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संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal February 16, 2026 04:15 5 0

मैंग्रोव क्लैम (Mangrove Clam) 

 

ICAR–सेंट्रल मरीन फिशरीज रिसर्च इंस्टिट्यूट (CMFRI) ने नियंत्रित परिस्थितियों में मैंग्रोव क्लैम के सफलतापूर्वक ‘प्रेरित प्रजनन’ (Inducing Breeding) द्वारा एक प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल की है।

मैंग्रोव क्लैम (गेलोइना एरोसा) के बारे में

  • मैंग्रोव क्लैम, जिन्हें ‘मड क्लैम’ भी कहा जाता है, उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय तटीय पारिस्थितिकी तंत्रों में पाए जाने वाले पारिस्थितिकी और आर्थिक रूप से महत्त्वपूर्ण पटलक्लोमी अकशेरुकी हैं।
  • ये क्लैम ‘फिल्टर फीडर’ होते हैं, जो मुख्यतः जलमग्नता (उच्च ज्वार या जलभराव) की अवधि के दौरान सक्रिय रहते हैं, जिससे जल को छानने और कार्बनिक पदार्थों के प्रसंस्करण में सहायता मिलती है।
  • वैज्ञानिक नाम: गेलोइना एरोसा
  • सामान्य नाम: मैंग्रोव क्लैम, मड क्लैम; उत्तरी केरल (भारत) में स्थानीय रूप से “कंडल कक्का” कहलाते हैं।
  • पसंदीदा आवास: मैंग्रोव वनों, मुहानों और कभी-कभी बड़ी नदियों या दलदलों के ज्वारीय क्षेत्रों में जैविक पदार्थों से भरपूर दलदली तल।
  • भौगोलिक विस्तार: दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया, जिसमें भारत (विशेषकर केरल और पूर्वी तट), मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस और चीन के कुछ हिस्से शामिल हैं।
  • पारिस्थितिक भूमिका: मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्रों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
    • ये पोषक तत्त्वों का पुनर्चक्रण करते हैं, अवसादों को स्थिर करते हैं, मृदा गुणवत्ता में सुधार करते हैं और समग्र जैव-विविधता का समर्थन करते हैं।
    • बेंथिक जीव होने के कारण, ये तटीय प्रदूषण और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के संकेतक के रूप में भी कार्य करते हैं।
  • पतन के कारण: अत्यधिक दोहन, आवास क्षरण, प्रदूषण और नियमन की कमी के कारण प्राकृतिक भंडार घट गए हैं, जिससे पुनर्प्राप्ति के लिए हैचरी तकनीक अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो गई है।

मैंग्रोव क्लैम का प्रेरित प्रजनन

  • पूर्ण हैचरी चक्र: ICAR-CMFRI के वैज्ञानिकों ने नियंत्रित परिस्थितियों में संपूर्ण भ्रूणीय और लार्वा विकास चक्र पूरा किया, जिसमें स्पॉनिंग के 18वें दिन से सफल ‘स्पैट सेटलमेंट’ हुआ।
  • प्रथम-प्रकार की उपलब्धि: हैचरी प्रणालियों में मैंग्रोव क्लैम का प्रेरित स्पॉनिंग, लार्वा पालन और स्पैट उत्पादन विश्व स्तर पर प्रलेखित अत्यंत सीमित उदाहरणों में से एक है
  • संरक्षण से संबंध: हैचरी में उत्पादित बीज क्षतिग्रस्त मैंग्रोव क्षेत्रों में रैंचिंग का समर्थन कर सकते हैं, जिससे स्टॉक संवर्द्धन और मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली में सहायता मिलती है।
  • सतत् जलीय कृषि मॉडल: यह सफलता मैंग्रोव संरक्षण के साथ एकीकृत, समुदाय-प्रबंधित, कम लागत आधारित मुहाना जलीय कृषि के विकास को सक्षम बनाती है।

सेंट्रल मरीन फिशरीज रिसर्च इंस्टिट्यूट (CMFRI)

  • ICAR-CMFRI भारत का एक प्रमुख सरकारी समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान है।
  • इसकी स्थापना फरवरी 1947 में भारत सरकार द्वारा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत की गई थी।
  • वर्ष 1967 में यह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) का हिस्सा बना, जो भारत में कृषि और संबद्ध अनुसंधान का शीर्ष निकाय है।
  • मुख्यालय: कोच्चि, केरल।

एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs)

नैटको फार्मा की चेन्नई APIs सुविधा को हालिया नियामकीय निरीक्षण के बाद अमेरिकी FDA से ‘वॉलंटरी एक्शन इंडिकेटेड’ (VAI) वर्गीकरण प्राप्त हुआ है।

निरीक्षण रिपोर्ट के बारे में

  • VAI वर्गीकरण: अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने एक एस्टैब्लिशमेंट इंस्पेक्शन रिपोर्ट जारी की, जिसमें सुविधा को वॉलंटरी एक्शन इंडिकेटेड के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया, जिसका अर्थ है कि बिना तत्काल नियामकीय कार्रवाई के कुछ टिप्पणियाँ की गई हैं।
  • फॉर्म 483 अवलोकन: नियामक ने पहले फॉर्म 483 के अंतर्गत सात अवलोकन जारी किए थे, जिनमें सुधारात्मक अनुपालन उपायों की आवश्यकता वाले प्रक्रियात्मक मुद्दों को उजागर किया गया था।
  • नियामकीय महत्त्व: VAI स्थिति ‘करेंट गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज’ (CGMP) मानकों के अंतर्गत सुधार अनिवार्य करते हुए निरंतर संचालन की अनुमति देती है।

APIs के बारे में

  • एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट्स (APIs) दवाओं में मौजूद जैविक रूप से सक्रिय पदार्थ होते हैं, जो उपचारात्मक प्रभावों के लिए जिम्मेदार होते हैं।
  • फार्मास्यूटिकल भूमिका: तैयार दवाएँ सुरक्षित वितरण और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए APIs को फिलर्स या बाइंडर्स जैसे सहायक पदार्थों के साथ संयोजित करती हैं।
  • APIs के प्रकार
    • रासायनिक-संश्लेषण APIs: क्रिस्टलीकरण और शुद्धिकरण से जुड़ी बहु-चरणीय रासायनिक अभिक्रियाओं के माध्यम से उत्पादित किए जाते हैं।
      • ये पैरासिटामोल, आइबुप्रोफेन और मेटफॉर्मिन जैसे कम आणविक भार और उच्च-शुद्धता वाले यौगिक होते हैं।
    • किण्वन-आधारित APIs: नियंत्रित वातावरण में सूक्ष्मजीवों के प्रजनन द्वारा उत्पन्न किए जाते हैं। इन जटिल जैविक उत्पादों में पेनिसिलिन और सेफालोस्पोरिन जैसे एंटीबायोटिक्स शामिल होते हैं।
    • सेमी-आर्टिफीशियल APIs: प्राकृतिक या किण्वन-आधारित अणुओं से व्युत्पन्न होते हैं और बेहतर प्रभावशीलता के लिए रासायनिक रूप से संशोधित किए जाते हैं।
      • उदाहरणों में सेफ्ट्रियाक्सोन और सेफ्डिनिर शामिल हैं।
    • प्राकृतिक/निष्कर्षण APIs: निष्कर्षण और शुद्धिकरण प्रक्रियाओं के माध्यम से सीधे पौधों या जानवरों से पृथक किए जाते हैं।
      • उदाहरणों में मॉर्फीन और क्विनिन शामिल हैं।

भारत में APIs की स्थिति

  • वैश्विक स्थिति: भारत विश्व का सबसे बड़ा जेनेरिक दवाओं का आपूर्तिकर्ता है और 60 उपचारात्मक श्रेणियों में 500 से अधिक APIs का उत्पादन करता है।
  • आयात निर्भरता: क्षमता होने के बावजूद, भारत लगभग 70% APIs चीन से आयात करता है, विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण किण्वन और रासायनिक-संश्लेषण क्षेत्रों में अधिक निर्भरता है।
  • नीतिगत पहल: फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने मेक इन इंडिया के अंतर्गत 56 प्रमुख APIs को प्राथमिकता दी है, जिन्हें प्रौद्योगिकी सर्वेक्षणों और उद्योग–शिक्षा सहयोग द्वारा आयात निर्भरता कम करने के लिए समर्थन दिया गया है।
    • प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना (वित्त वर्ष 2022-23 से वित्त वर्ष 2028-29) ₹6,940 करोड़ के बजटीय परिव्यय के साथ महत्त्वपूर्ण ‘की स्टार्टिंग मटेरियल्स’ (KSM), ड्रग इंटरमीडिएट्स (DI) और एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट्स (APIs) के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने का उद्देश्य रखती है, ताकि आयात निर्भरता कम की जा सके।

प्रौद्योगिकीय नवाचार और नियामकीय अनुपालन के माध्यम से घरेलू APIs विनिर्माण को मजबूत करना भारत की औषधि आत्मनिर्भरता और वैश्विक आपूर्ति शृंखला की सुदृढ़ता के लिए आवश्यक है।

कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेज (CMF)

हाल ही में भारतीय नौसेना ने बहरीन के मनामा में कंबाइंड टास्क फोर्स 154 की कमान सँभाली, जिससे बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा सहयोग में भारत की भूमिका मजबूत हुई।

कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेज (CMF) के बारे में

  • कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेज 47 देशों की एक बहुराष्ट्रीय समुद्री साझेदारी है, जिसका मुख्यालय मनामा, बहरीन में स्थित है और जिसका नेतृत्व अमेरिकी नौसेना के वाइस एडमिरल द्वारा किया जाता है।
    • भारत वर्ष 2022 में भारत–अमेरिका (2+2) संवाद के दौरान CMF में शामिल हुआ।
  • मुख्य उद्देश्य: CMF अवैध गैर-राज्यीय तत्त्वों का मुकाबला करके तथा समुद्री सुरक्षा, स्थिरता और नौवहन स्वतंत्रता को बढ़ावा देकर अंतरराष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था को स्थापित रखता  है।
  • संचालन क्षेत्र: यह लगभग 3.2 मिलियन वर्ग मील क्षेत्र में कार्य करता है, जिसमें अरब खाड़ी, लाल सागर, ओमान की खाड़ी और आस-पास के क्षेत्र शामिल हैं।
  • प्रमुख दायित्व: मादक पदार्थों की तस्करी विरोध, तस्करी विरोध, समुद्री डकैती विरोध, समुद्री अवरोधन तथा सहयोगात्मक सहभागिता के माध्यम से क्षेत्रीय समुद्री क्षमताओं को मजबूत करना।
  • प्रशिक्षण अभ्यास: CMF इंटरऑपरेबिलिटी और क्षमता निर्माण बढ़ाने के लिए मैरीटाइम सिक्योरिटी एन्हांसमेंट ट्रेनिंग (MSET) तथा कंपास रोज और नॉर्दर्न/सदर्न रेडीनेस जैसे अभ्यास आयोजित करता है।
  • टास्क फोर्स संरचना: CMF पाँच कंबाइंड टास्क फोर्स के माध्यम से कार्य करता है:
    • CTF 150 (अरब खाड़ी के बाहर समुद्री सुरक्षा)
    • CTF 151 (समुद्री डकैती विरोध)
    • CTF 152 (अरब खाड़ी सुरक्षा)
    • CTF 153 (लाल सागर सुरक्षा)
    • CTF 154 (समुद्री सुरक्षा प्रशिक्षण)।
  • CTF 154 की भूमिका: वर्ष 2023 में स्थापित, CTF 154 समुद्री क्षेत्र जागरूकता, समुद्री कानून के अनुपालन, अवरोधन अभियानों, संयुक्त बचाव अभियान समन्वय और नेतृत्व विकास को सुदृढ़ करता है।
  • लचीली संरचना: सदस्य देश बिना किसी निश्चित राजनीतिक या सैन्य दायित्व के स्वेच्छा से शामिल होते हैं, जिससे लचीला और सहमति-आधारित समुद्री सहयोग संभव होता है।

महत्त्व 

CTF 154 की कमान भारत को प्राप्त होने से उसकी हिंद-प्रशांत समुद्री अवस्थिति मजबूत होती है, रक्षा कूटनीति को बढ़ावा मिलता है और मुक्त, खुली एवं सुरक्षित समुद्री व्यवस्था के प्रति उसकी प्रतिबद्धता सुदृढ़ होती है।

भारत–थाईलैंड वायु अभ्यास

हाल ही में भारतीय वायु सेना ने हिंद महासागर क्षेत्र में थाईलैंड के साथ एक द्विपक्षीय इन-सीटू वायु युद्ध अभ्यास आयोजित किया।

भारत–थाईलैंड वायु अभ्यास के बारे में

  • यह एक द्विपक्षीय अभ्यास है, जिसका उद्देश्य रक्षा सहयोग को मजबूत करना, अंतर-संचालन क्षमता बढ़ाना और दोनों मित्र वायु सेनाओं के बीच परिचालन समन्वय में सुधार करना है।
  • शामिल  सेनाएँ: भारतीय वायु सेना और रॉयल थाई वायु सेना, जिन्होंने अग्रिम पंक्ति के मल्टी रोल फाइटर विमानों को तैनात किया।
  • परिचालन स्थल: भारतीय वायु सेना के विमान अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के ठिकानों से संचालित हुए, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक पहुँच प्रदर्शित हुई, जबकि थाई जेट ने घरेलू हवाई अड्डों से उड़न भरी।
  • प्रमुख फोकस क्षेत्र: इस अभ्यास में नौसैनिक युद्धाभ्यास, समुद्री क्षेत्र संचालन, निगरानी समन्वय, आकाश या हवा में ईंधन भरना और एयरोस्पेस संचालन में सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान पर बल  दिया गया।
  • रणनीतिक महत्त्व: इस सहभागिता ने भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को मजबूत किया, हिंद-प्रशांत सुरक्षा सहयोग को बढ़ाया, लंबी दूरी की तैनाती क्षमताओं को सुदृढ़ किया और रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण समुद्री हवाई क्षेत्र में पारस्परिक विश्वास को गहरा किया।

छठा भारत–दक्षिण कोरिया विदेश नीति एवं सुरक्षा संवाद (FPSD)

हाल ही में भारत और कोरिया गणराज्य (ROK) ने अपनी विशेष रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए सियोल में छठा विदेश नीति एवं सुरक्षा संवाद आयोजित किया।

भारत–दक्षिण कोरिया विदेश नीति एवं सुरक्षा संवाद (FPSD) के बारे में

  • विदेश नीति एवं सुरक्षा संवाद भारत और कोरिया गणराज्य (दक्षिण कोरिया) के बीच राजनीतिक, सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर व्यापक चर्चा के लिए एक उच्च-स्तरीय संस्थागत तंत्र है।
  • संरचनात्मक उत्पत्ति: FPSD भारत–दक्षिण कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी के अंतर्गत संचालित होता है, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों पर समन्वय को मजबूत करना है।
    • प्रथम कोरिया–भारत विदेश नीति एवं सुरक्षा संवाद वर्ष 2005 में नई दिल्ली में आयोजित किया गया था, जिसमें विदेश और रक्षा मंत्रालय शामिल थे।
  • संस्थागत उद्देश्य: यह संवाद रक्षा सहयोग, आर्थिक सुरक्षा, तकनीकी सहयोग तथा इंडो-पैसिफिक और उससे बढ़कर नीति समन्वय को बढ़ाने का प्रयास करता है।

छठे FPSD की प्रमुख विशेषताएँ

  • नेतृत्व सहभागिता: इस संवाद की सह-अध्यक्षता पी. कुमारन, सचिव (पूर्व), और पार्क यून-जू, कोरिया गणराज्य के प्रथम उप-विदेश मंत्री द्वारा की गई।
  • व्यापक एजेंडा: चर्चाओं में राजनीतिक संबंधों, रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग, व्यापार और निवेश, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, संस्कृति तथा लोगों-से-लोगों के मध्य संपर्क जैसे प्रमुख विषय शामिल रहे।
  • उभरती प्रौद्योगिकियाँ: दोनों पक्षों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, हरित हाइड्रोजन, महत्त्वपूर्ण खनिजों और सुदृढ़ आपूर्ति शृंखलाओं में साझेदारी की संभावनाओं पर विचार किया।
  • क्षेत्रीय समन्वय: संवाद में कोरियाई प्रायद्वीप, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में विकास तथा बहुपक्षीय मंचों में सहयोग पर भी विचार-विमर्श किया गया।

यह संवाद इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत–दक्षिण कोरिया रणनीतिक अभिसरण को मजबूत करता है, आर्थिक सुरक्षा सहयोग को बढ़ाता है तथा निरंतर उच्च-स्तरीय कूटनीतिक सहभागिता को सुदृढ़ करता है।

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