपनीय परमाणु परीक्षण और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है। साथ ही न्यू स्टार्ट को त्रुटिपूर्ण बताते हुए उसकी आलोचना की है।

‘न्यू स्टार्ट ट्रीटी’ की समाप्ति के संभावित प्रभाव

  • कानूनी सीमाओं के हटने से प्रमुख शक्तियों के बीच अनियंत्रित परमाणु हथियार दौड़ शुरू हो सकती है।
  • पारदर्शिता और निरीक्षण में कमी से रणनीतिक अनिश्चितता और गलत आकलन का जोखिम बढ़ जाता है।
  • वैश्विक परमाणु स्थिरता कमजोर हो सकती है, जिससे दशकों के हथियार नियंत्रण और निरस्त्रीकरण प्रयास कमजोर पड़ सकते हैं।

‘न्यू स्टार्ट ट्रीटी’ का पतन परमाणु शासन में एक महत्त्वपूर्ण मोड़ को दर्शाता है, जो बहुध्रुवीय विश्व में समावेशी और विश्वसनीय हथियार नियंत्रण तंत्र की तत्काल आवश्यकता को उजागर करता है।

शहरी ऊष्मा तनाव

हाल ही में यूनाइटेड किंगडम स्थित एक शोध ने चेतावनी दी है कि भारतीय शहर जलवायु मॉडल अनुमानों की तुलना में 0.5–2°C अधिक गर्म हो सकते हैं, जिसमें छोटे शहरों को असमान रूप से अधिक ऊष्मा तनाव का सामना करना पड़ सकता है।

भारत में तापमान संबंधी रुझान

  • अध्ययन किए गए 18 भारतीय शहर आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक तीव्रता से गर्म हो रहे हैं।
  • औसतन, भारतीय शहर क्षेत्रीय अर्थ सिस्टम मॉडल (ESM) अनुमानों की तुलना में लगभग 45% अधिक गर्म हो रहे हैं।
  • पटियाला जैसे शहरों में अनुमानित तापवृद्धि दोगुनी हो सकती है, जहाँ 2°C की वृद्धि शहरी प्रभावों के कारण लगभग 4°C तक पहुँच सकती है।
    • छोटे और गैर-महानगरीय शहरों को मेगासिटीज की तुलना में अधिक सापेक्ष जोखिम का सामना करना पड़ता है।

शहरी ऊष्मा तनाव 

  • शहरी ऊष्मा तनाव से तात्पर्य शहरों में अनुभव की जाने वाली अत्यधिक गर्मी से है, जो जलवायु परिवर्तन और स्थानीय शहरी विशेषताओं दोनों के कारण होती है और शहरों को निकटवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों से अधिक गर्म बनाती है।

उत्तरदायी कारक

  • शहरी ऊष्मा द्वीप प्रभाव: निर्मित क्षेत्र वनस्पति भूमि की तुलना में अधिक ऊष्मा अवशोषित और संचित करते हैं।
    • शहरों में आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में तापमान अत्यधिक होता है, जहाँ दिन के समय तापमान 1–7°F और रात के समय 2–5°F अधिक रहता है।
  • कम वनस्पति आवरण: कम वाष्पोत्सर्जन शहरों में प्राकृतिक शीतलन को सीमित करता है।
  • अभेद्य सतहें: कंकरीट और डामर ऊष्मा अवशोषण बढ़ाते हैं और नमी धारण क्षमता को कम करते हैं।
  • मॉडल की सीमाएँ: कम-रिजॉल्यूशन आधारित जलवायु मॉडल शहरों को ग्रामीण क्षेत्रों के साथ संयोजित कर देते हैं, जिससे शहरी-विशिष्ट ऊष्मावृद्धि छिप जाती है।

शहरी ऊष्मा तनाव का प्रभाव

  • गर्मी से संबंधित बीमारियों और मृत्यु जोखिम में वृद्धि।
  • जल और बिजली की माँग में वृद्धि, जिससे शीतलन पर सार्वजनिक व्यय बढ़ता है।
  • शहरी जीवन-योग्यता और उत्पादकता में कमी, विशेषकर कमजोर वर्गों के लिए।
  • शहरों और ग्रामीण पिछड़े क्षेत्रों के बीच तापमान अंतर में वृद्धि, जिससे जलवायु असमानता बढ़ती है।

यह अध्ययन भारत में बढ़ते शहरी ऊष्मा जोखिमों से निपटने के लिए शहरी-विशिष्ट जलवायु योजना, बेहतर मॉडलिंग, और ऊष्मा-प्रतिरोधी शहर डिजाइन की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है।

‘अग्नि-3’ मिसाइल

हाल ही में भारत ने ओडिशा के चाँदीपुर से अग्नि-3 मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया, जिससे इसकी पूर्ण परिचालन तत्परता की पुष्टि हुई।

‘अग्नि-3’ मिसाइल के बारे में

अग्नि-3 एक मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) है, जो अग्नि मिसाइल शृंखला के अंतर्गत भारत की स्थल-आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता का एक महत्त्वपूर्ण घटक है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • मारक क्षमता (Range): लगभग 3,000 किमी., जिससे विस्तृत क्षेत्रीय लक्ष्यों को कवर किया जा सकता है।
  • प्रणोदन (Propulsion): दो-चरणीय ठोस ईंधन मिसाइल, जो त्वरित प्रक्षेपण तत्परता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करती है।
  • पेलोड क्षमता (Payload Capability): पारंपरिक या परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम।
  • मार्गदर्शन प्रणाली (Guidance System): उच्च सटीकता प्रदान करने वाली उन्नत जड़त्वीय नेविगेशन प्रणाली।
  • प्रक्षेपण प्लेटफॉर्म (Launch Platform): सड़क पर गतिशील प्रक्षेपक, जो इसकी उत्तरजीविता और लचीलापन बढ़ाता है।

महत्त्व

  • रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ करता है: विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोधक सिद्धांत के अंतर्गत दीर्घ-सीमा शत्रुतापूर्ण खतरों को रोकने की भारत की क्षमता को बढ़ाता है।
  • द्वितीय-प्रहार क्षमता सुनिश्चित करता है: परमाणु हमले की स्थिति में उत्तरजीविता और प्रतिक्रिया विकल्पों में सुधार करता है।
  • मिसाइल स्पेक्ट्रम को पूर्ण करता है: अग्नि-1 से अग्नि-5 तक की शृंखला को पूरक बनाता है, जो 700–5,000 किमी. की रणनीतिक दूरी सीमा को शामिल करती है।

अग्नि-3 का सफल परीक्षण, रणनीतिक बल कमान (Strategic Forces Command) के अंतर्गत भारत की परमाणु प्रक्षेपण तत्परता, परिचालन विश्वसनीयता, और दीर्घकालिक रणनीतिक स्थिरता को सुदृढ़ करता है।

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