100% तक छात्रवृत्ति जीतें

रजिस्टर करें

संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal March 03, 2026 04:08 25 0

नक्सल-मुक्त बिहार

मुंगेर में अंतिम सशस्त्र माओवादी के आत्मसमर्पण के साथ बिहार को आधिकारिक रूप से नक्सल-मुक्त घोषित कर दिया गया है, जो वामपंथी उग्रवाद पर नियंत्रण में भारत की व्यापक सफलता को प्रतिबिंबित करता है।

नक्सल-मुक्त बिहार के बारे में

  • अंतिम सशस्त्र माओवादी का आत्मसमर्पण: मुंगेर में सुरेश कोड़ा के आत्मसमर्पण ने बिहार में संगठित सशस्त्र माओवादी उपस्थिति के अंत का संकेत दिया है।
    • केंद्र की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के अंतर्गत उन्हें वित्तीय सहायता और पुनर्समेकन समर्थन प्रदान किया जाएगा, जो उग्रवाद से मुख्यधारा की भागीदारी की ओर संक्रमण का प्रतीक है।
  • नक्सली गतिविधियों का पूर्ण उन्मूलन: वर्ष 2012 में 23 जिलों तक प्रभावित रहे बिहार में वर्ष 2025 में नक्सली घटनाओं की संख्या शून्य दर्ज की गई।
    • सतत् सुरक्षा अभियानों और विकासोन्मुख पहुँच के परिणामस्वरूप वर्ष 2025 में 220 गिरफ्तारियाँ हुईं, सशस्त्र दलों का विघटन किया गया तथा पूर्व में प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक व्यवस्था पुनर्स्थापित हुई।

वामपंथी उग्रवाद के बारे में

  • वामपंथी उग्रवाद मुख्यतः भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) द्वारा संचालित सशस्त्र विद्रोह को संदर्भित करता है, जिसका उद्देश्य हिंसात्मक क्रांति के माध्यम से भारतीय राज्य को उखाड़ फेंकना है।
  • उत्पत्ति: इस आंदोलन की जड़ें वर्ष 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी विद्रोह में निहित हैं। वर्ष 2004 में पीपुल्स वार ग्रुप और माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर के विलय से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के गठन के बाद इसे संगठित रूप मिला।
  • उन्मूलन लक्ष्य: वर्ष 2010 के बाद से हिंसक घटनाओं में 81% की कमी और प्रभावित जिलों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट के पश्चात् सरकार ने मार्च 2026 तक वामपंथी उग्रवाद के पूर्ण उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया है।
  • नोडल मंत्रालय एवं प्रभाग: गृह मंत्रालय वामपंथी उग्रवाद नीति की देख-रेख अपने वामपंथी उग्रवाद प्रभाग (वर्ष 2006 में स्थापित) के माध्यम से करता है।
    • यह सुरक्षा बलों की तैनाती का समन्वय, सुरक्षा-संबंधी व्यय योजना तथा विशेष अवसंरचना योजना जैसी क्षमता-वर्द्धन योजनाओं का संचालन, और अंतर-मंत्रालयी विकासात्मक प्रयासों की निगरानी करता है।
  • अब तक की सफलता: हिंसक घटनाएँ वर्ष 2010 में 1,936 से घटकर 2024 में 374 रह गईं; सुरक्षा बलों की हताहत संख्या में 73% की कमी आई; एक दशक में 8,000 से अधिक उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया; तथा वर्ष 2025 तक प्रभावित जिलों की संख्या 126 से घटकर 11 रह गई—जो तथाकथित “लाल गलियारे” के विघटन का संकेत है।

सालार डी पाजोनालेस 

वैज्ञानिक चिली के अटाकामा मरुस्थल में स्थित सालार डी पाजोनालेस की जिप्सम-समृद्ध शिलाओं का अध्ययन कर रहे हैं, ताकि यह समझा जा सके कि मंगल जैसी परिस्थितियों में किस प्रकार जीवन संभव और संरक्षित हो सकता है।

सालार डी पाजोनालेस के बारे में

  • सालार डी पाजोनालेस चिली के अटाकामा मरुस्थल में स्थित एक उच्च-ऊँचाई वाला लवणीय समतल क्षेत्र है और इसे मंगल ग्रह के वातावरण के सबसे निकट पृथ्वी-समान उदाहरणों में से एक माना जाता है।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • यह स्थल समुद्र तल से लगभग 3.5 किलोमीटर की ऊँचाई पर स्थित है और अत्यधिक शुष्कता, हिमांक से नीचे तापमान तथा तीव्र पराबैंगनी विकिरण का सामना करता है।
    • इसकी भू-आकृतिक संरचनाओं में जिप्सम (CaSO·2H₂O) के निक्षेप तथा स्ट्रोमैटोलाइट्स शामिल हैं, जो दीर्घकालीन सूक्ष्मजीवी गतिविधि से निर्मित परतदार शैल संरचनाएँ हैं।

सालार डी पाजोनालेस के अध्ययन की आवश्यकता

  • मंगल के समरूप पर्यावरण के रूप में: अत्यधिक शुष्कता, शीत जलवायु और उच्च पराबैंगनी विकिरण इसे मंगल ग्रह की सतही परिस्थितियों के अनुकरण हेतु एक आदर्श प्राकृतिक प्रयोगशाला बनाते हैं।
  • जिप्सम एक सुरक्षात्मक आश्रय के रूप में: जिप्सम शिलाएँ अर्द्धपारदर्शी होती हैं, जिससे प्रकाश संश्लेषण के लिए पर्याप्त सूर्य का प्रकाश भीतर प्रवेश कर सकता है, जबकि हानिकारक विकिरण को अवरुद्ध किया जाता है और नमी संरक्षित रहती है। इस प्रकार सूक्ष्म स्तर पर जीवन के लिए अनुकूल सूक्ष्म-आवास निर्मित होते हैं।
  • जीवित सूक्ष्मजीवों के प्रमाण: वैज्ञानिकों ने जिप्सम की सतह के मात्र कुछ मिलीमीटर नीचे जीवित सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति का पता लगाया, जो प्रतिकूल परिस्थितियों में जीवन की क्षमता को दर्शाता है।
  • प्राचीन जीवन का संरक्षण: स्ट्रोमैटोलाइट की गहरी परतों में जीवाश्म और रासायनिक जैव-चिह्न पाए गए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जिप्सम जैविक अवशेषों को सुरक्षित रखने में सक्षम है।

सालार डी पाजोनालेस से प्राप्त निष्कर्ष भविष्य के मंगल अभियानों को जिप्सम निक्षेपों को संभावित स्थलों के रूप में लक्षित करने में मार्गदर्शन प्रदान करेंगे, जहाँ संरक्षित जैव-चिह्न और परग्रही जीवन के संभावित प्रमाण खोजे जा सकते हैं।

साणंद में माइक्रोन ATMP सुविधा का उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के साणंद में माइक्रोन टेक्नोलॉजी की अर्द्धचालक संयोजन, परीक्षण एवं पैकेजिंग (ATMP) इकाई का उद्घाटन किया।

साणंद ATMP इकाई के बारे में

  • यह भारत में निर्मित अर्धचालक स्मृति मॉड्यूलों के वाणिज्यिक उत्पादन और आपूर्ति की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक है।
  • माइक्रोन की साणंद इकाई विशेष रूप से डायनेमिक रैंडम एक्सेस मेमोरी (DRAM) और नैंड मेमोरी चिपों का कार्य करेगी, जिनका उपयोग स्मार्टफोन, सॉलिड-स्टेट ड्राइव तथा डेटा केंद्रों में किया जाता है।
  • यह परियोजना भारत अर्द्धचालक मिशन के अंतर्गत स्वीकृत प्रारंभिक परियोजनाओं में से एक है।

ATMP सुविधा क्या है?

  • ATMP का अर्थ है संयोजन (Assembly), परीक्षण (Test) और पैकेजिंग (Packaging)। यह अर्द्धचालक निर्माण की अंतिम अवस्था है, जिसमें कच्ची सिलिकॉन वेफर को तैयार एवं उपयोग योग्य चिप में परिवर्तित किया जाता है।
  • ATMP की तीन अवस्थाएँ
    • संयोजन: सिलिकॉन वेफर को काटकर अलग-अलग चिप (जिन्हें “डाई” कहा जाता है) में विभाजित किया जाता है और उन्हें सब्सट्रेट या लीड फ्रेम पर स्थापित किया जाता है, जिससे चिप को भौतिक आधार प्राप्त होता है।
    • परीक्षण: प्रत्येक चिप का विद्युत परीक्षण किया जाता है, ताकि उसकी कार्यक्षमता सुनिश्चित की जा सके। दोषपूर्ण चिपों को उपभोक्ताओं तक पहुँचने से पूर्व ही अलग कर दिया जाता है।
    • पैकेजिंग: चिप को एक सुरक्षात्मक आवरण में संलग्न किया जाता है, जिसमें धातु पिन या संयोजक लगे होते हैं, ताकि वह अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से जुड़ सके।
  • ATMP अर्द्धचालक निर्माण की “पश्च-चरण” प्रक्रिया है, जो जटिल “पूर्व-चरण” निर्माण (जैसे कि टीएसएमसी जैसी फैब इकाइयों में) के बाद आती है।
  • यह पूर्ण अर्द्धचालक निर्माण संयंत्र स्थापित करने की तुलना में कम पूँजी-गहन होता है, इसलिए भारत जैसे देशों के लिए यह एक व्यावहारिक प्रवेश बिंदु माना जाता है।
  • इस प्रक्रिया से प्राप्त चिप सीधे मोबाइल फोन, लैपटॉप, वाहन और सर्वर जैसे उत्पादों में उपयोग के लिए तैयार होती हैं।

अन्वेष-2026

अन्वेष-2026 (ANVESH-2026), सतत् और स्वास्थ्यवर्द्धक खाद्य पदार्थों पर आधारित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, हरियाणा के सोनीपत स्थित निफ्टेम-कुंडली में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

अन्वेष-2026 के बारे में

  • अन्वेष-2026 (एडवांस्ड नेक्स्ट जेनरेशन विजन फॉर इमर्जिंग एंड सस्टेनेबल हेल्दी फूड्स) ने सतत् खाद्य प्रणालियों और अगली पीढ़ी के स्वास्थ्यवर्द्धक खाद्य पदार्थों में नवाचार को आगे बढ़ाने हेतु एक वैश्विक मंच प्रदान किया।
  • आयोजक: खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान, कुंडली (निफ्टेम-कुंडली)।
  • प्रतिभागी: इस आयोजन में 25 देशों के नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, स्टार्ट-अप, शेफ तथा शिक्षाविदों ने भाग लिया। 500 से अधिक पंजीकृत प्रतिभागियों और लगभग 2000 आगंतुकों की उपस्थिति दर्ज की गई।
    • सम्मेलन में 3 परिचर्चाएँ, 113 मौखिक प्रस्तुतियाँ, 115 आमंत्रित व्याख्यान, 226 पोस्टर प्रस्तुतियाँ, 61 प्रदर्शक तथा 22 प्रत्यक्ष पाक-प्रदर्शन शामिल रहे।
  • उद्देश्य: खाद्य सुरक्षा, पोषण-औषधीय उत्पाद, वैकल्पिक प्रोटीन, सतत् प्रसंस्करण, अपशिष्ट मूल्य संवर्द्धन, डिजिटल रूपांतरण तथा उद्योग–शैक्षणिक सहयोग में नवाचार को प्रोत्साहित करना।
    • साथ ही, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को विकसित भारत–2047 की परिकल्पना के अनुरूप समायोजित करना।
  • महत्व: अन्वेष-2026 ने सतत् खाद्य नवाचार, नीतिगत सुधार तथा वैश्विक सहयोग के क्षेत्र में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को सुदृढ़ किया।

निफ्टेम-कुंडली के बारे में

  • निफ्टेम-कुंडली, हरियाणा स्थित एक प्रमुख शीर्ष संस्थान है, जो खाद्य प्रौद्योगिकी और प्रबंधन के क्षेत्र में शिक्षा, अनुसंधान और उद्यमिता को समर्पित है।
  • स्थापना: वर्ष 2012 में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत स्थापित, इसे वर्ष 2021 में राष्ट्रीय महत्त्व का संस्थान घोषित किया गया।
  • मुख्य कार्यक्षेत्र: संस्थान बी.टेक, एम.टेक तथा पीएचडी कार्यक्रम संचालित करता है और अनुसंधान तथा पेटेंट को प्रोत्साहित करता है।
    • यह ऊष्मायन सुविधाओं और पायलट संयंत्रों के माध्यम से स्टार्ट-अप्स को समर्थन प्रदान करता है तथा उद्योग सहयोग और ग्रामीण पहुँच पहलों को बढ़ावा देता है।

राष्ट्रीय सुशासन सम्मेलन

“विकसित भारत के लिए शासन रूपांतरण: जिलों का समग्र विकास” विषय पर राष्ट्रीय सुशासन सम्मेलन 3 मार्च, 2026 से जम्मू में आयोजित किया जा रहा है।

राष्ट्रीय सुशासन सम्मेलन के बारे में

  • यह सम्मेलन “विकसित भारत” के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु नागरिक-केंद्रित और प्रौद्योगिकी-आधारित प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से जिला-स्तरीय शासन को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है।
  • आयोजक: यह सम्मेलन कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के अधीन प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) द्वारा जम्मू एवं कश्मीर सरकार के सहयोग से आयोजित किया गया है।
  • प्रतिभागी: देशभर से 200 से अधिक प्रतिनिधियों के भाग लेने की अपेक्षा है, जिनमें वरिष्ठ प्रशासक, विषय विशेषज्ञ तथा लोक प्रशासन क्षेत्र के कार्यकर्ता शामिल हैं।
  • उद्देश्य
    • देश के विभिन्न जिलों द्वारा अपनाई गई नवाचारी सुशासन पहलों को प्रदर्शित तथा प्रसारित करना, जिनसे सेवा प्रदायगी, नागरिक कल्याण एवं स्थानीय विकास परिणामों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
    • जिला कलेक्टरों, वरिष्ठ अधिकारियों, नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों को अनुभव साझा करने, विचारों के आदान-प्रदान तथा प्रमुख योजनाओं के संतृप्ति लक्ष्य, बहु-क्षेत्रीय एकीकृत विकास और प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र पर विचार-विमर्श हेतु मंच प्रदान करना।
  • प्रमुख फोकस क्षेत्र: इस सम्मेलन में शासन के डिजिटलीकरण, प्रमुख योजनाओं की पूर्ण कवरेज, शिकायत निवारण तंत्र और एकीकृत जिला विकास पर बल दिया गया।
    • इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल इंडिया पहल, ई-सुविधा मंच तथा रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान-सक्षम यात्रा प्रबंधन प्रणाली के उपयोग को रेखांकित किया गया।
  • प्रदर्शित उत्कृष्ट पहलें
    • वर्ष 2023–24 के लोक प्रशासन में उत्कृष्टता हेतु प्रधानमंत्री पुरस्कार से सम्मानित जिलों—एलुरु, गोमती, कोरापुट, कारगिल, नलबाड़ी, कुपवाड़ा और पर्वतीपुरम् संबंधी पहलें (प्रिज्म 10 पहल)।
    • जम्मू और कश्मीर की नवाचार पहलें, जिनमें कुलगाम जिला शासन मॉडल और श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान आधारित प्रबंधन प्रणाली शामिल हैं।

महत्त्व 

  • यह सम्मेलन जमीनी स्तर पर शासन सुधारों को सुदृढ़ करते हुए समावेशी विकास और प्रशासनिक रूपांतरण को गति प्रदान करता है।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस, 2026

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद और उसकी प्रयोगशालाओं ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस, 2026 को देशभर में व्याख्यानों, प्रदर्शनों, छात्र भ्रमण तथा जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से मनाया, जिनका उद्देश्य वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करना था।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के बारे में

  • राष्ट्रीय विज्ञान दिवस प्रतिवर्ष 28 फरवरी को मनाया जाता है, ताकि वर्ष 1928 में सी. वी. रमन द्वारा रमन प्रभाव की खोज को याद रखा जा सके।
    • रमन प्रभाव, प्रकाश की तरंगदैर्ध्य में होने वाला परिवर्तन है, जो तब घटित होता है, जब प्रकाश किरण अणुओं से विक्षेपित होती है।
    • वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय भौतिकी प्रयोगशाला और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के वैज्ञानिकों ने रमन प्रभाव का प्रदर्शन किया तथा इसके स्पेक्ट्रोस्कोपी, पदार्थ विज्ञान, रसायन, चिकित्सा और उद्योग में अनुप्रयोगों की व्याख्या की।
  • वर्ष 2026 की थीम: “विज्ञान में महिलाएँ: विकसित भारत के लिए उत्प्रेरक”।
  • प्रमुख फोकस क्षेत्र: समारोहों में वैज्ञानिक जागरूकता, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी और गणित में महिलाओं की भागीदारी, युवाओं की सहभागिता तथा भारत के अनुसंधान पारितंत्र को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया गया।

महत्त्व 

  • यह दिवस वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार और विज्ञान के प्रति जन-सहभागिता को प्रोत्साहित करता है, जो भारत को विज्ञान-आधारित विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना के अनुरूप है।

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

THE MOST
LEARNING PLATFORM

Learn From India's Best Faculty

      

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.