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संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal February 11, 2026 04:02 7 0

विशेषाधिकार हनन नोटिस

हाल ही में विपक्षी सांसद तिरुचि शिवा ने संसद सत्र के दौरान भारत–अमेरिका व्यापार समझौते पर मीडिया को जानकारी देने के लिए वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के विरुद्ध विशेषाधिकार हनन का नोटिस पेश किया।

विशेषाधिकार हनन नोटिस के बारे में

  • एक विशेषाधिकार नोटिस संसद सदस्य द्वारा प्रस्तुत किया गया एक औपचारिक प्रस्ताव होता है, जिसमें किसी मंत्री, सदस्य या बाहरी व्यक्ति द्वारा संसदीय विशेषाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया जाता है।
  • संसदीय विशेषाधिकारों के लिए संवैधानिक प्रावधान
    • अनुच्छेद-105: संसद सदस्यों के संसदीय विशेषाधिकार।
    • अनुच्छेद-194: राज्य विधानसभाओं के विशेषाधिकार।
  • उद्देश्य: संसद और उसके सदस्यों की गरिमा, प्राधिकार और सामूहिक कार्य प्रणाली की रक्षा करना।
  • विशेषाधिकार हनन: विशेषाधिकार हनन तब होता है, जब संसद या उसके सदस्यों के उन अधिकारों और प्रतिरक्षाओं का उल्लंघन किया जाता है, जो स्वतंत्र और प्रभावी कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक हैं या जब सदन की अवमानना की जाती है।
  • हनन के उदाहरण
    • सदस्यों के विरुद्ध झूठे या मानहानिकारक बयान देना।
    • संसद की कार्यवाही के हटाए गए अंशों का प्रकाशन करना।
    • समिति की रिपोर्टों का समय से पूर्व खुलासा करना।
    • कर्तव्यों के निर्वहन में सदस्यों को बाधित करना या डराना।
  • प्रक्रिया: एक सांसद लोकसभा अध्यक्ष (लोकसभा) या सभापति (राज्यसभा) को लिखित नोटिस प्रस्तुत करता है।
    • यह नियम 222 (लोकसभा) और नियम 187 (राज्यसभा) द्वारा प्रशासित होता है।
    •  यदि स्वीकार कर लिया जाए, तो मामले पर चर्चा की जा सकती है या इसे विशेषाधिकार समिति को भेजा जा सकता है।
      • लोकसभा: 15 सदस्य
      • राज्यसभा: 10 सदस्य
  • संभावित कार्यवाही और दंड: संसद हनन की गंभीरता के अनुसार कार्यवाही कर सकती है, चेतावनी दे सकती है, निलंबित कर सकती है, किसी सदस्य को निष्कासित कर सकती है या किसी बाहरी व्यक्ति को कारावास दे सकती है।

विशेषाधिकार नोटिस संसद सत्र के दौरान कार्यपालिका पर संसद की सर्वोच्चता को मजबूत करते हैं तथा जवाबदेही एवं संस्थागत सम्मान सुनिश्चित करते हैं।

नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स 2025 (NRI 2025)

भारत ने चार स्थानों की सुधार के साथ अपनी स्थिति बेहतर की है और अब नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स 2025 (NRI 2025) रिपोर्ट के अनुसार 45वें स्थान पर है।

नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स (NRI) 2025 के बारे में:

  • प्रकाशक संस्थान: पोर्टुलन्स इंस्टिट्यूट (वॉशिंगटन डीसी आधारित गैर-लाभकारी संस्था)।
  • यह इस बात का मानदंड तय करती है कि 127 अर्थव्यवस्थाएँ नेटवर्क अर्थव्यवस्था के लिए कैसे तैयारी करती हैं और उससे कैसे लाभ उठाती हैं।
  • इसे 4 फरवरी, 2026 को वर्ल्ड गवर्नमेंट्स समिट में लॉन्च किया गया था।
  • थीम: “एआई गवर्नेंस इन अ ग्लोबल कॉन्टेक्स्ट: पॉलिसी एंड रेगुलेटरी अप्रोचेज”।
  • NRI एक संयुक्त सूचकांक है, जो कुल 53 संकेतकों को शामिल करने वाले चार स्तंभों में प्रदर्शन का आकलन करता है:
    • प्रौद्योगिकी: ICT अवसंरचना तक पहुँच और अपनाना, उभरती तकनीक, और नवाचार।
    • लोग: कौशल, शिक्षा, समावेशन, और डिजिटल परिवर्तन के लिए सामाजिक तत्परता।
    • शासन: नियामक ढाँचे, विश्वास, समावेशन नीतियाँ, और स्थिरता।
    • प्रभाव: डिजिटल नेटवर्क से प्राप्त आर्थिक, सामाजिक, और पर्यावरणीय परिणाम।
  • नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स (NRI) 2025 की रैंकिंग
    • संयुक्त राज्य अमेरिका लगातार चौथे वर्ष सूचकांक में शीर्ष पर रहा।
    • फिनलैंड और सिंगापुर ने क्रमशः दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त किया।

NRI 2025 में भारत का प्रदर्शन

  • रैंक: वैश्विक स्तर पर 45वाँ (वर्ष 2024 से 4 स्थान ऊपर)।
  • स्कोर: 54.43 / 100 (2024: 53.63)।
  • आय समूह रैंक: निम्न-मध्यम आय वाले देशों में दूसरा स्थान।
  • भारत अपने आय स्तर के अनुसार अपेक्षित से अधिक नेटवर्क तत्परता दिखाता है।
  • भारत कई संकेतकों में वैश्विक स्तर पर अग्रणी (प्रथम रैंक) है: दूरसंचार सेवाओं में वार्षिक निवेश, एआई वैज्ञानिक प्रकाशन, आईसीटी सेवाओं का निर्यात, और ई-कॉमर्स कानून।
  • FTTH/बिल्डिंग इंटरनेट सदस्यता, मोबाइल ब्रॉडबैंड इंटरनेट ट्रैफिक, और अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट बैंडविड्थ में दूसरा स्थान
  • घरेलू बाजार पैमाना और आय असमानता में तीसरा स्थान।

लीबिया

अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन के अनुसार, लीबिया के तट के पास 55 लोगों को ले जा रही एक रबर निर्मित नाव के पलटने से 53 प्रवासी मृत या लापता हो गए।

लीबिया के बारे में

  • स्थान: उत्तरी अफ्रीका का देश, जो उत्तर में भूमध्य सागर से घिरा है और इसके पड़ोसी देशों में मिस्र, ट्यूनीशिया, अल्जीरिया, नाइजर, चाड और सूडान शामिल हैं।
  • राजधानी: त्रिपोली; भूमध्यसागरीय व्यापार मार्गों पर रणनीतिक रूप से स्थित।
  • राजनीतिक स्थिति: वर्ष 2011 में मुअम्मर गद्दाफी के पतन के बाद से देश विभाजन की स्थिति में था। वर्तमान स्थिति ने एक मानवीय संकट उत्पन्न कर दिया है।
  • अर्थव्यवस्था: अफ्रीका का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार रखता है, जिसमें तेल निर्यात और सरकारी राजस्व का प्रमुख स्रोत है।
  • रणनीतिक महत्त्व: भूमध्यसागरीय सुरक्षा, ऊर्जा बाजारों और प्रवासन मार्गों में प्रमुख भूमिका।

अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन

  • जनादेश: अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध प्रमुख अंतर-सरकारी संगठन है, जो मानवीय और सुव्यवस्थित प्रवासन को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है।
  • स्थापना: वर्ष 1951 में यूरोप से प्रवासियों के आवागमन के लिए अस्थायी अंतर-सरकारी समिति (PICMME) के रूप में स्थापित किया गया था, ताकि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद यूरोप में विस्थापन की समस्या का समाधान किया जा सके।
  • मुख्यालय: जेनेवा, स्विट्जरलैंड।
  • स्थिति: संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध संगठन (2016 से)।
  • सदस्य: 174 सदस्य देश; पर्यवेक्षकों में देश और गैर-सरकारी संगठन (NGOs) शामिल हैं।
  • कार्य के प्रमुख क्षेत्र
    • आपातकालीन प्रतिक्रिया और विस्थापन
    • स्वैच्छिक वापसी और पुनर्वास सहायता (AVRR)
    • प्रवासन स्वास्थ्य और श्रम प्रवासन
    • मानव तस्करी निरोध और प्रवासी संरक्षण
    • जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय प्रवासन।
  • भारत और IOM: भारत एक सदस्य है; IOM क्षमता निर्माण, प्रवासन डेटा, तथा वापसी और पुनर्वास कार्यक्रमों में सहयोग करता है।

भारत- ग्रीस साझेदारी

 

भारत और ग्रीस ने अपनी रणनीतिक साझेदारी के तहत पाँच-वर्षीय रोडमैप के माध्यम से रक्षा तथा समुद्री सहयोग को गहरा करने पर सहमति व्यक्त की है।

भारत–ग्रीस साझेदारी के बारे में

  • रक्षा एवं रणनीतिक सहयोग: रक्षा औद्योगिक सहयोग का विस्तार करने के लिए संयुक्त आशय घोषणा और द्विपक्षीय सैन्य सहयोग योजना, 2026 पर हस्ताक्षर किए गए।
    • यह साझेदारी भारत के आत्मनिर्भर भारत को ग्रीस के एजेंडा 2030 रक्षा सुधारों के साथ संरेखित करती है।
  • समुद्री एवं क्षेत्रीय सुरक्षा: साझा समुद्री परंपराओं को दर्शाते हुए समुद्री सुरक्षा पर अभिसरण।
    • ग्रीस, सूचना संलयन केंद्र – हिंद महासागर क्षेत्र (IFC–IOR), गुरुग्राम में एक संपर्क अधिकारी (Liaison Officer) तैनात करेगा, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में सूचना साझाकरण मजबूत होगा।
  • औद्योगिक एवं जन-जन संपर्क: भारतीय रक्षा स्टार्ट-अप्स और रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (DPSU) के साथ सहभागिता।
    • यह सहयोग हिंद-प्रशांत और भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में स्थिरता को सुदृढ़ करता है।

ग्रीस के बारे में

  • ग्रीस (हेलेनिक गणराज्य) दक्षिण-पूर्वी यूरोप में, बाल्कन प्रायद्वीप के दक्षिणी छोर पर स्थित है, और यूरोप, एशिया तथा अफ्रीका को जोड़ता है।
  • सीमाएँ: अल्बानिया, उत्तर मैसेडोनिया, बुल्गारिया और तुर्की।
  • भूगोल: यूरोप के सबसे पर्वतीय देशों में से एक; यहाँ ‘पिंडस’ पर्वतमाला अवस्थित है
    • माउंट ओलंपस (2,918 मीटर) सबसे ऊँचा शिखर है।
    • लंबा, विखंडित तट (13,676 किमी.) और लगभग 1,500 द्वीप, जिनमें क्रीट और एविया शामिल हैं।
  • नदियाँ, बंदरगाह एवं अर्थव्यवस्था
    • प्रमुख नदियाँ: अचेलूस, एलियाकमोन, एव्रोस, पिनिओस।
    • समुद्र: एजियन, आयोनियन, भूमध्य सागर, क्रीटन और थ्रेसियन सागरों से घिरा हुआ।
      • पिराएस बंदरगाह (एथेंस): यूरोप का सबसे बड़ा यात्री बंदरगाह और एक प्रमुख भूमध्यसागरीय केंद्र।

मधुमेह के लिए HbA1c परीक्षण

लैंसेट रीजनल हेल्थ: दक्षिण-पूर्व एशिया के एक अध्ययन ने चेतावनी दी है कि ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन परीक्षण पर निर्भरता भारत में व्यापक एनीमिया और रक्त विकारों के कारण टाइप 2 मधुमेह के गलत निदान का कारण बन सकती है।

अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष

  • HbA1c मान भ्रामक हो सकते हैं: हीमोग्लोबिन की मात्रा, संरचना या आयु को बदलने वाली स्थितियाँ जैसे- एनीमिया, सिकल सेल रोग, थैलेसीमिया और ग्लूकोज-6-फॉस्फेट डीहाइड्रोजनेज की कमी HbA1c रीडिंग को विकृत कर सकती हैं।
  • भारत-विशिष्ट निदान चुनौती: भारत में आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया और हीमोग्लोबिनोपैथी की उच्च व्यापकता HbA1c की विश्वसनीयता को सीमित करती है, जिससे मधुमेह के निदान में देरी हो सकती है और दीर्घकालिक जटिलताओं का जोखिम बढ़ सकता है।
  • बहु-पैरामीट्रिक निदान की आवश्यकता: विशेषज्ञ HbA1c को ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट, स्व-निगरानी, ग्लूकोज मॉनिटरिंग और हीमैटोलॉजिकल आकलन के साथ संयोजित करने की सिफारिश करते हैं, विशेषकर प्राथमिक देखभाल और संसाधन-सीमित परिस्थितियों में।

HbA1c रीडिंग मधुमेह का पता कैसे लगाती है?

  • दीर्घकालिक रक्त ग्लूकोज को मापता है: ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन (HbA1c) लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन से जुड़े ग्लूकोज को मापकर पिछले 2–3 महीनों के औसत रक्त ग्लूकोज स्तर को दर्शाता है।
  • दीर्घकालिक हाइपरग्लाइसीमिया को दर्शाता है: उच्च रक्त ग्लूकोज स्तर से हीमोग्लोबिन का ग्लाइकेशन बढ़ जाता है।
    • HbA1c मान 6.5% का उपयोग मधुमेह के निदान के लिए किया जाता है, जो निरंतर हाइपरग्लाइसीमिया को दर्शाता है।
  • निदान और निगरानी के लिए उपयोगी: HbA1c के लिए उपवास की आवश्यकता नहीं होती और यह मधुमेह के निदान तथा रोगियों में दीर्घकालिक ग्लाइसेमिक नियंत्रण के आकलन में सहायक होता है।

मधुमेह के बारे में

  • परिभाषा: डायबिटीज मेलिटस एक दीर्घकालिक, प्रगतिशील गैर-संचारी रोग है, जो अपर्याप्त इंसुलिन उत्पादन या इंसुलिन की क्रिया में बाधा के कारण लगातार हाइपरग्लाइसीमिया से चिह्नित होता है।
  • मधुमेह के प्रकार
    • टाइप 1 मधुमेह: इंसुलिन-उत्पादक अग्न्याशय बीटा कोशिकाओं का स्वप्रतिरक्षित विनाश; आजीवन इंसुलिन उपचार की आवश्यकता; कुल मामलों का 5–10%।
    • टाइप 2 मधुमेह: इंसुलिन प्रतिरोध और सापेक्ष इंसुलिन की कमी द्वारा चिह्नित; वैश्विक स्तर पर और भारत में 90–95% मामलों के लिए उत्तरदायी है।
  • वैश्विक स्थिति: विश्वभर में लगभग 422 मिलियन लोग मधुमेह से पीड़ित हैं, जिससे प्रतिवर्ष लगभग 15 लाख मौतें होती हैं, जो निम्न और मध्यम आय वाले देशों को असमान रूप से प्रभावित करता है।

इथियोपिया–इरिट्रिया तनाव

हाल ही में इथियोपिया ने इरिट्रिया से अपने सीमा क्षेत्रों से सेनाएँ वापस बुलाने को कहा है।

भू-राजनीतिक तनाव के केंद्र

  • बादमे (Badme): वर्ष 1998–2000 के सीमा युद्ध का केंद्र; अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता द्वारा इरिट्रिया को दिए जाने के बावजूद, यह अब भी एक स्थायी क्षेत्रीय विवाद बिंदु बना हुआ है।
  • प्रिटोरिया समझौता (2022): इथियोपियाई सरकार और तिग्राय पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट (TPLF) के बीच शांति समझौता; इसमें इरिट्रिया को शामिल न किए जाने से वर्तमान कूटनीतिक अविश्वास बढ़ा है।
  • संप्रभुता और विद्रोह: इथियोपिया अब इरिट्रिया की सैन्य उपस्थिति और कथित विद्रोही संबंधों को क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन मानता है, जिससे तिग्राय युद्ध (2020–2022) के दौरान बनी उनकी साझेदारी समाप्त हो गई है।

इरिट्रिया के बारे में 

  • स्थिति: ‘हॉर्न ऑफ अफ्रीका’ क्षेत्र में स्थित, पूर्व में लाल सागर से लगा हुआ।
  • स्थलीय सीमाएँ: सूडान (पश्चिम), इथियोपिया (दक्षिण), और जिबूती (दक्षिण-पूर्व)।
  • समुद्री महत्त्व: बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य (“आँसुओं का द्वार”) के पश्चिमी तट को नियंत्रित करता है, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला एक महत्त्वपूर्ण चोकपॉइंट है।
  • भौतिक भूगोल: दहलाक द्वीपसमूह, लाल सागर में स्थित एक रणनीतिक द्वीप समूह।
  • डानाकिल डिप्रेशन: पृथ्वी के सबसे निचले और सबसे गर्म क्षेत्रों में से एक, जो इथियोपिया के साथ साझा है।
  • मुख्य नदियाँ: सेटिट (टेकेजे) (एकमात्र बारहमासी नदी), गाश (मारेब), और बार्का।
  • सांस्कृतिक विशेषता: इसकी राजधानी अस्मारा एक यूनेस्को विश्व धरोहर शहर है, जो अपनी आधुनिकतावादी/भविष्यवादी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।

इथियोपिया के बारे में 

  • स्थल-आवृत्त स्थिति: वर्ष 1993 में इरिट्रिया की स्वतंत्रता के बाद विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला स्थल-आवृत्त देश बन गया।
  • रणनीतिक निर्भरता: इथियोपिया अपने बाह्य व्यापार के 90% से अधिक के लिए जिबूती बंदरगाह पर निर्भर है।
  • जल-राजनीति: ‘ब्लू नील’ नदी पर ग्रैंड इथियोपियन रिनेसाँ डैम (GERD) स्थित है, जो मिस्र और सूडान की जल सुरक्षा को प्रभावित करता है।
  • कूटनीतिक केंद्र: अदीस अबाबा अफ्रीकी संघ (AU) और संयुक्त राष्ट्र अफ्रीका आर्थिक आयोग (UNECA) का मुख्यालय है।

‘हॉर्न ऑफ अफ्रीका’ और क्षेत्रीय ढाँचे 

  • सदस्य राष्ट्र (SEED): सोमालिया, इथियोपिया, इरिट्रिया, जिबूती।
  • क्षेत्रीय संगठन: इंटर-गवर्नमेंटल अथॉरिटी ऑन डेवलपमेंट (IGAD), मुख्यालय जिबूती में।
  • वैश्विक प्रभाव: यहाँ अस्थिरता लाल सागर के शिपिंग मार्गों को बाधित कर सकती है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और स्वेज नहर मार्ग की सुरक्षा प्रभावित होती है।
  • प्रमुख व्यक्तित्व: प्रधानमंत्री अबी अहमद (इथियोपिया) को इरिट्रिया के साथ 20 वर्षों के गतिरोध को समाप्त करने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार (2019) मिला था।

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