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संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal March 12, 2026 04:45 48 0

एथिलीन ग्लाइकॉल

आंध्र प्रदेश के राजामहेंद्रवरम् में एथिलीन ग्लाइकॉल से दूषित दूध के कारण 11 लोगों की मौत हो गई और सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति उत्पन्न हो गई।

एथिलीन ग्लाइकॉल (Ethylene Glycol) के बारे में

  • एथिलीन ग्लाइकॉल एक रंगहीन, गंधहीन और मीठे स्वाद वाला कार्बनिक यौगिक है, जिसका व्यापक उपयोग औद्योगिक अनुप्रयोगों में किया जाता है।
  • रासायनिक सूत्र: C₂H₆O₂।
  • मुख्य उपयोग: सामान्यत: एंटीफ्रीज, इंजन शीतलक, पॉलिएस्टर फाइबर उत्पादन और पीईटी प्लास्टिक (PET plastics) के निर्माण में उपयोग किया जाता है।
  • उच्च विषाक्तता: एथिलीन ग्लाइकॉल का सेवन करने पर यह अत्यधिक विषैला होता है, क्योंकि शरीर में पहुँचने के बाद यह विषैले अम्लों में परिवर्तित हो जाता है।
  • स्वास्थ्य पर प्रभाव: चपापचय अम्लता, गुर्दे की विफलता, तंत्रिका संबंधी क्षति का कारण बनता है और गंभीर मामलों में  मृत्यु भी हो सकती है। 
  • संवेदनशील समूह: बच्चे और वृद्ध विशेष रूप से अधिक संवेदनशील होते हैं, क्योंकि उनकी शारीरिक सहनशीलता कम होती है।

डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (Diethylene Glycol)

  • डाइएथिलीन ग्लाइकॉल, ग्लाइकॉल परिवार का एक संबंधित रासायनिक यौगिक है, जो दो एथिलीन ग्लाइकॉल इकाइयों को एक ऑक्सीजन परमाणु के माध्यम से जोड़कर निर्मित होता है।
  • दोनों रसायन रंगहीन और मीठे स्वाद वाले तरल होते हैं और औद्योगिक विलायकों के रूप में उपयोग किए जाते हैं।
  • रासायनिक सूत्र: एथिलीन ग्लाइकॉल का सूत्र C₂H₆O₂ है, जबकि डाइएथिलीन ग्लाइकॉल का सूत्र C₄H₁₀O₃ है और इसकी आणविक संरचना बड़ी होती है।
  • औषधीय मिलावट के मामलों में, डाइएथिलीन ग्लाइकॉल ग्लिसरीन या प्रोपलीन ग्लाइकॉल जैसे सुरक्षित विलायकों की नकल कर सकता है, इस वजह से तरल दवाओं में इसका उपयोग खतरनाक हो सकता है।

पर्यावरण प्रभाव आकलन पर स्थायी प्राधिकरण (SAEIA)

केंद्र सरकार ने पर्यावरणीय मूल्यांकन प्रक्रिया में निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए पर्यावरण प्रभाव आकलन पर स्थायी प्राधिकरण (SAEIA) स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है।

पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) तंत्र

  • भारत में परियोजनाओं की स्वीकृति पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 द्वारा संचालित होती है, जिसके तहत प्रमुख परियोजनाओं के लिए पूर्व पर्यावरणीय मूल्यांकन अनिवार्य है।
  • राज्य-स्तरीय निकाय: परियोजनाओं को पर्यावरणीय स्वीकृति राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) द्वारा दी जाती है, जो राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (SEAC) की सिफारिशों के आधार पर निर्णय लेता है।
  • संस्थागत अंतराल: SEIAA और SEAC का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है। इनके पुनर्गठन में अक्सर विलंब हो जाता है, जिसके कारण कुछ अवधि के लिए ये संस्थाएँ निष्क्रिय हो जाती हैं।
  • पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया में व्यवधान को रोकने के लिए सरकार ने SAEIA को एक अंतरिम मूल्यांकन प्राधिकरण के रूप में प्रस्तावित किया है।

पर्यावरण प्रभाव आकलन पर स्थायी प्राधिकरण (SAEIA) के बारे में

  • कानूनी आधार: यह प्राधिकरण पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 के ढाँचे के अंतर्गत कार्य करेगा।
  • संरचना: इस प्राधिकरण में केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त पदेन सदस्य शामिल होंगे।
  • सक्रियता का कारण: जब राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) या राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (SEAC) कार्यरत नहीं होंगी, तब SAEIA परियोजनाओं का मूल्यांकन करेगी।
  • स्वचालित अग्रेषण तंत्र: यदि किसी परियोजना आवेदन का मूल्यांकन SEAC द्वारा 120 दिनों के भीतर नहीं किया जाता है, तो उसे परिवेश (PARIVESH) पोर्टल के माध्यम से स्वचालित रूप से राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण को भेज दिया जाएगा।
  • उद्देश्य: पर्यावरण मूल्यांकन में निरंतरता सुनिश्चित करना, प्रशासनिक विलंब को कम करना और परियोजना अनुमोदन में निवेशकों का विश्वास बनाए रखना।
  • जवाबदेही और दंड प्रावधान: मसौदे में जवाबदेही से संबंधित प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
    • विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (EAC), SEAC और SEIAA के सदस्यों को कार्यकाल समाप्त होने से पहले हटाया नहीं जा सकता, सिवाय सिद्ध कदाचार या अक्षमता के मामलों में।
    • पर्यावरण मंजूरी प्रस्तावों के प्रसंस्करण में निर्धारित समय सीमा से अधिक की देरी को वैध आरोप माना जा सकता है।

परिवेश (PARIVESH) पोर्टल

  • परिवेश का अर्थ है सक्रिय, लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल एकल-खिड़की केंद्र द्वारा सक्रिय और उत्तरदायी सुविधा।
  • यह पर्यावरण, वन, वन्यजीव और तटीय विनियमन संबंधी मंजूरियों के लिए आवेदन जमा करने और उनकी निगरानी करने की एक ऑनलाइन प्रणाली है।
  • यह अनुमोदन प्रक्रिया को डिजिटल बनाता है, जिससे वास्तविक समय की निगरानी, ​​तीव्र प्रसंस्करण और पर्यावरण मंजूरियों में बेहतर पारदर्शिता संभव हो पाती है।

जल जीवन मिशन (JJM)

हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन (JJM) को वर्ष 2028 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब मिशन का मुख्य ध्यान केवल अवसंरचना निर्माण से आगे बढ़कर नागरिक-केंद्रित पेयजल सेवा उपलब्ध कराने पर होगा।

जल जीवन मिशन (JJM) के बारे में

  • जल जीवन मिशन एक प्रमुख ग्रामीण जल आपूर्ति कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य भारत के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को सुरक्षित पेयजल के साथ कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) उपलब्ध कराना है।
  • नोडल मंत्रालय: इस मिशन का क्रियान्वयन जल शक्ति मंत्रालय द्वारा किया जाता है, जो ग्रामीण जल आपूर्ति प्रबंधन के लिए राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के साथ समन्वय करता है।
  • प्रारंभ और उद्देश्य: यह योजना 15 अगस्त, 2019 को शुरू की गई थी, जिसका लक्ष्य “हर घर जल” के दृष्टिकोण को साकार करना है। इसके अंतर्गत प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन 55 लीटर प्रति व्यक्ति (lpcd) सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
  • अवधि: प्रारंभिक रूप से इसका लक्ष्य वर्ष 2024 तक सार्वभौमिक कवरेज प्राप्त करना था। अब शेष कनेक्शनों को पूरा करने और सेवा वितरण को सुदृढ़ करने के लिए इसे वर्ष 2028 तक बढ़ा दिया गया है
  • JJM 2.0 के उद्देश्य
    • दिसंबर 2028 तक सभी ग्रामीण क्षेत्रों में नल के जल की सार्वभौमिक उपलब्धता सुनिश्चित करने, सभी ग्राम पंचायतों को हर घर जल के रूप में प्रमाणित करने और सतत् एवं नागरिक-केंद्रित जल सेवाओं को सुनिश्चित करने के लिए यह मिशन बनाया गया है।
    • इसके अतिरिक्त, मिशन के अंतर्गत “सुजलाम् भारत (Sujalam Bharat)” नामक एक डिजिटल निगरानी ढाँचा प्रस्तावित किया गया है, जिसके माध्यम से जल स्रोत से लेकर घरेलू नल तक पूरी पेयजल आपूर्ति प्रणाली का मानचित्रण किया जाएगा।
      • “सुजलाम् भारत” के अंतर्गत प्रत्येक गाँव को एक विशिष्ट “सुजल गाँव/सर्विस क्षेत्र आईडी ” प्रदान की जाएगी, जिससे जल स्रोत से नल तक संपूर्ण पेयजल आपूर्ति प्रणाली का डिजिटल मानचित्रण किया जा सकेगा।
  • वित्तीय व्यवस्था: यह मिशन केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में संचालित होता है, जिसमें लागत साझेदारी का प्रावधान निम्नलिखित प्रकार है:
    • केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 100% वित्तपोषण केंद्र सरकार द्वारा।
    • हिमालयी और उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए 90:10 (केंद्र : राज्य)।
    • अन्य राज्यों के लिए 50:50 (केंद्र : राज्य)।
  • महत्त्व: यह मिशन सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और महिलाओं के कल्याण को बेहतर बनाता है। साथ ही यह जल आपूर्ति संबंधी श्रम को कम करता है, ग्रामीण जल शासन को सुदृढ़ करता है तथा सतत् जल प्रबंधन को बढ़ावा देता है, जो विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

अंडरस्टैंडिंग लाइफलॉन्ग लर्निंग फॉर ऑल इन सोसाइटी- उल्लास

(Understanding Lifelong Learning for All in Society-ULLAS)

हाल ही में चंडीगढ़ ने 99.93% साक्षरता दर प्राप्त की है और उल्लास – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत पूर्ण साक्षर केंद्रशासित प्रदेश बन गया है।

  • चंडीगढ़, लद्दाख के बाद इस उपलब्धि को प्राप्त करने वाला दूसरा केंद्रशासित प्रदेश तथा देश का छठा राज्य/केंद्रशासित प्रदेश बन गया है।

अंडरस्टैंडिंग लाइफलॉन्ग लर्निंग फॉर ऑल इन सोसायटी (ULLAS) के बारे में

  • उल्लास – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य वयस्कों में बुनियादी साक्षरता और जीवन कौशल से संबंधित अंतराल को कम करना तथा आजीवन सीखने को बढ़ावा देना है।
  • उद्देश्य: 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों को बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान, महत्त्वपूर्ण जीवन कौशल तथा सतत् शिक्षा से सशक्त बनाना, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की परिकल्पना के अनुरूप है।
    • राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी (FLN) को समझ के साथ पढ़ने, लिखने तथा बुनियादी गणितीय क्रियाएँ (जोड़, घटाव) करने की आवश्यक क्षमता के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • योजना का प्रकार और अवधि: यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसे वर्ष 2022 से वर्ष 2027 की अवधि के लिए लागू किया जा रहा है।
  • नोडल मंत्रालय: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, विद्यालय शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL) के माध्यम से।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • आजीवन सीखना या लाइफलॉन्ग लर्निंग: समाज में सतत् शिक्षा और ज्ञान साझा करने को बढ़ावा देता है।
    • डिजिटल और वित्तीय साक्षरता: डिजिटल जागरूकता और वित्तीय सशक्तीकरण को बढ़ाता है।
    • महत्त्वपूर्ण जीवन कौशल: कानूनी साक्षरता, नागरिक जागरूकता और डिजिटल कौशल में प्रशिक्षण प्रदान करता है।
    • स्वयंसेवक प्रोत्साहन: छात्र स्वयंसेवकों को भागीदारी के लिए शैक्षणिक क्रेडिट, प्रमाण-पत्र और मान्यता प्रदान की जाती है।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म: उल्लास (ULLAS) मोबाइल एप्लीकेशन दीक्षा पोर्टल (DIKSHA Portal) के माध्यम से अध्ययन सामग्री तक पहुँच प्रदान करता है, जिससे वयस्क शिक्षा अधिक लचीली और समावेशी बनती है।

चौथा राष्ट्रीय एग्रो-आरई शिखर सम्मेलन

(National Agro-RE Summit)

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री ने नई दिल्ली में आयोजित चौथे राष्ट्रीय एग्रो-आरई शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और किसानों की आय बढ़ाने में नवीकरणीय ऊर्जा की भूमिका पर प्रकाश डाला।

चौथे राष्ट्रीय एग्रो-आरई (Agro-RE)  शिखर सम्मेलन के बारे में

  • आयोजक: नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया (NSEFI) द्वारा इंडिया एग्रीवोल्टाइक्स एलायंस (India Agrivoltaics Alliance) के सहयोग से आयोजित।
  • उद्देश्य: कृषि के साथ नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण को बढ़ावा देना।

शिखर सम्मेलन की प्रमुख विशेषताएँ

  • ग्रामीण परिवर्तन: नवीकरणीय ऊर्जा—विशेषकर रूफटॉप सोलर—कृषि और घरों के लिए विश्वसनीय बिजली उपलब्धता को बेहतर बना रही है, जिससे बिजली लागत में कमी और ग्रामीण उत्पादकता में वृद्धि हो रही है।
    • सौर सिंचाई पंप: सौर सिंचाई पंप डीजल पर निर्भरता और सिंचाई लागत को कम करते हैं, जिससे किसानों को प्रति एकड़ प्रतिवर्ष लगभग ₹5,000–₹6,500 की बचत होती है और दिन के समय विश्वसनीय सिंचाई सुनिश्चित होती है।
  • पीएम-कुसुम 2.0: सरकार पीएम-कुसुम योजना की सफलता के बाद इसकी एक उत्तरावर्ती योजना तैयार कर रही है, जिसमें सौर पैनलों को फसलों के साथ एक ही स्थान पर स्थापित करने को बढ़ावा देने के लिए समर्पित 10 गीगावाट एग्री-पीवी (Agri-PV) घटक शामिल होगा।
  • एग्रीवोल्टाइक क्षमता: भारत की संभावित क्षमता 3,000 गीगावाट से 14,000 गीगावाट के मध्य आँकी गई है।
    • यह किसानों की वार्षिक आय को ₹60,000 से बढ़ाकर प्रति एकड़ ₹1 लाख से अधिक तक पहुँचा सकता है।
  • पीएम सूर्य घर योजना की प्रगति: 31 लाख से अधिक परिवार पहले ही रूफटॉप सोलर अपना चुके हैं, जिससे बिजली बिल में कमी आई है और ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा पहुँच बेहतर हुई है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार (वर्ष 2014 बनाम 2026)
    • गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता: 81 गीगावाट → 275 गीगावाट।
    • सौर क्षमता: 2.8 गीगावाट → 143 गीगावाट।
    • पवन ऊर्जा: 21 गीगावाट → 55 गीगावाट।
    • जैव ऊर्जा: 8.1 गीगावाट → 12 गीगावाट।
  • लक्ष्य: 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता।

एग्रीवोल्टाइक्स (Agrivoltaics)

  • परिभाषा: भूमि का एक साथ सौर ऊर्जा उत्पादन और कृषि दोनों के लिए उपयोग करना।
  • लाभ: भूमि उपयोग की दक्षता में वृद्धि करता है, फसलों को छाया प्रदान करता है (जिससे जल वाष्पीकरण कम होता है) और किसानों के लिए द्वितीयक आय का स्रोत सृजित करता है (“ऊर्जादाता”)।

प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM)

  • प्रारंभ: वर्ष 2019 में भारत सरकार की एक प्रमुख योजना के रूप में प्रारंभ की गई।
  • लाभ: डीजल पंपों को सौर ऊर्जा आधारित पंपों से प्रतिस्थापित कर तथा सौर उर्जा से प्राप्त अतिरिक्त बिजली के विक्रय के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि करना।
  • उद्देश्य: मार्च 2026 तक 34,800 मेगावाट सौर क्षमता जोड़ने का लक्ष्य।
  • सब्सिडी हिस्सेदारी
    • सामान्य राज्य: 30% केंद्र + 30% राज्य सब्सिडी; किसान अधिकतम 40% योगदान करते हैं।
    • विशेष श्रेणी के राज्य: 50% केंद्र + 30% राज्य सब्सिडी; किसान अधिकतम 20% योगदान करते हैं।
  • तीन घटक
    • घटक-A: 10,000 मेगावाट विकेंद्रीकृत ग्राउंड/स्टिल्ट माउंटेड ग्रिड-संयोजित सौर (Ground/ Stilt Mounted Grid-Connected Solar) या अन्य नवीकरणीय ऊर्जा आधारित विद्युत संयंत्रों की स्थापना।
    • घटक-B: 14 लाख स्टैंड-अलोन (Stand-alone Solar) सौर कृषि पंपों की स्थापना।
    • घटक-C: 35 लाख ग्रिड-संयोजित कृषि पंपों का सौरकरण, जिसमें फीडर स्तर सौरकरण भी शामिल है।

पीएम सूर्य घर (PM Surya Ghar) के बारे में

  • प्रारंभ: यह भारत में घरों को निःशुल्क बिजली प्रदान करने के उद्देश्य से वर्ष 2024 में शुरू की गई एक केंद्रीय योजना है।
  • लाभ: इस योजना के अंतर्गत घरों में रूफटॉप सौर पैनल लगाने के लिए स्थापना लागत का अधिकतम 40% तक सब्सिडी प्रदान की जाती है।

प्रसार भारती की पीबी-शब्द (PB-SHABD) सेवा

प्रसार भारती ने अपनी लोगो-रहित समाचार फीड सेवा, पीबी-शब्द (logo-free news feed service, PB-SHABD) तक वर्ष 2027 तक निःशुल्क पहुँच की घोषणा की है।

पीबी-शब्द (Prasar Bharati – Shared Audio-Visuals for Broadcast and Dissemination) के बारे में

  • प्रारंभ: मार्च 2024 में मीडिया संगठनों के लिए एक साझा फीड सेवा के रूप में शुरू किया गया।
  • उद्देश्य: मीडिया परिदृश्य के ग्राहकों को वीडियो, ऑडियो, टेक्स्ट, फोटो और अन्य प्रारूपों में दैनिक समाचार फीड उपलब्ध कराना।
  • विशेषताएँ
    • संचालन अवसंरचना: 1,500 से अधिक संवाददाताओं और 60 संपादन डेस्क के 24×7 नेटवर्क के माध्यम से विभिन्न प्रारूपों में प्रतिदिन 1,000 से अधिक समाचार उपलब्ध कराए जाते हैं।
    • भाषायी पहुँच: कंटेंट को क्षेत्रीय समाचार इकाइयों (RNUs) और मुख्यालय के माध्यम से सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं में अपलोड किया जाता है।
    • लाइव फीड: राष्ट्रीय महत्त्व के कार्यक्रमों, अलंकरण समारोहों और प्रेस ब्रीफिंग की विशेष, लोगो-रहित कवरेज प्रदान करता है।
    • क्रेडिट की आवश्यकता नहीं: इस प्लेटफॉर्म के कंटेंट का उपयोग करते समय किसी क्रेडिट की आवश्यकता नहीं होती।
    • मीडिया रिपॉजिटरी: पुराने एवं ऐतिहासिक फुटेज तक पहुँच के लिए एक अभिलेखीय पुस्तकालय के रूप में कार्य करता है, साथ ही चयनित विशेष पैकेज, संपादकीय और मौसम अपडेट भी उपलब्ध कराता है।

प्रसार भारती (Prasar Bharati) के बारे में

  • परिचय: भारत की सबसे बड़ी सार्वजनिक प्रसारण एजेंसी, जिसे प्रसार भारती अधिनियम, 1990 के अंतर्गत 23 नवंबर, 1997 को एक स्वायत्त वैधानिक निकाय के रूप में स्थापित किया गया।
    • यह दूरदर्शन (DD) और ऑल इंडिया रेडियो (AIR) से मिलकर बना है।
  • उद्देश्य: जनता को सूचित करने और मनोरंजन प्रदान करने के लिए सार्वजनिक प्रसारण सेवाओं का संचालन करना।
  • मुख्यालय: नई दिल्ली।

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