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संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal February 20, 2026 03:39 5 0

भारत-आयरलैंड बैठक

हाल ही में भारत और आयरलैंड ने दूरसंचार, डिजिटल अवसंरचना तथा उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को गहरा करने के उद्देश्य से नई दिल्ली में एक उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बैठक आयोजित की।

बैठक के प्रमुख बिंदु

  • भारत का विस्तारित डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र: भारत ने 1.23 अरब से अधिक दूरसंचार ग्राहकों, लगभग सार्वभौमिक 5G जिला कवरेज, वहनीय डेटा शुल्क तथा UPI और DBT जैसी सुदृढ़ डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure) के माध्यम से अपने व्यापक डिजिटल विस्तार को रेखांकित किया।
  • नियामक एवं संस्थागत सहयोग: दोनों पक्षों ने भारत के प्रौद्योगिकी विभाग और आयरलैंड के संचार विनियमन आयोग के बीच सहयोग पर बल दिया, जिसे शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग क्षेत्र के साथ समन्वय द्वारा समर्थन प्रदान किया जाएगा।
  • अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ के ढाँचे में सहयोग: भारत ने अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ में अपनी सदस्यता की संभावना तथा पुनर्निर्वाचन के लिए, जिसमें वर्ष 2030 के पूर्णाधिकार सम्मेलन की मेजबानी भी सम्मिलित है, आयरलैंड के समर्थन का अनुरोध किया।

भारत–आयरलैंड संबंध

  • कूटनीतिक स्थापना: औपचारिक राजनयिक संबंध 10 जनवरी, 1949 को स्थापित किए गए थे। आयरलैंड भारत की स्वतंत्रता को मान्यता देने वाले प्रारंभिक देशों में से एक था।
  • शिक्षा एवं प्रवासी समुदाय: आयरलैंड में 10,000 से अधिक भारतीय विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जबकि वहाँ लगभग 80,000 भारतीय मूल के व्यक्ति निवास करते हैं।
  • द्विपक्षीय व्यापार
    • वृद्धि: वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार, तीव्र गति से बढ़ा है और वर्ष 2023 तक यह प्रतिवर्ष 16 अरब यूरो (लगभग 17 अरब अमेरिकी डॉलर) से अधिक हो गया है।
    • मुख्य निर्यात/आयात: भारत वस्त्र, मशीनरी और सॉफ्टवेयर सेवाओं का निर्यात करता है, जबकि औषधीय उत्पादों तथा उन्नत चिकित्सीय उपकरणों का आयात करता है।

आयरलैंड के बारे में

  • अवस्थिति: आयरलैंड, पश्चिमी यूरोप का एक देश है।
  • पड़ोसी देश: इसकी एकमात्र स्थलीय सीमा उत्तर में उत्तरी आयरलैंड (यूनाइटेड किंगडम) के साथ लगती है।
    • यह अटलांटिक महासागर और आयरिश सागर से घिरा हुआ है।
  • जलवायु: आयरलैंड की जलवायु समशीतोष्ण समुद्री प्रकार की है, जो उत्तरी अटलांटिक धारा से अत्यधिक प्रभावित है। इसके परिणामस्वरूप वर्ष भर मध्यम तापमान और अधिक वर्षा होती है।
  • उच्चावच और पर्वत: यहाँ का भू-दृश्य मध्य निम्नभूमि, ऊबड़-खाबड़ पश्चिमी तटरेखा, उत्तरी उच्चभूमि तथा विकलो पर्वत, मॉर्न पर्वत और कैराउनटूहिल (सर्वोच्च शिखर) जैसी पर्वत शृंखलाओं को समाहित करता है।
  • जल निकाय: प्रमुख नदियों में शैनन नदी और लिफी नदी शामिल हैं।
    • यहाँ कॉरिब झील जैसी बड़ी झीलें भी हैं।
    • लॉफ: ‘लॉफ’ का अर्थ झील या आंशिक रूप से स्थल से घिरी हुई ज्वारीय समुद्री खाड़ी होता है।

लॉगरहेड कछुए

काबो वर्दे में 17 वर्षों तक किए गए एक अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ है कि जलवायु परिवर्तन, समुद्रों के तापमान में वृद्धि और समुद्री उत्पादकता में गिरावट के कारण लॉगरहेड कछुओं की संख्या पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।

  • काबो वर्दे पश्चिमी अफ्रीका के तट से दूर स्थित एक द्वीपीय देश है।

लॉगरहेड कछुओं के बारे में

  • लॉगरहेड समुद्री कछुए (कैरेट्टा कैरेट्टा) समुद्री कछुओं की सबसे व्यापक रूप से पाई जाने वाली प्रजातियों में से एक हैं। ये अपने बड़े सिर और मजबूत जबड़ों के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • भौतिक विशेषताएँ: इनका नाम इनके असाधारण रूप से बड़े सिर और शक्तिशाली जबड़ों के कारण पड़ा है, जिनकी सहायता से ये कठोर खोल वाले शिकार को तोड़ सकते हैं।
    • आकृति: इनका ऊपरी कवच लाल-भूरे रंग का तथा हृदयाकार होता है; निचला कवच (प्लास्ट्रॉन) हल्का पीला होता है; सिर बड़ा तथा तैरने के लिए मजबूत फ्लिपर होते हैं।
  • आहार: ये मुख्यतः कठोर खोल वाले अकशेरुकी जीवों जैसे- शंख, घोंघे, केकड़े, सीप और समुद्री अर्चिन का सेवन करते हैं। इसके अतिरिक्त ये जेलीफिश तथा अन्य शिकार भी खाते हैं।
    • कभी-कभी ये वनस्पति पदार्थ भी ग्रहण करते हैं, जिससे ये सर्वाहारी माने जाते हैं।
  • आवास एवं वितरण: ये विश्वभर के समशीतोष्ण और उपोष्णकटिबंधीय महासागरों (अटलांटिक, प्रशांत, हिंद तथा भूमध्य सागर) में पाए जाते हैं। ये अत्यंत प्रवासी होते हैं और अक्सर हजारों मील की दूरी तय करते हैं।
  • प्रजनन: मादाएँ अंडे देने के लिए अपने जन्मस्थल समुद्र तटों पर लौटती हैं (पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग दिशा-निर्धारण हेतु करती हैं)। वे प्रत्येक 2–3 वर्षों में कई बार अंडे देती हैं (औसतन 4 बार)।
  • की-स्टोन प्रजाति: कुछ पारितंत्रों में इन्हें की-स्टोन प्रजाति माना जाता है, क्योंकि इनका आहार कैल्शियम के पुनर्चक्रण में सहायक होता है और अन्य समुद्री जीवों को समर्थन प्रदान करता है।
  • संरक्षण स्थिति: अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की लाल सूची में इन्हें ‘सुभेद्य’ श्रेणी में रखा गया है और कई क्षेत्रों में इनकी जनसंख्या घटती प्रवृत्ति दर्शा रही है।
    • इन्हें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची–I के अंतर्गत संरक्षित किया गया है।
    • साथ ही, ये जंगली जीवों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण संबंधी अभिसमय (CMS) के परिशिष्ट–I में सूचीबद्ध हैं।
  • खतरे: मछली पकड़ने के उपकरणों में आकस्मिक फँसना, आवास क्षरण (तटीय विकास और अपरदन), प्रदूषण, नौकाओं से टक्कर तथा जलवायु परिवर्तन इनके लिए प्रमुख खतरे हैं।

लॉगरहेड कछुओं पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

  • अंडे देने के समय में कमी: समुद्र के बढ़ते तापमान के कारण लॉगरहेड कछुए वर्ष में पहले ही अंडे देना प्रारंभ कर रहे हैं, जिससे उनके प्रजनन काल की अवधि लंबी हो रही है।
  • प्रजनन आवृत्ति में कमी: मादा कछुए अब प्रत्येक चार वर्ष में एक बार प्रजनन कर रही हैं, जबकि पहले यह चक्र दो वर्ष का था। यह उनकी प्रजनन क्षमता में गिरावट का संकेत है।
  • अंडा उत्पादन में गिरावट: प्रति मादा घोंसलों की संख्या में कमी आई है तथा प्रत्येक घोंसले में अंडों की संख्या भी घट गई है।
  • शारीरिक आकार में कमी: वयस्क मादा कछुओं का आकार छोटा होता जा रहा है। चूँकि शरीर का आकार अंडा उत्पादन से संबंधित होता है, इसलिए छोटी मादाएँ अपेक्षाकृत कम अंडे देती हैं।

वॉइसएरा (VoicERA)

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने नई दिल्ली में आयोजित इंडिया AI इंपैक्ट समिट 2026 में वॉइसएरा (VoicERA) का शुभारंभ किया।

वॉइसएरा के बारे में

  • वॉइसएरा एक मुक्त-स्रोत, एंड-टू-एंड वॉइस AI निष्पादन प्रणाली है, जिसे भाषिणी राष्ट्रीय भाषा अवसंरचना पर स्थापित किया गया है।
    • भाषिणी एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित भाषा अनुवाद मंच है, जो साक्षरता, भाषा और डिजिटल विभाजन को कम करने का कार्य करता है।
  • शुभारंभ: इसका शुभारंभ इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन की डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग द्वारा, एकस्टेप फाउंडेशन, सीओएसएस, आईआईआईटी बंगलूरू और AI4भारत (AI4Bharat) के सहयोग से किया गया।
  • विशेषताएँ
    • मुक्त-स्रोत एवं पारस्परिक रूप से क्रियाशील ढाँचा: इसे एक डिजिटल सार्वजनिक संपदा के रूप में विकसित किया गया है, जिसमें खुले मानक और मॉड्यूलर डिजाइन का उपयोग किया गया है। इससे प्रयासों की पुनरावृत्ति कम होती है और विभिन्न मंचों पर एकल प्रदाता पर निर्भरता (वेंडर लॉक-इन) से बचाव होता है।
    • बहुभाषी वास्तविक समय वॉइस AI: यह अनेक भारतीय भाषाओं में वाक् पहचान, संवादात्मक AI तथा बहुभाषी दूरभाष सेवाओं को सक्षम बनाता है, जिससे समावेशी नागरिक सहभागिता को बढ़ावा मिलता है।
    • संलग्ननीय एवं विस्तार योग्य संरचना: यह मॉड्यूलर, एपीआई-आधारित संरचना पर आधारित है, जो वर्तमान सरकारी प्रणालियों के साथ आसानी से एकीकृत हो सकती है और बड़े जनसमूह स्तर पर कार्यान्वयन का समर्थन करती है।
    • लचीला एवं सुरक्षित परिनियोजन: यह समाधान क्लाउड और ऑन-प्रिमाइज दोनों वातावरणों में तैनात किया जा सकता है तथा सुरक्षित निष्पादन परत के माध्यम से वॉइस डेटा के सुरक्षित प्रसंस्करण और विश्वसनीय सेवा-प्रदान को सुनिश्चित करता है।

महत्त्व

वॉइसएरा, भाषिणी की क्षमताओं को केवल अनुवाद उपकरणों तक सीमित न रखकर उन्हें वास्तविक समय की बहुभाषी वॉइस प्रणालियों तक विस्तारित करता है। इससे समावेशी, सुलभ और नागरिक-केंद्रित डिजिटल सुशासन को व्यापक स्तर पर बढ़ावा मिलता है।

बीट द हीट (Beat the Heat)

मुंबई क्लाइमेट वीक 2026 के दौरान महाराष्ट्र सरकार ने घोषणा की कि 30 शहर वैश्विक “बीट द हीट” पहल से जुड़ गए हैं, जिसका उद्देश्य ताप-प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ करना है।

  • इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय पहल से जुड़ने वाले भारत के 44 शहरों में से 30 शहर महाराष्ट्र के हैं। वर्तमान में इस पहल से विश्वभर के 230 से अधिक शहर संबद्ध हैं।

महाराष्ट्र में ऊष्मा जोखिम

  • 15 जिले तीव्र या गंभीर ऊष्मा तनाव का सामना कर रहे हैं।
  • 10 जिले अत्यधिक ऊष्मा तनाव की स्थिति में हैं।
  • ऊष्मा को “मूक हत्यारा” कहा गया है, क्योंकि यह बाढ़, तूफान या भूकंप की तुलना में अधिक मृत्यु का कारण बनती है।
  • संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने चेतावनी दी है कि यदि तापवृद्धि औद्योगिक-पूर्व स्तर से 2.6–2.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचती है, तो भारत के कुछ भागों में प्रतिवर्ष 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाले 150 से अधिक दिन हो सकते हैं।

बीट द हीट पहल के बारे में

  • बीट द हीट एक वैश्विक जलवायु कार्रवाई पहल है, जिसका उद्देश्य शहर-स्तर पर सतत् शीतलन, जलवायु-अनुकूल नियोजन तथा निम्न-कार्बन प्रौद्योगिकियों के माध्यम से शहरी ऊष्मा प्रतिरोधक क्षमता को तीव्र गति से बढ़ाना है।
  • शुभारंभ: इस कार्यक्रम की घोषणा COP30 ब्राजील अध्यक्षता के अंतर्गत की गई थी। इसे संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा उसके कूल कोएलिशन मंच के माध्यम से समर्थन प्रदान किया जा रहा है, ताकि ग्लोबल कूलिंग प्लेज को व्यावहारिक रूप से लागू किया जा सके।
  • उद्देश्य: यह पहल शीतलन प्रणालियों से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने, ऊर्जा-कुशल एवं जलवायु-अनुकूल प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने तथा समेकित शहरी नियोजन के माध्यम से अत्यधिक ऊष्मा से संवेदनशील आबादी की रक्षा करने का प्रयास करती है।

प्रमुख घटक

  • ऊष्मा जोखिम आकलन एवं शहरी नियोजन: यह पहल शहरों को ऊष्मा संवेदनशीलता का मानचित्रण करने, अत्यधिक प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने तथा शहरी नियोजन, भवन संहिताओं और अवसंरचना डिजाइन में ऊष्मा-प्रतिरोधक उपायों को समाहित करने में सहयोग प्रदान करती है।
  • प्रकृति-आधारित एवं निष्क्रिय शीतलन समाधान: इसके अंतर्गत शहरी हरितीकरण, वृक्ष आवरण का विस्तार, छायादार सार्वजनिक स्थलों का विकास, शीतल छतें, परावर्तक सतहें तथा जलवायु-संवेदनशील भवन डिजाइन को प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे शहरी ऊष्मा द्वीप प्रभाव को कम किया जा सके।
  • ऊर्जा-कुशल एवं जलवायु-अनुकूल शीतलन: यह कार्यक्रम कम ऊर्जा-आधारित शीतलन प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देता है, कम वैश्विक तापवर्द्धन क्षमता वाले शीतलक द्रव्यों के उपयोग को प्रोत्साहित करता है तथा सतत् शीतलन संक्रमण के लिए जलवायु वित्त तक पहुँच को सुगम बनाता है।

महत्त्व

यह पहल अत्यधिक ऊष्मा की समस्या का समाधान करने का प्रयास करती है, जो एक प्रमुख जलवायु जोखिम है और बाढ़ या तूफानों की तुलना में अधिक मृत्यु का कारण बनती है। साथ ही, यह शहरी ऊष्मा द्वीप प्रभाव को लक्षित करती है, जो शहरों में तापमान वृद्धि को और अधिक तीव्र बना देता है।

टिप्पणी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की “बीट द हीट” पहल अत्यधिक ऊष्मा से श्रमिकों तथा खेल आयोजनों में भाग लेने वाले प्रतिभागियों की सुरक्षा पर केंद्रित है।

AI उत्तरदायित्व प्रतिज्ञाएँ (AI Responsibility Pledges)

भारत ने इंडिया AI इंपैक्ट समिट 2026 के दौरान 24 घंटों के भीतर सर्वाधिक AI उत्तरदायित्व प्रतिज्ञाएँ प्राप्त कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किया।

रिकॉर्ड के प्रमुख बिंदु

  • विश्व रिकॉर्ड: भारत ने “24 घंटों में AI उत्तरदायित्व अभियान के लिए सर्वाधिक प्रतिज्ञाएँ प्राप्त करने” का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड खिताब हासिल किया। 16–17 फरवरी के बीच नई दिल्ली के भारत मंडपम में कुल 2,50,946 वैध प्रतिज्ञाएँ दर्ज की गईं।
  • व्यापक युवा सहभागिता: इस अभियान में 2.5 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया, जो प्रारंभिक 5,000 प्रतिज्ञाओं के लक्ष्य से कहीं अधिक था। प्रतिभागियों को डिजिटल बैज तथा AI शिक्षण संसाधन प्रदान किए गए।

AI उत्तरदायित्व प्रतिज्ञा (AI Responsibility Pledges) के बारे में

  • परिचय: AI उत्तरदायित्व प्रतिज्ञा एक राष्ट्रव्यापी नागरिक-नेतृत्व वाली पहल है, जो विभिन्न क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक, समावेशी और उत्तरदायित्वपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देती है।
  • लॉन्च: इसे 16 फरवरी, 2026 को इंडिया AI मिशन के तहत इंटेल इंडिया के सहयोग से इंडिया AI इंपैक्ट समिट, 2026 के दौरान लॉन्च किया गया था।
  • उद्देश्य: डेटा गोपनीयता, पारदर्शिता, जवाबदेही के बारे में जागरूकता बढ़ाकर और सार्वजनिक भागीदारी के माध्यम से गलत सूचनाओं का मुकाबला करके जिम्मेदार AI को अपनाने को प्रोत्साहित करना।

महत्त्व

  • नैतिक AI अपनाने को बढ़ावा देना: यह पहल डेटा गोपनीयता, पारदर्शिता, जवाबदेही और गलत सूचनाओं से निपटने पर ध्यान केंद्रित करते हुए, जिम्मेदार AI प्रथाओं के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करती है।
  • नागरिक नेतृत्व वाली डिजिटल जिम्मेदारी: यह अभियान बढ़ती जन जागरूकता को उजागर करता है और भारत को समावेशी, नैतिक और सामाजिक रूप से लाभकारी AI विकास के वैश्विक समर्थक के रूप में स्थापित करता है।

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